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Friday, August 7, 2026
याचिकाकर्ता छात्रों का मुख्य आरोप हे कि परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट में उनके द्वारा दर्ज किए गए उत्तर और एनटीए द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गयी प्रतियों के बीच बड़ा अंतर है।
नीटयूजी-काउंसिलिग से पहले सुनवाई की मांग, शीर्ष न्यायालय सहमत
प्रभात खबर-5 अगस्त 2026
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे छल छात्रों ने कहा ओएमआर शीट में बदल गये उत्तर-
ऐजेसिंयां नयी दिल्ली
नीट-यूजी 2026 को लेकर विविाद थामने का नाम नहीं ले रहा हे। परीक्षा में शामिल छल अभ्यर्थियों ने एनटीए द्वारा जारी ओएमआर शीट में गंभीर गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। प्रधान न्यायाधीश सूर्चकांत, न्यायमूर्ति जाॅयमाल्वा बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने आगामी काउंसिलिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले मामले पर त्वरित सुनवाई करने की मांग को स्वीकार कर लिया है। अधिवक्ता ने पीठ को बताया कि 600 से 650 से अधिक अंक पानेवाले इन मेघावी छात्रों का दावा हे कि एनटीए की वेबसाइट पर अपलोड हुई ओएमआर शीट की स्कैन काॅपी में उनके उत्तर वे नहीं हैं जो उन्होंने परीक्षा कंेन्द्र पर भरे थे। छात्रों का तर्क है कि यदि काउंसिलिंग से पहलं ओएमआर शीट में हुई इस कथित विसंगति का पारदर्शी समाधान नहीं किया गया, तो इसका सीधा असर उनकी मैरिट रैंक और मेडिकल काॅलेज में दखिले की संभवनाओं पर पडेगा।
आरोप-ओएमआर शीट में कई प्रश्नों के उत्तर गलत-
याचिकाकर्ता छात्रों का मुख्य आरोप हे कि परीक्षा के दौरान ओएमआर शीट में उनके द्वारा दर्ज किए गए उत्तर और एनटीए द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गयी प्रतियों के बीच बड़ा अंतर है। कई प्रश्नों के उततर या तो बदले हुए दिख रहे हैं या गलत दर्ज हैं, जिससे उनके वास्तविक अंक प्रभावित हुए हैं।
किए कई मेल, एनटीए ने नहीं दिया जवाब-
अदालत में दखिल याचिका के अनुसार, ओएमआर शीट में विसंगति सामने आने के बाद छात्रों ने तुरंत एनटीए को आधिकारिक ईमेल भेजे और व्यक्तिगत रूप से एजंेसी के कार्यालय भी पहुंचे, हालांकि, एनटीए की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या समाधान न मिलने के बाद अभ्यर्थियों को न्याय के लिए शीर्ष अदालत का रूख करना पड़ा।
पहली बार नहीं, जब छात्र ऐसे मामले ले पहुंचे-नीट-यूजी 2026 में ओएमआर शीट ओर अंक परिवर्तन को लेकर पहले भी कानूनी सवाल उठ चुके हैं। हाल ही में बाॅम्बे हाइकोर्टत्र झारखंड हाइकोर्ट और दिल्ली हाइकोर्ट में भी अभ्यर्थियों ने एनटीए पोर्टल पर अंक बदले जाने और घोषित स्कोर में अंतर को लेकर याचिकाएं दायर की और ऐसी गड़कडी पर न्याय की गुहार लगायींै।
पेपर लीक के कारण रद परीक्षा दोबारा हुई-उल्लेखनीय है कि नीट-यूजी 2026 की परीक्षा शुरूआती तौर पर 3 मई को आयोजित की गयी थी। हालांकि, बड़े पैमाने पर प्रश्नपत्र लीक के आरोप साबित होने के बाद इसे रदद कर दिया गया था। इसके बाद एनटीए ने 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई थी। जो अब ओएमआर विवाद के घेरे में है।
जेपीएससी की विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितता की जांच कर रही सीआइडी ने सोमवार को पांच जिलों के 18 स्थानों पर छापेमारी में मिले दस्तावेजों के आधार पर पूछताछ तेज कर दी है।
