Tuesday, June 24, 2014

चिलचिलाती धूप में तापती धरती की ताप में तुफान की झोंकों में ओला के गोलों की मार में भी शांत खड़ी सब सह लेती हो तुम काश मै तुम से सिख सकती

पुटुस तुम को
लोग जंगली कहते हैं
लेकिन मैं ही जानती हुं
की तुम कितना महान हो
तुम लोगों की निगह में जंगली हो
जहां-तहां तुम जन्म लेते हो
गंदगी के बीच
कीचड़ के बीच
खेत में 
खलिहान में
टांड में आड़ में
पहाड़ पर
टोंगरी पर
जंगल में
गांव में, टोला में
महला में
सभी जहग मौजूद हो
सभी हर जगह तुम्हारा है
जड़ा में
गरमी में
बरसात में
तुम खिलते हो
फलते हो
हरियाली, सफेद,
लाल-पीला
सबके  मन को खिंच लेते
बच्चों के मन में 
फूल के नन्हीं
नलों में
मीठी मीठी रस की बुंदे
कभी छोटी नन्हीं
चिंटी आती रस चुसने
तो कभी आप पर छोटी तितली
प्यार से चिपकती
हर फूल के
डंडी पर बीसियों 
छोटे छोटे हरी हरी
गोल गोल पुटुस 
फलों की बंधी मुठी
हरे गोल गोल
अब धीरे धीरे भूरापन
भूरापन अब अहिस्ते अहिस्ते
काला काला
कुछ तो नीलापन लिये-काला
अब मैना, गेंरवा, गिलहरी
चुटिया-मुसा 
बच्चें-बच्चियाॅं
युवा-बुजूर्ग 
पुटुस का पक्का मीठ
फल का स्वाद अपने
अंदाज के साथ 
ले रहे हैं
पेट भी ’ाांत होता है
पेट अब भूख भूख नहीं चिलाएगा
जब लोग असुरक्षित
महसुस करते हैं
अपने घर आंगन में
धान, मंडुआ, गोडा खेत में
तब तुम उनका रक्षक
बन कर चारों ओर उनके
खड़े हो कर
डनको पहरा देते हो 
घोरना बन कर
जब भी चुरू में भात
पकाना हो तुम 
हाजिर हो इंधन बन कर
और पकता है भात
तुम झुरी लकड़ी 
के बिना परिवार भूखे
पेट सोता है
तो फिर तुम कहां कमजोर हो??
नहीं नहीं कमजोर नहीं
तुम महान हो
सुबह बासी मुंह
को साफ करना हो
गांव कंपनी को
पुटुस दतवन आप 
के सामने खड़ा रहता है
गाय, बकरी चराते 
पैर की अंगुलियांे
पर ठेस लगता है
दर्द करहा रहा है
देशी  दवा पुटुस 
पत्ता को हाथ से
मल कर रस निचोड़
कर जख्म को राहत 
पहुंचाती हो तुम
चिलचिलाती धूप में
तापती धरती की ताप में 
तुफान की झोंकों में
ओला के गोलों की 
मार में भी
शांत खड़ी सब सह
लेती हो तुम
काश मै तुम से सिख सकती 


Tuesday, June 17, 2014

25 जनवरी 2012 को झारखंड हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि सीएनटी एक्ट 1908 की धारा 46 को कड़ाई से पालन किया जाए ।

सेवा में,                                              पत्रांक.......2......
उपायुक्त महोदय                                        दिनांक....17 जून 2014............
खूंटी
विषय-सीएनटी एक्ट के मूल धारा 46 को कड़ाई से लागू करने के संबंध में
महाशय,
इतिहास गवाह है कि बिरसा उलगुलान में हमारे नायकों के शहादत के बाद हमारी जमीन की रक्षा के लिए तत्कालीन सरकार छोटानागपुर काशतकारी अधिनियम 1908 बनाया. जब जमींदार हमारी जमीन छीन रहे थे, वह एक ऐसा समय था जब पुरखों ने जिस जंगल-जमीन को साँप  -भालू, बिच्छू से लड़कर बनाये थे, इससे जमींनदार, इजारेदार और भूमि-माफिया खुले आम छीनते जा रहे थे।  इसी जमीन की लूट को रोकने और आदिवासियों-मूलवासियों के धरोहर-जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए अंग्रेज सरकार ने  सी एन टी एक्ट  कानून १९०८ बनाया। इस कानून के बनने के बाद हमारी जमीन का संरक्षण हुआ।. कानून के बावजूद आदिवासियों और मूलवासियों की जमीन बेदर्दी से गैर-कानूनी तरीके से छीनते जा रही है। .हम जानते हैं कि झारखंड राज्य गठन के बाद से ही  झारखंड पर कापरोरेट घरानों, देशी -विदेशी  कंपनियों  और भूमि माफिया की गिद्ध दृष्टि  लगी हुई है.। पहले ही लाखों झारखंडी विस्थापित किए गए हैं और यदि यह कानून भी बदल दिया गया तो तय है कि झारखंडियों का कोई नामोनशान नहीं बचेगा।. झारखंडी अस्मिता और अस्तित्व को यदि बचाना है तो सीएनटी की मूल धारा 46 को मजबूती से लागू करवाना होगा और गैर-कानूनी तरीके से छीनी गयी जमीन की वापसी का भी अभियान चलाना होगा. यह सरकार की जिम्मेवारी है। 
