Wednesday, August 12, 2026

झारखंड में एसआईआर के तहत 43.61987 मतदाता सूची संे बाहर

झारखंड में एसआईआर के तहत 43.61987 मतदाता सूची संे बाहर

रांची-भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर विशेष गहन पुनरीक्षण-2026 के तहत बुधवार को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित किया गया। प्रारूप मतदाता सूची के अनुसार राज्य में कुल 2,21,01,249 मतदाता शामिल किए गए हैं। इनमें 1,12,06,755 पुरूष, 1,08,94,234 महिला तथा 260 थर्ड जेंडर मतदाता है। एसआईआर से पहले झारखं डमें मतदाताओं की कुल संक्ष्या 2,64,63,234 थी। प्रारूप सूची के प्रकाशन के बाद 43,61,987 मतदाता सूची से बाहर हो गए है। इन नामों को कारणों, जैसे मरण, स्थायी रूप से अन्य स्थान पर स्थानांतरण, एक से अधिक स्थानों पर नाम दर्ज होना था। निर्धारित प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर आधार पर हटाया गया है। 

इधर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदाता सूची में अपना नाम, पता और अन्य विवरण का मिलान अवश्य कर हें। यदि नाम छूट गया हो तो किसी प्रकार की त्रुुटि हो तो निर्धारित अवधि में दावा एवं आपति इर्ज करांएं। 

मतदाता अपॉनलाइन भी सूची में अपना नाम देख सकते हैं। इसके अलावा संबंधित मतदान केंन्द्र पर भी सूची उपलब्ध रहेगी। 

ड्राफट वोटर लिस्ट के मुख्य आंकडे

श्रेणी-------------मतदाताओं की संख्या

एसआईआर के पहले----2,64,63,236

प्रारूप सूची में--------2,21,01,249

पुरूष मतदाता--------1,12,06,755

म्हिला मतदाता--------1,08,94,236

थर्ड जेंडर-----------260

हटाए गए कुल नाम-----43,61,987


क्यों कटे 43,61

4 सितंबर तक दावा--आपति दर्ज कराएं

छावा ओर आपति-4 सितंबर 2026 तक

फॉम -6ः नया नाम जोड़ने या छूटे हुए पात्र मतदाता फॉम-6 के साथ घोषणा पत्र भरकर बीएलओं या ऑनलाइन अवजमतेण्मबपण्हवअण्पदध्म्ब्प्छमज।चच.....जमा कर सकते हैं। 

युवा मतदाताओं के लिए विशेष कैंपः 1 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के लिए 8, 9, 22 और 23 अगस्त 2026 को विशेष अभियान चलाए जाएंगे। 

अंतिम प्रकाशनः सभी दावों और आपतियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 अक्टूबर को होगा। 


यहां करें जांच-मतदाता अपने नाम की जांच ऑनलाइन भी कर सकते हैं। इसके लिए निम्न लिंक का उपयोग किया जा सकता है-ीजजचेरूध्ध्ेींतमण्हववहसमधर््गत्मश्रथ्मकदचदठ68इत3



क्यों कटे 43,61 लाख वोटरों के नाम

1,16,484 ऐसे विदेशी और अन्य अवैध मतदाता थे जिन्होंने गणना प्रपत्र पर हस्ताक्षर करने से स्पष्ट इनकार कर दिया।

7,63,903 मृत मतदाताओं के नाम हटाये गये।

15,92,194 मतदाता अपने स्थान से हमेशा के लिए स्थानांतरित हो चुके हैं।

24,50,810 मतदाता अपने पते पर नहीं मिले या अनुास्थित पाए गए।

4,38,596 मतदाता पहले से ही अन्य सूचियों में नामांकित थे। 


2,389 नए पोलिंग बूथ बने

मतदाताओ की सुविधा के लिए बूथों का युक्तिकरण किया गया है। किसी भी बूथ पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होगें और किसी मतदाता को 2 किमी से अधिक दूरी तय नहीं करनी पडेगी। राज्य के सभी 24 जिलों के 81 विधानसभा क्षेत्रों में 2,389 नए मतदान केंन्द्र बनाए गये हैं। इनमें से 1,248 वर्तमान स्थानों पर तथा 1,141 नए स्थानों पर बनाए गए हैं। 68 मतदान केंन्द्रों को मर्ज किया गया, जिसके बाद राज्य में कुल पोलिंग बूथों की संख्या 29,571 से बढ़कर 31,892 हो गई है। 


जामींदारी प्रथा ka उन्मुलन 1950 में हुआ, ं----आंज अडानी, अंबानी का नयी जमीनदारी शुरू

