Saturday, June 10, 2023

9 जून 2023 बिरसा मुंडा शहीद दिवस सह। संकल्प सभा सह

 10 जून 2023

9 जून को वीर नायक बिरसा मुंडा के 123 वीं शहादत दिवस सह संकल्प सभा सभा का आयोजन खूंटी के करम अखड़ा में विविन्न आदिवासी संगठनो द्वारा किया गया। संकल्प सभा में -निमिन संकल्प लिया गया।

1-हम सभी आदिवासी बिरसा मुंडा के वंशज हैं आज करम अखड़ा खूंटी में  जल जंगल जमीन की रक्षा करने का संकल्प लेते हैं।

2-हम भूमि पुत्र संकल्प लेते हैं हमारे विरोध में जो भी कनून बनाया जायेगा उसके खिलाफ हम एकजुट होकर कर संघर्ष करेंगे।

सभा को संबोधित करते हुए सनिका मुंडा ने कहा शहीद दिवस पर चिंतन करना है कि कितने लोग सच्चा बिरसा मुंडा बन सकते हैं जो सही में जल जंगल जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करेगें। क्योंकि सभी तरफ भारी संख्या में जमीन लुटा रहा है। गांव गांव में चौड़ा रोड़ बन रहा है ग्रामीण क्षेत्रों से प्राकृति संसाधनों को लुटने के लिए। गांव गांव में स्कूल है लेकिन टीचर नहीं है। अस्पताल है लेकिन डाक्टर, नर्स नहीं हैं। एक रुपया वाला राशन सबको मिलता है लेकिन जमीन जंगल लुटा रहा है इसकी शिकायत करते हैं तो अधिकारी, नेता मंत्री चुप हो जाते हैं। यह हमारे खिलाफ बड़ा सत्यंत्र है। इसको समझने की जरुरत है।


राजू लोहारा ने कहा गांव गांव में बैठक कर ग्राम सभा को मज़बूत करने की ज़रूरत है। कोचांग के काली मुंडा ने कहा साजिश करके पुंजीपतियों ने बिरसा मुंडा को ha से अलग किया। यही पूंजीपति आज हमारा सारा चीज लूट ले रहे हैं। आदिवासियो के सामाजिक, सांकृतिक, भाषा साहित्य, स्वस्थ, शिक्षा का विकास करने के लिए ट्राइबल सब प्लान में आबंटित करोड़ों रूपया दुसरे माद में पानी की तरह बहाया जा रहा है। इससे रोकने की ज़रूरत है।


सिंबुकेल का अनूप हस्सा ने कहा बिरसा मुंडा धरती, जंगल जमीन बचाने के लिए शहीद हुए। उनके संघर्ष का देन है 1908 का C N T act, जो हमारा सुरक्षा कवच है। अपने हक अधिकार की रक्षा के लिए बच्चों को पढ़ाना लिखाना होगा। हड़िया दारू जैसे नशा से दूर रहना होगा। 


जागेश्वर लकड़ा ने कहा आज केन्द्र सरकार डिजीडल क्रायाकर्म को बढ़ा कर विश्व गुरु बनने का दावा कर रहा है, लेकिन भारत तबतक विश्व गुरु नहीं बन सकता है जबतक देश के आदिवासी मूलवासी किसानों का जंगल जमीन,पर्यावरण सुरक्षित नहीं रहेगा। आज ऑनलाइन सिस्टम में भारी संख्या में रैयतों के जमीन का हेराफेरी चल रहा है। आदिवासी समुदाय का जमीन लुटाते जा रहा है।

इससे रोकने की ज़रूरत है।


लुकिन मुंडा ने कहा ऑनलाइन जमीन लूटा रहा है ज़रूरत है इस शाजिस को समझने का,। तभी जंगल जमीन बचा पाएंगे। कुचाई के मानसिंह मुंडा ने कहा हमारे इलाके में 39 मुंडारी खूंटकटी गांव हैं। रघुवर सरकार खूंट कटी व्यवस्था को तोड़ने का कोशिश किया था हैं लोग बकस्थ मुंडारी खूंटकटी समिति बना कर इसका विरोध किए।  मानसिंह कहते हैं जब रिकॉर्ड ऑफ राइट, खतियान में ही हमारा मालिकाना हक पहले से दर्ज है तब पणजी टू में नए सिरे से नाम चढ़ाने की क्या जरूरत है ? हम लोगों ने रघुवर सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध किया।


Karra प्रखंड के ludru गांव की रंजन सांगा ने कहा ऑनलाइन जमीन के कागजातों का kaara प्रखंड में सबसे ज्यादा छेड़छाड़ किया गया है और जमीन का लूट चल रहा है ।आज जरूरत है जंगल जमीन को बचाने के लिए नया अनुदान खड़ा करने का। तभी जमीन जंगल बच सकता है।


बुंडू के के तारा लाल मुंडा ने कहा आज जरूरत है बिरसा मुंडा के रास्ते जंगल जमीन बचाने के लिए संघर्ष करने के लिए संकल्प लेने का ।आज पूरे राज्य में जमीन की लूट धड़ल्ले से चल रही है राज बनने के बाद यह लूट बढ़ गया है। 


