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VOICE OF HULGULANLAND AGAINST GLOBLISATION AND COMMUNAL FACISM. OUR LAND SLOGAN BIRBURU OTE HASAA GARA BEAA ABUA ABUA. LAND'FORESTAND WATER IS OURS.
प्रभात खबर
30/8/2020
झारखंड में जमीन की साइबर लूट ऑनलाइन रिकॉर्ड में हो रही हेराफेरी
राज्य के अंचल कार्यालयों में काम कर रहा है अफसर-माफिया का गठजोड़-खाली प्लॉट, सरकारी जमीन व गैर मजरूआ जमीन के कागजात की हेराफेरी कर ऑनलाइन हो रही इंट्री-
आनंद मोहन-रांची
राज्य में जमीन की साइबर लूट हो रही है। आम लोगों की जेब से पेसा उड़ानेवाले जामताड़ा के साइबर अपराधियों से भी बड़ा गिरोह जमीन लूट में लगा है। जमीन के ऑन लाइन रिकॉर्ड तैयार करने के नाम पर यह हेराफेरी हो रही है। राज्य के कई अंचल कार्यालयों में भू-माफिया व अफसरों का गठजोड़ इस काम में लगा है। फर्जी दस्तावेज के सहारे मूल रैयतों की जमीन दूसरे के नाम की जा रही है। धनबाद, रांची व बोकारों सहित कई अन्य जिलों में हेराफेरी के मामले सामने आये हैं। सिर्फ धनबाद जिले के सभी चार अंचलों में सैकड़ों एकड़ जमीन की साइबर लूट हुइ है। सीएनटी एक्ट की धजियां उड़ा कर आदिवासी रैयतों की जमीन भी दूसरे के नाम की गयी है। मंत्री से लेकर आम आदमी तक की जमीन के कागजों में हेराफेरी कर दी जा रही है।
प्रभात खबर के पास है सैकड़ों दस्तावेज-राजधानी रांची के भी कई इलाके में फर्जी दस्तावेज के सहारे दाखिल-खारिज किये गये हैं। निछले कुछ वर्षों की ऑन लाइन प्रक्रिया देखी जाये, तो दो दर्जन से ज्यादा अंचलाधिकारी जांच के घेरे में आयेेगे। दरअसल भू-माफिया जमीन व गैर मजरूआ जमीन फर्जी कागज के सहारे हेराफेरी करने का धंधा चल रहा है। ुिर इसकी ऑनलाइन इंट्री करा दी जाती है। प्रभात खबर के पास जमीन की हेराफेरी के सैंकड़ों दस्तावेज उपलब्ध है।
मंत्री-विधायक भी नहीं बचे, उनकी जमीन के रिकॉर्ड में भी छेड़छाड़
सीएनटी एक्ट की धज्जियां उड़ा कर आदिवासी रैयतों की जमीन भी दूसरे के नाम की गयी।
वर्ष 2016 से शुरू हुई ऑन लाइन प्रक्रिया-राज्य में जमीन के दस्तावेज के कप्यूटरीकरण की प्रक्रिया 2016 से शुरू हुई है। इस प्रक्रिया के तहत अंचल कार्यालय में जमीन की खरीद-बिक्री से लेकर म्यूटेशन तक की प्रक्रिया ऑनलाइन हो रही है। सारे अभिलेख कप्यूटर पर दर्ज किये जा रहे हैं। इसी प्रक्रिया में छेड़छाड़ हो रही है। इधर पाई -पाई पैसा जोड़ कर जमीन खरीदनेवाले गरीब लुटे जा रहे हैं। कई बार तो ऑनलाइन पूरा विवरण देखने के बाद मूल रैयतों के होश उड़ रहे हैं।
मंत्री रामेश्वर उरांव की जमीन की भी हुई थी गलत इंट्री-ऑन लाइन की प्रक्रिया में मंत्री रामेश्वर उरांव की जमीन की भी गलत इंट्री की गयी थी। उनकी अपनी जमीन दूसरे के नाम कर दी गयी थी। श्री उरांव ने कहा कि ऑनलाइन प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी हो रही है। अंचल के स्तर पर भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। गांव-गांव में लोगों को लड़ाने का काम हो रहा है। फिलहाल ऑन लाइन प्रकिया को बंद कर पहले दस्तावेज मैनुअली दुरूस्त कर लिये जायें।
सामाजिक कार्यकर्ता रमेश ने धनबाद मामले में की है शिकायत-धनबाद में हो रहे जमीन घोटाले के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ने वाले सामाजिक कार्यकर्ता रमेश कुमार राही ने पूरे मामले की शिकायत सक्षम अधिकारियों से की है। उन्होंने धनबाद के उपायुक्त से लेकर भू-राजस्व विभाग के वरीय अधिकारियों की हेराफेरी से संबंधित प्रमाण सौंपे हैं। इस मामले में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा पहल भी गयी है। श्री राही का कहना है कि पूरे राज्य में अधिकारी की मिलीभगत से एक संगठित रैकेट चल रहा है। मामले के सही तरीके से जांच हुई तो कई लोग जेल जायेंगें। गरीबों की जमीन लूटी जा रही है। आदिवासी रैयतों को बेदखल किया जा रहा है।
गलत और अवैध म्यूटेशन के मामले
केस-1
