Tuesday, November 16, 2021

भगवान बिरसा मुंडा का गांव का तस्बीर बदल गया हे। लेकिन दुखद है कि उलिहातू सहित इस इलाके का तकदीर नहीं बदला।

 दयामनी बरला

बिरसा मुंडा के 146 वें जयंांती पर बिरसा मुंडा जन्मस्थाली उलीहातू में आप सभी का स्वागत है-जोवर गी मर सोबेन कुपुल को। राज्य के बाहर से आने वाले सभी मेहमानों का रांची स्थित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट में राज्य के आदिवासी-मूलवासी किसान समुदाय द्वारा परंगरात गीत-गोडधोवी के साथ जमा जोवर। आप यहां से सीधे बिना परेषानी के चलाचक डबल लेन रोड़ से खूंटी जिला के अड़की प्रखंड में सरजोम, मुरूद, इचआ, सेकरेज, तीरील, तरोब जैसे परंपरागत जंगल-झाड़ो से अच्छादित हरियाली वादियों की गोद में बसा बिरसा मुंडा का गांव सिर्फ डेढ़ घंण्टा में पहुंच जाएगें।अब उलिहातू गांव का नाक्सा बदला-बदला दिखता है। सभी तरफ सोलर प्लेट, जगह-जगह स्वाच्छ जल का पानी टांकी, सौच मुक्त गांव का वादा पूरा करता घर-घर में सौचालय, बिरसा मुंडा कम्पेक्स, बिरसा स्टेडियम, आवासीय स्कूल, सामुदायिक भवन, ग्राम संसद भवन, अस्पताल भवन, बडा चाबूतरा, बैंक भी है। इसके अलावा उद्योग विभाग का बोर्ड सहित विभिन्न योजनाओं पर जागरूकता फैलाने के लिए कई बोर्ड लगा हुआ है। दिल खुष हो जाता है कि भगवान बिरसा मुंडा का गांव का तस्बीर बदल गया हे। लेकिन दुखद है कि उलिहातू सहित इस इलाके का तकदीर नहीं बदला। 

 खूंटी से तमाड़ रोड़ में थोड़ी सावधानी बरतनी होगी, कारण की चैड़ी फिसलन रोड़ में दस चक्का वाले भारी माल वाहन हर 10-12 मिनट में दौड़ता हैं। छोटी गाडियों का तो संख्या ज्यादा है और स्पीड भी ज्यादा है। सोयको का गाया मुंडा चैक बहुत विकसित हो गया है। बस अब 11 किमी ही दूर है उलिहातू गांव।  सांप, बाघ, भालू जैसे खुंखार जंगली जानवरो से लड़कर जिस धरती को आदिवासी सामुदाय ने आबाद किया था, जिस पर इनका खूंटकटी अधिकार था, जहां अबुआ हातु रे अबुआ राईज की परंपरा थी। 1771 में ईस्ट इंडिया कंपनी का झारखंडमेंष्षासकीय अधिकार स्थापित हुआ। अंग्रेजो ष्षासकों के सहयोगी, जमींदारों द्वारा खूंटकटी हक पर हमला के खिलाफ तमाड़ के बिसू मानकी, दुखन मानकी, रूदु मुंडा, कोंता मुंडा आदि षहीदों के नेतृत्व में मुुडा सरदारी आंदोलन चरम पर था। तब उलिहातु के सुगना मुंडा और करमी मुंडी के गोद में वीर बिरसा पैदा हुआ। मुंडा उलगुलान की तपती धरती में बालक बिरसा युवा हुआ। मात्र 21 साल की उम्र में ही बिरसा मुंडा के अबुआ दिषुम रे अबुआ राईज का उलगुलान ने अंग्रेज षासक को लोहा मनवाया और सीएनटी एक्ट बना।