 जामींदारी प्रथा उन्मुलन 1950 में हुआ, ंआंज अडानी, अंबानी का नयी जमीनदारी शुरू

Ajadi  के बाद पहली बार 1950-1955 के बीच जमींदारी प्रथा  को समाप्त करने के लिए विधेयक लाये गए। और ये विधेयक अधिनियम बनकर लागू हो गये। जिनके परिणामस्वरूप जमीदारो प्रथा भारत में उन्मुलन हो गया और किसानों एवं राज्य के बीव पुनर सीधा संबंध स्थापित हो गया। भूमि अधिनियम कानून  बनने के बाद जमीन पर जोतने वाले का स्वामित्व हो गया। जमींदारों के खेत जोतकर उनके लिए पूंजि अर्जित करने वाले गरीब हलधर किसान जमींदारों के चंगुल से बाहर निकले गये।ं

अब ंअडानी, अमबानी की जमीनदारी प्रथा शुरू हो गयी है। जिसकी जागीरदारी का कमान मोदी सरकार संम्भाल रही है। लैंण्ड डिजिटालाईजेशन, वन नेशन वन लैंण्ड रिकाॅर्ड, स्मामित्व योजना, लेंण्ड बैंक इस प्रक्रिया का मूल हथियार है। 


jal, jangal , jameen bachane ki Ladai ka yah ek drisye hai, jo mittal company dawara Jameen-

 

Tuesday, August 11, 2026

50 लाख कीमत तक के जमीन रजिस्ट्री 1 रूप्या मे किया गया-इसका लाभ किसको मिला?

 19 जून 2017

ं 50 लाख कीमत तक के जमीन रजिस्ट्री 1 रूप्या मे किया गया-इसका लाभ किसको मिला?

झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने राज्य के सामृद्व महिलाओं को लाभ पहुुचाने के लिए भू-राजस्व एवं निबंधन विभाग के माध्यम से 50 लाख कीमत की जमीन खरीदने पर 1 रूप्या में जमीन की रजिस्ट्री करने की व्यवस्था लायी। 

इस व्यवस्था के बाद हर साल 70 महिलाएं इसका लाभ उठाते रहीं। इस व्यवस्था के तहत महिलाएं एक रूप्या में जमीन, मकान, प्लैट का रजिस्ट्रेशन करायी। 2 लाख से अधिक रजिस्ट्री की गयी। इससे राज्य को 1296 करोड़ राजस्व का नुकासान भी उठाना पड़ा। 

कोरोना काल में वर्तमान हेमंत सरकार ने इस व्यवस्था फिर से वापस लिया। तर्क दिया गया कि इस व्यवस्था के तहत गरीब महिलाएं लाभ नहीं ले पा रही हैं साथ ही राज्य का राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। इसी को देखते हुए राज्य की गठबंधन सरकार ने इस व्यवस्था को वापस लिया। 

5 सितंबर 2019 का तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने टवीट किया था-झारखंड देश का पहला राज्य है जहां महिलाओं के लिए 50 लाख रूपया तक की जमीन , मकान की रजिस्ट्री सिर्फ एक रूपये में होती है। अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा महिलाएं बन चुकी हैं मकान मालकिन। 

जानकारी के लिए-देश के बाकी राज्यों में भी महिलाओं को रजिस्ट्री में कुछ प्रतिशत की छूट मिलती है-उदाहरण के तौर में-दिल्ली में 4 प्रतिशत स्टाम्प डयूटी देनी पड़ती है। यूपी में महिलाओं द्वारा जमीन खरीदने पर सिर्फ एक (1) प्रतिशत ही स्टाम्प डयूटी में छूट दी गयी है। 

23 मार्च 2021 को राज्य सरकार ने महिलाओं को 1 रूप्या में जमीन रजिस्ट्री में छूट देने से राज्य सरकार को 400 करोड़ का नुकसान बताया। राज्य के पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि पिछली सरकार ने महिला के नाम से जमीन रजिस्ट्री कराने कर छूट दी थी, इससे राज्य को करीब 400 करोड़़ रूप्ये राजस्व का नुकसान हुआ था। वह रजिस्ट्री शुल्क भी देने में सक्षम होता है। यह सिर्फ जमीन लूटने की षडयंत्र के तहत किया गया था। 

जो भी नये-नये व्यवस्था जमीन संबंधित लाये गाये पिछली रघुवर दास की सरकार के द्वारा उसका समीक्षा होनी चाहिए कि आदिवासी, मूलवासी, दलित और मेहनत मजदूरी करने वाला परिवार को कितना लाभ मिला?। इसकी सूची सरकार को जारी करना चाहिए, तभी सामाजिक न्याय की बात हो सकती है। 