धनबाद अंचल के मौजा साबलपुर-11 के खाता संख्या-25, प्लॉट संख्या 519, रकबा-5 कठा जमीन का म्यूटेशन सैवाल चटर्जी के नाम किया गया। जबकि खाता संख्या-25 आदिवासी खाता की भूमि है।
केस -2
धनबाद के कोला कुसमा मौजा में सरकारी जमीन का भी दखिल-खारिज करने के साक्ष्य मिले है। खाता संख्या-217 के प्लॉट संख्या 857 का म्यूटेशन कर दिया गया। दस्तावेज बताते हैं कि इस जमीन की प्रकृति सरकारी है।
केस -3
धनबाद के ही विशुनपुर मौजा के खाता संख्या-194, प्लॉट संख्या-198, 112 की 58 डिसमिल जमीन नरेश शर्मा से क्रय किया गया। रेखा देवी के नाम से जमीन खरीदी गयी। 19.9.2019 को धनबाद अंचल में म्यूटेशन हुआ। खतियान देखा गया, तो खाता संख्या 194 में प्लॉट संख्या 198,111 नहीं है। वास्तविक खाता संख्या 496 है। निबंधन व दाखिल खारिज दोनों में गोलमाल हुआ।
केस -4
बघमारा अंचल के महेशपुर मौजा खाता संख्या 146, प्लॉट संख्या 524, 526,525,632, 1293, 1305 और खाता संख्या 147 के प्लॉट संख्या 1097 के दाखिल-खरिज में बड़बड़ी की गयी। यह जमीन सीएनटी एक्ट की परिधि में पा्रण महतो व रघुनाथ महतो-कुर्मी जाति के नाम है जमाबंदी में रैयत में प्राण महतो के नाम है इसके बावजूद इसे दूसरी जाति के नाम से दाखिल खारिज की दिया गया है।
केस -5
रांची जिला में तरीके से जमीन के हस्तातरण का मामला सामने आया हैं चान्हो अंचल में खात संख्या 41 की जमीन गलत तरीके से बंदोबस्त कर दी गयी है। दस्तावेज के साथ इसकी शिकायत उपायुक्त से की गयी है।
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23-1-2023
प्रभात खबर -प्रतिनिधि, कांके
50 करोड़ की जमीन के रिकॉर्ड से की छेड़छाड़, रदद की गयी जमाबंदी, होगी जांच।
टंचल कार्यालय कांके हल्का-9 की गेतलातू मौजा की 4.44 एकड़ जमीन की पंजी -2 के साथ छेड़छाड़ का मामला प्रकाश में आया है। इस जमीन की कीमत लगभग 50 करोड़ रूपये आंकी गयी है। मामला तब पकड़ में आया, जब गेतलातू मौजा की खाता संख्या-86, प्लॉट संख्या-591, 593, 594, 634, 640, 642, 651, 652, 653, 674, 675 की 4.44 एकड़ जमीन से प्लॉट संख्या-592 की पांच डिसमिल की क्रेता शिवाजी नगर, डुमरदगा की आशा देवी ने दाखिल -खारिज के लिए आवेदन दिया। कर्मचारी व सीआइ ने जांच के क्रम में पाया कि उत्क जमीन की कभी जमाबंदी कायम ही नहीं हुई है। इसके बावजूद ऑनलाइन पंजी 2 के साथ छेड़छाड़ कर जमाबंदी खोली गयी है। उत्क सीएनटी की जमीन पर राजकुमार यादव के नाम से पंजी-2 प्लॉट संख्या-592 के भाग संख्या-01, पृष्ट संख्या-204 पर दर्ज था। ऐसा एनआइसी की साइट में छेड़छाड़ कर किया गया था। जांच में यह भी पाया गया कि राजकुमार यादव ने उत्क सीएनटी की जमीन कोलकाता से रजिस्ट्री डीड बनाकर छेड़छाड़ कर पंजी-2 में अपना नाम दर्ज कराया था। कांके सीओ को इसकी जानकारी मिलते ही अपर समाहर्ता को सूचना देकर जमाबंदी रदद करायी गयी।
सही दस्तावेज प्रस्तुत नही ंकर पाया आरोपी-इस मामले में सीओ ने जमीन मालिक व विक्रेता बांका बिहार निवासी राजकुमार यादव, पिता बंगाली यादव व पावर होल्डर गंतलातू निवासी शिवदयाल महतो, पिता स्व लक्षण महतो को चार बार 01 नवंबर 2022, 18 नवंबर 2022, 24 दिसंबर 2022 व 07 जनवरी 2023 को नोटिस भेजकर पक्ष रखने को बुलाया, पर राजकुमार यादव एवं शिवदलाय महतो का वकील सीअसे कोर्ट में दो डेट पर हाजिरी देकर कोई भी सही दस्तावेज प्रस्तुत नही ंकर सका।
राजकुमार यादव ने दोबारा उत्क खाता संख्या-86 के प्लॉट संख्या 591 की 1.92 एकड़ जमीन का भाग संख्या-01 पृष्ट संख्या-44 की जमाबंदी में छेड़छाड़ कर खोलवा दिया। उत्क प्लॉट पर जाकर पूछताछ करने पर पाया गया कि इसमें जमीन मालिक व पावर होल्डर के पीछे कुछ सफेदपोश लोगों का हाथ है।