बबलू मुर्मू सरायकेला ने कहा आज शिक्षा के क्षेत्र भी हमें आगे बढ़ना होगा, तभी हमारे बच्चे अपने आधिकारों को समझ सकते हैं।  वन अधिकार अधिनियम सहित जितने भी कनून बने सभी जमीन जंगल लुटने के लिए बना। जन्हा टाटा जैसे फैक्ट्री बैठ गया आदिवासी विस्थापित होते जा रहे हैं। विस्थापीत अपने अधिकार से भी बेदखल होते जा रहे हैं। हम लोगों को सामाजिक राजनितिक क्षेत्र में भी संगठित होना होगा।


खरसांवा के धुलु सिंह मुंडा ने कहा रघुवर सरकार हमारे जमीन का भूमि बैंक बना लिया है, जमीन का ड्रोन से सर्व कर रहा है यह सिर्फ़ जमीन लुटने के कर रहा है। गोला मुंडा अड़की ने कहा जंगल जमीन बचाने का लड़ाई तेज करना होगा। बुधन लाल मुंडा ने कहा जल जंगल जमीन की रक्षा के लिए हम हैं सामाजिक और राजनीतिक रूप में भी संगठित और सशक्त होना पड़ेगा।


बहन इमिलिया ने कहा आज हमारे समाज में हड़िया दारू जैसे नशा जड़ जमा चुका है। हमारी बहनें हड़िया बेचती हैं और हमारे भाई पीते हैं, इससे हमारा समाज कमजोर हो रहा है।  इसे रोकने की जरूरत है । आजा हमारे समाज से ही वार्ड पार्षद है, मुखिया है, प्रमुख है, नेता है, मंत्री हैं फिर भी हमारा जमीन हमारे हाथ से छिनता जा रहा है यह दुर्भाग्य की बात है।


फादर टॉम ने कहा विरसा मुंडा का सीधा समझता था जमीन हमारा है इसको किसी भी कीमत में जीने नहीं देंगे इसलिए वह अंग्रेजो के खिलाफ उलगुलान किया था। आजाद भारत में आज हम गुलाम बने हुए हैं । पेसा कानून बने 25 साल हो गया लेकिन आज तक नियमावली नहीं बना। जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन हो गया है पूरे राज में आहिस्ता आहिस्ता सभी जमीन ऑनलाइन लूटा जा रहा है  । इसको रोकने के लिए संगठित होने की जरूरत है।


धर्म गुरु गुरु दुर्गावती ओडेया ने कहा आज हम जाति पति धर्म करम की लड़ाई में खो गए हैं हम् बिना सोचे समझे अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं उसका परिणाम हम देख रहे हैं। सीएनटी एक्ट बदल रहा है, ड्रोन से जमीन का सर्वे हो रहा है  आज हमे बिरसा मुंडा की तरह लड़ाई लड़ने की जरूरत है तभी जमीन बच पाएगा।


सुशीला कांडूलना ने आह्वान किया हमारे बच्चों को हमें हर तरह के नशा से दूर रखना होगा। युवाओं को शिक्षित बनाना होगा तभी हमारे बच्चे संविधान के आधिकारों को समझ सकते हैं। 

मुख वक्ता के रूप में मैंने अपनी बात रखी - आज बिरसा मुंडा के शहीद हुए एक 123 साल पूरे हो गए।  बिरसा मुंडा आदिवासी समाज ही नहीं लेकिन पूरे मानव समाज के लिए, उनकी आजादी के लिए, उनके सामाजिक अधिकार के लिए, उनके जल जंगल जमीन के अधिकारों के लिए अंग्रेजी व्यवस्था के खिलाफ उलगुलान किया ।आज बिरसा मुंडा के शहादात दिन में हम केवल बिरसा मुंडा को याद नहीं करेंगे लेकिन सरदारी लड़ाई के अगुआ तमाड़ के कानून मुंडा इसके साथ ही सिद्धू - कानू, चांद- भैरव,। फूलो झानो,  जतरा टाना भगत ,मक्खी मुंडा, गया मुंडा, डोका मुंडा , सिंदराय मनकी, बिंदराय मनकी, वीर बुधु भगत, तेलंगा खड़िया सबको सामूहिक रूप से उनके संघर्ष और शहादत के लिए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करती हहुं। इन सभी नेताओं के शहादत से ही सीएनटी एक्ट बना,।मुंडारी खूंटतकटी  अधिकार मिला। हो आदिवासी इलाके के लिए विलकिंग्सन रोल मिला , जो अपने जल जंगल जमीन पर परंपरागत अधिकार को रेखांकित किया है। 

2014 के बाद लगातर आदिवासी समुदाय के आधिकारों पर हमला हो रहा है। सी एन टी एक्ट, एस पी टी एक्ट, 5वीं अनुसूची में प्रावधान आदिवासी समुदाय के परम्परागत आधिकारों, पेसा कानून का आवहेलना करके रघुवर सरकार ने गांव की सामूदायिक जमीन को चिन्हित करके भूमि बैंक में शामिल कर दिया। जमीन के परम्परागत रिकॉर्ड जैसे खतियान पार्ट टू, विलेज नोट, गांव का नक्शा सभी को ऑनलाइन कर दिया। 

