Tuesday, July 5, 2011

5 july 2011 ko DC Rahula Sharma ko jankari dete pokta panchayat ke gramin



5 july 2011 ko DC Rahula Sharma ko jankari dete pokta panchayat ke gramin



सेवा में,
उपायुक्त महोदय
जिला गुमला पत्रांक 01.2011
दिनांक 5 जुलाई 2011

विषय-मनरेगा योजनाओं में मजदूरों का बकाया मजदूरी भुगतान कराने के संबंध में

महाशय,
आप को सविनय सूचित किया जाता है कि गुमला जिला के बसिया प्रखंड के पोकटा पंचायत में मनरेगा योजना के तहत पंचायत के सभी गांवों में दर्जनों योजनाओं का काम किया गया। सभी योजनओं में गांव के लोग मजदूर के रूप में काम किये। योजना 2006-07 से शुरु हुआ जो आज तक चल रहा है । दुखद बात है कि -इन मजदूरों को काम करने के बाद 2 साल, तीन साल हो गया आज तक मजदूरी नहीं दिया गया। जब मजदूर अपनी मेहनत की कमाई मांगते हैं-तक ठेकेदार, मेठ, दलाल, अधिकारी -देख - लेने की धकमी देते हैं।
इस तरह मजदूरों को शोषण सिर्फ पोकटा पंचायत में ही नहीं हो रहा है बल्कि पूरा प्रखंड में हो रहा है। इसे किसान, आम आदमी का मनोबल टुटता जा रहा है। अतः हम मजदूरों का अग्राह है-हमारा मजदूरी का भुगतान किया जाए, साथ ही हम मजदूरों के सुरक्षा की गारांटी की जाए।
हमारी मांगे
1..मनरेगा योजनाओं में हो रहे अनिमितता को रोका जाए
2-सभी योजनाओं का उच्च स्तरीय चांज किया जाए
3-मजदूरों का लंबित मजदूरी का भुगतान यथाशिघर किया जाए
3-मनरेगा योजनाओं के लाभूकों को योजनाओं को सही तरीके से काम करने के लिए समय पर प्रखंड कार्यालय से भुगतान नही किया जाता है-इसकी जांच की जाए
4-योजनाओं का काम करने में लाभूकों को क्या परेशानी हो रही है-इसकी जानकारी लेने के लिए-उच्च अधिकारियों को गांव में जाकर किसानों से -जिनके नाम पर योजना अबंटित किया गया है-समय समय पर गांव जाकर जांच किया जाए
5-योजनाओं में हो रहे , दलाली, ठेकेदारी बंद किया जाए
6-योजनाओं से बंधित-अधिकारी, मेठ, ठेकेदार मजदूरों के धमकी देते रहेते हैं-इनसे मजदूरों के सुरक्षा की गारंटी किया जाए

निवेदक-पोकटा पंचायत के ग्रामीण-मजदूर

निम्नलिखित योजनाओं में मजदूरों का भुगतान बाकी है-जो हमारे पास है-
गांव लोहडी-
क..1...बड़ा रोड़ लोहडी--अभिकर्ता.................
कुल हजरी-चैका- जो मजदूरों ने काम किया है-जिसका भूगतान नहीं किया गया-1092 हाजरी-चैका......कुल राशि ...............
2...तुलसी बेक का कुंआ लोहड़ी- कुल हाजरी....178 हाजरी-चैका....राशि ......
3...लोहड़ी तालाब-कुल हाजरी 140 चैका...राशि ........
4...अखड़ा निर्माण...कुल हाजरी बाकी....63 चैका...राशि ...
5....लालपूर डैम कुल हाजरी-चैका....80.राशि ............
6.....लिफट एरिगेशन...कुल 75 चैका...राशि ............
ख..1..बंगरकेला डाहुटोली रोड़...अभिकर्ता...
कुल हाजरी-349 चैका.-राशि ...(जोड़ना बाकी है-बेलस बेक का, लजरूस बेक, रहेमन बेक, भिनसेंट बेक, अनमोल बेक)
ग-पोकटा गांव गडवाल निर्माण....कुल हाजरी..305 चैका राशि .......
(पैरा का जोड़ना बाकी है)
घ -करम टोली रोड़---कुल हाजरी...50 चैका राशि ....
ड.-जंगली गेपा से बुढहा अम्बा-कुल हाजरी-392 चैका-राशि .....


मनरेगा योजना में धनराशी का लूट किस चरम पर है, साथ ही मजदूरों का शोषण किस हद तक हो रहा है यह समझने के लिए यह रिर्पोट काफी होगा। गुमला जिला के बसिया प्रखंड के पोकटा पंचायत के गा्रम पोकटा में बांध मरम्मति के लिए स्वीकृति राशि -13,00,000 (तरह लाख) जिला योजना से स्वीकृत की गयी है। जिसका योजना संख्या 1-2010 है। इस योजना का एकरारनामा प्रखंड के पदाधिकारी श्री रामकृष्ण ओहदार के नाम से है। जिसको मेट श्री नवीन कुमार सिंह कार्य करा रहा हैं। इस योजना में करीब 200 लोग माटी काटने-उठाने का काम किये। मनरेगा योजना में धनराशी का लूट किस चरम पर है, साथ ही मजदूरों का शोषण किस हद तक हो रहा है यह समझने के लिए यह रिर्पोट काफी होगा। गुमला जिला के बसिया प्रखंड के पोकटा पंचायत के गा्रम पोकटा में बांध मरम्मति के लिए स्वीकृति राशि -13,00,000 (तरह लाख) जिला योजना से स्वीकृत की गयी है। जिसका योजना संख्या 1-2010 है। इस योजना का एकरारनामा प्रखंड के पदाधिकारी श्री रामकृष्ण ओहदार के नाम से है। जिसको मेट श्री नवीन कुमार सिंह कार्य करा रहा हैं। इस योजना में करीब 200 लोग माटी काटने-उठाने का काम किये। मजदूर कहते हैं-पानी केवल पी पी कर हम लोग मिटटी काटे। महिलाएं कहती हैं-बच्चों को धूप में सूखा सूखा कर काम किये ताकि बच्चों के लिए एक रोटी का जुगाड़ हो। धूप में काम करते करते बीमार हो गये। लेकिन हम लोगों को आज तक मजदूरी नहीं मिला। मजदूरों ने कितना दिन काम किये, कितना चैका कोडे+, इसमें से क्या उनको क्या मिला-इसका लंबा सूची बनाये। मजदूरों का कहना है-हम लोग खून पसीना बहाऐ तो-अपना मजदूरी तो लेंगे ही। मजदूरों का शिकायत है-कि जब भी पैसा मांगने गये-मेट हमेशा घुमाते रहे। कभी बोलते हैं-बाजार में देगें, बाजार में मांगने पर कहते हैं -अभी पैसा नहीं है, कल घर में ही दे देगें। मजदूरों को मजदूरी दिलाने का प्रयास पोकटा ग्राम पंचायत के वार्ड पर्षद श्री चंन्द्रशेखर सिंह तथा सामाजिक कार्यकार्ता नीलिमा इंन्दार कर रहे हैं। इन लोगों को तैयार सूची यहां पर रखा जा रहा है कि-विकास के नाम पर लाखों धन राशि केंद्र से आ रहा है-लेकिन मजदूरों को उनकी कमाई की राशि नहीं मिल पा रही है। दूसरी ओर मजदूर जब अपनी कमाई के लिए मुंह खोलते हैं तो-उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। इस लूट में कौन शामिल हैं, किनके संरक्षरणा में यह फल-फूल रहा है -इसका जांच करना सरकारी मशीनरी के साथ समाज के शुभचितंको की भी जिम्मेवारी है। विविद हो कि काम 2010 -11 में किये हैं, इसका सरकारी रेट क्या है, इसके आधार पर प्रत्येक मजदूर का कितना बाकाया है, इसका कुलराशि निकाल सकते हैं। 2010 के पहले
99 रू था। लोगों ने बताया-एक चैका खोदने में जो मजदूरी मिलता है वही मजदूरी एक दिन हाजरी काम करने पर मिलता हैं। इसलिए मजदूरों ने अपना काम कहीं कही चैका में बताया तो कहीं कहीं हाजरी में बताया हैं। यहां मजदूर द्वारा किया गया काम दर्शाया गया है-साथ ही उन्हें कितना मिला है यह राशि दर्शाया गया है। कितना नहीं मिला यह आप स्वंय भी निकाल सकते हैं। यहां कुछ ही लोगों कि सूची दी गयी है-इसके आलावे और भी मजदूर हैं-जिनको मजदूरी नहीं मिला है।
क्रा नाम काम अब तक जो मिला है
1 पुष्पा ----- 18 दिन ----- 600.00
2 सिसलिया --- 11 दिन ------ 300.00
3 पुष्पा बाड़ा ---- 24 दिन ------ 900.00
4 पुष्पा बाड़ा ----- 8 चैका ----- 500.00
5 बलमदीना ----- 10 चैका--------------------
30 दिन हाजरी --- ---- 400.00
------- 500.00