हक-अधिकार की लड़ाई को कमजोर करने के लिए बिरसा को रोगोतो जंगल से गिरत्फार कर रांची के जेल में रखा गया। आज जेल का नामकेंन्द्री बिरसा मुंडाकारागह है। पुराने जेल परिसर को अब 146 करोड़ खर्च कर बिरसा स्मृति स्थल बना दिया। यहां बिरसा मुंडा का 25 फीट का प्रतिमा बना है साथ ही करीब 12 झारखंड के वीर षहीदों की प्रतिमा बनायी गयी।  राज्य में बिरसा मुंडा के नाम पर सौंकडो व्यावसायिक संस्थान बाजार की षोभा बढ़ा रहें हैं। बिरसा मुंडा के नाम से राज्य और देष की राजनीति गुलजार है। 

झारखंड अलग राज्य की लड़ाई, जल, जंगल, जमीन, भाषा, सांस्कृति को संगक्षित एवं विकसित करने के लिए था। यहां के मिटटी से उपजी नौकरी, रोजगार, जीविका के संसाधनों पर अधिकार यहां के लोगों के हाथों में हो, यही था अलग राज्य का सपना। षायद इसी सपना को पूरा करने के लिए बिरसा मुंडा के 125 वें जयंती पर, 15 नंवोंबर 2000 को अलग राज्य का पुर्नगठन किया गया। राज्य बनने के बाद जिनकी तकदीर बदलनी थी, खूब बदली। अबुआ हातु -दिषुम रे अबुआ राईज का सपना विकास के मुख्यधारा में विलीन हो गया। राज्य पूर्नगठन से पहले से ही देष की कई राजनीतिक पार्टीयों के षीर्ष नेताओं ने बिरसा मुंडा के गांव उलिहातू की माटी को नमन करते आ रहे हैं। ये गर्व का विषय है। 

मुंडा आदिवासी बहुल इस जंगली इलाके का विकास के लिए 12 सितंबर 2007 में रांची जिला से अलग कर खूंटी जिला बना। जिला बनने के बाद प्रखंड मुख्यालाय से लेकर जिला मुख्यालाय तक दर्जनों प्रषानिक अधिकारियों को बहाल किया गया। अधिकारी आये और गये। उलिहातू पहुंचने वाले नेता, विधायकों, मंत्रियों, मुख्यमंत्रीयों, संासदों, केंन्द्रीय मंत्रीयों, गृह मंत्रीयों, उपायुक्तों, प्रखंड पदाधिकारियों, सर्किल अधिकारियों ने सौंकड़ों वादा किये। आष्वासन दिये । उलिहातु को नमन करने वालों की गिनती की जाए तो, सूची बहुत लंबी है, सूची को रखने में थोड़ी झिझक होती है, लगता है यह तो बिरसा मुंडा सहित तमाम राज्य के षहीदों का अपमान है, कि जो वादा आप ने किया था, पूरा नहीं किया। 

बिरसा मुंडा की परपोती जौनी मुंडा सब्जी बेचकर पढ़ाई कर रही है, अखबार के खबर के साथ बाॅलीवूड के अभिनेता सोनू सदू ने जौनी कीे पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए सामने आया। साथ ही राजस्थान के दो संासद ने भी मदद की पेषकष की। नौकरी के नाम पर बिरसा के खनदान के दो लोगों को खूंटी जिला मुख्यालय में चपरासी की नौकरी मिली। 

गांव के लोगों ने सरकारी वादों पर भरोसा न करते हुए स्वंय अपना विकास करने का रास्ता तलाष रहे हें। गांव में 20-25 से अधिक मैट्रिक पास युवा हैं। 6-7 बीए पास हैं। बेरोजगार युवा अपनी पूंजी से गांव में ही छोटा-छोटा गुमटी बना कर किराना दुकान का समान से लेकर आॅनलाइन ग्राहक केंन्द्र के तौर पर मुंडा समुदाय का सेवा कर रहे हैं। कई लड़कियों ने बतायी वे 9वीं क्लास तक पढ़ाई किये, लेकिन आर्थिक कमी के कारण आगे पढ़ नहीं पायी। कस्तुबरा स्कूल जहां फीस नहीं लगता है, आवेदन दी थी, लेकिन नहीं हुआ। इस कारण कई लड़कियां बाहर पलायन कर गयी हैं। जाने के बाद अभी तक वापस नहीं आयी हैं। युवकों ने बताया-हम लोग पढने की कोषिष कर रहे हैं, लेकिन सरकारी सहयोग किसी तरह का नही है, इस कारण कई युवा पढ़ाई छोड़कर गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा मजदूरी करने चले गये। 

