Wednesday, October 5, 2022

चावल उत्पादन 70 लाख टन घटने के आसार ..

 चावल उत्पादन 70 लाख टन  घटने के आसार ..

टूटे चावल के निर्यात पर रोक...

  . नई दिल्ली 10 सितंबर 2022

प्रभात खबर में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार देश में चावल की बढ़ती खुदरा कीमत को नियंत्रण में रखने व घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के इरादे से सरकार ने टूटे चावल के निर्यात पर रोक लगा दी है।

 खरीफ सत्र में धान की बुवाई के रकबे में 4 . 95% की गिरावट आने से चावल उत्पादन 60 से 70 लाख टन कम होने का अनुमान जताया गया है। इसके अलावा सरकार ने निर्यात को कम करने के लिए गैर बासमती चावल पर 20% का सीमा शुल्क को भी लगा दिया है। केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि बहुत बड़े पैमाने पर टूटे चावल की खेप बाहर भेजी जाती रही है। पशु चारे के लिए भी समुचित मात्रा में टूटा चावल उपलब्ध नहीं है। इसका इस्तेमाल इथेनॉल में मिलाने के लिए भी किया जाता है। इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए टूटे चावल के निर्यात पर रोक लगाने का फैसला किया गया है। चावल की थोक कीमतें 1 साल में करीब 8% बढ़कर ₹3,291 प्रति क्विंटल हो चुकी

पुनर्वास व विस्थापन नीति के तहत लाभ लेने के लिए जमीन की रसीद जरूरी…

 पुनर्वास व विस्थापन नीति के तहत लाभ लेने के लिए जमीन की रसीद जरूरी…

बुडमू.. 10 सितंबर 2022

 छप्पर कोलियरी को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए छप्पर पंचायत में सीसीएल, मुखिया, प्रमुख, जिप सदस्य, उपप्रमुख व रैयतों की बैठक आयोजित की गई। बड़का सायल के महाप्रबंधक एके सिंह ने रैयतों को  पुनर्वास व विस्थापन नीति की जानकारी। सीओ शंकर कुमार विद्यार्थी ने कहा कि मुआवजा के लिए जमीन की रसीद, वंशावली, जाति व आवासीय प्रमाण पत्र बनाकर सीसीएल में आवेदन करें। पंचायत के सभी 5 राजस्व ग्राम में सीएसआर द्वारा सड़क, बिजली, पानी, खेल मैदान के सुंदरीकरण की सूची मांगी गई है। प्रत्येक 15 दिनों में सीसीएल स्वस्थ शिविर लगाएगी बैठक के दौरान 17 रैयतों को 108 एकड़ के मुआवजा की नोटिस दी। रैयतों के बीच खेल सामग्री व 20 सिलाई मशीन बांटी गई। दो जल मीनार का उद्घाटन भी किया गया।

झारखंड में 11 विश्विविद्यालय और 63 अंगीभूत कॉलेज हैं

 झारखंड में 11  विश्वविद्यालय और 63 अंगी भूत कॉलेज है।

उच्च  और तकनीकी शिक्षा विभाग झारखंड के अंतर्गत फिलहाल 11 विश्वविद्यालय और 63 अंगी भूत कॉलेज हैं। कूल 11 विश्वविद्यालय में 1. रांची विश्वविद्यालय 

2.विनोबा भावे विश्वविद्यालय 

3.सिद्धू कानू मुर्मू विश्वविद्यालय

4. कोल्हान विश्वविद्यालय

5. निलंबर पीतांबर विश्वविद्यालय

6. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय 

7.जमशेदपुर विमेंस विश्वविद्यालय 

8.झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय 

9.बिनोद  बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय धनबाद

10. झारखंड यूनिवर्सिटी आफ टेक्नोलॉजी और झारखंड राज्य ओपन यूनिवर्सिटी शामिल है 

11.पंडित रघुनाथ मुरमू जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना अभी प्रक्रिया अधीन है।

फोर्टीफाईड चावल का ग्रामीण ने क्यों विरोध करते हैं?

 झारखंड में अक्टूबर माह से राशन दुकान में फोर्टीफाईड चावल बांटने की योजना है । 

झारखंड में अक्टूबर से चावल का वितरण 25, 238 जन वितरण प्रणाली की दुकानों से प्रारंभ करने की तैयारी राज्य सरकार ने की है। फिलहाल झारखंड के 2 प्रखंडों चाकुलिया और धालभूमगढ़ में जन वितरण प्रणाली की दुकानों में फोर्टीफाईड चावल का वितरण पहले से ही हो रहा है । 16 सितंबर को जमशेदपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला किया गया। जिसमें खास तौर पर इसी बात पर चर्चा की गई कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के घेरे में आने वाले लोगों को फोर्टीफाईड चावल दीया जाना क्यों आवश्यक है।  एक तरह से कार्यशाला के माध्यम से राज्य में जन वितरण प्रणाली की दुकानों में फोर्टीफाईड चावल के वितरण पर सहमति बनाई गई । राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एक्ट के तहत सबको भोजन दिलाना ही मुख्य उद्देश्य नहीं, बल्कि सबको  पौष्टिक आहार की भी बात कही गई है ।

क्या है फोर्टीफाईड चावल?