6 बिमल कूजूर --- 5 चैका --- 0000.00
7 जशोदा देवी --- सढ़े 19 हाजरी --- 200.00
8 ज्गना कुजूर -- 16 हाजरी में
18 चैका में ----- 700.00
----- 700.00

9 हीरा इंन्दवार --- सढ़े 15 हाजरी में ---- 600.00
10 मनको इंन्दवार -- 4 हाजरी
12 चैका में ------ 900.00
11 कृष्णा उरांव -- 24 चैका में ----- 1200.00
12 म्मता कुजूर -- 6 हाजरी में ---- 400.00
13 द’ााई कुजूर -- 16 चैका में ---- 700.00
14 फुलमनी कुजूर - 13 दिन में ----- 200.00
15 क्ेवरा मिंज -- 30 हाजरी में --
16 मंगो कुजूर -- 10 दिन में ----- 200.00
17 कैरी मिंज, एमेलडा बिलुग के साथ 73 चैका में ------- 3400.00
18 कैरी मिंज -- ढ़ाई दिन हाजरी ------ .00.00
19 गोवरधन मिंज -- 45 दिन में ------ 1000.00
20 संध्या सोरेग --- 15 दिन में ------ 500.00
21 इग्नासियुस --- सढ़े 21 चैका में ------ 1000.00
22 गुडिया कुमारी -- 15 दिन में ------ 600.00
23 संतोषी कुमारी -- 13 दिन में ------ 400.00
24 बलचंद हजाम -- 8 चैका में ------ 600.00
25 गीता हजाम -- 26 दिन में ------ 500.00
26 हरिहर हजाम --- 16 चैका में ---- 1000.00
27 अरूण कुलू --- 10 दिने में --- 100.00
28 प्रिबा देवी ---25 दिन में ---- 500.00
29 प्रिबा देवी -- 13 चैका में ----- 600.00
30 रोशा बिलुंग -- 12 दिन में -------- 200.00
31 रेशमा बिलुंग -- 4 दिन में ------ 100.00
32 रोमा बिलुंग ---- 4 दिन में ---- 300.00
33 लीला देवी -- 17 दिन में ----- 300.00
34 हिन्दू देवी -- 10 हाजरी--
10 चैका में ------- 600.00
35 मुनी देवी -- सढ़े 10 दिन में ------ 500.00
36 लखन लोहरा -- 13 चैका---
4 हाजरी में -------- 700.00
37 रूकमनी देवी -- 4 हाजरी में ------- 100.00
38 सुशीला कुजूर - 17 दिन में -------- 1000.00
39 अंशु सिंह -15 हाजरी में -------- 200.00
40 जगमती देवी -- सढ़े 14 दिन में ------- 700.00
41 बसंती देवी - 15 दिन में --------- 600.00
42 करमु बार्डक --20 चैका में ------- 900.00
43 संतोष नाएक -- 13 हाजरी में ------- 800.00
44 जनकी कुमारी -- सढ़े 7 दिन में -------- 200.00
45 सुकरो उरांव -- 7 दिन में ------- 400.00
46 बिंदेयवरी बडाईक और रंजीत बड़ाईक 36 चैका में ------- 1700.00
47 सेमारी देवी -- 14 हाजरी में ----- 500.00
48 सनियारो कुजूर -- 9 हाजरी में ------ 600.00
49 बेलू बडईक -- 20 दिन में ------ 800.00
50 चिंता देवी --सढ़े 18 दिन में ------ 600.00
51 जौनी कुजूर -- 22 दिन में ------- 700.00
52 सुकरो देवी -- 7 दिन में ------- 00.00
53 करमु उरांव 46 चैका में
18 चैका में -------- 1200.00
--------- 1000.00
54 अनुपा कुमारी -- 8 दिन में ------ 100.00
55 ऋृतु कुमारी -- 8 दिन में ------ 100.00
56 पायों कुजूर -- 8 दिन में ------ 200.00
57 जतरी कच्छप - 7 दिन में ------ 400.00
58 अनीमा ---- 10 दिन में ---- 700.00
59 सशनी ---- 8 दिन में ---- 500.00
60 ज्वाकिम कुजूर -- 17 चैका में ----- 1100.00
61 प्रतिमा --- 7 दिन में -- 400.00
62 भादरो उरांव -- 11 चैका में ----- 200.00
पोकटा नवा टोली
63 कुंवर महतो -- सढ़े 14 चैका में १----- 100.00
64 बलि महतो
और रूदी देवी
8 चैका में-----
2 चैका ---- 500.00
00.००------
65 सेमरा उरांव --- 18 चैका - 900.00
66 सर’वाती कुमारी -- 14 चैका में --- 800.00
67 जितवाहन महतो -- 14 चैका में --- 800.00
68 दुर्गा उरांव -- 16 चैका में --- 700.00
69 लगुदूर उरांव -- 31 चैका में सढे में 12 चैका का मिला
70 रामु उरांव -- 29 चैका में ---- 1100.00
71 कर्मी कुमारी -- 13 चैका में ---- 1100.00
72 स्ुाकरा उरांव -- सढ़े 21 चैका में --- 1100.00
73 रमनी उरांव -- सढ़े 20 चैका में --- 1100.00
74 अघनु उरांव -- 12 चैका में --- 500.00
75 बिरमनी इंन्दुवार - 21 चैका में --- 700.00
76 रजनी इंदवार -- 9 चैका में -- 500.00
77 सोनामती देवी -- 22 हाजरी में
10 चैका मेे ------ 500.00
==== 900.00
78 बसंती देवी -- 7 हाजरी में
7 चैका में ------ 500.00
------ 400.00
79 ग्लोरिया मिंज -- 8 दिन में ---- 700.00
80 अब्रेन महली -- 8 दिन में ----- 700.00
81 अरसालेयानी डांग -- 10 हाजरी में ----- 100.00
82 संगीता देवी -- 6 दिन में ----- 300.00
83 सुकर उरांव -- 25 चैका में ----- 300.00
84 बबीता उरांव -- सढ़े 13 हाजरी में ------ 200.00
85 मनीषा कुजूर ---- 7 चैका में --- 300.00
86 मंगरी देवी --- सढ़े 22 दिन में ----- 800.00
87 बहन उरांव -- 16 चैका में ------ 500.00
88 वरेन डांग --- 11 चैका में ---- 300.00
89 शांति देवी -- 21 दिन हाजरी में ----- 700.00
90 बुधवा चीक बड़ाईक --- 22 चैका में --- 700.00
91 सुगी देवी -- 17 हाजरी में ----- 600.00
92 रबी बड़ाईक -- 20 चैका में ----- 700.00
93 जितेंन्द्र बड़ाईक -- 10 चैका में ----- 500.00
94 एतवा उरांव -- 27 चैका में --- 1400.00