विदित हो कि 25 जनवरी 2012  को झारखंड हाईकोर्ट ने  आदेश  दिया कि सीएनटी एक्ट 1908 की धारा 46 को कड़ाई से पालन किया जाए । 
हमारी मांगे-
1-.सीएनटी एक्ट की मूलधारा 46 को कड़ाई से लागू किया जाए 
2-खतियानों का आॅन लाईन करना सीएनटी एक्ट का घोर उल्लंघन है, यह सीएनटी एक्ट को स्वतः खत्म करने की बड़ी साजिश  है।  इसलिए खतियानों का आॅन लाईन का बंद किया जाए।
3-झारखंड हाइकोर्ट का यह फैसला कि सीएनटी एक्ट की धारा 46 (1),(2) और 64 को सख्ती से लागू किया जाए-इसका आक्षरसा पालन किया जाए।
4-. गैर कानूनी तरीके से आदिवासी-मूलवासियों की छीनी गयी जमीन की वापसी का अभियान चलाया जाए
5-. पांचवी अनुसूचि क्षेत्र में गा्रम सभा को जमीन संरक्षण के लिए दिये गये अधिकारों को कड़ाई से पालन किया जाए( ग्राम सभा के अनुमति के बिना किसी तरह का जमीन अधिग्रहण नहीं)।
6- सीएनटी एक्ट में आदिवासी-मूलवासियों के जमीन की रक्षा के लिए उपायुक्त को दिये गये अधिकार का अक्षरसा पालन किया जाए
7- झारखंड का समुन्नत विकास के लिए स्थानीयता नीति लागू किया जाए।

                                                             निवेदक
                                                 आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच 
                                                      आम आदमी पार्टी 

Sunday, June 1, 2014

जिंदगी के लंबे और चुनौति भरा सफर में आप लोग मेरी ताकत बन कर, दोस्ता बनकर, सहयोगी बन कर, चिंतक बनकर, मेरा प्रशासक बन कर, ’शुभ चिंतक बन कर हर कदम, हर स्वांस में मेरे साथ निरंतर रहे और आशा है-आगे कई वैचारिक मत भेदों के बावजूद हम-आप साथ रहेगें।

1995 के 5 जुलाई को कोयल कारो परियोजना का घोषणा के साथ ही झारखंड के तत्कालीन रांची जिला के तोरपा प्रखंड और तत्कालीन गुमला जिला के कमडारा प्रखंड, बसिया प्रखंड, पालकोट प्रखंड, सिसई प्रखंड और गुमला प्रखंड, प’शिचमी सिंहभूंम के .गांव सहित ...कुल 245 गांवों में विस्थापन का बादल मंडराने लगा था। कोयलकारो जनसंगठन ने नारा दिया-हम जान देगें-जमीन नहीं देगें। कोयलकारो जनसंगठन के साथ विस्थापन के खिलाफ संघर्षरत जनआंदोलनों ने भी आवाज बुलंद किया। मैं धन्यबाद देती हूॅं-कोयलकारो जनसंठन को-जो हम सभी को आंदोलन में अपने साथ खड़ा होने का मौका दिया। लड़ने सिखाया। झारखंड के इतिहास, भाषा-संस्कृति, सामाजिक मूल्यों की रक्षा के लिए समझौताविहीन संघर्ष के अस्तित्व को आगे बढ़ाने सिखलाया। 2 फरवरी 2001 को कोयलकारो जनसंगठन पर पुलिस फायरिगं हुआ-आठ साथी शहीद हुऐ। 23 साथी घायल हो गये। करीब दो माह तक घायलों का इलाज रिम्स में चला। तब पहली बार घायलों के साथ रहने, उनका सेवा करने का मौका मिला। 
सरकार के अनुसार 2 फरवरी के गोली कांड में एक पुलिस भी मारा गया था। इसको लेकर जनसंगठन के साथियों पर केस हुआ। केस की वापसी को लेकर जनसंगठन और पुलिस प्रशासन के बीच कई बार वर्ता हुआ। वर्ता में जनसंगठन ने मुझे ग्रामीण एसपी से बात करने की जिम्मेवारी दी। लगातार ग्रामीण एसपी के साथ केस वापसी को लेकर वर्ता चली-मैं एक ही बिंन्दु में अड़ी रही-कि जनसंगठन पर थोपा गया केस बिना वार्ता  वापस लिया जाए। लेकिन प्रशासन हमारी शर्त  नहीं मानी। 
दूसरी ओर जीवन में पहली बार केस लड़ने के लिए कार्ट का दरवाजा भी देखना पड़ां। जनसंगठन के हितौशी  साथियों के साथ मिल कर केस रांची कोर्ट के वकील....को दिये। उनको कोयलकारो आंदोलन, सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, जल-जंगल-जमीन के साथ आदिवासी -मूलवासी समाज का रिस्ता -इन तमाम पहलू पर वकील के साथ चर्चा किये। इसमें वासवीजी, वरिष्ठ पत्रकार फैसल अनुरागजी, डा. रमेश  शरणं जी आदि सक्रिया भूमिंका निभाये। 