जेपीएससी अनयिमितता-प्रभात खबर 5 अगस्त 2026
सीआइडी ने तीन और आरोपियों को किया गिरफतार-छात्रों के दस्तावेज व चेक कोचिंग संचालकों पास कैसे पहुंचे, सीआडी कर रही जांच।
विशेष संवाददाता-रांची
जेपीएससी की विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितता की जांच कर रही सीआइडी ने सोमवार को पांच जिलों के 18 स्थानों पर छापेमारी में मिले दस्तावेजों के आधार पर पूछताछ तेज कर दी है। सीआइडी ने कथित रूप से कोचिंग संचालक आदित्व पांडेय को धनबाद तथा हजारीबाग से लालू यादव और प्रदीप यादव को पूछताछ के लिए पकड़ा है।
इसके अलावा टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय वितारी और जेपीएससी के प्रोग्रामर उस्मान से भी पूछताछ की गयी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनूसार, सीआइडी की टीम छापेमारी के दौरान बराबम ब्लैंक चेक और अभ्यार्थियों के दस्तावेजा के बारे में जानकारी ले रही है। पूछताछ में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि ब्लैंक चेक किसके थे और इन्हें किन कारणों से लिया गया था। जांच टीम यह भी जानना चाहती है कि अथ्यार्थियों के एडमिट कार्ड, मार्कशीट ओएमआर शीट की कार्बन काॅपी और अन्य हस्तावेज आरोपियों के ठिकानों पर क्यों रखे गये थे।
कोचिंग संस्थानों की भूमिका की जांच--
सीआइडी कोचिंग संस्थानों में होनेवाली गतिविधियों और टीडीपीएल कंपनी से जुडे लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों के स्तर पर यह जानकारी जुटायी जा रही है कि कोचिंग सेंटर में अभ्यर्थियों से किस तरह का काम कराया जाता था और परीक्षा प्रक्रिया से जुडे लोगों के साथ उनका संपर्क कैसे था। जांच टीम यह भी पता कर रही है कि किन अभ्यर्थियों ने आरोपियों को चेक दिया थे।
नौकरी के बाद भुगतान की आशंका--
पूछताछ में इस बिंदू पर भी फोकस है कि क्या कुछ अभ्यर्थियों से नौकरी के बाद पैसे या जमीन देने का वादा लिया गया था। बराबम कागजात और बैंक रिकाॅर्ड के आधार पर लेन-देन की संभावित कडियों को जोडा जा रहा है। सीआइडी यह भी जांच रही है कि जमीन से जुडे़ दस्तावेज किन अभ्भ्यर्थियों के हैं और उनका इस्तेमाल किस उद्वेश्य से किया जाना था। सूत्रों के अनुसार कई ब्लैंक चेक सीआईडी को मिले हैं। इसकी जांच हो रही है। पर सीआइडी ने इस संबध में किसी भी जानकारी की पुष्टि नहीं की है।
पूछताछ के बाद आगे बढ़ेगी जांच--
सीआइडी आधिकारियों के अनुसार पूछताछ के बाद जांच की दिशा और स्पष्ट होगी। बयानो का मिलान छापेमारी में बरामद चेक, बैंक दस्तावेज, इलेक्ट्रानिक उपकरण और अभ्यर्थियों के कागजात से किया जायेगा। इसके आधार पर सीआइडी आगे की कार्रवाई और अन्य संदिग्धों की भूमिका तय करेगी। छापेमारी, और पूछताछ को लेकर सीआइडी ने अब तक आधिकारिक रूप से विस्तृत जानकारी जारी नहीं की है।
परीक्षा अनियमितता मामले में बड़ी कार्रवाई-
झारखंड अपराध अनुसंधान विभाग सीआइडी ने झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में अनियमितता से जुडे एक मामले में तीन लोगों को मंगलवार को गिरफतार किया। इनका नाम उमेश कुमार, बुद्वेश्वर भगत और रमेश कुमार है। सीआइडी ने बताया कि यह कार्रवाई कांड संख्या 16-26 के तहत प्रप्त लाक्ष्यों के आधार पर की गयी हे। जांच में डिजिटल साक्ष्य और अथिलेखीय साक्ष्य भी बरामद किये गये हैं।
Thursday, August 6, 2026
आदिवासी-मूलवासी किसानों जंगल-जमीन लूटने का नया हथियार -भूमि बैंक
आदिवासी-मूलवासी किसानों जंगल-जमीन लूटने का नया हथियार -भूमि बैंक