नीचे जो सूची दी जा रही है-यह उन मजदूरों का है जो-जिन्होंने बताया कि-उत्क राशि उन्हें नहीं मिला है। यह सूची ग्राम पोकटा के वार्ड पषर्द श्री चंन्द्रशेखर सिंह द्वारा तैयार किया गया है-जो मजदूरों के बकाया मजदूरी दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। यह सूची भी पोकटा बांध के मजदूरों से ही संबंधित है।
क्रा नाम बकायी राशि मजदूरी
१ शुगन देवी------ 1100.00
2 शंकर हजाम ------- 1100.00
3 सीता देवी ------- 1500.00
4 सहवईज देवी ------- 1300.00
5 सीता देवी ------ 2100.00
6 कार्तिक उरांव ------ 2200.00
7 अजित singh ------ 5000.00
8 बनू उरांव ------- 1000.00
9 कुंती देवी ------- 1000.00
10 मीना देवी -------- 900.00
11 हीरा उरांव -------- 9500.00
12 बिरश खडिया --------- 1800.00
13 शशि सिंह --------- 1100.00
14 ‘शनिचर खडिया ----------- 700.00
15 sushila कुमारी ------------ 1500.00
16 बाल कुंवार महली ------------ 1200.00
17 बबीता कुमारी ---------- 1100.00
18 तोपन लोहरा ----------- 1300.00
19 रीबा कुमारी ------------ 400.00

20 सवित्री ----------- 400.00
21 चेरो उरांव ----------- 800.00
22 संध्या कुमारी ------- 1100.00
23 गेवधन उरांव ---------- 3500.00
24 नारू उरांव ----------- 300.00
25 सेलीन कुजूर --------- 1700.00
26 मरसा डांग ---------- 100.00
27 बुकला सिंह --------- 1300.00
28 सरवा देवी --------- 400.00

। धूप में काम करते करते बीमार हो गये। लेकिन हम लोगों को आज तक मजदूरी नहीं मिला। मजदूरों ने कितना दिन काम किये, कितना चैका कोडे+, इसमें से क्या उनको क्या मिला-इसका लंबा सूची बनाये। मजदूरों का कहना है-हम लोग खून पसीना बहाऐ तो-अपना मजदूरी तो लेंगे ही। मजदूरों का शिकायत है-कि जब भी पैसा मांगने गये-मेट हमेशा घुमाते रहे। कभी बोलते हैं-बाजार में देगें, बाजार में मांगने पर कहते हैं -अभी पैसा नहीं है, कल घर में ही दे देगें। मजदूरों को मजदूरी दिलाने का प्रयास पोकटा ग्राम पंचायत के वार्ड पर्षद श्री चंन्द्रशेखर सिंह तथा सामाजिक कार्यकार्ता नीलिमा इंन्दार कर रहे हैं। इन लोगों को तैयार सूची यहां पर रखा जा रहा है कि-विकास के नाम पर लाखों धन राशि केंद्र से आ रहा है-लेकिन मजदूरों को उनकी कमाई की राशि नहीं मिल पा रही है। दूसरी ओर मजदूर जब अपनी कमाई के लिए मुंह खोलते हैं तो-उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है। इस लूट में कौन शामिल हैं, किनके संरक्षरणा में यह फल-फूल रहा है -इसका जांच करना सरकारी मशीनरी के साथ समाज के शुभचितंको की भी जिम्मेवारी है। विविद हो कि काम 2010 -11 में किये हैं, इसका सरकारी रेट क्या है, इसके आधार पर प्रत्येक मजदूर का कितना बाकाया है, इसका कुलराशि निकाल सकते हैं। 2010 के पहले
99 रू था। लोगों ने बताया-एक चैका खोदने में जो मजदूरी मिलता है वही मजदूरी एक दिन हाजरी काम करने पर मिलता हैं। इसलिए मजदूरों ने अपना काम कहीं कही चैका में बताया तो कहीं कहीं हाजरी में बताया हैं। यहां मजदूर द्वारा किया गया काम दर्शाया गया है-साथ ही उन्हें कितना मिला है यह राशि दर्शाया गया है। कितना नहीं मिला यह आप स्वंय भी निकाल सकते हैं। यहां कुछ ही लोगों कि सूची दी गयी है-इसके आलावे और भी मजदूर हैं-जिनको मजदूरी नहीं मिला है।
क्रा नाम काम अब तक जो मिला है
1 पुष्पा ----- 18 दिन ----- 600.00
2 सिसलिया --- 11 दिन ------ 300.00
3 पुष्पा बाड़ा ---- 24 दिन ------ 900.00
4 पुष्पा बाड़ा ----- 8 चैका ----- 500.00
5 बलमदीना ----- 10 चैका--------------------
30 दिन हाजरी --- ---- 400.00
------- 500.00

6 बिमल कूजूर --- 5 चैका --- 0000.00
7 जशोदा देवी --- सढ़े 19 हाजरी --- 200.00
8 ज्गना कुजूर -- 16 हाजरी में
18 चैका में ----- 700.00
----- 700.00