रांची कोर्ट में वकील साहब ने केस अपील किये। केस के लिए आवश्याक कागजात थाना से लाना कर वकील को देना, विधान सभा में जो चर्चा चला था-उसका प्रति माले विधायक काॅ0 महेंन्द्र सिंह के विधायक आवास जाकर लाना, और इसको वकील को पहुंचाना। हर दिन वाकील के पास जरूरी कागजात को लेकर जाना, साथ ही केस लड़ने के लिए पैसा चंदा करके जनसंगठन को देना, वकील को देना -जिंदगी और संघर्ष को करीब से समझने का मौका था। 
जनसंगठन पर थोपा गया केस वापसी, घायलों को मुआवजा दिलाने की लड़ाई, ‘’शहीद परिवार को सरकारी नौकरी देने की मांग लड़ाई -में काॅ0 महेंन्द्र सिंह के साथ लाकर साथ खड़ा कर दिया। क्योंकि मैं लगातार इस मामले को लेकर विधायक महेंन्द्र सिंह के विधायक आवास पर जाती थी। महेंन्द्र सिंह के सहयोग, पे्रम भाव और जुझारूपन से भी इसी दौरन परिचाय हुईं । 
इसके बाद लगातार जनमुदों को लेकर गांव-सामाज से लेकर राज्य से लेकर देश  स्तर पर जो भी संघर्ष विभिन्न जनआंदोलनों, जनआंदोलनों के समूहों, एनएपीएम, इंसाफ आदि के बैनरों से देश  भर में लड़ी जा रही तमाम जनआंदोलनों में भाग लेने, सिखने, आंदोलन को सहयोग करने, सहयोग लेने का भी मौका मिला। ये सभी अवसर निश्चित  रूप से आप सभों ने दी दिया। 
2006 से 2010 तक अर्सेलर मित्तल जो वर्तमान खूंटी जिला के तोरपा प्रखंड, रनिया प्रखंड, कर्रा प्रखंड तथा गुमला जिला के कमडारा प्रखंड़ों के करीब 40 गांवों को विस्थापित कर 12 मिलियन टन का स्टील प्लांट लगाना चाहता था-ग्रामीण गांव छोड़ना नहीं चाहते थे। ग्रामीण अपने पूर्वजों का जमीन बचाने के लिए कंपनी के खिलाफ झंण्डा बुलंद कियें। कई बार कंपनी और दलालों ने जान से मारने की धमकी दी। फान पर -बोला-तुम गांव में बैठक करना छोड़ दो, कंपनी के खिलाफ गांव वालों को भड़काना बंद करो-नही ंतो इतना गोली मारेगें कि -शव का ’शिनाख्त  नहीं होगा, तुम्हारा लाश  को कोई नहीं पहचानेगें। दूसरी बार फिर फोन आया-तुम सुधर नहीं रही हो-वारनिंग दे रहे हैं-गांव में बैठक करना छोड़ दो-नही तो लोगों के बीच से ही उठा लेंगें। आप लोगों का प्यार-सहयोग ने मुझें और मजबूती के साथ खड़ा रखा। 
हमने हमारे पूर्वजों की दी विरासत को कंपनी के हाथ-जाने से बचा के अभी तक रखा।  2010 से छाता नदी पर गैर कानूनी तरीके से कंटी जलाशय के नाम पर डैम बनना प्ररंभ्म किया गया थां। विरोध करने पर एक ग्रामीण की हत्या भी हो गयी। इस घटना के बाद मुझे गांव में बुलाया गया। 17 दिसंबर को पहली बार जबड़ा गांव आयी। दो बेगुनाह लोगों को पुलिस पांच दिनों तक अपने कस्टडी में रखी, इन लोगों को पुलिस से मुक्त करवाये। ग्रामीणों के अग्राह पर डैम के विरोध आंदोलन को आगे बढ़ाये। डैम के बारे जानकारी लेने के लिए सरकारी दफतरों में-प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, जिला में-एसडीओ, अपर सर्माहर्ता, उपायुक्त खूंटी, राज्य जलसं’ााधन विभाग, वि’ोष भूर्अजन विभाग में आरटीआई से जानकारी मांगी। सरकारी दफतरों से मिली जानकारी के अनुसार जनंआदोलन को तैयार करने की को’शिष  की। जनआंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए-डेम प्रभावित जनसंघर्ष समिति बनाये। कई धमकियां आयी, अढचन आये, फिर भी आज तक जमीन, गांव सभी सुरक्षित है। 