सीओ ने कहा-डीड की जांच करायी जायेगी- इस संबंध में सीओ दिवाकर सी द्विवेदी ने बताया कि पंजी-2 से छेड़छाड़ किये जाने के संबंधी सूचना वरीय पदाधिकारियों को दी गयी है। वरीय पदाधिकारियों से निर्देश प्राप्त होते ही आगे कानूनी कार्रवाई की जायेगी। सीओ ने बताया कि गतलातू मौजा की उत्क जमीन के खतियान में रैयत पलटू महतो वगैरह के नाम दर्ज है। राजकुमार यादव ने इस जमीन की कोलकाता से 18.12.80 को पलटू के वशंज सोहन महतो, कपिल महतो वगैरह से रजिस्ट्री करायी थी। इस जमीन की रजिस्ट्री रांची से नहीं कराकर बंगाल से करायी गयी डीड भी जाली हो सकती है। जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि कोलकाता से रजिस्ट्री करायी गयी डीड असली है या नकली।
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20 फरवरी 2023-दैनिक भास्कर
ई विद्यावाहिनी-स्कूली शिक्षा विभाग पहले वर्कशॉप का आयोजन कर शिक्षकों को दे प्रशिक्षण
अवकाश के आवेदन ऑनलाइन भरने पर शिक्षक बोले-हम दक्ष नहीं, कैफे में अप्लाई से डाटा हो जाता है सार्वजनिक
एजुकेशन रिपोर्टर-रांची
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा सरकारी स्कूलों में सेवा दे रहे शिक्षकों व कर्मचारियों को ई विद्यावाहिनी के माध्यम से ऑनलाइन अवकाश लेने की व्यवस्था लागू हो गई है। इसके साथ ही विरोध शुरू हो गया है। इनका कहना है कि अधिकांश शिक्षक कंप्यूटर और मोबाइल के दक्ष नहीं हैं । इस कारण ऑनलाइन अवकाश लेने के लिए साइबर कैफे की मदद ले रहे हैं। सिके कारण विभाग का डाटा सार्वजनिक हो जा रहा है। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने कहा कि अभी तक स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा ऑनलाइन अवकाश आवेदन भरने के संबंध में किसी प्रकार की जानकारी नहीं दी गई है। नई व्यवस्था को लागू करने से पहले स्कूली शिक्षा विभाग को जिला, प्रखंड और सीआरसी स्तर पर वर्कशॉप आयोजित कर शिक्षकों को प्रशिक्षण देना चाहिए। ताकि शिक्षक बिना किसी झिझक के नई ऑनलाइन व्यवस्था का लाभ उठा सकें। इसी सबसे पहले शिक्षकों को तकनीकी पहलूओं की जानकारी देने के लिए ट्रेनिंग देने की जरूरत है। कैफे में जाकर अवकाश आवेदन जमाकरने वाले शिक्षकों ने कहा कि इससे बेहतर अवकाश लेने का ऑफलाइन माध्यम बेहतर था। जिसमें अवकाश से संबंधित डाटा सार्वजनिक होने को डर नहीं था।
नई व्यवस्था से हो रही है परेशानी
नई व्यवस्था लागू होने के पहले तक शिक्षक ऑफलाइन माध्यम से अवकाश लेते थे। पूर्व में ऑफलाइन से ली गई छुटटी दर्ज का ऑनलाइन सिस्टम में विकल्प नहीं होने से कुल छुटटी की संख्या में फर्क हो रहा है। अवकाश दिवस में कार्य करने पर क्षतिपूरक अवकाश दिया जाता है, जिसका विकल्प ऑनलाइन सिस्टम में नहीं है।
छुटटी ले रहे 2 दिन, जो जा रहा 3 दिन
शिक्षकों ने कहा कि शनिवार और सोमवार को अवकाश के आवेदन देते हैं तो ऑनलाइन सिस्टम में तीन दिन अवकाश दिखा रहाहै। बीच में रविवार है, जिसका नए सिस्टम अवकाश में गिनती हो रही है। यानि दो दिन की छुटटी लेने पर तीन दिन की गिनती हो रही है। जबकि रविार को राजपत्रित अवकाश रहता है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों की हो व्यवस्था
ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन आवेदन देने की व्यवस्था होनी चाहिए। नए सिस्टम की खामियों को दूर करने व शिक्षकों को ट्रेनिंग देने पर विभाग को ध्यान देना चाहिए। तब तक ऑफलाइन व्यवस्था देना चाहिए।
नसीम अहमद-मुख्य प्रवक्ता सह शिक्षक
सेवा में,
माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन 04/2022
झारखंड सरकार दिनांक-7 नवंबर 2022
विषय-केंन्द्र की स्मामित्व योजना के तहत प्राॅपर्टी/संपत्ति कार्ड की योजना को झारखंड में लागू नहीं करने एवं पांचवी अनुसूचि, पेसा कानून, सीएनटी, एसपीटी एक्ट कानून का उल्लंघन कर राज्य में बनायी गयी भूमि बैंक का रदद करने की मांग के संबंध में।
महाशय,
