नई दिल्ली/रांची, हिन्दुस्तान टीम एवं प्रभात खबर की रिपोर्ट
देश में खनियों और खनिज युक्त भूमि पर राज्य सरकारें अब अतिरिक्त कर, उपकर-संस या किसी भी तरह का अन्य शुल्क नहीं लगा सकेगी। लोकसभा में बुधवार को विपक्ष के जोरदार हंगामें के बीच खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक 2026 पारित कर दिया गया। इस विधेयक के जरिये केंन्द्र सरकार ने राज्यों की शुल्क लगाने की शक्तियों को समाप्त कर दिया है। इसका व्यापक असर झारखं डमें भी पडेगा।
बुधवार को लोकसभा में विपक्षी दलों को हंगामा जारी रहने से दोपहर दो बजे एफसी आरए विधेयक संयूक्त संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव पारित करने के बाद पीठासीन सभापति जगदंकबका पाल ने दोपहर 02.27 बजे सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थागति कर दी। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर केंन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेडी ने विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध के बीच विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए सदन के पटल पर रखा। आरएसपी के एनके प्रेमचंन्दन समेत कुछ अन्य विपक्षी सांसदों ने इस विधेयक का विरोध किया। कहा कि यह संविधान और संघीय ढांचे के खिलाफ है।
हालांकि सदन ने बिना चर्चा के ही इस विधेयक को ध्वानिमत से पारित कर दिया। विधेयक के पारित होने के बाद विपक्ष के भारी हंगामें के कारण लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थागित कर दी गई।
भूमि का विनियमन भी कंेद्र करेगा-जानकारी के अनुसार, खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन संशोधन विधेयक में न सिर्फ राज्यों की शुल्क लागू करने की शक्तियाु समाप्त की गई हैं, बल्कि इसके लागू होने के बाद निर्धारित मानकों के अनुसार खनिज संपदा से जुडी भूमि का विनियमन भी केंन्द्र सरकार के नियंत्रण में आ जाएगा। Bidheyak--थ्वधेयक में प्रावधान किया गया है कि 2026 के संशोधन अधिनियम के लागू होने से पहले एैसा कोई कर, उपकर या अन्य शुल्क, जो राज्य सरकार के पास जमा नहीं किया गया हो या जिसकी वसूली उसके द्वारा नहीं की गयी हो, उसे हर लिहाज से अवैध माना जायेगा। ुक्
विधेयक में कहा गया है, हांलाकि , ऐसे लागू होने से पहले खनिज अधिकारों या खनिज युक्त भूमि पर लगाया गया कोई कर, उपकार या अन्य शुल्क, जो पहले ही राज्य सरकार के पास जमा किया जा चुका है या उसके द्वारा वसुल किया जा चुका है, उसे वापस नहीं किया जायेगा। पर जिन्होनें सेस या कर जमा ही नहीं किया है तो उन्हें आगे भी जमा नहीं करना होगा।
सरकार ने बिल को विकास से जोड़ा-जी किशन रेडी ने कहा कि संशोधन का उद्वेश्य खनिज क्षेत्र में वित्तीय व्यवस्था को स्थिर, स्पष्ट और अनुमान योग्य बनाना है। उनके मुताबिक इससे राष्ट्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावउ मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत तथा 2027 तक विकसित भारत के लक्ष्य में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि खनिजों पर अलग-अलग क्षेत्रों में आमरन कर व्यवस्था सार्वजनिक हित को प्रभावित करती है। अधिक टैक्स और शुल्क से स्थानीय आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने, बाजार के विकास में कमी आने और परिवहन लागत अढ़ने की स्थिति पैदा हो सकती है। केंन्द्रीय मंत्री ने कहा कि खनिजों पर असमान कर व्यवस्था से घरेलू आपुर्ति मंहगी हो सकती है और पर्प्याप्त स्थाीनय संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद खनिजों के आयात का जोखिम बढ़ सकता है। इसका असर आम नागरिक के जीवन-यापन की लागत पर पड़ सकता है।
झारखंड पर यह पड़ेगा असर
आठ से 10 हजार करोड़ का राजस्व प्रभावित हो सकता है-1.36 लाख करोड़ बकाये की मांग पर भी पड्रेगा असर। खनिज संपदा के मामले में झारखंड देश के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में है। इसलिए विधेयक असर यहां दूसरे राज्यों की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। झारखंड ने 2024 में झारखंड मिनरल बियरिंग लैंण्ड सेसे कानून बनाया था। इयके तहत खनिज-युक्त भूमि, जिसमें कोयला-युक्त भूमि भी शामिल है, पर खनिज के प्रेषण के आधार पर उनकर की व्यवस्था की गयी है। इससे पिछले वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार को लगभग आठ हजार करोड़ रूपये केवल झारखंड मिनरल बियरिंग लैंड सेस से मिले थे। इस वर्ष सरकार ने जेएमबीएल सेस से करीब 10 हजरी करोड़ से अधिक राजस्व का अनुमान लगाया है। झारखंड लंबे समय से केंन्द्र सरकार से 1.36 लाख करोड, अब बढ़कर 1.41 लाख करोड की मांग करता है। इसमें एक लाख करोड की मांग का मुआवजा है। जिसमें 41,142 करोड़ बकाया और 60 हजार करोड़ व्याज है। इस अधिनियम से इस पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ ाकतर है। हालांकि इस विधेयक से ढारखंड की रोयल्टी पर कोई असर नहीं पडेगा।