2012 में नगड़ी में सरकार आईआईएम सहित कई संस्थानों के लिए 227 एकड़ जमीन जबरन अधिग्रहण करना प्ररंभ्म कर दिया था। 227 एकड़ जमीन को चारों ओर से घेराबंद किया जा रहा था। इस भूखंड के चारों ओर पुलिस बल, को उतार दिया था। सरकार का तर्क था-जमीन 1957-58 में ही सरकार खरीद चुकी है। दूसरी ओर गांव वाले दावा कर रहे थे कि हमलोगों ने जमीन नहीं बेची है। दोनों पक्षों के हकिकत को समझने के लिए मैंने भूअर्जन विभाग से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी। जानकारी मिला-1957-58 में 153 रैयत थे, इनमें से 128 रैयतों ने मुआवजा नहीं लिया और वो पेसा रांची ट्रेजरी में जमा है। यह साफ हो गया-कि किसान जमीन का पैसा नहीं लिये हैं-तब सरकार जमीन कैसे खरीदी। 
इसकी जानकरी उपलब्ध सरकारी दस्तावेज के साथ 2 मार्च को राज्यपाल को मांग प्रत्र देकर -जबरन अधिग्रहण को रोकने का आग्रह किये। 2 मार्च से 4 जूलाई तक नंगड़ी के खेत में दिन-रात धरना ग्रामीणों ने दिया। पूरा आंदोलन में साथ रहे। धरना के साथ सभी मोरचों पर आंदोलन चला। सरकार ने हल निकालने के लिए पांच आइएस अधिकारियों का एक उच्चस्तरीय समिति बनायी। इस हाईलेबल समिति का अध्यक्ष भूराजस्व मंत्री श्री मथुरा महतो को बनाया गया था। जमीन मालिको और हाईलेबल समिति के बीच तीन बार बैठक हुई। तीनों बार ग्रामीणों ने बताया कि-जमीन बिका नहीं है, और न ही बेचना चाहते हैं। श्री महतो जी बोलते रहे-जमीन मालिकों की भावनाओं का ख्याल रखा जाएगा। 
सरकार को सुकुरहूटू का जमीन -जहां 1900 एकड़ बंजर भूमि हैं-लगातार विकल्प के रूप में बताते रहे। लेकिन सरकार अपने जिद पर अड़ी रही। दूसरी ओर सरकार मुझे जेल भेजने की तैयारी में जुट गयी। 2006 के मानरेगा में ग्रामीणों को जोब कार्ड दिलाने के लिए रैली निकाली गयी थी-इसी मामले में मेरे नाम पर वारंट निकाला गया और जेल भेज दिया। जेल से तब तक बाहर नहीं निकलने दिया-जब तक कि लाॅ यूनिर्वसिटी के लिए 70 एकड़ जमीन पूरी तरह से घेराबंदी और कब्जा में लिया। मेरे जेल जाने के बाद आंदोलन को किसी ने आगे नहीं बढ़ाया, यह दुखद रहा। फरवारी 2013 को तत्कालीन केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेश जी प्रभात खबर आये थे। तब प्रभात खबर के प्रधान संपाद श्री हरिवंश जी के अमंत्रण में मैं भी जयरामजी के छोटी मुलाकात में गयी थी। साथ में जयरामजी के नाम नगड़ी का जमीन वापस करने और इसके लिए विकल्प में सूकुरहूट में जमीन देखने के लिए मांग पत्र बना कर दिये। इस मुददे पर 35 मिनट तक मंत्री जी से बात हुई। दो माह के बाद जयराम रमे’ाजी के पहल पर नगड़ी से आई आई एम सहित अन्य संस्थानों को सूकूरहूटू स्थानंत्रित करने का फैसला लिया गया। जो मेरे लिए सुखद रहा। 
2011 से ही खूंटी जिला के तजना नदी पर डैम बनाने की सुगबुगाहट हो रही है। लेकिन डैम के खिलाफ आंदोलन 2013 से ज्यादा सक्रिया हुआ है। सरकारी अधिकारी भी 2013 में डैम बनाने के लिए पूरी ताकत के साथ जनसुनवाई कराने की कोशिश  किये। लेकिन सरकार असफल रही। 
मेरा मनना है-जींदगी में जितने भी उतार-चढ़ाव हम लोगों ने देखा-सामना किये, हर कदम में आप सभों का सहयोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रहा है। आप के प्रेम -दुलार ने ही हर कदम को मजबूती से आये बढ़ाया। आज गर्व के साथ कह सकते हैं-कि हमन बिरसा मुंडा के विरासत के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया। कोयल नदी, कारो नदी, छाता नदी और तजना नदी का बहता पानी इसका साक्षी है। 
इस लबें संघर्ष के कडुआ अनुभवों ने एक कदम आगे बढ़ने का निर्णय लिया। जिस जल-जंगल-जमीन को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं-इसको संरक्षित करने, पूंजीपतियों, कारपोरेट के हाथें निलामी करने का कानून -नीति लोक सभा में और विधान सभा में ही बनाया जाता है। पालन भी इन्हीं संस्थानों के द्वारा किया जाता है। इस लिए सभों ने आंदोलन के साथियों ने निर्णय लिये कि-हम लोगों को राजनीतिक हस्तक्षेप में जाना चाहिए-जहां कानून और नीतियां तय की जाती हैं। 
