Tuesday, October 6, 2026

Bachpan me Gaonw ka Bajar --

 

 Bachpan me Gaonw ka Bajar ---


आज सोमवार है आज रंेडवा में

बाजार है, जो गांव से बहुत दूर है

लातरा जंगल, कोनसा जंगल 

पार करना होगा

कोनसा के बाद जंगल और

पहाड़ का चढ़ान केवल है

लगातार दो घंटा तक चलना

होगा रेंडवा घाट तक पहुंचने में

मामा घर रेंड़वा बडका टोली में है

कल मंगल है रायकेरा में

बड़ा बाजार लगता है

पूरा सप्ताह का सबसे बड़ा बाजार

हर चीज मिलता है

साग-सब्जी से लेकर कुदाल

गांईता-कपड़ा लता, सूई धागा

बाजार में इतना भीड़ रहता है

कि सोनमेर गांव से ही आवाज

सुनाई देता है

सूई-सलाई दिन में सिलाई

राईत में जलाई- सूई सलाई

सलाई डिबा में ही एक सूई

खोंपा रहता है एक धागा में

जिसको बेचने वाला पूरे

बाजार में घूम घूम कर आवाज देकर

बेचता है

लोगों में भी यह आवाज मन में

बैठ गया है सूई धागा और सलाई

एक साथ मिल जाता है लोग

खुष हैं आष्वकता है खरीदने

क तो किसी को दूकान खोजना

न्हीं पड़ता है सिर्फ आवाज सुनना

है वह इधर आ रहा है या नहीं

इसी तरह -लोगों को एक दूसरा

आवाज में भी अपना पन का अहसास

होता है-सिकु गोज रानू

हुनि गोज रानू......

इस तरह के समान बेचने में

मुसलिम समाज आगे है

मंगल बाजार में मुर्गी खरीदने

वाले, कपड़ा व्योपारी

अधिकांष मुसलिम समुदाय से ही हैं

ये मुंडारी में बात करते हैं

दा बड़ी दस टाका ते ऐमीमे

का रेदो तयोमते नेयाओ

का नमोआ-हिंन्दी

मुंडारी भाषा बंेचने और खरिदने वालों

के बीच आत्मयीयता का संबंध बना जाता है

मंगल को स्कूल मोरनिंग होता है

स्कूल से लौट कर मैं

क्रंज को एक छोटा टोकरी में

भर ली, साथ ही एक छोटा सिसि

मिटी तेल का

एक छोटा सिसि खाने वाला तेल का

डाल ली और बुधनी दीदी के साथ चल दी

अरहारा गांव और सोनमेर गांव 

के बीच छोटा गढ़ा है सूनसान

जगह है गर्मी के दिन में डर लगता है

बाजार पहुंचते सूरज सिर के उपर से

पार होकर ढ़ल रहा था

बाजार घुसने के पहले ही

तीन-चार ढ़ार करने वाले

बैठे हैं

सभी करंज, लाह, सुरगुजा

मंडुआ, कंगाई खरीद रहे हैं

व्योपारी गांव से आने वाले हर

व्यक्ति पर नजर रखे हुऐ हैं

बेचने के लिए कौन क्या ला रहा है

उस रास्ते से आने वाले हर

महिला के सिर से व्योपारी जब्रजस्त

टोकरी खिंज कर उतार रहे हैं

क हेके-बड़ी  धान, मंडुआ

लान-लान.....एक रूप्या पैला

महिला अपना सहमति देती

उसके पहले ही .....

उसके सिर से डालिया ख्ंिाज कर

जमीन पर रख दिया

डालिया में रखा सिसि-बोतल

गमछा को निकाल कर जमीन में

रख दिया

न तराजू का सही नाप दिखाया

ना ही पसंगा लगाना है या नहीं

इसका जांच करने दिया

बस धड़ाधड़ तैलना षुरू कर दिया

बेचने वाले सिंर देखते रह गये

इतना दाम में देगें-नहीं

देगें कुछ भी बोलने का मौका 

नहीं दिया

मेरा करंज कच्चा था

देखते ही व्योपारी बोला...

ई एकदम बेरेलगी-एकदम कच्चा

इसका क्या देगें-चार आना ते दा

चार आना में दे-मेरे हां-नहीं

कहने के पहले वह आंख झपकते

करंज तैल लिया-10 किलो होलक

आढ़ाई रूप्या हाथ में थमा दिया

चलो....जो भी हुआ

इसी से जितना भी, जो भी मिले

हॉं-मिटी तेल और कडुवा तेल

जरूरी है

नही ंतो अंधार में रहना होगा

जो भी साग-सब्जी मिलेगा

थोड़ा सा छोंक लगाने से

अच्छा लगता है...तो कुछ 

भी खाकर पेट भर सकते हैं

छठा क्लास में एडमिषन

भी लेना है


No comments:

Post a Comment