आप को सादर जानकारी दी जाती है कि अप्रैल 2020 को केंन्द्र सरकार द्वारा घोषित स्वामित्व योजना के तहत डिजिटल लैंण्ड रिकाॅर्ड आधुनीकीकरण कार्यक्रम के तहत ड्रोन से गांवों की संपत्ति का सर्वेक्षण कर जीआईएस मानचित्र बनाये जाएगें। साथ ही जमीन मालिकों को प्राॅपटी कार्ड बना कर दिया जाएगा। ये जीआईएस नक्से और स्थानीय डेटाबेस ग्राम पंचायतों और राज्य सरकार के अन्य विभागों द्वारा विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग किये जाएगें। इस स्वामित्व योजना का कई उद्वेश्यों के साथ मूल उद्वेश्य एक राष्ट्र एक साॅफटवेयर( व्दम छंजपवद व्दम ैवजिूंतम द्ध व्यवस्था करना है।
लेकिन कि हम झारखंड के आदिवासी समुदाय का इतिहास गवाह है कि जल, जंगल, जमीन को आबाद करने का हमारा अपना गौरवशाली इतिहास है। आदिवासी समुदाय खतरनाक जंगली जानवरों से लड़ कर जंगल-झाड़ को साफ कर गांव बसाया, जमीन आबाद किया है। आदिवासी-मूलवासी किसान समुदाय जंगल, नदी-झरनों, पहाड़ों की गोद में ही अपने इतिहास, भाषा-सांस्कृति, पहचान के साथ विकसित होता है।
प्राकृतिक-पर्यावरण जीवन मूल्य के साथ आदिवासी-मूलवासी समुदाय के ताना-बाना को संरक्षित और विकसित करने के लिए ही छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908, संताल परगना काश्तकारी अधिनियम 1949 बनाया गया है। साथ ही भारतीय संविधान में पेसा कानून 1996 एवं पांचवी अनुसूचि में आदिवासी समुदाय के जल, जंगल, जमीन पर इनके खूंटकटी आधिकार सहित सभी परंपरागत अधिकारों का प्रावधान किया गया है। यही हमारा स्वामित्व का पहचान है।
सर्व विदित है कि आदिवासी समुदाय के जंगल, जमीन, सामाजिक संस्कृतिक, आर्थिक आधार को संरक्षित एवं विकसित करने के लिए भारतीय संविधान में विशेष कानूनी प्रावधान किये गये हैं। सीएनटी, एसपीटी एक्ट, पेसा कानून, फोरेस्ट राईट एक्ट 2006 में विशेष प्रावधान है। इसके तहत गांव के सीमा के भीतर एवं बाहर जो प्राकृतिक संसाधन है जैसे गिटी, मिटी, बालू, झाड़-जंगल, जमीन, नदी-झरना सभी गांव की सामुदायिक संपत्ति है। इस पर क्षेत्र के ग्रामीणों का सामुदायिक अधिकार है। ये अधिकार 1932 के खतियान और विलेज नोट एवं खतियान पार्ट टू में भी दर्ज है।
ये सभी अधिकार आदिवासी समुदाय के लंबे संघर्ष और शहादत के बाद मिला है। खतियान एवं वीलेज नोट में दर्ज सामुदायिक एवं खूंटकटी अधिकार को बचाना जगरूक नागरिकों के साथ राज्य की कल्याणकारी सरकार की भी जिम्मेवारी है।
वर्तमान में लाया जा रहा केंन्द्र सरकार की स्वामित्व योजना का उद्वेश्य भारत के लिए एक सकीकृत संपत्ति सत्यापन-समाधान के तहत पूरे देश के लिए एक ही डिजिटल लैंण्ड रिकाॅर्ड-डाटा बनाना है। जो पांचवी अनूसुचि क्षेत्र एवं सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, मुंण्डारी खूंटकटी अधिकार, हो आदिवासी बहुल क्षेत्र के विलकिनसन रूल्स में प्रावधान अधिकारों के खिलाफ है। इन कारणों को यहां रेखांकित करना चाहते हैं।
हम सभी नम्रतापूर्वक निम्नलिखित बिंन्दुओं पर आप का ध्यान खिचना चाहते हैं-
ऽ स्वामित्व योजना के कार्यान्वयन के लिए बनी दिशानिर्देक में झारखंड के 5वीं अनुसूचि क्षेत्र के प्रावधानों, सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, पेसा कानून, मुंण्डारी खूंटकटी अधिकारों एवं विलकिनसन रूल्स के प्रावधानों को संरक्षित करने के संबंध में कुछ भी जिक्र/प्रावधान नहीं किया गया है।
ऽ दूसरा बड़ा सवाल है- कि समाज की सामुदायिक -सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक अस्तित्व के ताना-बाना से जुड़ भूमि जैसे नदी-नाला, झील-झरना, सरना, मसना, अखड़ा, ससनदीरी-हडगड़ी, भूइहरी, डालीकतारी, भूत-खेता आदि को 2014 के बाद गलत तरीके से भूमि बैक में शामिल किया गया है-यह समुदाय की संपत्ति है। इसको यथावत समुदाय के स्वामित्व में सुरक्षित रखने का कोई जिक्र या प्रावधान नहीं किया गया है।
ऽ 2014 के बाद लैंण्ड रिकाॅर्ड आॅनलाइन होने के बाद जमीन के रिकाॅर्डों -रैयतों के खतियान, पंजी टू और खतियान पार्ट टू में प्रावधान रिकाॅर्डो में छेड-छाड़ किया जा रहा है। रातों रात असली जमीन मालिकों का नाम हटा कर किसी दूसरे नाम दर्ज किया जा रहा है। यह पूरी तरह से 5वीं अनुसूचि, सीएनटी, एसपीटी एक्ट, पेसा कानून एवं 1932 सहित सभी खतियान का अतिक्रमण एवं इससे खत्म करने की कोशिश है।
