जिंदगी की डायरी
मुझे एक डायरी मिला-
5 अक्टोबर 2001-
1 फरवरी 2001 को खूंटी जिलो के तपकारा ओपी क्षेत्र में कोइलकारो जनसंगठन ने डेरांग के पास नो-इंट्री गेट लगया था, ताकि कोई भी सरकारी आमदी परियोजना क्षेत्र में आ नहीं सके। इस नो-इ्रट्री गेट को रनिया पुलिस थाना और तपकारा ओपी के पुलिस लोहाजिमी जंगल की ओर गये थे। जाते समय गेट के किनारे से गाडी पार किया। वापसी के समय गेट को तोड़ कर पुलिस वाले अपने गाडी पर लाद कर ले जाने लगे।
ठसी समय गुटुहाते का अमृत गुडिया डेरांग की ओर से आ रहा था, पुलिस वालों को पूछा-आप लोग क्यों गेट को तोड कर ले जा रहे हैं? लेने से मना करने पर पुलिस वालों ने उससे बंदुक के कुंदे से पीट कर घायल कर दिया। और गेट को अपने साथ तपकारा ओपो लेकर गये।
यह खबर आग की तरह फैल गयी पूरे कोइल-कारो जनसंगठन के आंदोलन इलाके में। रात को जनसंगठन की बैठक हुई। निर्णय लिया गया-कल 2 फरवारी को तपकारा ओपी का घेराव करेगें। दूसरे दिन 11 बजे से चारों ओर से जनसंगठन के लोग तपकारा ओपी पहुंचें। जनसंगठन ने इस दौरान अपनी मांग रखी-
3-4 हजार लोग जमा थे। धेराव कार्यक्रम शांतिपूर्ण चल रहा थां। लोग मांग कर रहे थे-डीएसपी आए और हमारो मांगों को सुने। साथ ही लिखित मांग पत्र उन्हें सौंपना चाहते थे।
छो-ढाई बजे तक लोग इंतजार करते रहे। इसी बीच तोरपा के तत्कालीन विधायक श्री कोचे मुंण्डा जी वहां आये। ओपी में गये। लोगों की उम्मीद जगी कि अब हमारी मांग सुनी जाएगी। थोडी देर बाद विधायक जी अंदर से बाहर आये । क्या बात हुआ-लोगों में जिज्ञसा बढी, लेकिन कोई सकारात्मक बात नहीं बनी।
इसके 10-15 मिनट बाद ओपी की ओर से गोली चलने लगी। लोग समझ नहीं पा रहे थे कि क्या हो रहा है। वहां जवान से लेकर बुजुर्ग महिला-पुरूष हर उम्र के मौजूद थे।
चारो तरफ अफरा-तफरा मची। जो भागने सका, वो भागा। पुलिस की गोली से आठ लोग मरे। करीब 25 लोग घायल हुए। देखते ही देखते ओपी के अगल-बगल खून से लाल हो गया। इस गोली कांड को लेकर सामाजिक संगठन इंसाफ ने तय किया जनसुवाई कार्यक्रम करने का। क्योंकि पुलिस का दबाव जनसंगठन पर बढ़ रहा था। लोगों की गिरफतारी के लिए।
इस गोली कांड में जनसंगठन के आठ साथि शहीद हुए। 25 घायल हुए-इस घटनो को लेकर कोइल-कारो जनसंगठन ने पुलिस पर केस किया। दूसरी तरफ पुलिस ने जनसंगठन के 13 साथियों को नमजद आरोपी बनाते हुए केस दर्ज किया। इस घटना का सचाई को सामने लाने और जनसंगठन का साथ देने के लिए इंसाफ ने जनसुनाई करने की योजना बनायी।
5 अक्टोबर 2001 को दिल्ली में एक बैठक बुलायी गयी थी। बैठक में सायलजी ने फोन पर जस्टिस साचर जी से बात की -नोवेबर 1-4 की बीच समय तय करने के लिए। बोम्बे इंसाफ के राजन सिंह से भी फोन पर समय तय करने के लिए बात किये। राजन ने कहा-ठीक है दिल्ली आकर जस्टिस साचर से फाइनल कर लेगें।
जम्हार गांव से रंथु जी फोन कर बताये-गांव के समस्याओं को लेकर महिला समिति 19 अक्टोबर को कर्रा प्रखंड कार्यालय का घेराव करेगी, कार्यक्रम तय करने के लिए जयश्री 9-10 अक्टेबर को आप के पास रांची आएगी।
7 अक्टेबर को मसीह दास गुडिय सदर कंन्डुना और विजय गुडिया को फोन कर जनसुनवाई की जानकारी दिये। इसके लिए रांची में 21 अक्टोबर को बैठक भी तय किया गया।