अस्पताल भवन तो उलिहातु में बना है, लेकिन बीमारी के समय गांव के लोग खूंटी, अड़की या रांची इलाज कराने जाते हैं। लघु ग्रामीण जलापूर्ति योजना के तहत जलमीनार बना हुआ है, पानी घर-घर पहुंचाने के लिए सभी मिटटी के मकानों के आंगन में लोहा का पाईप खड़ा कर दिया गया है। लोगों ने बताया यह करीब चार साल से बंद पड़ा हुआ है। जगह-जगह चपाकल है, सभी टूटा पड़ा है। दर्जनों पानी टंकी लगा है, इसमें से सिर्फ एक टंकी में केवल बरसात में पानी रहता है। 2017 गृह मंत्री के घोषणा के बाद षहीद गांव मे 160 पका मकान निर्माण के लिए आबंटित है । प्रत्येक मकान 2 लाख 60 हजार का है। गांव में तीन-चार मकान षुरू किया मिला, एक-दो मकान का दीवार 5 फीट तक चढ़ा है। बाकी इंतजार में। बिरसा कृषि विविद्यालय की ओर से ग्रामीणों को मधुपालन का प्रषिक्षण दिया गया, बक्सा दिया गया, रस निकालने की मषीन दी गयी, गांव वालों ने बताया, सभी मधुमखी भाग गये, एक भी नहीं हैं। हां, ध्यान रखियेगा, यूरिन लगेगा तो थोड़ी परेषानी होगी, सौचालय है लेकिन घुस नहीं सकते हैं। इस बार के जयंती समाहरोह में उलिहातु पहुंचने वाले, बिरसा ओडआ में बिरसा की प्रतीमा पर श्रधासुमन अर्पित करने के बाद, गांव वाले जिस चुंवा, डोभा, नाला का पानी लाकर पीते हैं, उनका भी दर्षन करते आयें, तो उलिहातु गांव के लोगों का उपकार होगा। 


Saturday, November 13, 2021


 bahut din bad aayi hun, sabhi ko johar

Tuesday, September 14, 2021

corporete kheti nahi-paramparagat kheti kisani ko bikshit kiya jay

 corporete kheti nahi-paramparagat kheti kisani ko bikshit kiya jay

dheyan dene wali sachai yah hai ki in tino naye krishi kanun se sirph anaj yah phasal upjane wale kishanon per sankat nahi aayega, balki kishano ke phaslon ke asthaniye chote beyopari awam upbhogta ya, kharidne walon ki bhi pareshani badhegi. samaj ke sabhi bargon ki pareshani badhegi. chale wah upbhogta yah, kharid kar khane wala ho, chota -bada beyopari ho.

Friday, September 3, 2021

तीन कृषि बिल

 तीन कृषि बिल

1-आवश्यक वस्तु  संशोधन अध्यादेश 2020

2-किसान (सशत्किकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार अध्यादेश 2020

3-किसान उपज (संर्वधन एवं सुविधा) व्योपार एवं वाणिज्य अध्यादेश 2020

1-आवश्यक वस्तु संशोधन अध्यादेश 2020-इस कानून में अनाज, खाद्यान्न तेल, प्याज, आलू, दलहन को आवश्यक वस्तु की सूची से अलग कर दिया गया है। 

केंन्द्र सरकार का दावा है कि-आपादा की स्थिति में इसे आवश्यक वस्तु की सूचि में शामिल किया जाएगा। 

नोट-आवश्क वस्तु काननू को 1955 में ऐसे समय में बनाया गया था, जब देश में खाद्यान्न की भारी कमी से जूझ रहा था। इस काननू को बनाने का खास उद्वेश्य था-वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना। ताकि उचित मूल्य पर सभी को खाने का सामान मिले।

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम? 2020

आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत केंन्द्र सरकार के माध्यम से कुल आठ(8) श्रेणी के वस्तुओं पर नियंत्रण रखती थी-इसमें संशोधन कर निम्नलिखित को इसमें रखा गया-