ऽ जमीन संबंधित मुददे राज्य सरकार के अधीन है। यह क्षेत्र 5वीं अनुसूचि में हैं, एैसे में केन्द्र सरकार का स्वामित्व योजना को लागू करने के पहले राज्य के जनजातीय परामर्शदात्री समिति-टीएसी में चर्चा होनी चाहिए थी। इसके बाद राज्य के कैबिनेट में पास होना था। इसकी जानकारी आदिवासी समुदाय को भी देनी थी। लेकिन एैसा नहीं हुआ।
ऽ आदिवासी-मूलवासी समुदाय जंगल-जमीन के संबंध में कई समस्याओं से जुझ रहा है - 2014 के बाद भूमि बैंक बना, आखिर किस नीति के तहत बना? क्या सीएनटी, एसपीटी एक्ट, 5वीं अनुसूचि, पेसा कानून में संवैधानिक संशोधन करके बना है? इस सवाल का जवाब कौन देगा? राज्य के आदिवासी -मूलवासी समुदाय जानना चाहती है।
ऽ स्वामित्व योजना के तहत प्राॅपटी कार्ड बनाने के संबंध में भी कई बड़े सवाल हैं-समाज का सामुदायिक संपत्ति/भूमि जो खतियान पार्ट टू में दर्ज है, समुदाय सामूहिक उपयोग करता है। गांव में समुदाय बहुत सारे परंपरागत भूमि/संपत्ति है जिसका लगान भुगतान नहीं किया जाता है जो समाज का स्वामित्व में है-इसका प्राॅपटी कार्ड किसके नाम से बनेगा?
संपत्ति/प्राॅपटी कार्ड योजना के लागू होने से आदिवासी इलाके में निम्नलिखित खतरे भविष्य में होगें-
1-परंपरागत ग्रामीण आदिवासी इलाके का डेमोग्राफी -भौगोलिक एरिया, क्षेत्र पूरी तरह से बदल जाएगा। कारण 2016 के बाद ग्रामीण इलाके के गैर मजरूआ आख, आम, जंगल-झाडी, परती-झरती, नदी-नाला आदि सामुदायिक भूमि का खरीद-फरोक्त चरम पर हेै।
2-भूमि बैंक बनने के बाद 5वीं अनुसूचि क्षेत्र, सीएनटी, एसपीटी एक्ट, मुंण्डारी खूंटकटी इलाके में गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाड़ी, नदी-नाला जैसे सामुदायिक भूमि का खरीद-फरोक्त
के कारण भारी संख्या में बाहरी आबादी का प्रवेश एवं कब्जा बढ़ता जा रहा है।
3-आदिवासी ग्रामीण इलाके में शहरी एवं बाहरी आबादी के प्रवेश से प्राकृतिकमूलक जीवनशैली से जुडे आदिवासी-मूलवासी, दलित, किसान समुदाय का परंपरागत सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आधार खत्म हो जाएगा।
4-ड्रोन सर्वे पूरा होने के साथ ही गांव का नया डिजिटल डेटा बेस नक्सा बनेगा। इस नये डिजिटल नक्सा और 1932 के खतियान में कोई मेल नहीं रहेगा। ताजा उदाहरण है -आॅनलाइन डिजिटल खतियान और 1932 का मैनुअल-आॅफलाइन खतियान। तब निश्चित है कि नया डिजिटल नक्सा बनने के साथ ही आदिवासी -मूलवासी समुदाय को, सामुदायिक अधिकार देने के साथ ऐतिहासिक पहचान देने वाला 1932 का खतियान अस्तित्व विहीन हो जाएगा।
5-परिणाम स्वरूप आदिवासी समुदाय के अधिकार, सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, 5वीं अनुसूचि, मुंण्डारी खूंटकटी अधिकार, कोल्हान क्षेत्र का विलकिनसन रूल्स स्वतः कमजोर हो जाएगा।
6-ड्रोन सर्वे पूरा होने के बाद, जमीन का मालिकाना हक सत्यापित करने के लिए ग्रामीण आदिवासी, मूलवासी, दलित समुदाय से कई तरह के जमीन संबंधी दस्तावेज मांगे जाएगें, भोले-भाले ग्रामीण दस्तावेज पेस नहीं कर पायेगें। ऐसे परिस्थिति में जमीन उनके हाथ से निकल जाएगा।
7-ग्रामीण इलाके में बढ़ते शहरी आबादी के कारण ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था, वन व्यवस्था, जल स्त्रोत एवं पर्यावरणीय व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पडेगा।
8-ग्रामीण आदिवासी इलाके में बड़ी संख्या में बाहरी आबादी के प्रवेश होने से राज्य में आदिवासी आबादी तेजी से घटेगी, परिणाम स्वरूप आदिवासी समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनीतिक शत्कि स्वतः कमजोर होगा।
कई उदाहरण हैं-ग्रामीण जमीन का प्रर्याप्त दस्तावेज पेस नहीं कर पाने के कारण अपने ही परंपरागत अधिकार से बंचित हो रहे हैं।
1-विगत सुप्रीम कोट का फैसला-जिसमें झारखंड से 1,07,187 लोगों ने जंगल की भूमि पर अपने कब्जे का दावापत्र पेस किया था। लेकिन 27,809 आवेदकों के दावापत्र रदद कर दिया गया। कारण कि लोगों ने अपना दावा साबित नहीं कर सका।