ऑनलाइन होने के बाद आज धड़ले से गांव के रैयतों का जमीन लूटा जा रहा है। खतियान में भारी छेड़ छाड़ हो रहा है। रिकॉर्ड में छेड़ छाड़ होने के कारण रैयत अपने जमीन का रशीद नहीं करवा पा रहें हैं। जमीन संबंधित कागजातों के ऑनलाइन होने के बाद रघुवर सरकार ने यह व्यवस्था किया की जमीन के असली दावेदार कौन है , उनका कौन सा जमीन है,  इसका पूरा विवरण पणजी टू में दर्ज करने की व्यवस्था की यह व्यवस्था रघुवर दास की भाजपा सरकार ने 2016 के बाद पूरे राज्य में स्थापित की। लेकिन आजा पूरे राज की यह स्थिति है की जमीन मालिकों का नाम ऑनलाइन पणजी टू में कहीं नाम दर्ज किया गया है तो उसका खाता नंबर दर्ज नहीं है अगर खाता नंबर दर्ज है तो प्लॉट नंबर दर्ज नहीं किया गया है  यह भी गौर करने की बात है कि जमीन की हेराफेरी का खेल पणजी दो के माध्यम से ही हो रहा है दलाल , माफिया और अफसरों की मिलीभगत से असली मालिक का नाम पणजी टू से रातों-रात हटा दिया जा रहा है और कोई गैर व्यक्ति का नाम पंजों में दर्ज हो रहा है । ग्रामीण रैयत इसको ठीक करने के लिए कभी प्रज्ञा केंद्र तो कभी सीओ कार्यालय तो कभी आमीन के पास दौड़ लगा के थक जा रहे हैं लेकिन उनका काम नहीं हो पा रहा है।  उनकी शिकायत का निपटारा करने की जिम्मेवारी से सभी पल्ला झाड़ ले रहे हैं। आज सामाजिक एकता को मज़बूत करने की ज़रूरत है साथ ही संकल्प लेना होगा की हर संभव हम अपने समाज के आधिकारों की रक्षा करेगें।


जद्दो सिंह मुंडा ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा बिरसा मुंडा सिर्फ 25 साल की उम्र में अंग्रेजों को झुकने को मजबूर किया था। आज हमारा समाज पढ़ लिख कर आगे बढ़ा है। पहले से हमारा समाज मज़बूत हुआ है तब हमें और मजबूती से संघर्ष करना होगा। सभा संचालन हादू टोपनो ने किया। लेखन एनेम टोपनो ने किया। Í 

(Photo by Ronald Reagan Khalkho)

Saturday, May 20, 2023

मैं धन्यवाद देना चाहती हूं कि UMASS LOWELL के Greeley Advisory Board के सदस्यों को जिन्होंने Greeley Scholar 2023 के लिए मेरा चयन किए।

 मैं दयामनी बरला भारत के झारखंड प्रदेश के आदिवासी मूलवासी ,दलित मेहनत मजदूरी करने वाले समुदाय की ओर से अमेरिका -Bostan - के प्रतिष्ठित University of Massachusetts Lowell को हृदय से धन्यवाद देना चाहती हूं कि आपने मुझे University में Greeley Scholar के रूप में Greeley peace Studies के लिए आने का मौका दिए हैं।

