6 दिसंबर 2005
कर्रा
2 बजे हैं कर्रा प्रखंड कर्यालय में प्रखंड विकास पदाधिकारी श्री अनिरूद सिन्हा के चैमबर में श्री अनिरूद सिन्हा के अलावे सीडीपीओ सबिता कुमारी बैठे हैं। इसी बीच हम भी एनडीटीबी के दो साथियों के साथ उनके कमरे में पहुंचे। श्री अनिरूद जी से मैं प्रखंड का विस्तृत जानकारी ले रही थी। इसी बीच एक महिला अपने हाथ में कागजों का बंच लिए कमरेे में घुसी और अपना कागज बीडीओ की तरफ बढ़ा दी। उस महिला के पीछे दो-तीन और महिलाएं हाथ में आवेदन कागज लिये खड़ी थी। सामने वाली महिला का कागज देखने के बाद बीडीओ साहब ने कागज वापस करते हुए उत्क महिला को सप्लाई विभाग मंे जाने को कहा। महिला बाहर निकली, उसके पीछे खड़ी अन्य मलिाएं भी उनके पीछे हो ली। पांच मिनट बाद उत्क महिलाएं लौट कर बीडीओ के कमरे में वापस आयी और बतायी की सप्लाई विभाग में कोई नहीं है, ताला लगा हुआ है। महिलाएं बीडीओ साहब से पुछने लगी-बनेगा कि नहीं, बनेगा-मिलेगा-मिलेगा बोलते हैं, कितना दिन से दौड़ रहे हैं, लेकिन मिल नहीं रहा है। उत्क महिला से पुछने पर कि क्या नहीं मिल रहा है, जवाब देती है-राशन कार्ड। बीडीओ उत्क महिलाओं से पुछते हैं सप्लाई विभाग में कोई नहीं हैं, महिलाएं-नहीं सर ताला लगा हुआ है। घबड़ाते हुए बीडीओ साहब रामदेव कुमार दलपति को बुलवाते हैं। रामदेव कुमारजी आते हैं, बीडीओं पुछते हैं सप्लाई इंन्सपेक्टर नहीं हैं। रामदेवजी जवाब देते हैं नहीं सर नहीं हैं। बीच में ही हमने पुछा-आज नहीं हैं या कितने दिन से नहीं आ रहे हैं। रामदेव जी कहते हैं एक सत्पाह से नहीं आ रहीं हैं। क्यों नहीं आ रही
यह पुछने पर रामदेवजी ही बोलते है कि वह बीमार है। हम लोग जब बीडीओ साहब से पुछे कि आज तो मंगलवार है,-ब्लोक दिवस है, बीडीओ उत्तर में कहते हैं हां आज ब्लोक दिवस है। आज तो ब्लोक स्तर के सभी अधिकारियो-कर्मचारियों को ब्लोक में उपस्थित रहने का आदेश रहता है ताकि इस दिन पुरे क्षेत्र के ग्रामीणों के विभिन्न तरह के समस्याओं का निपटारा संबंधित अधिकारी कर सकें। हमने उत्क महिलाओं से पुछा-चलिए तो किधर है सप्लाई विभाग देखते हैं। इसी बीच एक व्यत्कि आता है बीडीओ के कमरे में और कहता है, सर चावल में आग लगा दिया। यह सुनते ही सबका ध्यान उस व्यत्कि की ओर जाता है। उससे पुछने पर कि कयों जला दिया-उत्क व्यत्कि कहता है सड़ गया था, पिलू लग गया था, फेंकने से बकरी सब खा जाता तो मर जाता क्योंकि वह तो पोयजन हो गया। अखबार वाले अधिकारियों से सवाल-जवाब कर रहे हैं-इस खबर से प्रखंड से अपना काम कराने आये गा्रमीणों के चेहरे में अजीब तरह का उत्साह का झलक रहा था। शायद इसलिए की पहली बार टीब्ी कैमरा वाले को लोग प्रखंड कर्यालय में देख रहे थे। जब हम बीडीओ के कमरे से उत्क महिला के पीछी-पीछे सप्लाई विभाग की ओर जाने के लिए निकले, बीडीओ के कमरा के बाहर लगी भीड़ जोे बार-बार अंदर झांकने की कोशिश कर रही थी, हम लोगो के पीछे सामने आंगन तक आ गयी। साथ में बीडीओ साहब भी बाहर निकले। भीड़ ने बीडीओ साहब के सामने ही कई शिकायत की।