इसमें-1-ड्रग्स

2-उर्वरक

3-खाद्य तिलहन, तेल समेत खाने की चीजें

4-कपास से बना धागा

5-पेट्रोलियम तथा पेट्रोलियम उत्पाद

6-कच्चा जूट और जूट वस्त्र

7-खाद्य, फसलों के बीज और फल, सब्जियां, पशुओं के चारे के बीज, कपास के बीज तथा जुट के बीज

8-फेस मास्क तथा हैंड सैनिटाइजर शामिल है। 

केंन्द्र सरकार इस कानून में दी गयी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए राज्य सरकारों को नियंत्रण आदेश जारी करने के लिए कहता है, जिसके तहत वस्तुओं को स्टाॅक याने जमा करने की सीमा तय की जाती है और समान के अवागमन पर नजर रखती है। 

नोट-अब सरकार इस कानून में संशोधन करने अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेलों, प्याज और आलू को धारा 3(1) के दायरे से अलग कर दिया है-जिसके तहत केंन्द्र सरकार को आवश्यक वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण पर नियंत्रण करने अधिकार प्राप्त है। 

मोदी सरकार का मानना है कि-अब इन वस्तुओं का उत्पादन प्रर्याप्त हो रहा है, इसलिए इस पर नियंत्रण की जरूरत नहीं है। 

मोदो सरकार का मानना है कि-उत्पादन, भंण्डारण, ढुलाई, वितरण और आपूर्ति करने की आजादी से व्यापक स्तर पर उत्पादन बढ़ेगा साथ ही कृषि क्षेत्र में निजी प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सकेगा। इसे कोल्ड स्टोरेज में निवेश बढ़ाने और खाद्य आर्पित श्रंखला (सप्लाई चेन) के अधुनिकीकरण में मदद मिलेगी। 

नोट-निजीकरण, कृषि पर काॅरपोरेट पूंजि निवेश और एवं काॅरपोरेट बाजार को आमंत्रित करना है। 

2- किसान (सशत्किकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार अध्यादेश 2020

इसका उद्वेश्य-कृषि उजप विपणन समितियों (एपीएमसी) मंडियों के बाहर भी कृषि उत्पाद बेचने और ,खरीदने की व्यवस्था तैयार करना है। 

किसान और विशेषज्ञों की चिंता-यह कानून लागू होने से एपीएमसी व्यवस्था खत्म हो जाएगा।

एैसे में एगमार्कनेट द्वारा कृषि उत्पादों के मूल्यों को बड़ा झटका लगेगा और देश के विभिन्न क्षेत्रों में वस्तुओं का असली मूल्य का पता लगाना असंभव हो जाएगा। 

ऐसे में सरकार को कृषि उत्पादों के मूल्य आकलन करने में भी मुश्किल होगा।

सरकार का उद्वेश्य-इस कानून का उद्वेश्य कृषि में इफ्रास्ट्रचर जैसे, कोल्ड स्टोरेज और सप्लाई चेन के अधुनिकीकरण आदि को बढ़वा देना है। 

केंन्द्र का मानना है-वैसे तो भारत में ज्यादातर कृषि उत्पादों के उत्पादन में अधिशेष (सरप्लस ) की स्थिति होती हे। इसके बामजूद कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग और निर्यात में निवेश के अभाव में किसान अपनी उपज उचित मूल्य पाने में असमर्थ रहे हैं-कारण आवश्यक वस्तु अधिनियम की तलवार लटक रही है। 

केंन्द्र का तर्क है-ऐसे में जब भी शीघ्र नष्ट हो जाने वाले कृषि उपज की बंपर पैदवार होती है तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। 

यदि प्र्याप्त प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध हो तो बड़े पैमाने पर इस तरह की बर्बादी रोकी जा सकती है। 

पूर्व कृषि सचिव-सिराज हुसैन

इन्होनें कहा-इस नये कानून में कई खमियां हैं। 200-2004 में बेइमान गेंहू निर्यातकों ने आॅपन मार्केट सेल स्कीम (निर्यात) के तहत निर्यात जारी रखने के लिए कई खामियों का उपयोग कर उत्पादित निर्यात किया। इस कारण देश में खाद्यान्न की भारी कमी हो गयी, इस कमी को पूरा करने के लिए 5.5 मिलियन टन गेंहू आयात करना पड़ा। 