फोर्टीफाईड में आयरन, फोलिक एसिड और बी 12 का मिश्रण किया जाता है । इस चावल में आम चावल की तुलना में आयरन विटामिन b12 , फोलिक एसिड  की मात्रा अधिक है । इसके अलावा जिंक, विटामिन ए, विटामिन बी वाले  फोर्टीफाईड  भी तैयार किए जा सकते हैं। 

 खाने से भोजन में पौष्टिक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है। 

 वर्ष 2024 तक देश भर में इस योजना को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है।

 यहां यह समझने की जरूरत है कि राज्य मेंफोर्टीफाईड चावल का वितरण 2021 के शुरुआत में ही पायलट प्रोजेक्ट के रूप में झारखंड के खूंटी जिला में वितरण करना शुरू कर दिया गया था। चावल मैं जो फोर्टीफाईड चावल मिलाया जाता है उसकी जानकारी ना तो ग्राम सभा को पहले दी गई,  और ना ही ग्राम पंचायत से संबंधित अधिकारियों को,  ना ही राशन डीलर को,  ना तो कार्ड धारियों को ।

जब ग्रामीणों ने देखा कि चावल में प्लास्टिक नुमा कुछ चावल से बड़े आकार का चीज उसमें दिखाई दिया तब ग्रामीणों क्षेत्रों में ग्राम सभा के बैनर से विरोध करना शुरू किया , और खाद्य आपूर्ति विभाग पर आरोप लगाना शुरू किया कि सरकार लोगों को प्लास्टिक के मिलावट का चावल बांट रही है। 

 लोगों ने चावल का नमूना लेकर जगह-जगह बैठक करना शुरू किया और सरकार से मांग करने लगे कि प्लास्टिक मिलावट चावल आदिवासी किसान और गरीब तबके के लोगों को हानि पहुंचाने के दृष्टिकोण से दिया जा रहा है । 


यहां इसलिए ऐसा आरोप लगने लगा क्योंकि खाद्य आपूर्ति विभाग ने इसकी जानकारी पहले से राशन कार्ड धारियों को, ग्राम सभा को, और डीलर को भी नहीं दिया था । हम लोगों ने भी इस आरोप को समझने की कोशिश किए क्योंकि खूंटी जिला के मुरहू प्रखंड अंतर्गत गुल्लू गांव में मार्च महीने में ही 15 से 20 गांवों के ग्राम प्रधान और आम राशन कार्ड धारियों ने एक बड़ी बैठक की थी। 

 जिसमें हम लोगों को भी बुलाया गया था और ग्रामीणों ने हम लोगों के सामने चावल का नमूना लेकर आए । कुछ लोगों ने चावल से प्लास्टिक नुमा चावल से बड़े आकार की ठोस वस्तु को चुनकर अलग करके लाया और दिखाते हुए बोले  ,यह प्लास्टिक मिला हुआ चावल है और सभी जानते हैं की प्लास्टिक को अगर गाय खा जाती है तो वह पचती नहीं है और वह पॉयजन/जहर बन जाता है। जिससे गाय भी मर जाती है।

 ग्रामीणों ने कई उदाहरण पेश किए जो गाय, बकरी प्लास्टिक खा के मर गए थे । इस बैठक में यह तय किया गया की इस मामले को हम खाद्य आपूर्ति मंत्री रामेश्वर उरांव, खूंटी के , जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी तक पहुंचाएं। यह जिम्मेवारी ग्रामीणों में मुझे दी। मैंने वादा किया कि इस मामले को खूंटी जिला  खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी, डीसी और राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री श्री रामेश्वर उरांव जी के पास पहुंचा देंगे। मैंने इसकी कोशिश भी की और खाद्य आपूर्ति मंत्री रामेश्वर उरांव जी से इस मामले पर बात की। श्री उरांव जी ने मुझे आश्वस्त किया कि मैं खूंटी आऊंगा और गांव के लोगों से, डीलर से, और  कार्ड धारियों  से और जहां से भी इस तरह की शिकायतें आ रही है, लोगों में भ्रम है उनके साथ बैठक करेंगे और उन्हें बताएंगे कि फोर्टीफाईड   चावल है।  जो लोगों के कुपोषण को दूर करने के लिए दिया जा रहा है। खाद्य आपूर्ति मंत्री श्री रामेश्वर उरांव जी से बातचीत के बाद  सरकार ने लोगों को जानकारी देने के लिए अखबारों में फोर्टीफाईड चावल देने की जानकारी प्रकाश श करना शुरू कर दिए ।