9 हीरा इंन्दवार --- सढ़े 15 हाजरी में ---- 600.00
10 मनको इंन्दवार -- 4 हाजरी
12 चैका में ------ 900.00
11 कृष्णा उरांव -- 24 चैका में ----- 1200.00
12 म्मता कुजूर -- 6 हाजरी में ---- 400.00
13 द’ााई कुजूर -- 16 चैका में ---- 700.00
14 फुलमनी कुजूर - 13 दिन में ----- 200.00
15 क्ेवरा मिंज -- 30 हाजरी में --
16 मंगो कुजूर -- 10 दिन में ----- 200.00
17 कैरी मिंज, एमेलडा बिलुग के साथ 73 चैका में ------- 3400.00
18 कैरी मिंज -- ढ़ाई दिन हाजरी ------ .00.00
19 गोवरधन मिंज -- 45 दिन में ------ 1000.00
20 संध्या सोरेग --- 15 दिन में ------ 500.00
21 इग्नासियुस --- सढ़े 21 चैका में ------ 1000.00
22 गुडिया कुमारी -- 15 दिन में ------ 600.00
23 संतोषी कुमारी -- 13 दिन में ------ 400.00
24 बलचंद हजाम -- 8 चैका में ------ 600.00
25 गीता हजाम -- 26 दिन में ------ 500.00
26 हरिहर हजाम --- 16 चैका में ---- 1000.00
27 अरूण कुलू --- 10 दिने में --- 100.00
28 प्रिबा देवी ---25 दिन में ---- 500.00
29 प्रिबा देवी -- 13 चैका में ----- 600.00
30 रोशा बिलुंग -- 12 दिन में -------- 200.00
31 रेशमा बिलुंग -- 4 दिन में ------ 100.00
32 रोमा बिलुंग ---- 4 दिन में ---- 300.00
33 लीला देवी -- 17 दिन में ----- 300.00
34 हिन्दू देवी -- 10 हाजरी--
10 चैका में ------- 600.00
35 मुनी देवी -- सढ़े 10 दिन में ------ 500.00
36 लखन लोहरा -- 13 चैका---
4 हाजरी में -------- 700.00
37 रूकमनी देवी -- 4 हाजरी में ------- 100.00
38 सुशीला कुजूर - 17 दिन में -------- 1000.00
39 अंशु सिंह -15 हाजरी में -------- 200.00
40 जगमती देवी -- सढ़े 14 दिन में ------- 700.00
41 बसंती देवी - 15 दिन में --------- 600.00
42 करमु बार्डक --20 चैका में ------- 900.00
43 संतोष नाएक -- 13 हाजरी में ------- 800.00
44 जनकी कुमारी -- सढ़े 7 दिन में -------- 200.00
45 सुकरो उरांव -- 7 दिन में ------- 400.00
46 बिंदेयवरी बडाईक और रंजीत बड़ाईक 36 चैका में ------- 1700.00
47 सेमारी देवी -- 14 हाजरी में ----- 500.00
48 सनियारो कुजूर -- 9 हाजरी में ------ 600.00
49 बेलू बडईक -- 20 दिन में ------ 800.00
50 चिंता देवी --सढ़े 18 दिन में ------ 600.00
51 जौनी कुजूर -- 22 दिन में ------- 700.00
52 सुकरो देवी -- 7 दिन में ------- 00.00
53 करमु उरांव 46 चैका में
18 चैका में -------- 1200.00
--------- 1000.00
54 अनुपा कुमारी -- 8 दिन में ------ 100.00
55 ऋृतु कुमारी -- 8 दिन में ------ 100.00
56 पायों कुजूर -- 8 दिन में ------ 200.00
57 जतरी कच्छप - 7 दिन में ------ 400.00
58 अनीमा ---- 10 दिन में ---- 700.00
59 सशनी ---- 8 दिन में ---- 500.00
60 ज्वाकिम कुजूर -- 17 चैका में ----- 1100.00
61 प्रतिमा --- 7 दिन में -- 400.00
62 भादरो उरांव -- 11 चैका में ----- 200.00
पोकटा नवा टोली
63 कुंवर महतो -- सढ़े 14 चैका में १----- 100.00
64 बलि महतो
और रूदी देवी
8 चैका में-----
2 चैका ---- 500.00
00.००------
65 सेमरा उरांव --- 18 चैका - 900.00
66 सर’वाती कुमारी -- 14 चैका में --- 800.00
67 जितवाहन महतो -- 14 चैका में --- 800.00
68 दुर्गा उरांव -- 16 चैका में --- 700.00
69 लगुदूर उरांव -- 31 चैका में सढे में 12 चैका का मिला
70 रामु उरांव -- 29 चैका में ---- 1100.00
71 कर्मी कुमारी -- 13 चैका में ---- 1100.00
72 स्ुाकरा उरांव -- सढ़े 21 चैका में --- 1100.00
73 रमनी उरांव -- सढ़े 20 चैका में --- 1100.00
74 अघनु उरांव -- 12 चैका में --- 500.00
75 बिरमनी इंन्दुवार - 21 चैका में --- 700.00
76 रजनी इंदवार -- 9 चैका में -- 500.00
77 सोनामती देवी -- 22 हाजरी में
10 चैका मेे ------ 500.00
==== 900.00
78 बसंती देवी -- 7 हाजरी में
7 चैका में ------ 500.00
------ 400.00
79 ग्लोरिया मिंज -- 8 दिन में ---- 700.00
80 अब्रेन महली -- 8 दिन में ----- 700.00
81 अरसालेयानी डांग -- 10 हाजरी में ----- 100.00
82 संगीता देवी -- 6 दिन में ----- 300.00
83 सुकर उरांव -- 25 चैका में ----- 300.00
84 बबीता उरांव -- सढ़े 13 हाजरी में ------ 200.00
85 मनीषा कुजूर ---- 7 चैका में --- 300.00
86 मंगरी देवी --- सढ़े 22 दिन में ----- 800.00
87 बहन उरांव -- 16 चैका में ------ 500.00
88 वरेन डांग --- 11 चैका में ---- 300.00
89 शांति देवी -- 21 दिन हाजरी में ----- 700.00
90 बुधवा चीक बड़ाईक --- 22 चैका में --- 700.00
91 सुगी देवी -- 17 हाजरी में ----- 600.00
92 रबी बड़ाईक -- 20 चैका में ----- 700.00
93 जितेंन्द्र बड़ाईक -- 10 चैका में ----- 500.00
94 एतवा उरांव -- 27 चैका में --- 1400.00


नीचे जो सूची दी जा रही है-यह उन मजदूरों का है जो-जिन्होंने बताया कि-उत्क राशि उन्हें नहीं मिला है। यह सूची ग्राम पोकटा के वार्ड पषर्द श्री चंन्द्रशेखर सिंह द्वारा तैयार किया गया है-जो मजदूरों के बकाया मजदूरी दिलाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। यह सूची भी पोकटा बांध के मजदूरों से ही संबंधित है।
क्रा नाम बकायी राशि मजदूरी
१ शुगन देवी------ 1100.00
2 शंकर हजाम ------- 1100.00
3 सीता देवी ------- 1500.00
4 सहवईज देवी ------- 1300.00
5 सीता देवी ------ 2100.00
6 कार्तिक उरांव ------ 2200.00
7 अजित singh ------ 5000.00
8 बनू उरांव ------- 1000.00
9 कुंती देवी ------- 1000.00
10 मीना देवी -------- 900.00
11 हीरा उरांव -------- 9500.00
12 बिरश खडिया --------- 1800.00
13 शशि सिंह --------- 1100.00
14 ‘शनिचर खडिया ----------- 700.00
15 sushila कुमारी ------------ 1500.00
16 बाल कुंवार महली ------------ 1200.00
17 बबीता कुमारी ---------- 1100.00
18 तोपन लोहरा ----------- 1300.00
19 रीबा कुमारी ------------ 400.00

20 सवित्री ----------- 400.00
21 चेरो उरांव ----------- 800.00
22 संध्या कुमारी ------- 1100.00
23 गेवधन उरांव ---------- 3500.00
24 नारू उरांव ----------- 300.00
25 सेलीन कुजूर --------- 1700.00
26 मरसा डांग ---------- 100.00
27 बुकला सिंह --------- 1300.00
28 सरवा देवी --------- 400.00

5 july 2011 ko DC Rahul Sarma ko jankari dete pokta panchayat ke gramin

Sunday, July 3, 2011

SARKARI ADHIKARI JANTA KE PRATI KYON IMANDAR NAHI HAIN ?