सिराज जी ने कहा-केंन्द्रीय पूल के स्टाॅक के मामले में न केवल लोगों को स्टाॅक की मात्रा के बारे जानकारी होती हैं-परंतु सरकार को भी एफसीआई के कम्पूटरीकरण स्टाॅक प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से किस जगह कितना स्टाॅक पड़ा है-जानकारी होती है। 

लेकिन प्राईवेट स्केटर में रखे स्टाॅक के बारे कोई जानकारी नहीं होती है। 


3-किसान(सशक्तिकरण एवं संवर्धन) मूल्य आश्वासन एवं कृषि सेवा पर करार अध्यादेश-2020

यह कानून फसल की बुआई के पहले किसान को अपनी फसल को तय मानकों और तय कीमत के अनुसार बेचने का अनुबंध करने की सुविधा देता है।

इस कानून में काॅन्ट्रेक्ट फर्मिंग की बात है। 

केंन्द्र सरकार का मानना है-

इसे किसान का जोखिम कम होगा

खरीददार ठुंढने के लिए कहीं जाना नहीं पडे़गा

यह कानून किसानों को शोषण के भय के बिना समानता के आधार पर खुदरा कारोबारियों, नियात्तकों आदि के साथ जोड़ेगा। 


सवाल-इस अध्यादेश में -तीन, चार एकड़ जोत वाले किसानों का क्या होगा?


धारा -4 में कहा गया है-किसानों पैसा/कीमत तीन कार्य दिवस में दिया जाएगा

  छोटे किसान जिनका पैसा जहां फंसा है-वहां बार-बार जाकर क्या पैसा वासुल सकते हैं?


छोटे किसान-आॅनलाईन खरीद-बिक्री नहीं कर सकता है।


स्रकार वन नेशन वन मार्केट की बात कर रही है-इसे मंडियां खत्म हो जाएगें।


इस कानून से कृषि उपज विपणन समितियां खत्म हो जाएगी-इसे बिचैलियों और काॅरपोरेट का मनमानी चलेगा। 


केंन्द्र सरकार का मानना है-यह कानून किसानों के लिए लाभदायक है-

सवाल-1-यदि ये तीनों कानून किसानों के लिए लाभ दायक हैं तो राज्यसभा में इस कानून के पक्ष-विपक्ष में होने वाले बहस एवं वोटिंग को क्यों नहीं होने दिया गया?


2-तीनों कानून किसानों के लिए लाभदायक है तो-इस कानून में किसानों को, जब वे छले जाऐगें, इस पर न्याय के लिए कोर्ट जाने के अधिकार का प्रावधान क्यों नहीं किया गया?

इस काननू में किसानों को न्याय की मांग को लेकर कोर्ट जाने की जगह उन्हें जिला के एसडीएम एवं उपायुक्त के पास ही जाने का प्रावधान किया गया है। 


Wednesday, September 1, 2021

राज्य के 14 काॅलेजों में क्षेत्रीय भाषाओं के 200 शिक्षकों की होगी नियुक्ति

 24 अगस्त 2021

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन न पद सृजन की मंजूरी दी--

राज्य के 14 काॅलेजों में क्षेत्रीय भाषाओं के 200 शिक्षकों की होगी नियुक्ति

कोल्हान विश्वविद्यालय चाईबासा के 14 अंगीभूत काॅजेलों में क्षेत्रीय भाषाओं के 200 से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति होगी। सीएम हेमंत सोरेन ने 159 विश्वविद्यालय शिक्षकों के पद सृजन पर सोमवार को सहमति दे दी। सीएम ने कहा कि उनका उद्वेश्य सिर्फ सरकारी नौकरियों में ही झारखंड की समृद्व स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देना नहीं है, बल्कि इससे जुड़े पाठयक्रम को भी सशत्क करना है। जिन क्षेत्रीय भाषाओं के लिए शिक्षकों को नियुक्ति की जाने है, उनमें संथाली, हो, कुडुख, खोरठा, कुरमाली और मुंडारी भाषा शामिल है। 159 क्षेत्रीय भाषाओं के शिक्षकों के नए पद सृजित करने के लिए सीएम को प्रस्ताव भेजा गया था। 