चुनाव की तैयारी आप लोगों ने जनआंदोलन के तर्ज पर किये। नामंकन के पहले सभी अपने देवी-देवता, शत्कि के प्रतिक भगवानों को नमन-दर्’शन करते हैं। आप लोगों ने झारखंड के समझौताविहीन ’शहादती बिरसा मुंडा  के उलगुलान को याद करके-झारखंड की विरासत की हिफाज के लिए बिरसा मुंडा के शहादती आंदोलन के साथ राजनीतिक शत्कि को बनाने का संकल्प डोम्बारी बुरू में लिये। और तय किये कि हमारा रास्ता बिरसा का रास्ता होगा। 
खूंटी लोक सभा क्षेत्र चार जिलों के 6 विधान सभा क्षेत्र में फैला है। इसमें खूुटी जिला में तोरपा विधान सभा, और खूंटी विधान सभा है। सिमडेगा जिला में  कोलेबिरा विधान सभा और, सिमडेगा विधान सभा है। रांची जिला में  तमाड़ विधान सभा है, और खरसंवा जिला में खरसंवा विधान सभा है। पूरा देश -दुनिया जानता है कि-पूरा खूंटी लोक सभा क्षेत्र में माओवादी, पीएलएफआई से लेकर दर्जनों छोटे-बड़े उग्रवादी समूह सक्रिया हैं। यह भी सभी जानते हैं-इसमें से कई विधान सभा पर उग्रवादी संगठनों का शतप्रतिशत वर्चास्व है। इन उग्रवादि संगठनों के इच्छा के बिना कई क्षेत्रों में पता भी डोल नहीं सकता है।
 पिछले विधान सभा चुनाव के दौरान तोरपा विधान सभा क्षेत्र में उग्रवादी संगठन ने फरमान जारी किया था-कि हमारा आदमी को वोट नहीं करोगे तो -हम रात में आएगें, और वोट करोग तो दिन में आएगें। इस फरमान से पूरा तोरपा विधान सभा क्षेत्र आतांक में डुब गया। चाहते-ना चाहते हुए भी लोागों ने भय से उनका उम्मीदवार को भारी मतों से जितवाया। 
2014 के लोक सभा चुनाव में सभा उग्रवादी संगठनों ने अपना अपना उम्मीदवार खड़ा किया था। जो अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया-वो संगठन उम्मीदवारों से भारी राशि  लेकर उनके पक्ष में वोट डालवाने का जिम्मेवादी उठाया। मेरे साथियों से सीधे तौर पर कहा-दयामनी को वोट करोगे तो-पूरा गांव जला देगें। नामांकन के दिन से ही मेरे साथियों को खूंटी नामांकन के लिए आने से रोकना शुरू किया। मेरे समर्थकों को कहा गया-दयामनी को वोट करोगे तो अंजाम ठीक नहीं होगा। नामांकन के दिन से लगातार -दिन-रात हर गांव में मेरे साथियों को प्रचार करने से रोकते रहे। धमकियां देते रहे। 
7 अप्रैल को बिरबांकी में हमारे साथियों  को बंधक बनाया, गाड़ी की चाभी छीन लिये। चार घंण्टा तक बंधक रखने के बाद शाम सात बजे साथी वहां से किसी तरह भाग निकले। सातों साथी रात भर बिरबांकी के जंगल में भटकते रहे। 18 घंण्टा के बाद साथी खूंटी पहुंचे। चलते चलते पैरों पर छले ओ गये थे। पूरा देह में जंगल झाडी -कांटों का खंरोच, देख कर मन सिहर जाता था। सात साथियों की जिंदगी हमारे लिये कीमती था। हमलोगों ने प्रशासन को  रिपोर्ट देर से ही लिखवायी, कारण की पहले हमारे साथियों के वापस आने का इंतजार कर रहे थे। 
9 अप्रैल को कर्रा थाना के बिकवादाग में पीएलफआई ने हमारे साथियों को मारा-पीटा, गाड़ी का चाबी छीन लिया। बाद में हमारे नेतृत्वकारी साथी को कैद में लिया और बाकी छह को वहां से भागने को कहा, उन लोगों को हिदायत दी गयी कि कोई पिछे मुडकर नहीं देखेगा-जितना जल्दी हो भागो यहां से। जिस साथी को छह बंदूकधारियों ने कैद में रखा-उनसे वहां खड़े ब्रहम्णों का पैर छू कर प्रणाम करके हाथ जोड़कर कहलवाया-एनोश  एक्का को वोट दो। पुलिस वहां पहुंची, इस कारण उनका जान बच गया। 
एक बुजूर्ग साथी से इसी संगठन के लोगों ने पूछा-तुम दयामनी का काम कर रहे हो? उस सज्जन ने जवाब दिया-हां काम कर रहे हैं। तब उन लोगों ने धमकाया-दयामनी को वोट कराओगे तो अंजाम ठीक नहीं होगा। भयमुक्त उस सज्जन ने जवाब दिया-यदि सचाई और समाज के लिए आप लोग मार भी दीजिएगा-तो इतिहास बनेगा, कि हमारी जान समाज की रक्षा के लिए गयी। 