हिंदुस्तान अखबार, प्रभात खबर, दैनिक भास्कर में यह जानकारियां छपी जाने लगी। इसके बाद कई इलाकों में विरोध का स्वर कम हुआ। मैंने स्वयं खूंटी की dso रंजीता मेम से भी बात की और उन्होंने मैसेज भेजें की ग्रामीणों को जानकारी दीजिए कि यहां प्लास्टिक मिलावट चावल नहीं है बल्कि कुपोषण दूर करने के लिए सरकार  फोर्टीफाईड चावल दे रही है।

इसके साथ ही सरकार ने टीम बनाकर कई इलाकों में जांच के लिए भेजा और जांच के बाद सरकारी अधिकारियों ने रिपोर्ट जारी किया और ग्रामीणों को बताने की कोशिश किए कि यहां प्लास्टिक मिलावट चावल नहीं लेकिन यह फोर्टीफाईड चावल है।


फोर्टीफाईड चावल का ग्रामीण ने क्यों विरोध करते हैं?

 मैं यहां फिर से इस बात को दोहराना चाहती हूं कि सरकार इस योजना को चुपचाप गांव के बीच में वितरण करना शुरू किया, इस कारण इसका विरोध शुरू किया। दूसरी बात यह भी समझने की जरूरत है कि गांव के लोग कभी अपने शरीर का पूरी तरह से तकनीकी तौर पर बीपी की स्थिति, शुगर की स्थिति, चेक नहीं करते हैं ना ही सरकारी स्वास्थ्य विभाग भी ग्रामीणों को इस मामले में सचेत नहीं करती है। न ही कभी सरकार ग्रामीणों के हेल्थ ठीक रखने के लिए इस तरह के कोई विशेष प्रावधान भी नहीं करती है, की कौन कितना एनेमिक है ? किसका blood pressure का स्थिति क्या है ? शुगर की स्थिति क्या है ? 

इसकी जांच करने के लिए सरकारी व्यवस्था होनी चाहिए। तब सरकार सही तरीके से ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जानकारी एकत्र करते हुए उन लोगों को किसको कितना विटामिन? किसको कितना कैल्शियम  देना चाहिए ,ताकि उनका स्वास्थ्य ठीक रहे । इसकी व्यवस्था सरकार को हर पंचायत में   व्यवस्था की जांच करने की व्यवस्था करनी चाहिए। सिर्फ आयरन मिला हुआ चावल देने से ही उनका स्वस्थ है ठीक रहेगा यहां मानना उचित नहीं होगा।

झारखंड में 15 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं

 10 सितंबर 2022

झारखंड के 38,432 anganbadi Kendra Hain

झारखंड में कुपोषण मिटाने के नारे के साथ 2 सितंबर से से पोषण जागरूकता रत निकाला गया। यह हर जिले के प्रखंडों में घूम कर बच्चों को पोषण युक्त भोजन देने का प्रचार प्रसार कर रहा है। इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों ,सहायिका ,सेविका और आम लोगों को शपथ भी दिलाई जा रही है । 

इसका कारण है कि राज्य में कुपोषण की स्थिति नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 की कुपोषण रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में जीरो 5 वर्ष से कम उम्र वाले 36, लाख 64000 बच्चों में से 42% यानी 15 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं। इनमें भी 9 . १ प्रतिशत यानी तीन लाख के करीबी बच्चे अति गंभीर कुपोषण के शिकार हैं ।

दैनिक भास्कर की टीम कुपोषण से लड़ाई के लिए सरकारी अमले के अभियान की पड़ताल करने रांची धनबाद, जमशेदपुर और बोकारो के 55 आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचे । पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि आंगनबाड़ी केंद्रों को अप्रैल-मई से प्रति बच्चा मिलने वाली ₹250 की पोषाहार राशि मिली ही नहीं है। चावल निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है लेकिन दाल, सब्जियां ,बदाम ,चना ,गुड़, अंडा आदि आंगनबाड़ी सेविकाओं को उधार पर खरीदनी पड़ रही है।

 उधार ₹10,000 से ज्यादा हो जाने पर दुकानदार ने राशन देना बंद कर दिया , ऐसे में कई जगहों पर बच्चों को सिर्फ दाल भात या खिचड़ी मिल रही है और कई जगह तो वह भी नहीं।


Sunday, August 7, 2022

110 प्रखंडों को Backward Block के रूप में चयन एवं अधिसूचित किया जाता है

 -झारखंड सरकार

राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग

अधिसूचना

अधि0 सं0-05/स0 भू0 विधिक ( Non Profit Charitable/ Spiritual Organization) 104/16 4877/रा0 रांची, दिनांक 11-12-18


1-राज्य में(  Non profit Charitable Spiritual Organization) को शैक्षणिक/स्वास्थ्य कार्यों से संबंधित संस्थान खोलने हेतु रियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने हेतु विभागीय संकल्प संख्या-4175, दिनांक-08.10.18 द्वारा नीति निधा्ररित किया गया है। उक्त संकल्प की कंडिका-1 (ख) में सुदूरवर्ती (Remote) क्षेत्र/ Backward Block की सूची सरकार द्वारा अलग से अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया है। 