159 विवि में सर्वाधिक 147 सहायक शिक्षकों के पद कोल्हान विवि में एवं जनजातीय भाषा के अंतर्गत संथाली, हो कुकुडख, कुरमाली और मुंडारी भाषा में कुल 159 शिक्षकों के पद सृजन का प्रस्ताव है। इसमें सहायक अध्यापक के 147, सह प्राध्यापक के 8 और प्राध्यापक के 4 पद शामिल है। 

काॅलेजों में किस भाषा के कितने पद

भाषा--------पद

कुडुख-------06

संथाली------39

कुरमाली-----39

मुंडारी------12

पीजी सेंटर्स में इन भाषाओं के पद

संथाली-----06

हो--------06

कुरमाली----06

मुंडारी-----06


वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 लाख करोड़ रू. जुटाने की योजना लाॅन्च की-- रेलवे, हाईवे, रांची एयरपोर्ट समेत 13 सरकारी संपत्तियों में हिस्सेदारी इस वर्ष से निजी हाथों में-

 वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 लाख करोड़ रू. जुटाने की योजना लाॅन्च की-- रेलवे, हाईवे, रांची एयरपोर्ट समेत 13 सरकारी संपत्तियों में हिस्सेदारी इस वर्ष से निजी हाथों में-

मोनेटाइजेशन पाइपलाइन के तहत मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा-

केंन्द्री वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को नेशलन मोनेटाइजेशन पाइपलान (एनएमपी) लाॅन्च की। इसके तरह विभिन्न क्षेत्रों की सरकारी संपतियों में हिस्सेदारी बेचकर या संपित को लीज पर इेकर 6 लाख करोड़ रू. जुटाने का लक्ष्य है। वित्त मंत्रालय ने सोमवार को पूरा खाका पेश करते हुए बताया कि लीज पर देने की प्रकिया 4 साल, यानी 2025 तक चरणबद्व तरीके से चलेगी। निर्मला ने साफ किया कि जिन रोड़, रेलवे स्टेशन या एयरपोटर्स को लीज पर दिया जाएगा, उनका मालिकाना हक सरकार के पास ही रहेगा। लीज एक तय समयसीमा के लिए होगी। उसके बाद पूरा इफ्रास्टक्चर सरकार के पास आ जाएगा। इसमें रांची एयरपोर्ट भी शामिल है। 

कुल 13 ताह की सरकारी संपत्तियों में हिस्सेदारी बिकेगी या लीज पर दी जाएगी-

सड़कों , रेलवे से सबसे ज्यादा 3 लाख करोड़ रू. जुटाने की तैयारी-

हाईवे 1.6 लाख करोड़

रेलवे 1.5 लाख करोडऋ

पावर ट्रांसमिशन 45,200 करोड. जुटाये जायेगें

पावर जेनरेशन 39,832 करोड़ का लक्ष्य रखा है

टेलीकाॅम 35,100 करोड़

वेयरहाउसिंग 28,900 करोड़

न्ेोचुरल गैस पाइपलाइन 24,,462 करोड़

प्रोडक्ट पाइपलाइन/अन्य 22,504 करोड़

खनन 28,747 करोड़

एविएशन 20,782 करोड़

पोटर्स 12,828 करोड़

स्टेडियम 11,450 करोड़

अर्बन रियल एस्टेट 15,000 करोड़, इसमें ज्यादातर संपति दिल्ली में


हाईवेः 27600 किमी सड़कें दी जाएंगी, जो देश की कुल सड़कों की 27 प्रतिशत है-सरबार को हाईवे से ही सबसे ज्यादा पैसा मिलने की उम्मीद है। उत्तर भारत की 29 सड़कें, दक्षिण की 28, पूरब की 22 और पश्चिमी भारत की 25 सड़कें लीज पर दी जाएगी। निजी क्षेत्र इनका संचालन निर्धारित अवधि तक करेगें। यह अवधि कितनी होगी यह बाद में तय किया जाएगा। 

