Monday, July 27, 2026

रेल बेच दिया, संडक बेच दिया, एयरपोर्ट बेच दिया, रेलवेस्टेशन बेच दिया, बंदरगाह बेच दिया- Ab आदिवासी, किसानों की जमीन बेचने की तैयारी

 रेल बेच दिया, संडक बेच दिया, एयरपोर्ट बेच दिया, रेलवेस्टेशन बेच दिया, बंदरगाह बेच दिया- Ab आदिवासी, किसानों की जमीन बेचने की तैयारी

केंन्द्र सरकार की लैंण्ड रिकाॅर्ड मोर्डनाइजेशन कार्यक्रम का ही एक भाग है

लैंण्ड टाइटलिंग एक्ट 

केंन्द्र में मोदी सरकार आने के बाद देश के जमीन-जंगल संबंधित कानूनों में कई तरह के बदलाव लाये गये। इसी क्रम में देश में भूमि संबंधी एक नया कानून लाने की योजना बनायी गयी। जो लैंड टाइटलिंग के नाम से जाना जाता है। केंन्द्र सरकार की  इस मसौदा को नीति ओयोग ने 9 सितंबर 2020 को झारखंड सरकार का भेजा था। इसमें राज्य सरकार से सुझाव 3 महीने के भीतर देने को कहा था। इस मसौदा में सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, मुंण्डारी खूंटकटटी अधिकार, विलकिनसन रूल एवं 5वीं अनुसूचि के संबंध में कोई जिक्र नहीं है।  इससे बड़ा और गंभीर सवाल उठता है कि इस लैंण्ड टाइटलिंग एक्ट के लागू होने से सीएनटी, एसपीटी एक्ट एवं 5वीं अनुसूचि में प्रावधान आदिवासी, मूलवासी, किसानों, दलितों के जंगल-जमीन पर परंपरागत एवं संवैधानिक  अधिकार सुरक्षित रहेगें या नहीं?। 

नये कानून पर केंन्द्र की दलील

केंन्द्र सरकार और नीति आयोग का मनना है कि इसे लागू करने के बाद परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आसान हो जाएगा। प्रस्तावित मसौदा में पूरे देश के लिए एक नयी तकनीकी व्यवस्था को स्थापित करना है, साथ ही स्थापित व्यवस्था के प्रशाकिय शक्ति पर नियंत्रित करना है। लैंण्ड टाइटलिंग कानून के तहत ग्रामीण अंचलो की अचल संपत्तियों (भूमि/भू-खंड़ों ) के नया टाइटल का पंजिकृत करना मुख्य उद्वेश्य है। 

ं केंन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों से राय मांगी थी-

21 सितंबर 2020 को एक पत्र क्ण्व् 6;5द्धध्2017.ॅत् राज्यों को भेजा था, जिसमें 30 सितंबर 2020 तक अपनी मंतव्य भेजने को कहा था। राज्यों से जवाब नहीं मिलने पर नीति आयोग न फिर से राज्य सरकारों के पास पत्र भेजा था। इसमें जमीन संबंधित नया अधुनिकी माॅडल बनाने की बात कही गयी है। यह ड्राफट 301 पेज की है। इसमें 3 माह का समय दिया गया था। कहा गया था कि यदि राज्य सरकार सितंबर माह तक कोई प्रतिक्रिया नहीं भेजती है, तब इसे स्वीकृति के तौर पर माना जाएगा। 

झारखंड के संदर्भ में यहां इन बिंन्दु पर ध्यान देना चाहिए, पहला यहां पांचवी अनुसूचि क्षेत्र होने के नाते इस मसौदा पर आदिवासी सहलाकार परिषद में भी चर्चा होना चाहिए। क्योंकि कानून तौर पर यह मुदा राज्य के जमीन से संबंधित है, इसलिए इसमें जब तक राज्य विधानसभा इसकी स्वीकृति नहीं देगी, केन्द्रीय कानून का राज्य में लागू नहीं किया जा सकता है। 

ंनोट-लैंण्ड टाइटिलिंग व्यवस्था लाने के बाद जमीन विवादों को किसी सिविल अदालतों में भी नहीं ले जाया जा सकता है।  जबकि लोग अपने जमीन संबंधी मामलों को अदालतों ले जाने का अधिकार था। मामला अदालत में जाने के बाद मुकदमा चलता था। लेकिन इस नयी व्यवस्था में किसी मामले को अदालत में चुनौती नहीं दिया जा सकता है। 

Jharkhand ke 5th Scheduled Area Me Land Bank Kyon?

 

Meri Book--Sambhidhan Pradat Adivasi Adhikar Khatre Me --Digital India Me adivasi Adhikar

  अध्याय- Digital India

             महत्वपूर्ण बदलाव आखिर किसके लिए

डिजिटल इंडिया लैंड रिकाॅर्ड अधुनीकिरण ने भारत को बदल रहा है। देश के नियम-कानून को बदल दे रहा है। देश की संघीय व्यवस्था को बदल रहे हैं। परंपरागत गांव का अस्तित्व बदल दिया जा रहा हैं। गांव  ka  भौगोलिक स्थिति और समाज की सामाजिक मूल्य बदल दिया जा रहा है। 

बदलाव होना चाहिए, लेकिन बदलाव लाने का उद्वेश्य क्या है? बदलाव लाने के केंन्द्र में किनको रखा गया है? क्या अमीरों को, पूंजीपतियों को, देश -विदेश के काॅरपोरेट घरानों को या आदिवासी, दलित, किसान, मेहनतकश मजदूरों को? यह सवाल महत्वपूर्ण है। 

जमीन का जो अधुनिकीकरण व्यवस्था स्थापित किया जा रहा है, वह पढे़-लिखे समुदाय के लिए निश्चित तौर पर उपयोंगी साबित होगा। क्योंकि इस व्यवस्था में सारी जानकारियां आॅनलाइन /वेबसाईड में उपलब्ध होगा। इसको उपयोग करने के लिए बहुत सारी जानकारी रखना जरूरी होगा। साथ ही कमप्युटर, लेपटोप, स्मार्ट फोन जरूरी होगा। इसको उपयोग करने के लिए बिजली की उपलब्ध के साथ आॅनलाइन कनेशन /नेटवार्क बिना बाधा के सतत उपलब्धता अतिअवश्यकता होगा। राज्य के अल्पशिक्षित ग्रामीण किसान कों इसका कितना लाभ मिलेगा यह भी विचारणीय बिंन्दु है। 

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 Sabhi Sathiyon ko Johar, Namaskar,

Bahut din ke bad mai Apne Blog me aayi hun, Karan Samajik Jimmedari me Beyasth Rahna. Han Bahut kush Aap Logon se Share Karna hai, mil kar Aage ka safar Tay karenge . 

Prem ke sath Johar, Namaskar.

Saturday, July 25, 2026