2-मंत्रिपरिषद की बैठक दिनांक -06.12.2018 के मद संख्यज्ञ-27 में लिये गये निर्णय के आलोक में Non Profit Charitable/Spiritual  Organization  को शैक्षणिक/स्वास्थ्य कार्यों से संबंधित संस्थान खोलने हेतु नियायती दरों पर भूमि उपलब्ध कराने हेतु सुदूरवर्ती (Remote ) क्षेत्र/ Backward Block के चयन हेतु संविधान की पॉंचवी अनूसूचि के तहत झारखंड राज्य के भीतर परिभाषित अनुसूचित क्षेत्र के सभी 134 प्रखंड/ अंचल में से अधिसूचति नगर निकाय के प्रखडों/ अंचलों को छोड़कर तथा बड़े नगरीय क्षेत्रों के भविष्य में संभावित विस्तार को देखते हुए निम्नवत शेष 110 प्रखंडों को Backward Block  के रूप में चयन एवं अधिसूचित किया जाता है, जिसकी सूची निम्नवत है-

क््र0 सं0----- जिला---- प्रखंड

1---- -------------रांची-------- बेड़ो

2------------------ लापुंग

3------------------ अनगड़ा

4-------------------- बुडमू

5------------------ चान्हो

6------------------ माण्डर

7-------------------- तमाड़

8------------------ सोनाहातू

9-----------------             इटकी

10--------------- राहे

11---------- खूंटी----------- तोरपा

12----------------------- रनिया

ु13-------------------------- मुरहू

14---------------------------------अड़की

15----------------------------- कर्रा

16---------------- सिमडेगा---- कोलेबिरा

17------------------------- बानो

18----------------------- जलडेगा

19----------------------- थेथईटांगर

20----------------------------- बोलबा

21------------------------- कुरडेग

22----------------------- पाकरटांड

23-------------------------- केरसई

24---------------------------- बांसजोर

25---------------- लातेहार-------- गारू

26--------------------------- महुंआटांड

27-------------------------- बरवाडीह

28-------------------------- मनिका

29----------------------- बलूमाथ

30-----------------------------------------चंदवा

31----------------------- बारियातु

32--------------------- हेरहंज

33------------------ गुमला---- भरनो

34----------------------- सिसई

35----------------------- घाघरा

36----------------------------- चैनपुर

37------------------------- डुमरी

38--------------------------- विशुनपुर

39-------------------------- रायडीह

40----------------------------- पालकोट

41---------------------------- बसिया 

42--------------------------- कामडारा

43----------------------- अलबर्ट एक्का

44--------------------- लोहरदगा-- भंडरा

45------------------------ सेन्हा

46-------------------------- किस्को

47-------------------------- कुडू

48--------------------------- कैरो

49------------------------- पेशरार

50-------- पूर्वी सिंह भूम-- घाटशिला

51----------------- धालभूमगढ.

52----------------- मुसाबनी

53----------------- डुमरिया

54---------------------- पटमदा

55--------------------- पोटका

56----------------- बहरागोड़ा

57------------------- चकूलिया

58----------------- बोड़ाम

59-------------------- गुडाबंन्दा

60--- पश्चिमी सिंहभूम--- मनोहरपुर

61----------------------- मझगांव

62----------------------- कुमारडुंगी

63----------------------- बन्दगांव

64---------------------------- मंझारी

65----------------------- खूंटपानी

66----------------------- तांतनगर

67----------------------- नोवामुण्डी

68----------------------- जगरनाथपुर

69------------------------- गोइलकेरा

70----------------------- सोनुआ

71------------------------- झींकपानी

72----------------------------- टोंन्टो

73----------------------------- गम्हरिया

74------------------------- आनंदपुर

75------------------------ गुदडी

76--- सरायकेला -खरसावां-- खरसावां

77------------------------- कुचाई

78----------------------- चाण्डिल

79----------------------- ईचागढ.

80--------------------------- नीमडीह

81------------- राजनगर(गोबिंदपुर)

82----------------------- कुकडू

83------------------ जामताड़ा नरायणपुर

84------------------ नाला

85------------------- कुढित

86------------------ करमाटांड

87---------------------- फतेहपुर

88--- दुमका------- जामा

89--------------------- शिकारीपाड़ा

90----------------- रानेश्वर

91----------------- रामगढ

92----------------- जरमुण्डी

93----------------- मसलिया

94---------------------- सरैयाहाट

95------------------ काठीकुंण्ड

96----------------- गोपीकांदर

97------ साहेबगंज--- बरहेट

98--------------------- पटना

99------------------ बोरियो

100--------------- तलझारी

101--------------- उधवा

102----------------- मंडरो

103------- पाकुड------ पाकुडिया

104------------------ महेशपुर

105--------------------- हिरणपुर

106-------------------- लिटटीपाड़ा

107------------------- अमरापाड़ा

108-- गोडडा------- सुन्दरपहाड़ी

109----------------- बोआरीजोर

110-- गढवा------- भण्डरिया

                        झारखंड राज्यपाल के आदेश से,

                          (राम कुमार सिन्हा)