सड़कें निजी हाथों में जाने से क्या ज्यादा टोल देना पड़ेगा, इस सवाल के जवाब में अफसरों ने कहा कि यह कहना अभी सही नहीं है। क्योंकि टोल को नियंत्रित रखने का फाॅरमूर्ला बनना अभी बाकी है। 


रेलवेः 400 स्टेशन, 90 पैसेंजर ट्रेन, 1400 किमी के ट्रैक लीज पर देगें-सड़कों के बाद सबसे ज्यादा 1.52 लाख करोड़ रू. रेलवे में हिस्सेदारी बेचकर जुटाया जाएगा। 400 स्टेशन, 90 पैसेंजर ट्रेन, 1400 किमी के ट्रैक लीज पर देगें। साथ ही पहाड़ी इलाकों में रेलवे संचालन भी निजी हाथों में जाएगें। इसमें कालका-शिमला, दिर्जिलिंग-नीलगिरी, माथेरन ट्रैक शामिल हैं। 

265 गुडस शेड लीज पर दिए जाएगें। साथ ही 673 किमी डीएफसी भी निजी क्षेत्र को दी जाएगी। इनके अलावा चुनिंदा रेलवे काॅलोनी, रेलवे के 15 स्टेडियम को संचालन 

भी लीज पर दिया जाएगा। 


25 एयरपोर्ट भी, इनमें से 12 डेढ साल में-

6 एयरपोर्ट इसी वित्तवर्ष-

एयरपोर्ट------आय

भुनेश्वर -----  900 

वाराणसी-----500

अमृसर------500

त्रिची-------700

इंदौर-------400

रायपुर------600


6 एयरपोर्ट अगले वित्तवर्ष

एयरपोर्ट   ----आय

चेनाई -------2800

विजयवाडा-----600

तिरूपति------260

बड़ोदरा------245

भोपाल-------159

ळुबली-------130


झारखंड में होटल अशोक, दो एनएच और कई कोयला खदानें भी दायरे में-इस योजना में रांची एयरपोट, होटल अशोक, रांची समेत दो एनएच और कोल ब्लाॅक भी हैं। रोची एयरपोर्ट की अनुमनित कीमत 708 करोड़ रू. रखी गई है। यहीे होटल अशोक के लिए कीमत तय नहीं है। वहीं 79 किमी गढ़वा-बरवाछीह एनएच और 77 किमी चास-रामगढ एनएच को निजी क्षेत्रों को बेचा जाएगा। झारखंड समेत कई राज्यों की 19 कोयला खदानों की नीलामी होगी। 



Wednesday, August 11, 2021

400 बेरोजगारों ने राची के मोराबादी मैदान में सरकार से नौकरी मांगने के लिए प्रर्दशन किया.

 जटेट पास अभ्यर्थि संघ, झारखंड युथ एसैसिएशन, पंचायत सचिवालय स्वयंसेवक संघ, झारखंड होमगार्ड, और पोलेटेक्निक छात्र संघ के 400 बेरोजगारों ने राची के मोराबादी मैदान में सरकार से नौकरी मांगने के लिए प्रर्दशन किया.

‌*जेटेट पास अभ्यर्थि संघ  --सभी जेटेट उत्तीर्ण अभ्यर्थीयो की बहाली की जाए.

‌*झारखंड युथ एसैसिएशन-कारा वाहन चालकों की अबिलंब नियुक्ति की जाए.

‌*पंचायत सचिवालय स्वयंसेवक संघ-पंचायत सचिवालय स्वयंसेवक को नियमित किया जाए प्रोत्साहन राशि हटा कर एक उचित मानदेय दिया जाए.मृत पंचायत सचिवालय स्वयंसेवकों के परिजनों को जल्द से जल्द अर्थिक सहयोग दिया जाए.

‌*झारखंड होमगार्ड-सभी चयनित होमगार्ड अभ्यर्थियों को रोजगार दिया जाए, कयोकि सभी की उम्र सीमा समाप्त हो रही है.

‌*पोलेटेक्निक छात्र संघ-सात वषोॅ से बिना बहाली के 

 पोलेटेक्निक छात्र बेरोजगार हैं.जुनियर इंजीनियर और एमवीआई की बहाली में उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्रथमिकता मिले.