मुख्य बिलड़िग से बाहर निकलते ही सामने मैदान के दुसरी छोर में सप्लाई विभाग का गोदाम है। इस गोदाम के दहिने कोने से घना धुंआं उठ रहा है, धुंआ के साथ किसी चीज के जलने की गंध आ रही हैं। भीड. से एक व्यत्कि बगल में आ कर धीमें आवाज में कहता है-उधर देखिए चावल जल रहा हैं। गोदाम के पास पहुंचने पर वस्तुस्थिति समझ में आती है। गोदाम का एक बड़ा शटर बंद है। बगल में एक छोटा शटर उठा हुआ है। उसके सामने चावल बोरी का ढेर है जो जलकर आंगारा का रूप लेता जा रहा है। कुछ तो जल कर राख हो चुका है, लेकिन अभी भी 20-25 बोरी दिखाई दे रहा है जिसको जलना बाकी है। जल रहे चावल के ढेर के बगल में कुछ चावल के दाने पड़े हैं उसे एक कुता खाने में लीन है। जिस कमरे में चावल रखा गया था, उसमें घुस कर देखने की कोशिश में सीढ़ी तक गयी। लेकिन अंदर नहीं घुस सकी-कारण की गोदाम के कमरा से लेकर जल रहे चावल के ढेर तक कानी अंगुली के एक चौथाई के बराबर मोटा-मोटा काला-काला पिलू पुरा बिछा हुआ रेंग रहा था। देखकर मन- बदन सिहर जा रहा था। पुरा कमरा में पीलू रेंग रहा था, र्फस गीला था। गोदाम के पास हम लोगों के साथ कर्रा प्रखंड के प्रभात खबर का संवाददाता साईद भी थे। इन्होने बताया की यह चावल दो साल से गोदाम में पड़ा हुआ था जिसका वितरण नहीं किया गया। बीडीओ साहब से पुछने पर कि यह किसका चावल था, क्यों नहीं बांटा गया, इसके उत्तर में बीडीओ बात को टालते हुए कहते हैं-हां-हां चलिए सीओ से पुछते हैं कहते हुए वे कर्यालय की ओर बढ गये।
सप्लाई इंन्सपेक्टर कौन है यह पुछने पर बीडीओ साहब रामकदेव कुमार की ओर इशारा करते हुए पुछते हैं-क्या नाम है जी उसका। रामदेव कहते है मंजु कुमारी, कब से नहीं आ रही हैं पुछने पर दलपति कहते हैं- आठ दिन से। क्यों नहीं आ रहे हैं पता है पुछने पर कहते हैं बीमार है। वहां मौजुद ग्रामीण कहने लगे-बहुत दिन से नहीं आ रहे हैं। एनडीटीबी के साथियों ने जब रामदेव से पुछा क्या पिछले ब्लोक दिवस के दिन इंन्सपेक्टर आयी थी, उत्तर मिलता है-नहीं, याने दो सप्ताह से नहीं आ रहे हैं। ये तमाम बातें बीडीओं के सामने ही होता रहा, जबकि बीडीओ साहब चुप थे। विदित हो कि इसके पहले ही जब हम बीडीओ के कमरे में बैठे प्रखंड़ में कितने बीपीएल परिवार है, इसमें अनतोदय-अन्नपुर्ण योजना में कितने लाभूक हैं। बीपीएल लाभूकों के लिए हर माह कितना राशन प्रखंड कर्यालय को मिलता है, इसकी जानकारी लेने की कोशिश करने पर बीडीओ साहब जवाब दिये-कि इसका डीटेल तो आप को प्रखंड के सप्लाई आफसर ही दे सकता है। ये तमााम घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि प्रखंड में ग्रामीणों की सेवा में पदास्थापित अधिकारी एक-दुसरे अधिकारी के बारे जानीकारी भी नहीं रखते हैं। जो भी हो-लेकिन सवाल बहुत ही गंभीर है-आखिर यह किसका चावल था, गरीबों का, बृधाओं का, या फिर महिलाओं या बच्चों का, जिनके नाम पर आता है, उन्हें तो नहीं मिला-जिससे कीड़ा खा गया, सड़ गया, जिससे गंदगी साफ करने के नाम पर जला दिया गया। दुखद बात तो यह है कि इसी अनाज को प्राप्त करने के लिए सुदूर गांवों से बुढा-बुढी लकडी टेकते-टेकते पैदल चल कर आते हैं-अंतोदय-अन्नपुर्ण सुविधा लेने के नाम पर। इससे प्राप्त करने के लिए लाभुकों की सुची में अपना नाम दर्ज करवाने, या फिर राशन कार्ड बनवाने के लिए गरीब कई दिनों से प्रखंड कर्यालय का चक्र काटते हैं। गरीबों के साथ हो रहे इस न इंनसाफी के लिए आखिर कौन जिम्मेवार है क्या प्रखंडों में बैठे पदाधिकारी, या यहां की भ्रष्ट कुप्रशानिक व्यवस्था या फिर ग्रामीण विकास विभाग। आखिर इसका जवाब कौन देगा।