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23 मार्च का प्रभात खबर में विधायक सरयू ने बयान दिया था कहा था-कि राज्य में कई स्थानों पर सरकारी जमीन पर लोग वर्षों से रहते आ रहे हैं, उनकों सरकार से सुविधाएं भी मिल रही है। ऐसे जमीन को नियमित करना चाहिए। इनके अनुसार जमशेदपुर में कई इलाके ऐसे हैं नियमित करने का कोई नियम बना लेना चाहिए, इससे सरकार को बड़ी संख्या में राजस्व मिलेगा। 

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2014 से 2019 के बीच राज्य की कल्याणकारी सरकार आखिर अमिरों को ही क्यों सस्ते दर में जमीन दी?

बाबा रामदेव को रघुवर सरकार ने 101 रूपये की टोकन मनी पर 15 एकड़ जमीन नमकोम प्रखंड के बरगांवा में दिया है। यह कहा गया कि यहां स्कूल खुलेगा, जहां गरीबों के बच्चे पढ़ेंगे। लेकिन सचाई को क्या है, यह जांचने की जरूरत है। 

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Friday, August 7, 2026

thoda mood bana hai

 






























याचिकाकर्ता छात्रों का मुख्य आरोप हे कि परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट में उनके द्वारा दर्ज किए गए उत्तर और एनटीए द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गयी प्रतियों के बीच बड़ा अंतर है।

 नीटयूजी-काउंसिलिग से पहले सुनवाई की मांग, शीर्ष न्यायालय सहमत

प्रभात खबर-5 अगस्त 2026

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे छल छात्रों ने कहा ओएमआर शीट में बदल गये उत्तर-

ऐजेसिंयां नयी दिल्ली

नीट-यूजी 2026 को लेकर विविाद थामने का नाम नहीं ले रहा हे। परीक्षा में शामिल छल अभ्यर्थियों ने एनटीए द्वारा जारी ओएमआर शीट में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्चकांत, न्यायमूर्ति जाॅयमाल्वा बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने आगामी काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले मामले पर त्वरित सुनवाई करने की मांग को स्वीकार कर लिया है। अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि 600 से 650 से अधिक अंक पानेवाले इन मेघावी छात्रों का दावा हे कि एनटीए की वेबसाइट पर अपलोड हुई ओएमआर शीट की स्कैन काॅपी में उनके उत्तर वे नहीं हैं जो उन्होंने परीक्षा कंेन्द्र पर भरे थे। छात्रों का तर्क है कि यदि काउंसिलिंग से पहलं ओएमआर शीट में हुई इस कथित विसंगति का पारदर्शी समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर उनकी मैरिट रैंक और मेडिकल काॅलेज में दखिले की संभवनाओं पर पडेगा। 

आरोप-ओएमआर शीट में कई प्रश्नों के उत्तर गलत-

याचिकाकर्ता छात्रों का मुख्य आरोप हे कि परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट में उनके द्वारा दर्ज किए गए उत्तर और एनटीए द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गयी प्रतियों के बीच बड़ा अंतर है। कई प्रश्नों के उततर या तो बदले हुए दिख रहे हैं या गलत दर्ज हैं, जिससे उनके वास्तविक अंक प्रभावित हुए हैं। 

किए कई मेल, एनटीए ने नहीं दिया जवाब-

अदालत में दखिल याचिका के अनुसार, ओएमआर शीट में विसंगति सामने आने के बाद छात्रों ने तुरंत एनटीए को आधिकारिक ईमेल भेजे और व्यक्तिगत रूप से एजंेसी के कार्यालय भी पहुंचे, हालांकि, एनटीए की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या समाधान न मिलने के बाद अभ्यर्थियों को न्याय के लिए शीर्ष अदालत का रूख करना पड़ा। 

पहली बार नहीं, जब छात्र ऐसे मामले ले पहुंचे-नीट-यूजी 2026 में ओएमआर शीट ओर अंक परिवर्तन को लेकर पहले भी कानूनी सवाल उठ चुके हैं। हाल ही में बाॅम्बे हाइकोर्टत्र झारखंड हाइकोर्ट और दिल्ली हाइकोर्ट में भी अभ्यर्थियों ने एनटीए पोर्टल पर अंक बदले जाने और घोषित स्कोर में अंतर को लेकर याचिकाएं दायर की और ऐसी गड़कडी पर न्याय की गुहार लगायींै। 

