Friday, December 24, 2010

आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच ने -स्वछ राजनीति का इतिहास रचा-2


संघर्ष और निर्माण की और बढ़ता कदम
तोरपा ब्लोक के आमा पंचायत में आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच ने चुनाव में जीत हाशिल कर निर्माण की प्रक्रिया में अपने उपस्थिति दर्ज किया। पंचायत में कुल ९ वाड है-इसमें मंच ने ६ वाड जीता। मुखिया पद के लिए-जे एम् एम् -ने अगुस्तिन टोपनो, बीजेपी-चमरा पहन, दुसरे संगठन-धनकुंवर टोपनो, आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच-जों टोपनो उमीदवार थे। मंच ने मुखिया पद जीत लिया।
पंचायत समिति- के उमीदवार-रोशन टोपनो-निर्दलीय, मार्शेल टोपनो-जे एम् एम्, शशि कुमार टोपनो-दुसरे संगठन, आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच-तुर्तन टोपनो थे। मंच नि जीत हाशिल किया। उप मुखिया का पद भी मंच लेने की स्थिति में है। मंच ने हर घर से वाड परसद से लाकर पंचायत समिति के उम्मीदवारों के लिए चंदाजमा किया था।

आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच ने --स्वछ राजनीति की नीव डाल कर नया इतिहास रचा


जीत हाशिल करने के बाद आदिवासी मूलवासीअस्तित्व रक्षा मंच के साथी कंषा थाली एवं लोटा में पानीलेकर -मुखिया, पंचायत समिति सदस्य एवं वाड पर्सदों का स्वागत किये

आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच संघर्ष औरनिर्माण के रास्ते आगे बढ़ रहा है. २००५ में राज्य सरकारऔर मित्तल कम्पनी के बीच एम् ओ यू हस्ताक्षर करने केबाद मित्तल कम्पनी खूंटी जिला के कर्रा, तोरपा एवं गुमला जिला के कामडारा ब्लोक एरिया में १२ हज़ार हेक्टेयरजमीन कारखाना के लिए अधिग्रहण करना चाहता था. इसके खिलाफ मंच ने लगातार संघर्षरत रहा. पंचायतचुनाव में आमा पंचायत में वार्ड परसद से लेकर मुखिया, एवं पंचायत समिति -बीजेपी, जे एम् एम् , कांग्रसे सहितदुसरे धन बल, बहु बालों को पराजित कर पंचायत में कब्ज़ा जमा लिया है.सायद यह पहला मौका था...ग्रामीणों नेघर घर से सहयोग राशी जमा कर चुनाव लड़ कर जीत हाशिल कर ...स्वछ राजनीति का नीव रखेहैं.

Tuesday, December 21, 2010

१० साल में नेता और मंत्रियों ने राज्य को यही दिया है-1




क्या इस राज्य का अपना भविष्य है?
आखिर राज्य का भविष्य कौन तय करेगा? इस सवाल का जवाब हम आम जनता को ही तलाशना होगा. इसे के लिए एक ही रास्ता है, भ्रष्ट नेता, मंत्री, अधिकारी, प्रशासन, ठेकेदार, दलाल के खिलाफ एक जुट होकर संघर्ष. तभी का नवनिर्माण संभव होगा और यह जनता ही कर सकती है.
झारखण्ड अलग राज्य बने १० साल हो गया. राज्य ने ७ मुख्यमंत्री देख लिया. सैकड़ों मंत्रियों को देखा. हार मंत्री अपने पास ३-४ विभाग रखे. हार विभाग से जनता के करोड़ों रूपया लुट लिए. हार मंत्री करोडपति बन गए. लेकिन झारखण्ड के विकास के बुनियादी बेवस्था के दिशा में कोई काम नहीं किये. इस तस्बीर को देख कर आप को लगेगा की- ये कोई कबाड़ी खाना है, नहीं-यह तो लाखों किसानो को जीवन देने वाला बंडू का सिंचाई विभाग का कार्यालय है. जंहा..ना ..तो बिजली है, ना है टेलीफ़ोन, ना ही कर्मचारियों के लिए स्वस्थ्य पानी पिने की बेवस्था. जर्जर भवन. सिचाई विभाग खुद ही बीमार है, लचार है, अपांग है ......

Monday, December 20, 2010

समाज के सामुदायिक सम्पति पर पूंजीपतियों का हमला-खूंटी जिला-कर्रा ब्लाक-जबड़ा गाँव -अंतिम भाग