ग्रामीणों के समस्याओं का सही समय में हल करने के लिए हर सप्ताह में एक दिन प्रखंडों में पदास्थापित पधारिकारियों को एक दिन हर हाल में प्रखंड कर्यालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। यह दिन मंगल के दिन को निस्चित किया गया हैं इस दिन को प्रखंड कर्यालय का मंगल दिवस कहा जाता है। इसी दिन ग्रामीण अपने-अपने सस्मयाओं को लेकर आते हैं क्योंकि इस दिन सभी विभागों के संबंधित अधिकारी मौजुद रहते हैं। ताकि गांव के साथ ग्रामीणों का सही विकास हो सके। मैं भी इस दिन का लाभ उठााना चाही। प्रखंड विकास पदाधिकारी से प्रखंड की जनसंख्या की स्थिति, ग्रामीणों में शिक्षा-स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी लेनी थी। अंचल पदाधिकारी से प्रखंड में कृर्षि भूमिं, वनभूमि, जलस्त्रोत, बंजर भूमि, चरागह भमि, तथा आदिवासियों के जमीन की स्थिति का विवरण एकत्र करना था। सप्लाई अधिकारी से प्रखड के बीपीएल ग्रामीणों की सख्या, ग्रामीणों के नाम आने वाला अंतोदय-अन्नपुर्णा योजना के तहत मिलने वाला राशन, किरोसिन तेल, डीलरों की संख्या आदि सुचनायें लेना था। लेबर आफिसर से प्रखंड से हो रहे मजदूरों के पलायन की स्थिति की जानकारी लेनी थी। इसी तरह सीडीपीओ से ग्रामीण महिलाओं-बच्चों के स्वास्थ्य आदि का जानकारी एकत्र करना था। इसी उद्वेश्य के साथ मंगलवार या मंगल दिवस को 11.30 में कर्रा प्रखंड कर्यालय पहुंचे। बाहर प्रगंन में ग्रामीणों की भीड़ लगी हुई थी। इस भीड़ में कुछ नेता टाइप के लोग भी दिख रहे थे। सबसे पहले बीडीओं में मिलना था, उसके चेम्बर तक गये, दरवाजा में ताला लटक रहा था।
बगल में ही सीओ का दरवाजा खुला हुआ पाकर सीओ के कमरे में गयी। सीओ नवीण सुवार्णाे बैठे हुए थे। बीडीओ से मिलना है लेकिन दरवाजा में तो ताला लगा है वो आएगें की नहीं-यह पुछने पर सीओ साहब एक कर्मचारी को बुलाकर, जाओ बीडीओ साहब को जल्दी आने के लिए कहो, बाहर से लोग आऐ हैं। 20 मिनट के बाद बीडीओ साहब सीओ के चेम्बर में आए जहां हम लोग बैठे थे। सीओ ने सीआइ को बुला का प्रखंड के जमीन-जंगल का विवरण देने को कहा। इन दोनो अधिकारियों के अनुसार 178 रेवन्यू गांव हैं, जिसमें 1 गांव बंेचिरागी-आबादीविहीन है। कुल क्षेत्रफल-2001 के अनुसार-50745.24 हेक्टेयर है।
बीडीओ श्री अनिरूद्व सिन्हा के अनुसार प्रखंड की कुल जनसंख्या 90,836 है। जिसमें पुरूषों की संख्या 45,305 तथा महिलाओं की 45,331 है। इसमें अनुसूचित जनजाति 65,025 तथा जेनेरल की 25,811 है। यहां आदिम जनजाति नहीं हैं। इन्होंन बताया कि यहां 17,488 बीपीएल हैं। प्रखंड में शिक्षा का प्रतिशत 28 है। इसमें महिलाओं में शिक्षा का प्रतिशत 17 है जबकि पुरूषों में 36 है। यह पुछने पर कि क्या-राज्य सरकार या मितल समूह प्रखंड कर्यालय कोे किसी तरह का लिखित सूचना दिये हैं कि-मितल को उद्योग लगाने के लिए जमीन चाहिए। इसके जवाब में बीडीओ ने कहा-आज तक तो किसी तरह का लिखित सूचना नहीं मिला है। सिर्फ अखबारों में ही पढ़ रहे हैं।