                        सरकार के संयुक्त सचिव। 

Sunday, July 10, 2022

-रघुवर सरकार ने गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाड़ी जमीन को भूमि बैंक में शामिल किया है, इस भूमि बैंक को रदद किया जाए।

                                 संघर्ष संकल्प गोष्ठी

                             9 जुलाई 2022 एसआरडीसी-रांची

आइए मिल कर झारखंड को बचाएंगें। आप सभी जानते हैं कि हमारे पूर्वजों ने संाप, भालू, बाघ, बिच्छू जैसे खुंखार जंगली जानवरों से लड़कर झारखंडी की धरती को आबाद किया है।  एक नजर में अपने राज्य को देखें-झारखंड-कुल आबादी-3 करोड,, 29 लाख, 88 हजार, 134 है। कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 79,71,400 वर्ग किमी है। इसकं 30 प्रतिशत  कृषि योग्य भूमि है, इसका 22.6 प्रतिशत क्षेत्र में बोया गया क्षेत्र है। 29.3 प्रतिशत वन क्षेत्र है ।  जितना खाद्यान्न की जरूरत है, उतना  उत्पादन नहीं कर रहा है। इसमें खेती योग्य जमीन 2039000 हेक्टेयर है, जिसमें 1795000 हेक्टेयर में फसल लगायी जाती है। खेती की जाने वाली जमीन में मात्र 195000 हेक्टेयर पर ही सिंचाई होती है। बाकी जमीन में पानी रहते हुए भी सरकार सिंचाई का व्यवस्था नहीं रही है। 

विकास के नाम पर 2 लाख एकड़ से अधिक जमीन अधिग्रहण हो चुका है। खेती की जमीन तेजी से घटते जा रही है। 2 करोड़ से अधिक लोग बडे परियोजनाओं और शहरीकरण से विस्थापित हो चुके है। राज्य में बड़ी संख्या में विस्थापितों की संख्या हैं, जिनका सामाजिक, आर्थिक स्थिति बिकुल खाराब है। 2 लाख से अधिक लोग दूसरे राज्यों में रोजगार की तालाश में पलायन कर गये हैं। राज्य के आदिवासी, मूलवासी, किसानों की जनसंख्या तेजी से घटते जा रही है। दूसरी और बाहर आबादी के आने से राज्य में दूसरे समुदाय की आबादी तेजी से बढ़ते जा रही है।  

झारखंड आखिर किनके लिये बना है? 

आज राज्य बनने के बाद लगातार आदिवासी, मूलवासी समुदाय के उपर चारों ओर से हमला हो रहा है, राज्य बनने के बाद आज तक राज्य और केंन्द्र में जितने भी संवैधानिक कानूनांे में संशोधन या फेर-बदल किया गया, सीएनटी एक्ट 1908, एसपीटी एक्ट 1949, पांचवी अनूसूचि, पेसा कानून 1996, सभी को तकनीकी रूप से  अधिकार को कमजोर करने का काम किया है।

 केंन्द्र सरकार और पिछली राज्य सरकार ने भूमि बैंक बनाया, और 21 लाख एकड़ से अधिक समुदायिक संपत्ति/जमीन को भूमि बैंक में शामिल कर दिया। आज धड़ले से जमीन पर गैरकानूनी कब्जा का धंधा चरम पर है। जमीन का दस्तावेज आॅनलाइन होने के बाद रातों-रात जमीन का असली मालिक का नाम हटा कर किसी दूसरा व्यक्ति का नाम दर्ज किया जा रहा है। जमीन के खतियान जैसे मूल दस्तावेजों में भारी छेड-छोड किया जा रहा है। सरकार द्वारा नित नये कानून लाकर आदिवासी, मूलवासी, किसानों के परंपरागत एवं संवैधानिक अधिकारों का क्षरण और कमजोर करके पूुजिपतियों और कारपोरेट उद्वोगों के हित को पूरा करने जा रही है।  

आदिवासी-मूलवासी किसानों के परंपरागत अधिकार सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, मुंडारी खूंटी अधिकार,  5वीं अनुसूचि  के अधिकारों सहित 1932 के खतियान में प्रावधान अधिकारों का कड़ाई से पालन करने की मांग, साथ ही पांचवी अनूसूचि क्षेत्र, एवं सीएनटी एक्ट क्षेत्र के आदिवासी बहुल खूंटी जिला में ग्राम सभा को योजना को सही जानकारी दिये बिना, एवं ग्राम सभा की सहमति के बिना जबरन संपति कार्ड बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र की जमीन का ड्रोन सर्वेक्षण किया जा रहा था, का लगातार जून 2022 से ही विरोध किया जा रहा है। इस विरोध के बीच ही बागोदर के माले विधायक श्री विनोद सिंह ने 10 मार्च को विधान सभा में सवाल उठाए थे। श्री विनोद सिंह जी के सवाल का जवाब स्वंय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने कहा-खूंटी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति और जमीन का डिजिटल सर्वे डा्रेन के जरिए  हो रहा था। यह काम केन्द्र सरकार द्वारा किया जा रहा था। इसको लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में संशय की स्थिति है, इसलिए राज्य सरकार इसे फिलहाल होल्ड करने का आदेश देता है। इन्होनें कहा-इस संबंध में जांच करायी जाएगी। बजट सत्र में सीएम के आदेश के तुरंत बाद ड्रोन सर्वे को होल्ड कर दिया गया है। लेकिन यह स्थायी रूप से नहीं। 