मैं धन्यवाद देना चाहती हूं कि UMASS LOWELL के Greeley Advisory Board के सदस्यों को जिन्होंने Greeley Scholar 2023 के लिए मेरा चयन किए।
मैं धन्यवादी हूं Greeley Advisory Board की अध्यक्ष urmiji के लिए की आप ने भारत के ग्रासरूट -आदिवासी समुदाय से मेरा नाम Greeley Scholar के लिए Nominate किए।
मैं धन्यवादी हूं UMASS LOWELL की chancellor Julie Chan की -आपने मुझे यूनिवर्सिटी के विभिन्न फ
FECULTY - संकाय में विभिन्न विभाग के प्रोफेसर विद्यार्थियों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा करने, समझने समझाने, सवाल-जवाब के द्वारा विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर संवाद करके एक दूसरे के साथ साझा करने का मौका दिया।
देश एवं विश्व अस्तर पर आदिवासी ,मूलवासी ,दलित, किसान, मजदूर ,मेहनत करने वाली समुदाय का जल, जंगल, जमीन, नदी - झील, झरना ,पहाड़ एवं पूरी प्रकृति के साथ जुड़ा उनका जीवंत इतिहास सामाजिक मूल्य, भाषा संस्कृत, आर्थिक व्यवस्था के अस्तित्व की रक्षा के लिए उनका संघर्ष को एक दूसरे से साझा करने का मौका आपने दिया।
जमीन से लेकर आसमान तक - जमीन, जंगल ,नदी झील झरना, शुद्ध पानी, शुद्ध पर्यावरण ,सामाजिक न्याय ,पर्यावरणीय न्याय ,क्लाइमेट जस्टिस जस्टिस ऑफ एग्रीकल्चर, जस्टिस ऑफ ह्यूमन राइट , आर्थिक असमानता के खिलाफ Sangharsh जैसे सभी पहलुओं पर एक दूसरे के अनुभव साझा करने का मौका दिए ।
यही नहीं हिंद महासागर का तूफान बंगाल की खाड़ी से टकराने से भारत में समय बे समय होने वाली बारिश , तूफान के कहर से लेकर धरती एवं हवा के गर्म होने से अटलांटिक महासागर में पिघलने वाली ग्लेशियर से उत्पीड़ित देशों की कहानी अपने आप बाया करने लगी , इसका भी एक अनुभव हमने एक साथ साझा किया। इस पर सबने चिता जताई कि इन परिस्थितियों से बहार कैसे निकला जाए।
विभिन्न संकायों, क्लासों, प्रोफेसर एवं विद्यार्थियों के साथ विभिन्न विषयों पर चर्चा के बाद, प्रोफेसर और विद्यार्थियों ने प्रत्येक क्लास में 15-२० तक सवाल पूछे, जो मेरे आत्मविश्वास को बहुत मजबूत किया।
मै UMASS LOWELL को फिर से आपके द्वारा ग्रीले स्कॉलर के लिए चयन करने और आप के बीच रहने का मौका देने के लिए मैं पूरे यूनिवर्सिटी को धन्यवाद देना चाहती हूं ।
UMASS LOWELL में 3 अप्रैल को University में आने के बाद लगातर विभिन्न संकायों के प्रोफेसर के साथ उनके क्लास के विद्यार्थियों को क्लास लेते रहे।
उनमें से कुछ क्लास थे -
*Intro to Environmental Politics With -Prof.Vanessa Gray. Conference *
*-Model UN.
*, Sociology of Immigration With -Prof.Kyrie Kowailik.
* Middlesex Community College -Indigenous People's Mobilization Against Exploitative and Extractive Practice.
*Immigration History with -Prof.Bob Forrant.
*Day Without Violence -Jal (Water). Jungal (Forest) Zameen (Land) Sangharsh (Struggles) Stories of Aadivasi Resistance and Survival -Lecture by me.
*African Community Centre of Lowell.
* Tour of Lowell with Prof.Bob Forrant.
*Concept of Power With -prof.Emma Rodman.
* A Conversation with Dayamani Barla
-Hosted by the International Studies Hub.
GLILA-
*Personal Inspiration in the Sutuggle for Justice, Reflection from an Adivasi/ Indigenous Activist.
*Human Rights with Prof. Jarrod Hayes.
*Psychology। Department.
*Event at Lowell।High school.
*Ambedkar Jayanti/ Equality Day, Bostan study Group Cambridge.
*Frist Parish Concord.
*I have also joined the Farewell।Lunch With Greeley Advisory Board.
मैं Greeley Advisory Board ki Chair आदरणीय
Urmiji को उनके पति कौशिक को दिल से धन्यवाद देना चाहती हूं की आप ने मुझे ,अपने घर में ठहराया ,अपना परिवार का एक मूल हिस्सा माना, आपने मुझे हर तरह से मेरी मदद की, मेरा ख्याल रखा ,आपने अपना प्यार और सहयोग से मुझे हर घड़ी, हर समय मुझे आत्मविश्वास से परिपूर्ण बनाएं रखा। इस कारण मैं इस नए वातावरण में, अनजान जगह में, विभिन्न देश विदेश के वासियों के बीच में रहकर मैं अपनी जिम्मेवारी को पूरा करने में सक्षम हो पाई।
पर्यावरण को बचाने का संघर्ष (Climate Justice, Environmental Justice, Social Justice, Protection of Human Rights,) क्लाइमेट जस्टिस, पर्यावरण जस्टिस, सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता, सस्टेनेबल डेवलपमेंट सिस्टम स्थापित करने के लिए कौन सा रास्ता अपनाया जा सकता है? मानव अधिकार की रक्षा हम किस तरह से कर सकते हैं क्या संभावनाएं हैं इस पर कई सवाल क्लास में, और पब्लिक मीटिंग में चर्चा के साथ सवाल पूछे गए -इसका जवाब देने में आपका प्यार आपकी सयोग में मुझे और भी मजबूत बनाया है।
मैं आभारी हूं UMASS LOWELL के चांसलर का, तमाम फैकल्टी के अध्यक्ष, उनका विद्यार्थियों का और सभी प्रोफेसर का । साथ ही आरिफ हुसैन, राजीव, हमीदा , शुभानि, अलिशा और सभी उन साथियों का जो मेरे साथ कई कक्षा में मेरे हिंदी से दी गई बातों का अंग्रेजी में अनुवाद किया।
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हां आशा है आगे जाकर फिर मुलाकात होगी।