यह धरती हमारी माँ है- सरकार का सम्पति नहीं
18 दिसंबर को जब मैं खूंटी डीसी श्री राकेश कुमार जी से इस संबंध में बात कर रहे थे-इन्होंने बताया कि अपहरण का खबर मिला था। हम लोग सोच रहे थे कि लेवी के लिए अपहरण हुआ है तो कंपनी याने ठेकेदार के आदमी का हुआ होगा। लेकिन पता चला गांव के लड़के का भी हुआ है। जब हम को थोड़ी देर के बाद पता चला कि एक को छोड़ दिया, तो सोच रहे थे गांव के लड़के को छोड़ दिया होगा। लेकिन
पता
चला कि ठेकेदार के आदमी को छोड़ दिया है। और गांव का गयाब है। डैम कौन बना रहा है, किसके द्वारा बनाया जा रहा है, क्यों बनाया जा रहा है, कहां बनाया जा रहा है, किसकी जमीन ली जा रही है, कितना बडा बनाया जा रहा है? इसकी जानकारी जिला प्रशासन को नहीं देना-अपने आप में अहम सवाल है। 65 करोड़ का योजना जब क्षेत्र में बनाया जा रहा है-आखिर इसकी जानकारी क्यों अधिकारियों तक नहीं दी गयी। यह आम ग्रामीणों का सवाल केवल नहीं है। यह सवाल राज्य व्यवस्था के उपर भी है। नेताओं के उपर भी है-कि आप जनता के प्रति कितने जिम्मेदार हैं। विकास का दिशा आप किस तरह तय कर रहे हैं, किसके लिए तय कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम एवं कारवाई से कई कडुवे सवाल छन कर निकलते हैं। यदि सत्ताधारी, राज्य व्यवस्वथा इसे नजरअंदाज करती है-तब यह तय है कि झारखंड राज्य का कोई भविष्य नहीं है।

समाज के सामुदायिक सम्पति पर पूंजीपतियों का कब्ज़ा- खूंटी जिला कर्रा ब्लोक-


जहां पूंजी का प्रवेश होगा, समाज की समूहिकता स्वतः समाप्त होगा। वहां व्यक्तिवाद हावी होगा। पैसा अपना काम करेगा। पैसा एक दूसरे को लडाएगा। खून होगा। पूंजी-पैसा का खेल ऐसा ही होता है। कर्रा प्रखंड में अब इसका खेल शुरू हो चुका है। बिजय धान के अपहरण के बाद हत्या, और इसमें ठेकेदार के सुपरवाईजर आर पी सिंह के बयान पर कर्रा थाना में दर्ज आरोपित महादेव मुंडा एंव उनके सहयोगियों , धारा....364, 323, 279, 34 आई पी सी इसका उदाहरण है। इस खेल में कानून, प्रशासन , नेता, मंत्री, दलाल, अधिकारी सभी अपने क्षमतानुसार हर अवसर का लाभ उठाना चाहेगें। इसमें आम जनता पर चैतरफा दमन बढेंगा। यह खेल भोले-भाले ग्रामीणों के समझ के परे होगा। यदि Triveni Engicons pvt.ltd द्वारा कांटी डैम के बनाने की प्रक्रिया पर बारिक से नजर डाला जाए तो उपरोक्त बात साफ हो जाती है। अचानक 10 दिसंबर को भूमिं पूजन होता है डैम का काम शुरू करने के लिए। 11 दिसंबर से ठेकेदार गांव गाड़ी घुसाता है। 12 दिसंबर से डैम बांघना शुरू कर दिया। 13 दिसंबर की sham 7-8 बजे एक ही जगह से एक साथ बिजय धान जबड़ा और बिंधयालय गुप्ता.-ठेकेदार का आदमी का अपहरण होता है। पुलिस के अनुसार उनकी दो टीम अलग अलग रास्ते से उसे खोजने निकलती है। एक टीम जब नदी के पास पहुंचती है-तो सामने से किसी आदमी को आता देख पुलिस उसे रोकती है। पता चलता है-यह विंधयालय गुप्ता है जिससे अपहरण किया गया था। पुलिस पूछती हैं-कौन लोग थे वे, कहां ले कर गये थे? और एक कहां है, उसको किधर ले गये? बिंधयाचल जबाव देता है-नहीं जानते हैं। 14 दिसंबर को एस पी गांव जाते हैं। अरोपियों का सुराग खोजने के लिए जबड़ा गांव के ही लोधा धान 45 तथा जगतु धान 38 को पुलिस उठा कर कर्रा थाना लाती है। पुलिस मैनुवल कहता है-किसी भी निर्दोष को किसी भी केस में पुलिस पूछ-ताछ के लिए ले जाती हैं, उसे 24 घंटे के भीतर प्रक्रिया पूरा करके छोड़ देना है। लेकिन पुलिस ने इन दोनो निर्दोष लोगों को 19 दिसंबर तक थाना में रखा। यहां यह सवाल उठता है कि बिंधयाचल गुप्ता जो ठेकेदार का आदमी है-जिसको छोड़ दिया गया, को पुलिस कास्टडी में रख कर पूछ-ताछ करती, कडा+ई से पुलिस पेश आती तो सायद पुलिस को जो मिला है, उससे और भी कुछ मिलता। साथ ही पुलिस कारवाई पर लोगों का भरोसा बढ़ता। लेकिन पुलिस आज बिंधयाचल कहां है..यह बताने में भी असमार्थ है। यह भी बता नहीं पा रही है वह मध्यप्रदेश का है या विहार का? जहां तक केस करने का सवाल है-ग्रामीणों को ठेकेदार पर यह कंपनी पर करवाना चाहिए था। क्योंकि बिजय उनके लिए काम करता था, और ठेकेदार के आदमी के साथ ही अपहरण हुआ था।