2-जमीन पर सदियों से ग्रामीणों का कब्जा है, खेत-बारी करते आ रहे हैं, जमीन का खतियान उनके हाथ में है, आॅफलाइन जमीन का रसीद काटता था-अब आॅनलाइन रसीद काटना बंद कर दिया गया। भूमिदान में मिला जमीन भी छीना जा रहा है -कानून के तहत राज्य में लाखो छोटे किसान और भूमिहीन परिवारों को एक-एक, दो-दो एकड़ भूमिदान में मिला था। जमीन का लगान भी भुगतान करते आ रहे थे-अब एैसे जमीन का लगान रसीद काटना बंद कर दिया। अब ग्रामीणों से कई तरह के साबूत पेस करने के लिए कहा जा रहा है, लोग परेशान है।
3-जमीन आॅनलाइन व्यवस्था में भारी गड़बड़ी-राज्य में जमीन संबंधित काम-2014-15 तक आॅफलाइन हो रहा था। जमीन मालिक आॅफलाइन रसीद हल्का कर्मचारी द्वारा कटवा रहे थे। आॅनलाइन व्यवस्था होने के बाद जमीन के दस्तावेज-खतियान में भारी गड़बडियां हो गयी है। किसी का खतियान में रैयत का नाम गलत है, खाता नंबर गलत है, प्लाॅट नंबर गलत है, जमीन का रकबा गलत है। इसको सुधारवाने के लिए लोग प्रज्ञा केंन्द्र, अमीन के पास, अंचल पदाधिकारी के पास दौड़ते -दौड़ते थक रहे हैं-कार्रवाई नहीं हो रहा है।
4-आॅनलाइन खतियान में गलती के कारण बहुत से किसान जमीन का मलगुजारी रसीद 4-5 सालों से नहीं कटवा पा रहे हैं।
इस तरह से आदिवासी-मूलवासी, किसान, दलित समुदाय से जमीन निकल जाएगा। यही नहीं समुदाय का सुरक्षा कवच सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, पेसा कानून, मुंण्डारी खूंटकटी अधिकार कागजों पर रहेगा, लेकिन वास्तविक अधिकार स्वतः खत्म हो जाएगा।
उपरोक्त परिणामों से जमीन का लूट बढ़ेगा। परिवार और समाज में अशांति बढ़ेगा। इससे उत्पन्न परिस्थितियों से विस्थापन, पलायन, बेरोजगारी, भूख, भूमिहीन, सूखा-आकाल एवं प्रदूषण जैसे महामारी का ही सामना करना पडेगा।
हमारी मांगे-
1-केंन्द्र सरकार द्वारा लायी जा रही स्वामित्व योजना के तहत प्राॅपटी/संपत्ति कार्ड योजना का झारखंड में लागू नहीं किया जाए।
2 सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, 5वीं अनुसूचि एवं पेसा कानून में प्रावधान अधिकारों को कड़ाई से लागू किया जाए।
3-आदिवासी बहुल खूंटी जिला में प्राॅपटी कार्ड बनाने के लिए ड्रोन से जमीन/संपत्ति का सर्वे किया जा रहा था को होल्ड किया गया है, इसको स्थायी रूप से रोका जाए। साथ ही गांव -गांव चुपके से जाकर भूमि बैंक में शामिल किये गये प्लाॅटों का ग्रांउड/जमीनी सत्यापन किया जा रहा है-इससे रोका जाए।
4-रघुवर सरकार ने गैर मजरूआ आम, खास , जंगल-झाड़ी जमीन को भूमि बैंक में शामिल किया है, इस भूमि बैंक को रदद किया जाए।
5-आॅनलाइन जमीन के दस्वातेजों का छेड़-छाड़ हो रहा है, इससे रोका जाए।
6-जमीन का लगान रसीद आॅफलाइन काटा जाए।
7-जमीन के दस्तावेजों में भारी गड़बडी, छेड़-छाड़ किया गया है, उसको ठीक -सुधारा जाए। ठीक करने के नाम पर ग्रामीणों से पैसा वासूला जा रहा है-इससे रोका जाए।
8-सीएनटी, एसपीटी एक्ट का उल्लंघन करके आदिवासी समुदाय का जमीन गलत तरीके से हडप लिया गया था, एसएआर कोट ने फैसला दिया था इस जमीन को आदिवासी समुदाय को वापस कब्जा दिलाने का, जो आज तक कार्रवाई नहीं हुआ है इस पर रैयतों को दखल कब्जा दिलाया जाए।
9-राज्य के सभी जलस्त्रोंतों नदी-नाला, झील-झरना, डैम का पानी किसानों के खेतों तक पाइप लाइन द्वारा सिंचाइ के लिए पहुंचाया जाए।
10-2013 के जमीन अधिग्रहण कानून को कड़ाई से लागू किया जाए।
निवेदेक-
खतियान-जमीन बचाओं संघर्ष मोर्चा
घटक संगठन-आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच-दयामनी बरला-मो0 9431104386
त्ुाुरतन तोपनो, नियारन तोपनो, राजू लोहरा, शिवशरण मिश्र, ज्वालंत तोपनो
2-केंन्द्रीय जनसंघर्ष समिति-लातेहार-गुमला-जेरोम जेराल्ड कुजूर, अनिल मनोहर, प्लादियुश, पात्रिक कुजूर, रोज खाखा
3-जबड़ा डैम प्रभावित संघर्ष समिति-बिरसा सांगा, रीता तिडू, जोर्ज धान, सिलाश धान, लोधा पाहन