आज दक्षिण अफरिका यात्रा की डायरी निकाली। यात्रा के दौरान स्वेटो, जाहनसवर्ग, दक्षिण अफ्रिका में मिले -स्थानीय समुदाय-काले लोगों पर-चित्रण किये। एक रिपोर्ट तैयार की । अश्वेतों या काले लोगों की जनसंख्या कितनी है। विभिन्न टाउनशीप में रहने वाले 85 प्रतिशत गरीबी रेखा से नीचे जिंदगी जी रहे हैं। 20 प्रतिशत घरों में ही बिजली था। यहां बिजली का नीजिकरण हो चुका था। प्रीपेड बिजली के बारे यहीं समझने का मौका मिला था।
वहां काले लोगों का आंदोलन को समझने का मौका मिला। 1994 के बाद की स्थिति -काले लोगों की क्या थी है? प्रशासन की क्या भूमिका है-आम जनता के प्रति, जनता की क्या आशांए थी। द0 अफ्रीका का 87 प्रतिशत ़क्षेत्र श्वेतों के लिए सुरक्षित रखा गया। लगभग 13 प्रतिशत अश्वेतों के लिए। इस तरह देश के 10-13 प्रतिशत भाग में ही देश की 80 प्रतिशत अश्वेतों की आबादी रहती है। अश्वेतों को बाण्टूस्तान के घने और बंजर इलाकों में ही रहने का अधिकार दिया गया था।
21 अक्टोबर को रांची स्थित विकास मैत्री में जनसुवाई को लेकर बैठक हुई थी। मच पर श्री याकूब कांन्डुलना-बंडआ जयपुर, श्री इमानुएल डहंगा-बंडआ जयपुर, श्री सोमा गुडिया-कालेट थे।
जनसुनवाई में जजमेंट टीम में -सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस साचर जी, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता श्री संजय पारिख जी, अधिवक्ता सुश्री सुधा भरद्वाज, पीयूसीएल के श्री चितरंजन सिंह, और डॉ0 विनोद रैयना होगें इसकी जानकारी साझा की गयी। बैठक के दौरान जनसुनवाई क्यों जरूरी है इस पर रांची के अधिवक्ता श्री रश्मि कत्यायन जी ने कहा-एक इनक्वारी होता है आवाज को बंद करना, दूसरा होता है आवाज को हमेशा उठाते रहना। जनता का आवाज को आवाज देने के लिए यह सुनवाई होगा।
बैठक में जनसुनवाई के मुख्य ंिबन्दुओं का निर्धारित किया गया-1-कोयलकारो परियोजना पर 3-
2-कानूनी पक्ष परियोजना पर
3-सास्कृतिक पक्ष
4-स्वाशासन-पड़हा, पंचायत
5-झारखंड में कोयलकारो परियोजना जरूरी है क्या?
6-कोयलकारो परियोजना पर स्थानिय लोगों का क्या राय है?
7-ग्रामीणों को इससे क्या लाभ होगा
8-नया राज्य बनने के बाद पुलिस फायरिंग क्यों?
सुनवाई की तैसारी के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला का कॉपी निकालना है
2-रांची एक्सआईसेस से परियोजना से संबंधित कॉपी निकालना है-परियोजना पर पहला अध्यायन किया था।
3-मुख्य सचिव से मिलना है
4-सुधीर प्रसाद को बांध बनाने की जिम्मेवारी दी गई थी-उनसे बात करना
5- ग्रामीण एसपी से मिलना
6-रिपोर्ट-हिंन्दी और अंग्रेजी में बनाना
यह मैंने अपनी नोट बुक जो 2001 में लिखि थी, उसका रिपोर्ट है।
1995 से मैं सामाजिक काम में हुं। मेरी आदत थी प्रत्येक दिन का डायरी लिखना। आज मेंरे पास हजारों नोट बुक है। मैने अपना नोटबुक या डायरी कभी नहीं बेची या हटायी।
आज सुबह मेरा हाथ एक छोटा नोट बुक पर पडा। खोली -4-5 पेज पलटी। मन किया आप लोगों से साझा करने का। नोट बुक में नोट की गयी मुददे को गहराई से आज के संदर्भ में सोचने लगी, तो लगने लगा झारखंड राज्य बने 26 साल हो गये। लेकिन आदिवासी-मूवलवासी या मूल झारखंडी अब भी विस्थापन, जंगल, जमीन का लूट, बेरोजगारी, हर स्तर पर शोषण दमन का शिकार हो रहे हैं। फिर भी उम्मीद के साथ संघर्षरत हैं।