आज आदिवासी समुदाय स्वामित्व योजना के तहत बनने वाली संपत्ति/प्रोपाॅटी कार्ड क्यों नहीं चाहती है, इस पर बहस होनी चाहिए, साथ ही देश के पांचवी अनुसूचि एवं छठी अनुसूचि क्षेत्र में आदिवासी, मूलवासी, दलित, किसान समुदाय के परंपरागत समुदायिक अधिकारों पर चर्चा करने की जरूरत है। साथ ही झारखंड के आदिवासी समुदाय के जंगल, जमीन से संबंधित सुरक्षा कवच सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, मुंण्डारी खूंटकटी अधिकार, विलकिनसन रूल, पेसा कानून जैसे संवैधानिक अधिकारों पर भी चर्चा होनी चाहिए। इसके लिए झारखंड के इतिहास को आदिवासी समुदाय के एतिहासिक दृष्टिकोण से समझना होगा। 

पांचवी अनुसूचि, पेसा कानून, सीएनटी एक्ट, एसपीटी सक्ट का कोई जिक्र नहीं है-

वर्तमान समय में केंन्द्र सरकार द्वारा लायी जा रही पयलट प्रोजेक्ट स्वामित्व योजना भी इसका हिस्सा है। जिसके तहत प्रोपाॅटी कार्ड देने के नाम पर आदिवासी समुदाय के समुदायिक जमीन को सरकार अपने हाथ में लेने की योजना बनायी है। वर्तमान में लाया जा रहा स्वामित्व योजना इसी उद्वेश्य का एक हिस्सा है। इससे सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, 5वीं अनूसूचि, पेसा कानून, मुंडारो खूुटकटटी अधिकार, हो आदिवासी समुदाय के विल किनसन रूल में प्रावधान परंपरागत समुदायिक अधिकार पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। 

आप सभी जानते हैं कि झारखंड में सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, मुंडारी खूंटकटी एवं 5वीं अनुसूचि क्षेत्र के आदिवासी बहुल जिला खूंटी में प्राॅपटी कार्ड बनाने के लिए ड्रोन से जमीन का सर्वे किया जा रहा था, आदिवासी सामाजिक संगठन लगातार इसका विरोध कर रहे हैं। बगोदर के माले विधायक श्री विनोद कुमार सिंह जी ने 10 मार्च को इस संबंध में विधान खूटी जिला 5वीं अनूसूचि क्षेत्र में आता है, बावजूद इसके ग्राम सभा की सहमति के बिना ही स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति/जमीन का ड्रोन से सर्वे किया जा रहा है। इसके जवाब में स्वंय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन ने कहा-खूंटी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति और जमीन का डिजिटल सर्वे डा्रेन के जरिए  हो रहा था। यह काम केन्द्र सरकार द्वारा किया जा रहा था। इसको लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में संशय की स्थिति है, इसलिए राज्य सरकार इसे फिलहाल होल्ड करने का आदेश देता है। इन्होनें कहा-इस संबंध में जांच करायी जाएगी। बजट सत्र में सीएम के आदेश के तुरंत बाद ड्रोन सर्वे को होल्ड कर दिया गया है। लेकिन यह स्थायी रूप से नहीं। 

ऐसे समय में कल्याणकारी राज्य के नागरिकों, मानवधिकार के शुभचितकों और आम लोगों की जिम्मेदारी है कि सामाजिक न्याय और राज्य हित में जनविरोधी नितीयों पर चिंतन करके हस्तक्षेप करें।

स्वामित योजना के तहत जमीन मालिकों के जमीन का प्राॅपटी /संपत्ति कार्ड बनायी जाएगी। जिस जमीन का दस्तावेज लोग पेस कर पायेगें, उसी जमीन का संपत्ति कार्ड बना कर गांव वालों को दिया जाएगा। बाकी जमीन का क्या होगा? उसका कोई जिक्र नहीं है। 

लैंण्ड रेकार्ड डिजिटालाइजेशन हो रहा है

डिजिटल इंडिया लैंण्ड रिकाडर्ड अधुनीकिरण कार्याक्रम के संबंध में सभी जानते हैं, फिर भी आप को सादर जानकारी दी जाती है कि अप्रैल 2020 को केंन्द्र सरकार द्वारा घाषित स्वमि