भूमि बैंक बनाने की लिए सरकार कौन सा नीति -नियम अपनाया था। किस आधार पर जमीन के किस्मों के प्लाॅटों को चिन्हित करने का क्या मापदंड अपनाया जाए, क्या इसकी कोई नीति बनी थी। यही नहीं भूमि बैंक का इस्तेमाल/उपयोग कौन करेगा, किस तरह से उपयोग किया जाएगा, इसको उपयोग करने के लिए कौन अधिकृत होगा, इसके लिए क्या नीति बनायी गयी है, यह स्पष्ट करना चाहिए।
यदि भूमि बैंक बनाने की नीति बनी थी तब कृषि व्यवस्था, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक, संस्कृतिक, परंपरागत-जीवनशैली और पर्यावरण को संरक्षित और विकसित करने के लिए क्या योजना बनायी गयी है। इस पर भी मंथन करने की जरूरत है। इसकी जानकारी राज्य के ग्रामीण, आदिवासी, मूलवासी, दलित, किसानों को देना चाहिए। क्योंकि झारखड का भू-भाग पहाड़ी और जंगल-झाड़ी से अच्छादित है। राज्य के 24 जिलों का भौगोलिक स्थिति, लैंण्डस्कैप अलग अलग है। कोई जिला समतल है, तो कोई जिला जंगल-पहाड़ों से अच्छादित है। अलग-अलग भौगालिक पहचान के साथ वहां के आदिवासी-मूलवासी सामुदाय की बोली-भाषा, रीति-संस्कृति की भी अपनी विशिष्टता है। इसके साथ ही प्रकृतिक उत्पाद, फूल-फल भी वहां के प्रकृति और मौसम के आधार पर निर्भर करता है।
जब राज्य के कृषि व्यवस्था की को समझने के लिए जरूरी है कुछ बुनियादी आधार को समझने की। पहाड़ी इलाकों की जमीन ढ़लाउ होती है। ग्रामीण आबादी /समुदाय इसी ढ़लाउ जमीन पर खेती-बारी करता है। बरसात का पानी ढलाने के टांडं, गोडा, बारी-झारी, पेड़-पौधों को सिंचते हुए नीचे के चंवरा खेतों को सिंचते हुए सबसे नीचे के गड़हा दोन या एक नंबर के खेतों में पहुंचती है। सबसे नीचे वाले खेत ही बहु फसली भी होती है। यही ग्रामीण इलाके का जीवित जलस्त्रोत भी है।
समतल इलाके में अधिकांश जमीन पर खेती की जाती है। इन इलाकों में सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था हो तो सालों भर खेती की जा सकती है। इन इलाकों में भी टांड, चैंरा, दोन और गढ़हा दोन है। टांड में गोड़ा, मंडुआ, शंकर कंदा, उरद, कुरथी, गंगाई, जौ, बजरा, तील, सुरगुजा खेती की जाती है। चैंरा में हल्का धान, दोन और गढ़हा दोन में देर से तैयार होने वाला धान की खेती करते हैं। ये सभी बरसाती खेती है, जो सिर्फ बरशा पानी से स्वातः सिंचता है।
झारखंड का एक-एक इंच जमीन बहु-फसली है
राज्य की बड़ी आबादी के उनके नाम से भूमि नहीं है-फिर भी वह भूमि का मालिक हैनदी-का बहता पानी पर किसी एक परिवार या कोई एक गांव मालिक नहीं होता-नदी के उदगम से लेकर जिस भी इलाके से, गांवों से होकर नहीं बहती है, जितनी दूर नदी की धारा बहती है-उतने दूर तक के धरती सिंचती है। उतने दूर तक मनुष्य से लेकर पेड़-पौधे, झाड़-जंगल, जीव-जंतु, गांय, बैल, बाघ, भालू, सभी को जीवन मिलता है। सबकी जिंदगी सिंचती है। तब धरती फूलती-फलती है, सामुदाय भी फूलता-फलता है।
आखिर गांव का परिभाषा सरकार के नजर में क्या है? क्योंकि भूमि बैंक में शामिल जमीन के प्लाॅटों में -गैर मजरूआ आम भूमि के प्लाॅटों में सबसे ज्यादा रास्ता का ही प्लाॅट है।
झारखंड का परंपरागत गांव
हम गांव किसको मानते हैं -आबादी का समूह। घरों का समूह। हर घर का घर-बारी होता है। बारी-झारी होता है। खेती-किसानी के लिए हर परिवार -गाय, बैल, बकरी, भेड़, सुवर, मुर्गी-चेंगना, बत्तक पालता है। इन पलातू जीव-जंतु के चरने के लिए, आने-जाने के लिए, जगह तो चाहिए ही। किसान हल-बैल लेकर खेत-टांड जोतने जाएगें, उसके लिए छाउर-चैड़ा कच्चा रास्ता होता है। किसानों को अपने खेतों तक हल-बैल ले जाने के लिए रास्ता होता है। गांव मावेशियों को चराने, नहलाने-धोने, पानी पिलाने के लिए गांवों के आबादी क्षेत्र में और गांव के सीमा में बहती नाला, छोटी नदियों का होना जरूरी है। ये छोटी नदी-नाला जीवित रहेगा-तभी गांव का सामाजिक, आर्थिक, कृषि व्यवस्था संरक्षित और विकसित होगा।