4-आजादी बचाओं आंदोलन-मिथलेश डांगी
5-पहाडिया आदिवासी बचाओं समिति-संताल परगाना-रमेश मालटो
6-आदिवासी जागरूता मंच-गुमला-बहन सिसलिया
7-चांडिल विस्थापित समिति-आंम्बिका यादाव
धरना सभा को संबोधित किये-अनुप खेस-बसितया, जागेश्वर लकड़ा-सिसाई, जस्टीन बेक-सिमडेगा, तुरतन तोपनो-तोरपा, सुषमा बिरूली-रांची, जुनास लकड़ा-मांडर, मिथलेश डांगी-हजारीबाग, रोज खाखा-गुमला, मंथनजी-जमशेदपुर, हीरा मिंज-रांची, बरथलमय सांगा-खूंटी, जादू मुंडा-तमाड़, मनोहर केरकेटा-महुंआटांड, प्रफूल लिंडा-आदिवासी संघर्ष मंच रांची, अम्बिका यादव-चांडिल, दयामनी बरला, एलिना होरो।
स्ंाचालन- हादू तोपनो।
प्रेस विज्ञप्ति
आप सभी जानते हैं कि हमारे पूर्वजों ने संाप, भालू, बाघ, बिच्छू जैसे खुंखार जंगली जानवरों से लड़कर झारखंडी की धरती को आबाद किया है। जब-जब हमारे विरासत पर हमला हुआ, समाज ने संघर्ष किया। आज राज्य बनने के बाद लगातार आदिवासी, मूलवासी समुदाय के उपर चारों ओर से हमला हो रहा है। राज्य बनने के बाद आज तक राज्य और केंन्द्र में जितने भी संवैधानिक कानूनांे में संशोधन या फेर-बदल किया गया, सभी आदिवासी, मूलवासी, किसान, दलित और मजदूरों के संवैधानिक अधिकार को कमजोर करने का काम किया है।
केंन्द्र सरकार और पिछली राज्य सरकार ने 2016 में भूमि बैंक बनाया, और 21 लाख एकड़ से अधिक समुदायिक संपत्ति/जमीन को भूमि बैंक में शामिल कर दिया। आज धड़ले से जमीन पर गैरकानूनी कब्जा का धंधा चरम पर है। जमीन का दस्तावेज आॅनलाइन होने के बाद रातों-रात जमीन का असली मालिक का नाम हटा कर किसी दूसरा व्यक्ति का नाम दर्ज किया जा रहा है। जमीन के खतियान जैसे मूल दस्तावेजों में भारी छेड-छोड किया जा रहा है। सरकार द्वारा नित नये कानून लाकर आदिवासी, मूलवासी, किसानों के परंपरागत एवं संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करके पूुजिपतियों और कारपोरेट उद्वोगों के हित को पूरा करने जा रही है। झारखंड में आदिवासी, मूलवासी समुदाय के जल, जंगल, जमीन का सुरक्षा कवच सीएनटी, एसपीटी एक्ट, 5वीं अनूसूचि क्षेत्र, पेसा कानून में प्रावधान, समुदाय के सभी परंपरागत अधिकारों को तकनीकी रूप से कमजोर किया जा रहा है।
वर्तमान समय में केंन्द्र सरकार द्वारा लायी जा रही स्वामित्व योजना के तहत प्राॅपटी कार्ड बनाने की प्रक्रिया भी इसका हिस्सा है। जिसके तहत प्रोपाॅटी कार्ड देने के नाम पर आदिवासी मूलवासी, दलित किसान समुदाय के समुदायिक जमीन को सरकार अपने हाथ में लेने की योजना बनायी है। वर्तमान में लाया जा रहा स्वामित्व योजना इसी उद्वेश्य का एक हिस्सा है। इससे सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, 5वीं अनूसूचि, पेसा कानून, मुंडारी खूुटकटटी अधिकार, हो आदिवासी समुदाय के विलकिनसन रूल में प्रावधान परंपरागत समुदायिक अधिकार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
ऐसे समय में कल्याणकारी राज्य के नागरिकों, मानवधिकार के शुभचितकों और आम लोगों की जिम्मेदारी है कि सामाजिक न्याय और राज्य हित में जनविरोधी नीतियों रोका जाए। इसके लिए व्यापक जनहस्तक्षेप की जरूरत है। इसी उद्वेश्य से 7 नवंबर 2022 को राजभवन के समक्ष धरना-सभा करने का निर्णय लिया गया है। धरना सभा में राज्य के विभिन्न ग्रामीण इलाकों के आदिवासी, मूलवासी, दलित किसान समुदाय भाग लेगें।
सभा के बाद-मांग पत्र राज्यपाल के नाम, मुख्यमंत्री के नाम, जनजातिय कल्याण मंत्री के नाम, भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग -सचिव के नाम सौपां जाएगा।