एक दूसरा व्यक्ति ने हिम्मत दिखायी-17 अप्रैल को चुनाव के दिन-उसी संगठन के लोग मातदाताओं को अपने तरफ वोट करवाने के लिए खाने-पिने का आयोजन किये थे। वहां सभी को जाना था। वहां निर्देष दिया गया-सिर्फ झारखंड पार्टी के एनो’श को ही वोट करना है, प्रत्यक्षदशिर्यों के अनुसार-एक बुजुर्ग ने जवाब दिया-हम तो दयामनी को ही वोट देगें। इतना सूनना था-कि उक्त बुजुर्ग को लोगों ने खूब पीटा। इसी रात को वोट के बाद कर्रा थाना क्षेत्र के एक गांव के हमारे मूख्य अगुवा साथी के घर लोग पहुंचे-और यह कहते पीटा की तुम लोग दयामनी को वोट किये हो। 
केलेबिरा विधान सभा क्षेत्र में मेरा परचा बांट रहे युवक के उपर गोली चलायी गयी। जैसे ही गोली चलाया-परचा बांट रहा युवक सिर झुका दिया। बाल बाल बच गया। 
मैं आप लोगों को यह भी बताना चाहती हुं-कि मुझे भी बोला गया कि-5 लाख रूपया दो, नही ंतो गांव में घुसने नहीं देगें। मैं ने एक ही जवाब दी-जब गांव बचाने का लड़ाने मैंने भी लड़ा है , तब गांव बचा है-आज इसी गांव में घुसने के लिए 5 लाख रूप्रया मांग रहे हो। हमने सीधा कहा-हम नहीं दे सकते हैं। 
मित्रो-राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ यह एक बड़ी लड़ाई थी। जहां कहीं भी हमारे लोगों से वोट करने के लिए पैसा मांगा-हमारे साथियों ने हाथ जोड़ कर सीधा अनुरोध करते हुए कहा-यदि आप को वोट के लिए पैसा चाहिए तो आप हम को वोट मत दीजिए। हमारी टीम ने चुनाव प्रचार में यह भी नहीं कहा-कि आप हम को ही वोट करो, हाॅ आप अपना वोट पैसों से, लालच से मत बेचो, आप का एक वोट ही इस राज्य और दे’ा को बना सकता है और विगाड सकता है। 
मुझे गर्भ है-कि जिस उदे’य के साथ राजनीति में कदम रखे थे-हम उस उदे’य को हाशिल कर लिए हैं। हमारा उद्देश्य  था- जल-जंगल-जमीन-भाषा-संस्कृति, अस्तित्व-पहचान की लड़ाई को राजनीतिक प्लेटफाॅम में लाना, जहां दूसरे राजनीतिक पार्टीयों के यह हमारी अस्तित्व-विरासत मुददा के रूप कभी नहीं देखा गया। हम ने घोषणा भी किया हे-कि इसकी रक्षा के लिए अंतिम स्वांस तक हम आप लोगों के साथ रहेगें। 
हमारी टीम उन तमाम साथियों को भी धन्यवाद देना चाहती है-जिन्होंने मार खा कर, जुल्म सह कर भी समाज-व्यवस्था बदलने और अपने हक-अधिकार, जल-जंगल-जमीन और विरासत के लिए वोट किये। हमारी टीम धन्यवाद करती है-आप लोगों ने एक-एक मुठा चावल, एक-एक फड़ा लकड़ी, पातल, दाल, सुखा साग-सब्जी जमा कर चुनाव लड़ने का जजबा का आगे बढ़ायें। हम आप तमाम साथियों को भी धन्यवाद देना चाहते हैं, ,जिन्होंने दूर रह कर भी हमारी टीम के बहुत करीब हर कदम में, हर दुख-सुख में साथ रहे। हम आप सभों को भी धन्यवाद देना चाहते हैं-जिन्होंने अपने चिंतन में हमशा  हम लोगों के साथ रहे। हमारी टीम मीडिया के सभी साथियों को धन्यवाद देती है-कि आप ने हमारे प्रति अपनी जिम्मेवारी निभाते हुए -राज्य और देश  को हमारे चिंतन और कामों से हमेशा  अवगत करने का काम किये। हमारी टीम आप सभी अपील करती हे-कि इस लड़ाई को हम अकेले लड़ नहीं सकते हैं-आप सभी से सहयोग की अपील करती है। 
1995 के 5 जुलाई को कोयल कारो परियोजना का घोषणा के साथ ही झारखंड के तत्कालीन रांची जिला के तोरपा प्रखंड और तत्कालीन गुमला जिला के कमडारा प्रखंड, बसिया प्रखंड, पालकोट प्रखंड, सिसई प्रखंड और गुमला प्रखंड, प’शिचमी सिंहभूंम के .गांव सहित ...कुल 245 गांवों में विस्थापन का बादल मंडराने लगा था। कोयलकारो जनसंगठन ने नारा दिया-हम जान देगें-जमीन नहीं देगें। कोयलकारो जनसंगठन के साथ विस्थापन के खिलाफ संघर्षरत जनआंदोलनों ने भी आवाज बुलंद किया। मैं धन्यबाद देती हूॅं-कोयलकारो जनसंठन को-जो हम सभी को आंदोलन में अपने साथ खड़ा होने का मौका दिया। लड़ने सिखाया। झारखंड के इतिहास, भाषा-संस्कृति, सामाजिक मूल्यों की रक्षा के लिए समझौताविहीन संघर्ष के अस्तित्व को आगे बढ़ाने सिखलाया। 2 फरवरी 2001 को कोयलकारो जनसंगठन पर पुलिस फायरिगं हुआ-आठ साथी शहीद हुऐ। 23 साथी घायल हो गये। करीब दो माह तक घायलों का इलाज रिम्स में चला। तब पहली बार घायलों के साथ रहने, उनका सेवा करने का मौका मिला। 