गांव का रास्ता-पगडंडी ही गांव के सामाजिक, आर्थिक, संस्कृतिक विकास का हाइवे है- भूमि बैंक में शामिल गैर मजरूआ आम भूमि के किस्म में सबसे अधिक प्लाॅट रास्ता से संबंधित है। भूमि बैंक में शामिल प्लाॅटों की अध्यायन करेगें, देखेगें तब यह सवाल उठता है कि आखिर सरकार के रास्तों वाले प्लॅटों को क्यों भूमि बैंक में शामिल किया ? सरकार के नजर में गांव में रास्ता नहीं होना चाहिए? आप भूमि बैंक में शामिल भूमि के प्लाॅटों का अध्यायन करगें तो यह सवाल आप की भी बेचैनी बढ़ाएगा। किसी भी गांव का नाम दिमाग में आते ही, तरह-तरह के विशाल पेड़-पौधे, बांस का झुंड, टंगरा/चटटान, अखड़ा, सरना, मसना, कब्रिस्थान, हड़गड़ी, ससनदीरी, मरघटी डाडी, चुंवा, कुंआ सभी दिखने लगता है, ये गांव के किस स्थान में किस दिशा में अवस्थित है। कौन रास्ता किसके घर तक जाता है। उपर टोला, नीचे टोला, पाहन टोली, अम्बा टोली, पुजार टोली, लोहरा टोली, कुम्हार टोली, घांसी टोली, तुरी कोचा, महरा/अहिर कोचा सभी को एक दूसरे से जोड़ने के लिए कई रास्ते रहते हैं। यही है गांव, जहां सभी जाति-समुदाय के समरसता की आत्मा बसती है।
सरकार नहीं चाहती है कि किसानों के खेतों की बीच में मोटा आड़, नाला और पाइन रहे-
रघुवार सरकार द्वारा बनाये गये भूमि बैंक का अध्यान करेगें, तो यह समझ में आता है कि ग्रामीणों के खेत-टांड के बीच मोटा आड़ नहीं होना चाहिए। नदी-पाइन, नाला भी नहीं हो, शायद इसीलिए सभी गांवों के खतों के बीच मोट आड़ वाले प्लाॅट, पाइन वाले प्लाॅट, गढहा वाले प्लाॅट, को चिन्हित कर भूमि बैंक में शामिल किया गया है।
भूमि बैक में शामिल जमीन का उपयोग करने के लिए कौन अधिकृति है-
भूमि बैंक किसके लिए बना है? इसका उपयोग कौन करेगा? इस सवाल को समझने के लिए पिछली सरकार द्वारा आयोजित मोंमेंन्टम झारखंड के उदेश्यों को समझना 2017 में पहला मोमेंन्टम झारखंड का आयोजन 16-17 फरवरी को किया गया था। उस समय राज्य सरकार मोंमेंन्टम झारखंड उत्साव में आये कंपनियों, देशी-विदेशी निवेशकों के समक्ष अपनी रिपोट पेस कर घोषणा किया था-कि सरकार ने निवेशकों को आसानी से जमीन उपल्बध कराने के लिए 21 लाख एकड़ जमीन भूमि बैंक में सुरक्षित रखा है। मोमेंन्टम झारंखड का लोगो ““उड़ता हाथी ““ सभी ने देखा था।
(तत्कालीन सरकार का रिपोट-पर आधारित)
Wednesday, August 5, 2026
क्या है स्वामित्व योजना?
क्या है स्वामित्व योजना?
केंन्द्र सरकार की यह योजना राष्ट्रीय पंचायती दिवस 24 अप्रैल 2020 को शुरू किया गया था। प्रचायती राज मंत्रालय ही इस योजना को लागू कराने वाला नोडल मंत्रालय है। राज्यों में योजना के लिए राजंस्व/भूलेख विभाग नोडल विभाग है। ड्रोन के जरिये प्राॅपर्टी के सर्वे ंके लिए सर्वे आॅफ इडिया नोडल एजेंसी है। योजना का मकसद है कि ग्रामीण इलाकों की जमीनों का सीमांकन ड्रोन सर्वे टेक्नोलाॅजी के जरिए होगा। इससे ग्रामीण इलाकों में मौजूद घरों के मालिकों के संपत्तियों का मालिकाना हक का एक “प्राॅपर्टी कार्ड ”रिकाॅर्ड बनेगा। वह इसका इस्तेमाल बैंकों से कर्ज लेने के अलावा अन्य कार्यों में भी उपयोग कर सकता है।