आप सभी जानते हैं कि झारखंड में सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, मुंडारी खूंटकटी एवं 5वीं अनुसूचि क्षेत्र के आदिवासी बहुल जिला खूंटी में प्राॅपटी कार्ड बनाने के लिए ड्रोन से जमीन का सर्वे किया जा रहा था, आदिवासी सामाजिक संगठन लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। बगोदर के माले विधायक श्री विनोद कुमार सिंह जी ने 10 मार्च को इस संबंध में विधान खूटी जिला 5वीं अनूसूचि क्षेत्र में आता है, बावजूद इसके ग्राम सभा की सहमति के बिना ही स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति/जमीन का ड्रोन से सर्वे किया जा रहा है। इसके जवाब में स्वंय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने कहा-खूंटी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति और जमीन का डिजिटल सर्वे डा्रेन के जरिए हो रहा था। यह काम केन्द्र सरकार द्वारा किया जा रहा था। इसको लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में संशय की स्थिति है, इसलिए राज्य सरकार इसे फिलहाल होल्ड करने का आदेश देता है। इन्होनें कहा-इस संबंध में जांच करायी जाएगी। बजट सत्र में सीएम के आदेश के तुरंत बाद ड्रोन सर्वे को होल्ड कर दिया गया है। लेकिन यह स्थायी रूप से नहीं।
आप सभी जानते हैं कि केंन्द्र सरकार डिजिटल इंडिया लैंण्ड रिकाॅर्ड अधुनीकिकरण कार्यक्रम लेकर आयी है। इसके तहत देश भर की सभी संपत्ति और जमीन का स्वामित्व कार्ड बनाने जा रहा है। इसके लिए देश के सभी जमीन व संपत्ति का एक सोफटवेयर और हार्डवेयर तैयार कर रही है। जमीन व संपत्ति का ड्रोन सर्वे इसी प्रकिया के तहत खूंटी जिला के गांवों से शुरू किया गया है। पायलट प्रोजेक्ट के पहला चरण में (2022-22) में खूंटी जिला के 725 गांवों का डिजिटल सर्वे पूरा करने के बाद झारखंड के बाकि जिलों में, दूसरे चरण 2022-23 में 12000 गोवों, तीसरे चरण में 20000 गांवों का ड्रोन डिजिटल सर्वे करके डिजिटल नक्सा, खतियान भी बनाया जाएगा। ड्रोन से जमीन व संपत्ति का डिजिटल सर्वे कर संपत्ति/स्वामित्व कार्ड बनाने का काम 2024 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
झारखंड के आदिवासी समुदाय का अपना विशिष्ट इतिहास है। जंगल-जमीन पर अपना परंपरागत संवैधानिक अधिकार है। स्वामित्व योजना के लागू होने से राज्य के आदिवासी समुदाय के सभी परंपरागत संवैधानिक अधिकार स्वातः खत्म हो जाएगा। इसलिए ड्रोन सर्वे जो होल्ड किया गया है को पूरा तरह रदद किया जाना चाहिए।
हमारी मांगें-
1-केंन्द्र सरकार द्वारा काॅरपोरेट घराणों एवं पूंजिपतियों के लिए लायी जा रही स्वामित्व योजना के तहत प्राॅपटी/ संपत्ति कार्ड योजना का लागू नहीं किया जाए।
2-झारखंड में सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, ं 5वीं अनुसूचि एवं पेसा कानून में प्रावधान अधिकारों को कड़ाई से लागू किया जाए।
3-आदिवासी बहुल खूंटी जिला में प्राॅपटी कार्ड बनाने के लिए ड्रोन से जमीन /संपत्ति का सर्वे किया जा रहा था को होल्ड किया गया है, इसको पूरी तरह स्थायी रूप से रोका जाए।
4-रघुवर सरकार ने गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाड़ी जमीन को भूमि बैंक में शामिल किया है, इस भूमि बैंक को रदद किया जाए।
5-राज्य के सभी जलस्त्रोंतों, नदी-नाला, झील-झरना का पानी लिफट ऐरिगेशन के तहत पाइप द्वारा किसानों के खेतों तक कृषि विकास के लिए पहुंचाया जाए।
6-आॅनलाइन जमीन के दस्तावेजों का हो रहा ़क्षेड़-छाड़ को रोका जाए।
7-जमीन का लगान रसीद आॅफलाइन काटा जाए।
8-2013 के जमीन अधिग्रहण कानून को कड़ाई से लागू किया जाए।
9-भूमि बैंक का रदद किया जाए।
10-ग्राम सभा के हक अधिकार, पेसा कानून को कड़ाई से लागू किया जाए।
आयोजक-खतियान-जमीन बचाओं संघर्ष मोर्चा झारखंड
घटक संगठन-केंन्द्रीय जनसंघर्ष समिति-लातेहार, गुमला
आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच
पहाडिया सेवा समिति-साहेबगंज
भूमि बचाव संघर्ष समिति-गोडा
जबड़ा डैम प्रभावित संधर्ष समिति-कर्रा
आजादी बचाओं आंदोलन-हजारीबाग
विस्थापित मुक्ति वाहिनी-चांडिल
आदिवासी जागरूकता मंच-गुमला
आदिवासी एकता मंच
प्रेस वर्ता में -संयोजक दयामनी बरला, रोनाल्ड रिगन खलखो, कुरदुला कुजूर, टोम, मोनोरेन तोपनो, ंललिता तिग्गा, अरूण तोपनो।
धरना का समय - 12 बजे से
स्थान-राजभवन के समक्ष