2 July 2011 ko ..meeting ke liye co karra ka Notice


17 march 2011 ko meeting ke liye..co karra ka notice..

karra co ka RTI replly...


karra co..ka RTI ka repply

RTI me manga gaya...jankari...

Saturday, July 2, 2011

हम किसी भी कीमत में डैम बनने नहीं देंगे. हमारे पूर्वजों की एक इंच जमीन नहीं देंगे

ठेकेदार-माफिया और भ्रष्ट आधिकारी, राजनीतिक गंठजोड़ की जडें झारखंड में बहुत हो चुकी हैं। इसको उखाड़ फेंकना सबकी जिम्मेवारी बनती है। कई अधिकारी इस व्यवस्था को खत्म करना चाहते हैं, लेकिन उनके मतहत काम करने वाले कई अधिकारी इस को बरकारार रखना चाहते हैं, ताकि जानता का हक इनके पाकेट में कैद रहे। और जनहित में जो भी संसाधन केंद्र और राज्य से आबंटित हो, सीधे उनके पोकेट में चला आए। आज इस व्यवस्था को मजबूती देने वाले बहु संख्यक में हैं। इसकी पूष्टि यहां उल्लेखित घटना से होती है।

खूंटी जिला के कर्रा प्रखंड में घोरपिंडा, जबड़ा, जोन्हे, लुदरू, कांटी गांवो से होते हुए बह रही छाता नदी में जलपथ प्रमंडल धु्रर्वा 65 करोड़ का डैम बनाने जा रही है। इस योजना का डेंडर निकाला गया। जलपथ प्रमंडल के अधिकारियों के साथ, Triveni Engicons pvt.ltd ने 2008 में ठेका का काम तय किया गया।

ग्रामीणों द्वारा लगातार विरोध के बाद, इस योजना के संबंध में जानकारी देने के लिए 17 मार्च 11 को एस डी ओ, खूंटी, अपर समाहर्ता खूंटी , बिशेष भूअर्जन पदाधिकारी रांची, जलपथ प्रमडल ध्रुवा रांची के कार्यपालक अभियंता, आंचल अधिकारी तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी नवनिर्वाचित पंचायत समिति सदस्यों को प्रखंड के किसान भवन में बैठक के लिए बुलाये थे। विदित हो कि 25 मार्च 2011 को सरकारी अधिकारी इस परियोजना को लेकर मेरले में ग्राम सभा बुलाये थे। इसकी तैयारी बैठक के रूप में,17 मार्च को किसान भवन में बैठक बुलाया गया था।

उपस्थित ग्रामीणों ने यहां किसी तरह का डैम बनाने नहीं देगें-कहते हुए बैठक का बहिष्कार किया। इसके बाद सभी अधिकारी बी डी ओ के चैमबर में बैठे। वहां इन सभी अधिकारिय यह तैयारी बैठक था। अधिकारियों से इस संदर्भ में हमने कई सवाल पूछा। बिशेष भूआर्जन पदाधिकारी, अपर समाहर्ता , एस डी ओ, सभी अधिकारियों ने कहा-बिशेष भूअर्जन विभाग द्वारा जमीन का मापी करने, जिनकी जमीन जाएगी-उन किसानों का सही पहचान करने, जमीन का 80 प्रतिशत मुआवजा भुगतान करने के बाद ही जमीन पर किसी तरह का काम शुरू किया जा सकता है। जमीन किसानों की है उनकी सहमति के बिना जमीन अधिग्रहण नहीं किया जा सकता है। लेकिन यहां जमीन का मापी किये बिना, मुआवजा का भुगतान किये बिना काम शुरू किया गया-यह गलत हुआ है। लेकिन जलपथ प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता नहीं मानते हैं कि गलती हुआ है।

25 मार्च 2011 को मेरले गांव में आयोजित सरकारी ग्राम सभा को अचानक ही स्थागित कर दिया गया। इस संबंध में जानकारी मिलने पर मैंने 24 मार्च शाम को एस. डी. ओ. से पूछी कि, कल का बैठक क्यों स्थागित किया गया? इसके जवाब में -एस. डी. ओ. साहब ने कहा-क्या पता क्यों स्थागित किया गया है-सी ओ का लेटर आया है, इसमें -कहा है अपरिहर्या कारणों से सथागित किया जा रहा है.। आप से इसके लिए कोई सहमति ली गयी थी-यह नहीं?। इस पर अधिकारी ने जवाब दिये-नहीं। मैंने क्यों स्थागित किया गया-इस संबंध में जानकारी लेने के लिए सी ओ श्री कमलाकांत गुप्ताजी से फोन पर पूछी-तो इन्होंने कहा-उपायुक्त साहब ने स्थागित करने के लिए बोले हैं-अभी मार्च क्लोजिंग है।

मैंने 25 मार्च 2011 को उपायुक्त साहब से पूछी-सर आज का बैठक में आप आ रहे हैं? उन्होंने पूछा-कौन सा बैठक, सर कर्रा वाला। अच्छा-जबड़ा डैम वाला ना? जी-उपायुक्त साहब ने कहा-इस बैठक को सीओ साहब ने स्थागित कर दिया है-हमको पत्र भेज कर सूचना दिया है। मै उपायुक्त साहब से पूछी-सर किस कारण से स्थागित किये हैं-कारण बताये होगें ना सीओ साहब?। उपायुक्त ने कहा-नहीं उसी से पूछियेगा-क्यों उनहोंने ही स्थागित किया। मैंने फिर सीओ साहब को फोन कर बोली-उपायुक्त साहब तो बोल रहे हैं-नहीं जानते हैं सीओ साहब ने क्यों स्थागित किया है। इस पर सीओ बोलते हैं-हां हल्का से उपायुक्त साहब बोले थे-मार्च के बारे। हां निर्णय लेते समय अपर समाहर्ता और इक्जीक्यूटिव इंजीनियर साहब थे। मैंने अपर समाहर्ता श्री केरकेटा जी को फोन कर इस संबंध में पूछी-इन्होंने कहा-नहीं मुझको नहीं पता कि किस कारण से बैठक स्थागित किया गया है-हम को तो एक पत्र आया है, इसी से जान रहे हैं कि-बैठक स्थागित किया गया है.
अधिकारीयों ऩे २० जून को फिर से इसके लिए बैठक बुलाये...जिसमे नवनिर्वाचित पंचायत सदस्याओं ..महिला समिति..एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था..इस बैठक का भी ग्रामीणों ऩे बहिष्कार किया..और लुद्रू, जोंहे, घोर्पिंडा , जबड़ा, जुर्दाग, काँटी आदि गाँव से कोई भी ग्रामीण नहीं आया..
सरकार की दो मुह बयां अब सामने आने लगा है...पहले सरकारी अधिकार आर टी आई में मांगी गयी जानकारी में लिखित जानकारी दिये हैं..की यंहा दाम का काम हो रहा है..इसकी जानकारी प्रखंड और आँचल कार्यालय को नहीं है..आज २ जुलाई को फिर से आज्चल कार्यालय से ग्रामीणों को सुचना दिया गया है..इसमें कहा गया है की २०१० में डैम का काम संवेदक ऩे शुरु किया था..बिरोध के कारण रुक गया..आता इसकी ..डैम के संबंद में जानकारी देने के लिए २ जुलाई को किसान भवन कर्रा में बैठक होगी जिसमे पहले की तरह ही पचायत सदस्यों को बाजूला गया था..
सुखद बात तो यह रहा की...आज भी लुद्रू, घोर्पिंडा, जबड़ा और जोंहे के ग्रामीणों ऩे प्रखंड कार्यालय जा कर ..अपना संकल्प दुहराया..हम किसी भी कीमत में डैम बनने नहीं देंगे. हमारे पूर्वजों की एक इंच जमीन नहीं देंगे. इसके साथ ही फिर से मांग पत्र .B D O को दिया गया..मज़ेदार की बात तो यह है..की जिला मुखियालय से अधिकारी भी..बैठक के लिए आये थे, जिला परिसद chairmen , जिला परिषद् सदस्य भी आये थे..बैठक में समिल होने..लेकिन ग्रामों का बिरोध देख कर वापस चलेगए..