पेपर लीक के कारण रद परीक्षा दोबारा हुई-उल्लेखनीय है कि नीट-यूजी 2026 की परीक्षा शुरूआती तौर पर 3 मई को आयोजित की गयी थी। हालांकि, बड़े पैमाने पर प्रश्नपत्र लीक के आरोप साबित होने के बाद इसे रदद कर दिया गया था। इसके बाद एनटीए ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई थी। जो अब ओएमआर विवाद के घेरे में है। 


जेपीएससी की विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितता की जांच कर रही सीआइडी ने सोमवार को पांच जिलों के 18 स्थानों पर छापेमारी में मिले दस्तावेजों के आधार पर पूछताछ तेज कर दी है।

 जेपीएससी अनयिमितता-प्रभात खबर 5 अगस्त 2026

सीआइडी ने तीन और आरोपियों को किया गिरफतार-छात्रों के दस्तावेज व चेक कोचिंग संचालकों पास कैसे पहुंचे, सीआडी कर रही जांच।

विशेष संवाददाता-रांची

जेपीएससी की विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितता की जांच कर रही सीआइडी ने सोमवार को पांच जिलों के 18 स्थानों पर छापेमारी में मिले दस्तावेजों के आधार पर पूछताछ तेज कर दी है। सीआइडी ने कथित रूप से कोचिंग संचालक आदित्व पांडेय को धनबाद तथा हजारीबाग से लालू यादव और प्रदीप यादव को पूछताछ के लिए पकड़ा है। 

इसके अलावा टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय वितारी और जेपीएससी के प्रोग्रामर उस्मान से भी पूछताछ की गयी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनूसार, सीआइडी की टीम छापेमारी के दौरान बराबम ब्लैंक चेक और अभ्यार्थियों के दस्तावेजा के बारे में जानकारी ले रही है। पूछताछ में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ब्लैंक चेक किसके थे और इन्हें किन कारणों से लिया गया था। जांच टीम यह भी जानना चाहती है कि अथ्यार्थियों के एडमिट कार्ड, मार्कशीट ओएमआर शीट की कार्बन काॅपी और अन्य हस्तावेज आरोपियों के ठिकानों पर क्यों रखे गये थे। 

कोचिंग संस्थानों की भूमिका की जांच--

सीआइडी कोचिंग संस्थानों में होनेवाली गतिविधियों और टीडीपीएल कंपनी से जुडे लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के स्तर पर यह जानकारी जुटायी जा रही है कि कोचिंग सेंटर में अभ्यर्थियों से किस तरह का काम कराया जाता था और परीक्षा प्रक्रिया से जुडे लोगों के साथ उनका संपर्क कैसे था। जांच टीम यह भी पता कर रही है कि किन अभ्यर्थियों ने आरोपियों को चेक दिया थे। 

नौकरी के बाद भुगतान की आशंका--

पूछताछ में इस बिंदू पर भी फोकस है कि क्या कुछ अभ्यर्थियों से नौकरी के बाद पैसे या जमीन देने का वादा लिया गया था। बराबम कागजात और बैंक रिकाॅर्ड के आधार पर लेन-देन की संभावित कडियों को जोडा जा रहा है। सीआइडी यह भी जांच रही है कि जमीन से जुडे़ दस्तावेज किन अभ्भ्यर्थियों के हैं और उनका इस्तेमाल किस उद्वेश्य से किया जाना था। सूत्रों के अनुसार कई ब्लैंक चेक सीआईडी को मिले हैं। इसकी जांच हो रही है। पर सीआइडी ने इस संबध में किसी भी जानकारी की पुष्टि नहीं की है। 

पूछताछ के बाद आगे बढ़ेगी जांच--

सीआइडी आधिकारियों के अनुसार पूछताछ के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होगी। बयानो का मिलान छापेमारी में बरामद चेक, बैंक दस्तावेज, इलेक्ट्रानिक उपकरण और अभ्यर्थियों के कागजात से किया जायेगा। इसके आधार पर सीआइडी आगे की कार्रवाई और अन्य संदिग्धों की भूमिका तय करेगी। छापेमारी, और पूछताछ को लेकर सीआइडी ने अब तक आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी जारी नहीं की है। 

परीक्षा अनियमितता मामले में बड़ी कार्रवाई-

झारखंड अपराध अनुसंधान विभाग सीआइडी ने झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में अनियमितता से जुडे एक मामले में तीन लोगों को मंगलवार को गिरफतार किया। इनका नाम उमेश कुमार, बुद्वेश्वर भगत और रमेश कुमार है। सीआइडी ने बताया कि यह कार्रवाई कांड संख्या 16-26 के तहत प्रप्त लाक्ष्यों के आधार पर की गयी हे। जांच में डिजिटल साक्ष्य और अथिलेखीय साक्ष्य भी बरामद किये गये हैं।