त्व योजना के तहत डिजिटल इंण्डिया लैंड रिकाॅर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत ड्रोन से गांवों की संपति का सवेक्षेण कर जीअईएस मानचित्र बनाये जाऐगें। साथ ही जमीन मालिको को प्राॅपटी कार्ड बना कर दिया जाएगा। ये जीआईएस नक्से और स्थानीय डेटाबेस ग्राम पंचायतों और और राज्य सरकार के अन्य विभागों द्वारा विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग किये जाएगें। इस स्वमित्व योजना का कई उदद्यों के साथ मूल उद्वेश्य एक राष्ट्र एक साॅफटवेयर (Digital Land Record, Digital Map  ka ka Software ) व्यवस्था करना है। 

इससे कई बड़े सवाल उभर कर आ रहे हैं-

1-आदिवासी सामुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक संपत्ति/धरोहर -जल, जंगल, जमीन जैसे भूईहारी खेत, डालीकतारी खेत, भूत खेता, पहनाई खेत, चरागल, सरना, मसना, ससनदीरी, हड़गड़ी, कब्रिस्तान, जहिरा, जाहेरस्थान, देवस्थान, अखड़ा, बांध, पोखरा, जतरा टांड जैसे बेलगान जमीन है। यह समाज की सामुदायिक संपत्ति है। सवाल है- स्वामित्व योजना के तहत इस धरोहर का प्राॅपटी कार्ड किसके नाम से बनेगा? 

2- आदिवासी-मूलवासी समुदाय के सामुदायिक जमीन, जो खतियान पार्ट दो में, वीलेज नोट में, सीएनटी, एसपीटी एक्ट में, पेसा कानून में सामुदायिक स्वामित्व का प्रावधान है। ग्रामीण आदिवासी, मूलवासी, किसान समुदाय का जीवनशैली इसी ताना-बाना के साथ जीवांत है, इसमें गैर मजरूआ आम, गैरजरूआ खास, गैर मजरूआ जंगल-झाड़ी, नदी-नाला, सरना, मसना, हडगडी, जाहेर, देशाउली, ससनदीरी, अखड़ा, हड्रगडी, खेल मैदान, जतरा टांड आदि का भूमि बैंक में शामिल किया गया है। यह जमीन गांव का सामुदायिक संपत्ति है-इसका संपति/स्वामित्व कार्ड किसके नाम से बनेगा?

  3- आॅनलाइन व्यवस्था होने के बाद 1932 के खतियान में भारी छेड़छाड़ हुआ है, जिसमें खतियान धारियों का नाम गलत दर्ज किया गया है। किसी में खाता संख्या गलत दर्ज है, किसी में असली जमीन मालिक को हटा कर दूसरे लोगों का नाम दर्ज कर दिया गया है । आॅनलाइन गलत अपडेट होने के कारण जमीन मालिक जमीन का रसीद नहीं काट पा रहे हैं। स्वामित्व योजना के तहत इस तरह के जमीन का प्राॅपर्टी /स्वामित्व कार्ड किसके नाम से बनेगा?

 4-सीएनटी, एसपीटी एक्ट, पेसा कानून 1996, 1932 के खतियान में प्रावधान अधिकार,ं वन अधिनियम कानून 2006 एवं 5 वीं अनूसचित क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के जल, जंगल, जमीन पर इनके परंपरागत अधिकारों का प्रावधान किया गया है। के जंगल-जमीन, सामाजिक-संस्कृतिक मूल्यों पर प्रतिकूल असर होगा। 

5-ये सभी गंभीर सवाल हैं-जमीन का आॅनलाइन व्यवस्था होने के बाद भारी संख्या में आॅनलाइन जमीन का लूट, नजायज कब्जा चल रहा है। इसको ठीक करने लिए आदिवासी, मूलवासी, किसान प्रज्ञा केंन्द्र से सीओ कार्यालय, सीओ कार्यलाय से अमीन के पास दौडतें दौड़ते दो-तीन साल बित गया, लेकिन गलती ठीक नहीं हो रहा है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

प्राॅपटी कार्ड-मकान के साथ, उनके सभी जमीन को एक में लिंक किया जाएगा, तब इसका संपति कार्ड बनेगा। (जिस जमीन पर ग्रामीण अपना मालिकाना हक साबित कर सकेगें, जिस जमीन का मालिकाना हक साबित नहीं कर पाऐगें उस जमीन को सरकार अपने नाम कर लेगी), जो डिजिटल नक्सा में रखा जाएगा। 

 स्ंापति कार्ड/प्राॅपटी कार्ड लागू होने से आदिवासी इलाके को निम्नलिखित खतरों का सामना  भविष्य में करना होगा। 

1-परंपरागत आदिवासी इलाके का डेमोग्राफी -भौगोलिक स्थिति पूरी तरह से बदल जाएगा। 

2-5वीं अनुसूचि, सीएनटी, एसपीटी एक्ट, मुंडारी खूंटकटी एवं विलकिनसन रूल्स में प्रावधान गांव के सीमा के भीतर के गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाड़ी, परती-झारती, नदी-नाला आदि सामुदायिक जमीन पर बाहरी समुदाय का प्रावेश एवं कब्जा होगा।