सरकार के अनुसार 2 फरवरी के गोली कांड में एक पुलिस भी मारा गया था। इसको लेकर जनसंगठन के साथियों पर केस हुआ। केस की वापसी को लेकर जनसंगठन और पुलिस प्रशासन के बीच कई बार वर्ता हुआ। वर्ता में जनसंगठन ने मुझे ग्रामीण एसपी से बात करने की जिम्मेवारी दी। लगातार ग्रामीण एसपी के साथ केस वापसी को लेकर वर्ता चली-मैं एक ही बिंन्दु में अड़ी रही-कि जनसंगठन पर थोपा गया केस बिना वार्ता  वापस लिया जाए। लेकिन प्रशासन हमारी शर्त  नहीं मानी। 
दूसरी ओर जीवन में पहली बार केस लड़ने के लिए कार्ट का दरवाजा भी देखना पड़ां। जनसंगठन के हितौशी  साथियों के साथ मिल कर केस रांची कोर्ट के वकील....को दिये। उनको कोयलकारो आंदोलन, सीएनटी एक्ट, एसपीटी एक्ट, जल-जंगल-जमीन के साथ आदिवासी -मूलवासी समाज का रिस्ता -इन तमाम पहलू पर वकील के साथ चर्चा किये। इसमें वासवीजी, वरिष्ठ पत्रकार फैसल अनुरागजी, डा. रमेश  शरणं जी आदि सक्रिया भूमिंका निभाये। 
रांची कोर्ट में वकील साहब ने केस अपील किये। केस के लिए आवश्याक कागजात थाना से लाना कर वकील को देना, विधान सभा में जो चर्चा चला था-उसका प्रति माले विधायक काॅ0 महेंन्द्र सिंह के विधायक आवास जाकर लाना, और इसको वकील को पहुंचाना। हर दिन वाकील के पास जरूरी कागजात को लेकर जाना, साथ ही केस लड़ने के लिए पैसा चंदा करके जनसंगठन को देना, वकील को देना -जिंदगी और संघर्ष को करीब से समझने का मौका था। 
जनसंगठन पर थोपा गया केस वापसी, घायलों को मुआवजा दिलाने की लड़ाई, ‘’शहीद परिवार को सरकारी नौकरी देने की मांग लड़ाई -में काॅ0 महेंन्द्र सिंह के साथ लाकर साथ खड़ा कर दिया। क्योंकि मैं लगातार इस मामले को लेकर विधायक महेंन्द्र सिंह के विधायक आवास पर जाती थी। महेंन्द्र सिंह के सहयोग, पे्रम भाव और जुझारूपन से भी इसी दौरन परिचाय हुईं । 
इसके बाद लगातार जनमुदों को लेकर गांव-सामाज से लेकर राज्य से लेकर देश  स्तर पर जो भी संघर्ष विभिन्न जनआंदोलनों, जनआंदोलनों के समूहों, एनएपीएम, इंसाफ आदि के बैनरों से देश  भर में लड़ी जा रही तमाम जनआंदोलनों में भाग लेने, सिखने, आंदोलन को सहयोग करने, सहयोग लेने का भी मौका मिला। ये सभी अवसर निश्चित  रूप से आप सभों ने दी दिया। 
2006 से 2010 तक अर्सेलर मित्तल जो वर्तमान खूंटी जिला के तोरपा प्रखंड, रनिया प्रखंड, कर्रा प्रखंड तथा गुमला जिला के कमडारा प्रखंड़ों के करीब 40 गांवों को विस्थापित कर 12 मिलियन टन का स्टील प्लांट लगाना चाहता था-ग्रामीण गांव छोड़ना नहीं चाहते थे। ग्रामीण अपने पूर्वजों का जमीन बचाने के लिए कंपनी के खिलाफ झंण्डा बुलंद कियें। कई बार कंपनी और दलालों ने जान से मारने की धमकी दी। फान पर -बोला-तुम गांव में बैठक करना छोड़ दो, कंपनी के खिलाफ गांव वालों को भड़काना बंद करो-नही ंतो इतना गोली मारेगें कि -शव का ’शिनाख्त  नहीं होगा, तुम्हारा लाश  को कोई नहीं पहचानेगें। दूसरी बार फिर फोन आया-तुम सुधर नहीं रही हो-वारनिंग दे रहे हैं-गांव में बैठक करना छोड़ दो-नही तो लोगों के बीच से ही उठा लेंगें। आप लोगों का प्यार-सहयोग ने मुझें और मजबूती के साथ खड़ा रखा। 