Thursday, June 30, 2011

आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच की बचनब्दता -२९- 30 जून २०११



SANKALAP LETA...ADIVASI MULVASI ASTITVA RAKCHA MANCH

आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच

खूंटी -गुमला
आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच की बचनब्दता -२९- 30 जून २०११
द्वितीय शहादत सह संल्कप दिवस-कोरको टोली-तोरपा -खूंटी
समुन्नत झारखंड और नवझारखंड के लिए आदिवासी मूलवासी अस्त्त्वि रक्षा मंच लगातार संघर्षशील है। हमरा संघर्ष और निर्माण का स्वप्न एक ऐसी जनराजनीति से निर्देशित है जिसकी दिशा हूलगुलान के शहीदों और बिचारकों ने ही तय कर दिया था। झारखंड राज्य गठन के बाद हमारी चुनौती और हमारा दायित्व और ज्यादा गहन हो गया है। हमने देखा है कि झारखंड कारपोरेट घरानों के निशाने पर है और झारखंड की अधिकांश राजनीति इन निगमों का पिछलग्गू बन गयी है। यह सारी दुनिया के आदिवासी-मूलवासियों के संसाधनों की लूट कर पूंजीपतियों की आर्थिक संरचना का दौर है। साथ ही जनता द्वारा चुने गये जनप्रतिनिधियों का पूंजिपतियों के साथ गांठजोड़ की राजनीति कर यहां के प्रकृतिक संसाधनों का दोहन दिया जा रहा है। ऐसे दौर में आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच का साफ मानना है कि हम एक समुन्नत समाज के नवनिर्माण की नई जनराजनीतिक चेतना का विकास के पहल से ही हालात को बदल सकते हैं और इसके लिए हम सब को अपने बिचारों की धार को तेज करना होगा। कोई भी समाज या जनसंगठन बिना विचार के न तो जीवित रह सकता है और न ही वह समकालीन चुनौतियों का पूरी तत्पराता के साथ मुकाबला कर सकता है। हम उन खतरों से वाकिफ हैं जो हमारे इर्दगिर्द मौजूद है। हमारी भाषा, संस्कृति, लोकाचार और हमारी आजीविका की संस्कृति तथा परंपरागत हुनर, तकनीक और कृर्षि-जंगल आधारित आजीविका को न केवल खत्म करने की कोशिश की जा रही है बल्कि इसे अवैज्ञानिक समझ साबित कर विनाशाकारी विकास की परियोजनाओं को थोपने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसी विकास नीति के पक्ष में बात की जा रही है जिससे न केवल परस्थिकीय संकट खड़ा हुआ है बल्कि धरती और जीवन ही संकटग्रस्त हो गया है। झारखंड की त्रासदी यह है कि झारखंडी समाज और संस्कृति में अंतरनिहित वैज्ञानिक समुन्नति की प्रक्रियाओं और प्रवृतियों को ही खारिज कर देने के लिए माहौल बनाया जा रहा है। इतिहास साक्षी है और हमारे शहीदों के विचार बताते हैं कि झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों ने जिस तरह के लयात्मक समन्वय की सामाजिक चेतना का सृजन किया था उसे और गतिशील बना कर ही संकट का न केवल मुकाबला किया जा सकता है बल्कि झारखंड के नवनिर्माण का भावी मार्ग को भी प्रशस्त किया जा सकता है। झारखंडी जनगण के सामूहिक विवेक और इतिहास चेतना में जिस तरह की राजनीतिक विरासत मौजूद है वह हमारी सबसे बड़ी ताकत है। यह न केवल सामुदायिकता और समानता के मूल्यों पर आधरित जनतंत्र की विरासत है बल्कि इसमें स्त्री पुरूष की समानता का मूल्य जीवंत है. विभिन्न कारकों और सांस्कृतिक हमलों के कारण जो विघटन हुआ है उसे पहचानने की जरूरत है और यह समझ स्पस्ट करने की जरूरत है कि झारखंड के आदिवासी मूलवासी जनगण का संघर्ष न केवल स्थानीय स्तर पर परंपरा की रूढि़यों और रूकावटों को खत्म कर एक नए समाज के निर्माण के दिशा में आगे बढ़ने के लिए है और इसके विचार और सिद्धांत के लिए दीर्घकालिक सामाजिक चेतना हमें प्रेरित करती है
झारखंड के आदिवासियों और मूलवासियों का सपना दिनां दिन कठिन होता जा रहा है. झारखंड को एक ऐसे मुकाम पर पहुंचा दिया गया है जहां भविष्य बहुत अंधकारमय दिखता है. इससे बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता जनसंघर्ष को तेज करना और उसके आधार पर एक नई जनराजनीतिक बहस और चरित्र का निर्माण करना है। हमें यह बताना होगा कि झारखंडी मूल्य और विचार क्या हैं तथा उसे जीवन में किस तरह सार्थक किया जा सकता है। हमारे संगठन को पूरा देश इसी उम्मीद के साथ देख रहा है। हमारे संगठन न केवन दुनिया के सबसे बड़े कारपोरेट को चुनौती दी है बल्कि इस बिमर्ष को भी अपने मौलिक नारों के माध्यम से खड़ा किया है कि झारखंड की अस्मिता और अस्तित्व का वैज्ञानिक नजरिया क्या है तथा उन्नति के मानक का मतलब क्या है। हमने उस बिमर्ष को पुनः रेखांकित किया है कि समुन्नति एक प्रकृतिक अवधारणा है और यदि दुनिया के पर्यावरण की हिफाजत करनी है तो विकास के वर्तमान माडल को बदलना होगा। हमारे जनसंगठन ने यह भी स्थापित किया है कि जनसंगठन और जनांदोलन की राजनीति का वास्तविक अर्थ क्या है। हमने अपने अनुभव से सीखा है कि इतिहास केवल प्रेरित ही नहीं करता बल्कि वह गढ़ने की शक्ति भी प्रदान करता है और जनसक्रियता के व्यापक संदर्भ न केवल जनगण की राजनीतिक चेतना को उन्नत करते हैं बल्कि उनके इतिहासबोध को और ठोस बनाते हुए भावी समाज के निर्माण की दिशा में ठोस तर्क और प्रवृतियों का सृजन भी करते हैं। हम कह सकते हैं कि हमारी बचनबद्धता झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों की हिफाजत, लोगों की आजीविका संस्कृति को आगे ले जाने, भाषा और विरासत के पुननिर्माण के साथ एक ऐसी जनराजनीतिक चेतना के निर्माण के प्रति है जिससे हूलगुलानों के सपने को जमीन पर उतारा जा सके। हूलगुलानों का संदेश था कि हमें अपने अस्तित्व को न केवल बचाना है बल्कि उसे गतिशील भी रखना है और साथ ही ऐसे सामाजिक मूल्यों के साथ स्वयं को आत्मलीन करना है जिसमें एक ईमानदार और जनतांत्रिक झारखंड गढ़ा जा सके। हमारा अनुभव है कि असली ताकत तो गांवों में है और लोगों में है लेकिन इस ताकत का राजनीतिक इस्तेमाल कर जिस तरह झारखंड की छवि बना दी गयी है उसे बदलना होगा। संताल हूल और बिरसा उलगुलान ने जिस तरह का नेतृत्व विकसित किया था उसी तरह का नेतृत्व हमें भी निर्मित करना होगा। जो समझौताविहीन संघर्ष तथा जनगण के नियंत्रण में हो। हमारा साफ मानना है कि असली राजनीतिक और आर्थिक ताकत जनता में है और किसी भी निर्णय की प्रक्रिया में उसे नजरअंदाज करने की प्रवृति को खतम कर हम वास्तविक स्वशसन की दिशा तेज कर सकते हैं।
आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच के विचार निर्माण की प्रक्रिया जनसमुदायों की इसी समझ से विकसित हुई है. यह कार्यभार हमारे समक्ष है कि हम इस प्रक्रिया और गति प्रदान करें। हम व्यापक लक्ष्यों के लिए संघर्ष कर रहे हैं जिसमें आम आदमी की भूमिका प्रमुख है।
आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच जनतांत्रिक मूल्यों पर बिश्वाश करता है। मंच व्यापक जनसमुदाय की निर्णायक हिस्सेदारी में बिश्वाश करता है। हमारी सफलता का यही मूख्य कारण है. मंच यह भी मानता है कि संकीर्ण राजनीतिक हितों से जनगण के व्यापक सपनों को पूरा नहीं किया जा सकता। मंच जनगण की सक्रियता के साथ एक जीवंत समाज का प्रतिनिधित्व करता है। इतिहास से सीखते हुए हमारा अनुभव यह भी बताता है कि संघर्ष स्थानीय संसाधनों के बल पर ही मंजिल हासिल करता है। हम देख रहे हैं कि झारखंड को विखंडित करने की हर तरह की साजिशें चल रही हैं. झारखंड की अस्मिता को खत्म करने के षडयंत्र को नाकामयाब करना भी हमरा मकसद है। झारखंड को किसी भी हालत में हम भ्रष्ट तथा लुटेरे लोगों का साम्राज्य नहीं बनने दे सकते।. हूलगुलानों की सीख यही है। हमें साफ तौर पर कहना होगा कि झारखंड शोषकों और लुटेरों का चारागाह नहीं है बल्कि उन करोड़ों आदिवासियों और मूलवासियों का एक जीवन है जो श्रम की महत्ता का आदर करते हैं तथा लूट की संस्कृति से नफरत करते हैं.। कारपोरेट राजनीति और विकास की कारपोरेट नीतियों को चुनौती देने के लिए हमें अपनी परंपरा के ईमानदार तथा सादगीपूर्ण जीवन को और आगे ले जाने की जरूरत है.। दुनिया को कारपोरेट साजि’ा से बाहर निकाल का जनतांत्रिक उन्नति के रास्ते पर ले जाने के लिए हमें वैकल्पिक नीतियों को जमीन पर उतारने की दिशा में कदम बढ़ाना होगा.
आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच को मजबूत बनाने की दिशा में हमें सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ने की जरूरत है. याद रखना चाहिए कि हमें सारा देश गौर से देख रहा है। आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच झारखंडियों की जनएकता को मजबूत बनाने की एक प्रक्रिया भी है और विचार भी.। साथ ही मंच मानता है कि झारखंड के किसान-कारीगर-कामगारों की व्यापक एकता भी जरूरी है.। जनता को बांटनेवाली विभाजक प्रवृतियों के प्रति हम सबको लगातार सजग रहने की जरूरत है.। झारखंड में विभिन्न तरह के विचारों के सहारे न केवल झारखंडी मूल्यों को लगतार कमजोर किया जा रहा है बल्कि जनता की एकता को तोड़ने के लिए कई तरह के प्रयोग किए जा रहे हैं.। इन सबको नाकाम करने का कार्यभार भी मंच का बुनियादी दायित्व है.
इस बात को एक बार और दुहराने की जरूरत है कि जनसंगठन न केवल जनराजनीति को जन्म देता है बल्कि विचारों से लैस जनसंगठन व्यपाक बदलावों की भी दिशा तय करता है। आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच को और मजबूत बनाते हुए हम अपने संसाधनों की हिफाजत करेंगे और इन संसाधनों से जो अर्थ संरचना उभरती है उसके आधार पर समुन्नत झारखंड की दिशा भी तय करेगे। एक नवझारखंड के नवनिर्माण के ऐतिहासिक दायित्व के प्रति हम सजग हैं और इस मकसद के लिए जनतंत्र को आधार बना कर हमें आगे बढ़ना है।
इतिहास गवाह है कि इस राज्य की धरती को हमारे पूर्वजों ने सांप, भालू, सिंह, बिच्छु से लड़ कर आबाद किया है। इसलिए यहां के जल-जंगल-जमीन पर हमारा खूंटकटी अधिकार है। हम यहां के मालिक हैं। जब जब हमारे पूर्वजों द्वारा आबाद इस धरोहर को बाहरी लोगों ने छीनने का प्रयास किया तब-तब यहां विद्रोह उठ खड़ा हुआ। इस राज्य के जलन-जंगल-जमीन को बचाने के लिए तिलका मांझी, सिद्वू-कान्हू, फूलो-झाणो, सिंदराय-बिन्द्रय , वीर बिरसा मुंडा, गया मुंडा, माकी मुंडा जैसे वीरों ने अपनी शहादत दी। इन शहीदों के खून का कीमत है-छोटानागपुर काशतकारी अधिनियक 1908 और संतालपरगना का’तकारी अधिनियम । इन कानूनों में कहा गया है कि आदिवासी इलाके के जल-जंगल-जमीन पर कोई भी बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता है। यहां के जमीन का मालिक नहीं बन सकता है। हम सभी जानते हैं कि भारतीय संविधान में हमारे इस क्षेत्र को बिशेष अधिकार मिला है-यह है पांचवी अनुसूचि क्षेत्र। इसे पांचवी अनुसूची क्षेत्र में जंगल-जमीन-पानी, गांव-समाज को अपने परंपरागत अधिकार के तहत संचालित एवं विकसित एंव नियंत्रित करने को अधिकार है। आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच इन अधिकारों का सम्मान करता है, और इसकी रक्षा के लिए बचनबद्व है।

संकल्प

1-छोटानागपुर का’तकारी अधिनियम 1908 के मूल धारा 46 में आदिवासियों को जो अधिकार दिया गया है, इसकी रक्षा के लिए मंच बचनबद्व है।

2-73वे संविधान सं’शोधन के तहत इस इलाके के ग्राम सभा को जल, जंगल, जमीन, गांव, समाज को संचालित , विकसित तथा नियांत्रित करने का अधिकार प्राप्त है-इसकी रक्षा के लिए मंच हमेशा संघर्ष के लिए तैयार रहेगा।