3-प्रकृतिक जीवनशैली से जुड़े आदिवासी-मूलवासी, किसान, दलित समुदाय का परंपरागत सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, आधार ध्वस्त हो जाएगा।

4-ड्रोन सर्वे पूरा होने के साथ ही गांव का डिजिटल नक्सा बनेगा, नक्सा डिजिटल होगा, तब खतियान भी डिजिटल होगा। तब सवाल है कि-आदिवासी-मूलवासी समुदाय को सामुदाचिक अधिकार देने के साथ ऐतिहासिक पहचान देने वाला 1932 (जिससे आधार माना जाता है) खतियान का अस्तित्व बना रहेगा? या स्वतः निरस्त हो जाएगा?

5-ड्रोन से सर्वे के बाद जमीन मालिकाना हक क्लेम या दावा करने के लिए ग्रामीणों से कहा जाएगा, तब जिस जमीन का मजगुजारी रसीद काटा जा रहा है, उस जमीन का फ्रूफ या सबूत पेस करेगें, लेकिन ग्रामीणों का सामुदायिक जमीन जिसका रसीद नहीं काटा जाता है, उसका क्या होगा?

6-ग्रामीण इलाके में बढ़ते शहरी, आबादी के कारण ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था, परंपरागत जलस्त्रोतों, वन व्यवस्था, जैव विविधता, एवं पर्यावरणीय व्यवस्था पर प्रतिकुल प्रभाव पड़ेगा।

7-प्राॅपटी कार्ड योजना के तहत ग्रीमीण आदिवासी इलाके में बड़ी संख्या में बाहरी आबादी के प्रवेश होने से, राज्य में आदिवासी आबादी तेजी से घटेगी। परिणाम स्वरूप आदिवासी समुदाय की सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं राजनीतिक शक्ति स्वतःकमजोर होगा। 

आॅनलाइन खतियान में गलती के कारण बहुत से जमीन मालिक 4-5 वर्षों से जमीन का रसीद नहीं कटवा पा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ खतियान से परंपरागत रैयातों का नाम हटाकर रातों-रात पांजी टू में में जमीन मालिक का नाम बदल दिया जा रहा है। कम पढ़े-लिखे सीधे, साधे आदिवासी किसानों को नहीं समझ में आ रहा कि ये क्या हो रहा है? बड़ा सवाल है कि आखिर इसके लिए कौन जिम्मेवार है?। 

इस तरह से आदिवासी-मूलवासी किसान, समुदाय से जमीन, जंगल निकलते जा रहा है। साथ ही समुदाय का सुरक्षा कवच सीएनटी, एसपीटी एक्ट, कमजोर होता जा रहा है। अब जमीन का लूट बढ़ेगा, परिवार और समाज में अशांति बढ़ेगा। इससे उत्पन्न परिस्थियों से विस्थापन, पलायन, बेरोजगारी, भूख, गरीबी, भूमिहीन, अस्वस्थ्य, सूखा-आकाल एवं पर्यावरण प्रदूषण जैसे महामारी का सामना करना होगा। 

हमारी मांगें-

1-केंन्द्र सरकार द्वारा काॅरपोरेट घराणों एवं पूंजिपतियों के लिए लायी जा रही स्वामित्व योजना के तहत प्राॅपटी/ संपत्ति कार्ड योजना का लागू नहीं किया जाए। 

2-झारखंड में सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, ं 5वीं अनुसूचि एवं पेसा कानून में प्रावधान अधिकारों को कड़ाई से लागू किया जाए। 

3-आदिवासी बहुल खूंटी जिला में प्राॅपटी कार्ड बनाने के लिए ड्रोन से जमीन /संपत्ति का सर्वे किया जा रहा था को होल्ड किया गया है, इसको पूरी तरह स्थायी रूप से रोका जाए। 

 4-रघुवर सरकार ने गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाड़ी जमीन को भूमि बैंक में शामिल किया है, इस भूमि बैंक को रदद किया जाए। 

5-राज्य के सभी जलस्त्रोंतों, नदी-नाला, झील-झरना का पानी लिफट ऐरिगेशन के तहत पाइप द्वारा किसानों के खेतों तक कृषि विकास के लिए पहुंचाया जाए। 

6-आॅनलाइन जमीन के दस्तावेजों का हो रहा ़क्षेड़-छाड़ एवं जमीन ko roka jayA

Niwedak -आदिवासी अस्तित्व रक्षा मंच,

  मुंडारी खूंटकटी परिषद। संपर्क -दयामनी बरला-9431104386

तुरतन तोपनो-7091128043, फूलचंद मुंण्डा, हादु तोपना-9801705283, राजू लोहरा-6202988865, दयाल कोनगाड़ी-8797772125,