 जिंदगी एक नदी की धारा है। हजारों चट्टानों से टकराते फुहारों में बिखरते-समेटते कल कल करते अपना रास्ता बनाते आगे बढ़ते परिचित - अपरिचित कई छोटी बड़ी धाराओं से मिलती हैं। UMASS LOWELL University of Massachusetts द्वारा GREELEY Scholar for Peace Studies 2023 के लिए चुने जाने के बाद America -Bostan में रहते हुए मैंने महसूस किया की कई छोटी बड़ी नदियों का संगम हो रहा है।

बोस्टन में प्रोफेसर उर्मी जी और कौशिक ने तय कर लिए थे की मैं उनके साथ रहूंगी। एक दूसरे से अनजान, लेकिन अहसास में अपनापन। उर्मी जी UMASS LOWELL University की प्रोफेसर, कौशिक दूसरे बड़े University में मानव cell संबंधित रिसर्च जॉब में।
प्रतिदिन सुबह अदरक वाली गर्म चाय कौशिक बना कर पिलाते हैं। कप खाली होने पर वे छूने भी नहीं देते, मन में झिझक होती थी की.. अपना खाया -प्लेट और कप नहीं धो पा रही थी। जब भी बर्तन पर हाथ डालने की कोशिश करती कौशिक मना कर देते। खुद खाएं या न खाएं पर आप को खिलाएंगे ही। मन से लेकर घर का कोना - कोना खुला खुला सा था। कॉलेज जाते समय बात चीत के सिलसिले में मेरे मन में चल रहे सोच जुबान पर आ गई निकले।
अच्छा आप अपना घर -प्यार हमारे जैसे लोग के लिए खुला रखे हैं , ऐसा... ! ! मेरे मन की.. बात समझते हुए….. प्रोफेसर उर्मी जी गाड़ी का इस्टेयरिंग संभालते... गाड़ी बढ़ते…कहती है . मेरे पिताजी उत्पल रंजन दाता Tura Govt. Collage के प्रोफेसर थे। बहुत सारे कॉलेज के बच्चे उनके पास पढ़ने के लिए आते थे। पिताजी बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते थे, बच्चों से कहते थे जब भी तुम लोग आना चाहो तुम लोग आ सकते हो।
कहती है - मेरी मां भी स्कूल मैं टीचर थी । मेरे साथ पढ़ने वाले कोई भी बच्चा अगर मुझसे किताब पढ़ने के लिए मांगते, तो मेरी मां कहती थी तुम उसको किताब दे दो। उसको भी पढ़ने दो तुम्हारे पास तो किताब रहेगा तुम जब चाहोगे तब पढ़ लोगे। कभी-कभी परीक्षा के बीच भी मेरे साथ पढ़ने वाले साथी मुझसे किताब मानते थे, तो मेरे माता - पिता बोलते थे तुम उससे किताब दे दो तुम तो पढ़ ली हो उसको भी पढ़ने दो। मैं देखी हूं सभी पढ़ने वाले बच्चों के लिए मेरा मां-बाप का दरवाजा हमेशा खुला रहता था।
मेरी मां Jayanti Dutta school teacher थी। 2000 में उन्होने Denovo School Tura खोली, ताकि गरीब परिवार के बच्चे भी पढ़ सकें। प्रोफेसर बताती हैं हम कभी घर में नहीं खेले। हमेशा पेड़ के नीचे साथियों के साथ खेलते थे। कभी कभी पेड़ पर बैठे रहते थे साथियों के साथ। घर से यूनिवर्सिटी तस्तरी रास्ता हम दोनों के बीच चाचा चलते रही।
एक दिन सुबह कौशिक ने बताए मेरी मां आने वाली है। उसके लिए कमरा ठीक करना है। 10 अप्रैल को कौशिक की मां आई। मिलनसार और मृदुभाषी। मूल भाषा तमिल है लेकिन हिंदी भी अच्छी तरह बोलती हैं। बात चीत में पता चला कि वह एक महीने से अमेरिका के 8 स्थानों में अपनी टीम के साथ तमिल लोक संगीत कार्यक्रम दे चुकीं हैं। अब भारत लौटने की तैयारी है।
Sudha Ragunathan सुप्रशिद तमिल लोक गायिका हैं। बचपन से ही गाती हैं। Sudhaji के सरल व्यवहार से लगता ही नहीं है कि ये इतनी बड़ी लोक कलाकार हैं। कई तरह पुरस्कार से सम्मानित की गई हैं। हमारे देश के तीन राष्ट्रपति स्वर्गीय dr. अब्दुल कलाम, प्राणव मुखर्जी और बर्तवान राष्ट्रपति श्रीमति द्रौपदी मुर्मू जी के हाथों सम्मानित हो चुकी हैं। मेरा सौभाग्य रहा की आप के साथ और आप के परिवार के साथ रहने का मौका मिला।
जब परिवार से अलग हो रहे थे... हम सभी भाऊक थे.. एक दूसरे को देख रहें थे... संत थे…. मन.. बोलना चाह रहा था... सही में जिंदगी नदी की धारा है, बहते बहते कई छोटे बड़े नदियों से जा मिलता है, कुछ दूर साथ चलने के बाद फिर से कई धाराओं में बंट जाती है और आगे बढ़ती है... हां आशा है आगे जाकर फिर मुलाकात होगी।
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Sunday, March 19, 2023