सीडीपीओ साबिता कुमारी जो खूंटी में पदास्थापित हैं जो 11 जुलाई 05 से कर्रा प्रखंड अतिरित्क इनचार्च के रूप में सीडीपीओं की भूमिका निभा रही थी। जो मंगल दिवस के दिन ही सीडीपीओ का चार्ज बीडीओ को सौंपी। साबिता कहती हैं-दो-दो प्रखंड का जिम्म्ेावारी संभालना बहुत कठिन होता है। इन्होंने बताया कि यहां 117 आंगनबाड़ी केंन्द्र हैं। इसके लिए 110 सेविकाएं हैं। तीन सेविकाएं मुखिया चुनाव लड़ने के लिए इसत्फिा दे दीं। प्रखंड में 23 पंचायत हैं जिसमें संशोधन के बाद 19 हो गया है। 117 आंगनबाड़ियों के लिए चार सुपरवाइजर हैं। ग्रामीण महिलाओं और बच्चों को पोषाहार के रूप में गुड-मुरही दिया जाता था। अब सुप्रिम कोर्ट का आदिश दिया है कि स्थानीय सेविकाएं ही इसकी व्यवस्था स्वंय करेगीं। इसी कारण सभी सेविकाओं के नाम से खाता खोलवाया गया है। हर सेविका को प्रतिमाह इसके लिए 4600 कुछ रूपया दिया जा रहा है। महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर आइसीडीएस की ओर से क्या व्यवस्था है-इसके जवाब में साबिताजी ने बतायी कि आइसीडीएस में कोइ्र सरकारी डाक्टर-नर्स नहीं है। प्राथमिक हेल्थ सेंटर के डाक्टर-नर्स से ताल-मेल कर काम चला रहे है।
लेबर अफिसर से मिलने की इच्छा जाहीर करने पर पता चला कि यहां लेबर अफिसर हैे ही नही। अपने समस्याओं को निपटाने आऐ ग्रामीणों ने शिकायत किया कि-यहां हर विभाग में काम मन-मना होता हैं परिवारिक लाभ योजना के तहत 10,000 तक की राशि देने का प्रावधान है, इसमें उन्हीं लागों को दिया जाता है जो कम्शिन देते हैं। कई आंगनबाड़ी सेविकाओं ने शिकायत की कि-सुपरवाईजर उन्हेंने मन-मना ढ़ंग से हटाने की कोश्शि कर उनके जगह दुसरों को घुसाते हैं। कई लोगों ने कहा कि यहां जिनका चलता है उसी का काम होता है, यदि आप अधिकारियों के खिलाफ मुंह खेलेगें तो आप पर झुठा केस थोप दिया जाएगा। विदित हो कि राज्य सरकार राज्य बनने के पांच साल हो गये लेकिन प्रखंड वासियों के विकास कार्य में कोई नयापन नहीं आया, वही भ्रष्टाचार, अधिकारियों की कमी, अनियामितता, घुसखोर-दलालों की दया पर टिकी है ग्रामीणों का विकास। यह भी सर्वविदित है अर्जुन मुंडा ने राज्य में देशी-विदेेशी पूुजीपतियो को उद्योग लगाने के लिए जमीन-जंगल-पानी देने के लिए पूुजीपतियों से 40 करार कर लिया है। इसी के तहत मितल समूह को इस्पात करखाना खोलने के लिए मुंडा सरकार मनोहरपुर क्षेत्र को दिखाया था। इसका विरोध मनोहरपुर क्षेत्र की जनता ने की। वहां विरोध के बाद राज्य सरकार और मितल समूह कर्रा प्रखंड में जमीन तलाशाने में लगे हैं। वहीं दूसरी ओर विस्थापन का भय लोगों को विस्थापन के खिलाफ अनआंदोलन करने को उद्वेलित कर रहा है और गांव-गांव में जनगोबंदी का बिंगुल फूंका जा रहा है। कर्रा प्रखंड में विस्थापन के खिलाफ उठे इस जनगोबंदी को विस्थापन के खिलाफ शहादती संघर्ष का परचम लहराने वाला कोयलकारो जनसंगठन का भी समर्थन है।
दयामनी बरला






