Tuesday, August 16, 2011

जिंदगी..एक नदी की धारा है..


जिंदगी..एक नदी की धारा है..
जिसका अपना गति है
अपनी बोली है
अपनी भाषा है
अपना गीत है
संगीत है
अपना लय है
ना किसी से नफरत
ना किसी से इर्षा
सब को अपना प्यार देती
जो उनके प्यार को समझते
आगे बढ़ने के लिए
खुद रास्ता साफ करती है
सामने चट्टान हो
पथल हो- bas
आगे ही बढ़ते जाना है
चट्टान से टकरा कर
पहाड़ से टकरा कर
चोट जरुर आती है
लेकिन घुटने टेकने की
आदत नहीं है
टूटती है..आशा बूंदों में
फवारों में ...बिखरती है
लेकिन इनके डायरी में
हार शब्द कंही नहीं है
यही तो है..हमारी भाषा, हमारी संस्कृति , हमारा इतिहास....






2 comments:

  1. नदी -
    नाम .... निरंतरता का, चलते रहने का, या जीवन का
    कभी भी विश्राम नहीं
    श्राप है या वरदान मुझे नहीं पता है
    पर इतना जनता हू की रुकना - मौत है..., अंत है ! (या हार भी )
    सायद इसी लिये कहती है ...रुको नहीं... थको नहीं...
    बहादो... मिटादो... रूकावटो को
    पर रुको नही थको नहीं
    बढ़ते चलो
    बढ़ते चलो

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