3-आदिवासी-मूलवासियों का परंपरागत अधिकार जमीन के साथ, जंगल, पहाड़, नदी-नालों, सहित तमाम जलस्त्रोतों पर है, इस पर बाहरी, सरकारी या कंपनियों का हस्तक्षेप मंच कताई स्वीकार नहीं करेगा।

4-विकास योजनाओं में हर आम किसान, महिला एंव युवाओं को बराबरी का भागीदारी बनाने के लिए मंच संघर्ष करेगा।

5-कृर्षि, पर्यावरण के विकास के लिए कारो नदी, छाता नदी, कोयल नदी सहित सभी जलस्त्रोतों का पानी किसानों के खेतों तक लिफट एरिगेशन के तहत पहुंचाने की व्यवस्था के लिए मंच हर संभव कोशिश करेगा।

6-इस इलाके में किसी तरह की परियोजनाएं, जिससे विस्थापन हो, रोकने के प्रयास जारी रहेगा।

7-विकास से लिए क्षेत्र में कृर्षि तथा वन आधारित कुटीर उद्योगों की स्थापना के लिए सरकार पर दबाव देने का लगातार प्रयास किया जाएगा।

8-’सिक्चा के क्षेत्र में हो रहे घोटालों का रोकने का प्रयास किया जाएगा

9-जनराजनीतिक चिंतन को मजबूदी देने के लिए मंच तत्पर रहेगा-ताकि झारखंड के इतिहास, धरोहर-जंगल-पानी-जमीन, गांव समाज की रक्षा के साथ ही इसका विकास को दिशा दिया जा सके।

10-जाति-धर्म, वर्ग और स्वर्थपरस्त राजनीति से उपर उठकर मंच संघर्ष जारी रखेगा ।

11-मंच स्थानीय संसाधनों, चंदा, एक एक मुठी धान, चावल के बल पर ही संघर्ष जारी रखेगा ।

12-हम विकास विरोधी नहीं हैं-विकास चाहते हैं-लेकिन हमारा-जल-जंगल-जमीन, समाज, भाषा-संस्कृतिक के कीमत पर नहीं।

13-पूर्नावास और पूर्नास्थापन नीति एक धोखा है, मंच इसे मीठा जहर मानती है। इसे जो भी स्वीकार करेगा-भविष्य नष्ट होना तय है।

14-पूर्नावास और पूर्नास्थापन नीति उनके लिए बने जो आजादी के बाद विस्थापित हो, बेघर-बार, भूमिंहीन, बेराजगारी, असिक्चा , बीमारी और कंगाली का जीवन जी रहे हैं। जब तक इन पूर्व में विस्थापितों का पूर्ण एवं आदर्श पुर्नावास नहीं किया जाएगा-झारखंड में किसी तरह का विस्थापन नहीं होने दिया जाएगा।

15-हमारा भाषा-संस्कृति, सामासजिक मूल्यों, धार्मिक अस्था, सरना-ससन दीरी, मंदिर, मशजीद, गिरजा को किसी पूर्नावास पैकेज से नहीं भरा जा सकता है, और न ही इन ही इनका पूर्नावासित किया जा सकता है।

आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच
संयोजक- प्रखंड समितियां- कर्रा, तोरपा, कमडारा, रनिया

नोट-आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच ने हुलगुलान दिवस सभा में २९-30 जून 2011 को यह संकल्प पत्र जारी किया।

कंपनियों की जागीर नहीं ---- हमारे पूर्वजों की -झारखंड हमारा है

संकल्प सह हुलउलगुलान दिवस



कंपनियों की जागीर नहीं हमारे पूर्वजों की -झारखंड हमारा है एक इंच जमीन नहीं देगें


जल जंगल जमीन-भाषा संस्कृति, इतिहास, अस्तित्व को बचाने का झारखंड़ का गैरवपूर्ण इतिहास रहा है। 1700 के दशक से 1900 ई0 का दशक अपने अस्तित्व इतिहास बचाने का अंग्रेज साम्राज्यवाद -जमीनदारों के खिलाफ झारखंडियों ने समझौताविहीन संघर्ष का इतिहास रचा। इस संर्घष में आदिवासियों ने अंग्रेज हुकूमत के सामने कभी घुटना नहीं टेका। अंग्रेजों के गोलियों का सामना सिना तान कर किया-लेकिन पीठ दिखाकर कर आदिवासी समाज पीछे कभी नहीं हटा। 30 जून 1856 में संथाली आदिवासियों ने सिद्वू-कान्हू के नेतृत्व में भोगनाडीह में अंग्रेज के गोलियों का सामना करते हुए-10,000 की संख्या में समुहिक शहादत दिये । 9 जून 1900 में बिरसा मुंडा के आगुवाई में डोम्बारी बुरू में अंग्रेजों के बंदुक के गोलियों को सामना करते हुए 500 लोग शहीद हुए।
झारखंड के इतिहास के पनों में जल-जंगल-जमीन, इतिहास-अस्तित्व बचाने का संर्घष के लिए जून महिना -शहीदो का माहिना है। आज जब पूर झारखंड को देशी -बिदेशी पूंजीपति कब्जा जमाने की कोशिशि में हैं-ऐसे समय में हम झारखंड़ी आदिवासी-मूलवासियों को अपनेपूर्वजों के दिये बलिदान को याद करने की जरूरत है। यही नहीं अपने अस्तित्व की रक्षा के सघर्ष को आगे ले जाने की भी जरूरत है- ताकि हमारा झारखड़ बचा को बचा सकें।
यह जिम्मेवारी हर युवक-युवाती,, महिला-पुरूष, बुधिजीवियो, सामाजिक कार्यकर्ताओं, झारखंडी शुभचिंतकों की है
इसी जिम्मेवारी के साथ आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच अपना संकल्प एक एंच भी जमीन नहीं देगें की आवाज को और बुलंद करने के लिए 29-30 जून 2011 को कनकलोया कोरको टोली में संकल्प सह हुलउलगुलान दिवस मनाने का निर्णय लिया है।
नोट-इस अवसर पर संस्कृतिक कार्यक्रम, तीर-धनुष चलान प्रतियोगिता भी होगा। इसमें हर गांव के सभी वर्ग शामिल होगें। अताः हर गांव से अपना गाजा-बाजा के साथ, परंपारिक पहिराव के साथ आयें।


स्थान- कनकलोया कोरको टोली
तिथि-29-30 जून 2011, 29 जून को सुबह 9 बजे तक सभी पहुंचने की कृपा करेगें

निवेदक-आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच

संजोजक - प्रखंड समितियां- कर्रा, तोरपा, कमडारा, बसिया, रनिय

Sunday, June 26, 2011

.therre are ten ripe fruits on a particular tree. They will pluck only seven or eight of the them for themselves, and leave at least a couple of fruit

The Cultural Values of the Triblas..
..is such that....therre are ten ripe fruits on a particular tree. They will pluck only seven or eight of the them for themselves, and leave at least a couple of fruits for the birds of the Air.
They believe that fruits are gifts of Nature and they are meant for all, including birds because the latter are also part of the Nature.
Likewise, When they come back after a hunting expedition in the Jungale, they divide whatever they have hunted into equal parts not only according to the nembers of perssons, who were participated in the hunting but to the dogs that accompany them in the hunting venture..