जिलावार आरक्षण रोस्टर-प्रतिशत में

 20 /3/23

 खबर रांची में प्रकाशित रिपोट

झारखंड सरकार ने कैबिनंट से संकल्प जारी किया-

झारखं डमें कुल 60 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया गया-जिलास्तरीय नियुत्कि में इडब्ल्यूएस को (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण, शेष के कोटा में बदलाव नहीं-झारखं डमें जिलास्तरीय पदों प् होनेवाली सीधी नियुत्कि में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ( इडब्ल्यूएस ) के लोगों को भी आरक्षण दिया जायेगा। राज्य में कुल 60 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया गया है। सरकार के निर्णय के अनुरूप राज्यस्तरीय नियुत्कि के बाद अब जिलास्तरीय नियुत्कि में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग या इंडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिश सीट आरक्षित किया गया है। कार्मिक विभाग ने आरक्षण रोस्टर का संकल्प जारी कर दिया है। कैबिनेट की बैठक में जिलावार आरक्षण रोस्टर के प्रस्ताव को मिली स्वीकृति के बाद कार्मिक विभाग द्वारा जारी संकल्प में कहा गया है कि जिलास्तरीय पदों पर नियुत्कि के संबंध मे ंतो अप्रैल 2010 के संकल्प में संशोधन किया गया है। जिला रोस्टर में एसटी, एससी, ओबीसी, बीसी व इडब्ल्यूएस को जिलावार आरक्षण दिया गया है। राज्यस्तरीय पदों पर होनेवाली नियुत्कि में इडब्ल्यूएस को दस प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को जिलावार भी सुनिश्चित कर दिया गया है। 

झारखं डमें पदों व सेवाओं में रित्कियों में आरक्षण अधिनियम 2019 द्वारा दस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। जिलावार आरक्षण रोस्टर में विभिन्न वर्गौं के पूर्व से आरक्षण कोटा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में जिला स्तरीय वर्ग नियुत्कि के लिए जारी अधिसूचना की तरह ही नयी अधिसूचना में भी छह जिलों में एमबीसी(अत्यंत पिछड़ा वर्ग) और बीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है। 

15 भाषाओं में से किसी एक का चयन करने की होगी अनूमति-जिलास्तरीय पदों पर नियुत्कि के लिए निकाले जानेवाले विज्ञापन में अभ्यार्थी का ेअब 15 भाषाओं में से किसी एक का चयन करनी की अनुमति होगी। इसमें उर्दू, संथाली, बंगाली, मुंण्डारी, हो, खडिया, उरांव, कुरमाली, खोरठा, नागपुरी, पंचनरगनिया, उड़ियाा, हिन्दीं, अंग्रेजी और संस्कृत भाषा शामिल है। हालांकि जिलों में पदों पर नियुत्कि को लेकर कार्मिक विभाग ने जिलावार क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की सूची अभी जारी नहीं किया है। 

जिलावार आरक्षण रोस्टर-प्रतिशत में

जिला------एससी-----एसटी----एमबीसी-1-----बीसी--2---इडब्ल्यूएस

रांची-------05-------37------05---------03-------10

खुंटी------05--------45------00-------- 00-------10

हजारीबाग--21--------04-------14--------11-------10

रामगढ----11--------20-------11--------08-------10

चतरा-----18--------08-------14--------10-------10

गिरिडीह---13--------12-------14--------11-------10

बोकारो----13-------12--------14--------11-------10

धनबाद----15-------08------- 15--------12-------10

लतेहार----21-------29--------00-------00--------10

लेहरदगा---03-------47--------00-------00--------10

सिमडेगा--07-------43--------00--------00--------10

प0 सिंहभूम--04-----46--------00--------00--------10

दुमका-----05-----45--------00--------00--------10

साहिबगंज---05-----38-------04--------03--------10

पाकुड-----05-----38-------04--------03--------10

सरायकेला----05----38-------04------03-------10

पू0 सिंहभूम----04----28------10------08--------10

देवघर------12-----12------15------11--------10

गोडा-------08-----25------10------07-------10

जामताडा----09-----32-------05-----04--------10

Saturday, March 4, 2023

 2016-17 me 

ं 50 लाख कीमत तक के जमीन रजिस्ट्री 1 रूप्या मे किया गया-इसका लाभ किसको मिला?

झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने राज्य के सामृद्व महिलाओं को लाभ पहुुचाने के लिए भू-राजस्व एवं निबंधन विभाग के माध्यम से 50 लाख कीमत की जमीन खरीदने पर 1 रूप्या में जमीन की रजिस्ट्री करने की व्यवस्था लायी। 

इस व्यवस्था के बाद हर साल 70 महिलाएं इसका लाभ उठाते रहीं। इस व्यवस्था के तहत महिलाएं एक रूप्या में जमीन, मकान, प्लैट का रजिस्ट्रेशन करायी। 2 लाख से अधिक रजिस्ट्री की गयी। इससे राज्य को 1296 करोड़ राजस्व का नुकासान भी उठाना पड़ा। 

कोरोना काल में वर्तमान हेमंत सरकार ने इस व्यवस्था फिर से वापस लिया। तर्क दिया गया कि इस व्यवस्था के तहत गरीब महिलाएं लाभ नहीं ले पा रही हैं साथ ही राज्य का राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। इसी को देखते हुए राज्य की गठबंधन सरकार ने इस व्यवस्था को वापस लिया। 

5 सितंबर 2019 का तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने टवीट किया था-झारखंड देश का पहला राज्य है जहां महिलाओं के लिए 50 लाख रूप्या तक की जमीन , मकान की रजिस्ट्री सिर्फ एक रूप्ये में होती है। अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा महिलाएं बन चुकी हैं मकान मालकिन। 

जानकारी के लिए-देश के बाकी राज्यों में भी महिलाओं को रजिस्ट्री में कुछ प्रतिशत की छूट मिलती है-उदाहरण के तौर में-दिल्ली में 4 प्रतिशत स्टाम्प डयूटी देनी पड़ती है। यूपी में महिलाओं द्वारा जमीन खरीदने पर सिर्फ एक (1) प्रतिशत ही स्टाम्प डयूटी में छूट दी गयी है। 

23 मार्च 2021 को राज्य सरकार ने महिलाओं को 1 रूप्या में जमीन रजिस्ट्री में छूट देने से राज्य सरकार को 400 करोड़ का नुकसान बताया। राज्य के प्र्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि पिछली सरकार ने महिला के नाम से जमीन रजिस्ट्री कराने नर छूट दी थी, इससे राज्य को करीब 400 करोड़़ रूप्ये राजस्व का नुकसान हुआ था। वह रजिस्ट्री शुल्क भी देने में सक्षम होता है। यह सिर्फ जमीन लूटने की षडयंत्र के तहत किया गया था। 

जो भी नये-नये व्यवस्था जमीन संबंधित लाये गाये पिछली रघुवर दास की सरकार के द्वारा उसका समीक्षा होनी चाहिए कि आदिवासी, मूलवासी, दलित और मेहनत मजदूरी करने वाला परिवार को कितना लाभ मिला?। इसकी सूची सरकार को जारी करना चाहिए, तभी सामाजिक न्याय की बात हो सकती है। 


विद्यार्थी आवासीय, आय, जाति और अन्य प्रमाण पत्र के लिए रोज कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।

 17-2-2023 को शहर के अखबरों में छपी मुख्य समाचार-प्रभात खबर

राजधानी के शहर अंचल कार्यालय में म्यूटेशन के 828 मामले लंबित हैं। म्यूटेशन की फरियाद लेकर लोग चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कोई उनकी सुनने वाल नहीं है। विद्यार्थी आवासीय, आय, जाति और अन्य प्रमाण पत्र के लिए रोज कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। कर्मचारी तरह-तरह की दलील देकर और त्रुटियां निकाल कर उनको लौटा दे रहे हैं। ऐसे में प्रमाण पत्र मिलने में युवाओं को कई महीने लग रहे हैं। नतीजन शहर अंचल में तंबित मामलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। बार-बार ऐसी बातें सामने आ रही कि म्यूटेशन का मामला चढावा नही ंदेने के कारण लटकाया जा रहा है। चढ़ावे के बाद ही म्यूटेशन किया जा रहा है। हालांकि लोगों के म्यूटेशन का मामला लटक न जाये, इस डर से पीड़ित सामने नहीं आ रहे हैं। 

एसटी सटिफिकेट के 399 मामले लंबित-शहर अंचल के पिछले एक साल (एक अप्रैल 2022 से दो फरवरी 2023 तक) के कार्यकलाप का आकलन किया गया, तो लंबित मामलों की लंबी लिस्ट तैयार हो गयी। एसटी सर्टिफिकेट के कुल 399 मामले लंबित पाये गये। वहीं एसी सर्टिफिकेट की बात की जाये, तो एक साम से 79 मामले लंबित हैं। सार्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण विद्यार्थी कई प्रतियोगी परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं। 

जति प्रमाण पत्र के लंबित मामलों की है लंबी लिस्ट-शहर अंचल में सबसे ज्यादा जाति और आवासीय माममले लंबित हैं। इबीसी-वन और बीसी-टू के करीब 556 आवेदन लंबित हैं। 369 आवेदनों को रदद किया गया हे। वहीं 755 प्रमाण पत्र जारी कर दिेये गये हैं। 

व्हीं ओबीसी सर्टिफिकेट की बात की जाये तो 67 आवेदन पर अभी तक विचार नहीं किया है। इस कारण प्रमाण पत्र जारी नही हो पाया है। यहां 137 प्रमाण पत्र जारी किया गया है और 115 आवेदन रदद किया गया। नाॅन क्रीमिलेयर वाली इबीसी-वन और बीसी-टू के प्रमाण पत्रों के लंबित मामलों की संख्या 250 के करीब है। इसके आवेदक भी चक्कर लगाकर थक चुके हैं। 

आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी दिक्कत-उच्च शिक्षा और केंन्द्र सरकार की नौकरी का लाभ लेने के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग इडयूएस को भी प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। लेकिन शहर अंचल में इस प्रमाण पत्र को बनाने में भी विद्यार्थियों को मशक्कत करनी पड़ रही है। एक अप्रैल 2022 से दो फरवरी 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक शहर अंचल में इडबयूएस के करीब 70 आवेदन लंबित हैं। 


Friday, March 3, 2023

नियोजन के लिए पूर्व निर्धारित क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं मे संशोधन करते हुए हिंन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत को शामिल किया राज्य सेवा के अभ्यार्थियों को झारखंड की स्थानीय रीति-रिवाज, भाषा एवं परिवेश कर ज्ञान होने की अनिवार्यता विलोपित करने की स्वीकृति दी

 प्रभात खबर 3-3-2023

स्थानीय नियोजन नीति में संशोधन किया-हैंमत सोरेन के कैबिनेट के फैसले

नौकरी के लिए राज्य से 10वीं व 12वीं पास की बाध्यता खत्म, क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं में हिंन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत भी-

झारखंड में नौकर करने के लिए अब राज्य के मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थानों से 10वीं व 12वीं की पढ़ाई करना जरूरी नहीं होगा। गुरूवार को कैबिनेट ने राज्य में नियोजन के लिए झारखंड के शिक्षण संस्थानों से ही 10वीं व 12वीं की पढ़ाई करने की अनिवार्यता समाप्त करने पर सहमति दी। साथ ही नियोजन के लिए पूर्व निर्धारित क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं मे संशोधन करते हुए हिंन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत को शामिल किया राज्य सेवा के अभ्यार्थियों को झारखंड की स्थानीय रीति-रिवाज, भाषा एवं परिवेश कर ज्ञान होने की अनिवार्यता विलोपित करने की स्वीकृति दी। इसके लिए कैबिनेट ने दर्जन भर नियुक्ति नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। रास्त में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए  कुल 12 क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं को चिन्हित किया गया था। इनमें उर्द, संताली, बांगला, मुंण्डारी, हो, खड़िया, कुडुख, खोरठा, नागपुरी, आडिया, पंचपरगनिया और कुरमाली भाषा शामिल थे। 

टब कैंनिनेट ने सूची बढ़ाते हुए राज्य स्तरीय पदों के लिए कुल 15 भाषाओं को शामिल करने पर मंजूरी दी। जिलास्तरीय पदों के लिए क्रार्मिक विभाग क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं को चिन्हित कर अलग से सूची जारी करेगा। हाईकोटै द्वारा राज्य सरकार की नियोजन नीति खारिज करने के बाद राज्य के स्कूलों से पढ़ाई करने की बाध्यता समाप्त करने और चिन्हित भाषाओं में हिन्दी, अंग्रेजी व संस्कृति को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। परीक्षा में भाषा के 100 बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे जाऐंगें। 


Sunday, February 26, 2023

यह तस्बीर बिता इतिहास बन गया है

यह तस्बीर बिता इतिहास बन गया है यह तस्बीर लोधमा रोड जाने पर सिठियो के पहले खेत था। जहां किसान धान की खेती करते थे। आदिवासी, मूलवासी किसान समुदाय जानते हैं कि खेत-टांड में मुसा-गुडु, चुहा रहते हैं। ये किसानों के खेत के फसलों को खाते हैं साथ ही फसलों की बालियों को अपने बिलों में भंण्डारन/एकठा करते हैं भविष्य के लिए। यह भी सर्वविदित हैं कि आदिवासी, मुलवासी, दलित समुदाय इन मुसा, गुडु, चुहा का शिकार करते हैं और खाते हैं। जब किसान खेत से धान, गेंहू काट लेते हैं, तब बच्चे खेतों में इन मुसा, गुडु का बिल तलाशते हैं। बिल मिल लाता जाता है, तब उनको निकालने के लिए कुदाल से खोदते और उसे निकालते हैं। निकालते समय ध्यान देना होता है कि बिल का मुख्या रास्ता के अलावा और किधर रास्ता है। जहां से वे खोदते समय भाग सकत हैं। उन सहायक बिल के रास्तों को बंद किया जाता है। तब खोदना शुरू करते हैं। म्ुसा-गुडु, चुहा को मार कर बच्चे मिलकर आग में जलाते, बनाते हैं। इनका मांस को बढिया से भुून कर मिल-बैठ कर खाते हैं। इस तस्बीर में गांव के बच्चे का टीम खेत के बिल से मुसा निकालने के लिए खोदने में वयस्थ हैं। करीब 7-8 साल पहले याने रिंग रोड़ बनने के पहले जब मैं इस रास्ते से कर्रा की ओर जा रही थी, मैंने इस तस्बीर को खीचीं। आज यहां खेत गायब हो गया कारण कि यहां का सभी खेत पर रिंग रोड़ बन गया। यहां अब खेत दूर-दूर तक दिखाइ नहीं देता है। गांव दिखाई नहीं देता है। अब सिर्फ दौडती गाडियां ही दिखाई देती है।