हमने हमारे पूर्वजों की दी विरासत को कंपनी के हाथ-जाने से बचा के अभी तक रखा।  2010 से छाता नदी पर गैर कानूनी तरीके से कंटी जलाशय के नाम पर डैम बनना प्ररंभ्म किया गया थां। विरोध करने पर एक ग्रामीण की हत्या भी हो गयी। इस घटना के बाद मुझे गांव में बुलाया गया। 17 दिसंबर को पहली बार जबड़ा गांव आयी। दो बेगुनाह लोगों को पुलिस पांच दिनों तक अपने कस्टडी में रखी, इन लोगों को पुलिस से मुक्त करवाये। ग्रामीणों के अग्राह पर डैम के विरोध आंदोलन को आगे बढ़ाये। डैम के बारे जानकारी लेने के लिए सरकारी दफतरों में-प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचल अधिकारी, जिला में-एसडीओ, अपर सर्माहर्ता, उपायुक्त खूंटी, राज्य जलसं’ााधन विभाग, वि’ोष भूर्अजन विभाग में आरटीआई से जानकारी मांगी। सरकारी दफतरों से मिली जानकारी के अनुसार जनंआदोलन को तैयार करने की को’शिष  की। जनआंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए-डेम प्रभावित जनसंघर्ष समिति बनाये। कई धमकियां आयी, अढचन आये, फिर भी आज तक जमीन, गांव सभी सुरक्षित है। 
2012 में नगड़ी में सरकार आईआईएम सहित कई संस्थानों के लिए 227 एकड़ जमीन जबरन अधिग्रहण करना प्ररंभ्म कर दिया था। 227 एकड़ जमीन को चारों ओर से घेराबंद किया जा रहा था। इस भूखंड के चारों ओर पुलिस बल, को उतार दिया था। सरकार का तर्क था-जमीन 1957-58 में ही सरकार खरीद चुकी है। दूसरी ओर गांव वाले दावा कर रहे थे कि हमलोगों ने जमीन नहीं बेची है। दोनों पक्षों के हकिकत को समझने के लिए मैंने भूअर्जन विभाग से आरटीआई के तहत जानकारी मांगी। जानकारी मिला-1957-58 में 153 रैयत थे, इनमें से 128 रैयतों ने मुआवजा नहीं लिया और वो पेसा रांची ट्रेजरी में जमा है। यह साफ हो गया-कि किसान जमीन का पैसा नहीं लिये हैं-तब सरकार जमीन कैसे खरीदी। 
इसकी जानकरी उपलब्ध सरकारी दस्तावेज के साथ 2 मार्च को राज्यपाल को मांग प्रत्र देकर -जबरन अधिग्रहण को रोकने का आग्रह किये। 2 मार्च से 4 जूलाई तक नंगड़ी के खेत में दिन-रात धरना ग्रामीणों ने दिया। पूरा आंदोलन में साथ रहे। धरना के साथ सभी मोरचों पर आंदोलन चला। सरकार ने हल निकालने के लिए पांच आइएस अधिकारियों का एक उच्चस्तरीय समिति बनायी। इस हाईलेबल समिति का अध्यक्ष भूराजस्व मंत्री श्री मथुरा महतो को बनाया गया था। जमीन मालिको और हाईलेबल समिति के बीच तीन बार बैठक हुई। तीनों बार ग्रामीणों ने बताया कि-जमीन बिका नहीं है, और न ही बेचना चाहते हैं। श्री महतो जी बोलते रहे-जमीन मालिकों की भावनाओं का ख्याल रखा जाएगा। 
सरकार को सुकुरहूटू का जमीन -जहां 1900 एकड़ बंजर भूमि हैं-लगातार विकल्प के रूप में बताते रहे। लेकिन सरकार अपने जिद पर अड़ी रही। दूसरी ओर सरकार मुझे जेल भेजने की तैयारी में जुट गयी। 2006 के मानरेगा में ग्रामीणों को जोब कार्ड दिलाने के लिए रैली निकाली गयी थी-इसी मामले में मेरे नाम पर वारंट निकाला गया और जेल भेज दिया। जेल से तब तक बाहर नहीं निकलने दिया-जब तक कि लाॅ यूनिर्वसिटी के लिए 70 एकड़ जमीन पूरी तरह से घेराबंदी और कब्जा में लिया। मेरे जेल जाने के बाद आंदोलन को किसी ने आगे नहीं बढ़ाया, यह दुखद रहा। फरवारी 2013 को तत्कालीन केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री जयराम रमेश जी प्रभात खबर आये थे। तब प्रभात खबर के प्रधान संपाद श्री हरिवंश जी के अमंत्रण में मैं भी जयरामजी के छोटी मुलाकात में गयी थी। साथ में जयरामजी के नाम नगड़ी का जमीन वापस करने और इसके लिए विकल्प में सूकुरहूट में जमीन देखने के लिए मांग पत्र बना कर दिये। इस मुददे पर 35 मिनट तक मंत्री जी से बात हुई। दो माह के बाद जयराम रमे’ाजी के पहल पर नगड़ी से आई आई एम सहित अन्य संस्थानों को सूकूरहूटू स्थानंत्रित करने का फैसला लिया गया। जो मेरे लिए सुखद रहा। 
2011 से ही खूंटी जिला के तजना नदी पर डैम बनाने की सुगबुगाहट हो रही है। लेकिन डैम के खिलाफ आंदोलन 2013 से ज्यादा सक्रिया हुआ है। सरकारी अधिकारी भी 2013 में डैम बनाने के लिए पूरी ताकत के साथ जनसुनवाई कराने की कोशिश  किये। लेकिन सरकार असफल रही। 
मेरा मनना है-जींदगी में जितने भी उतार-चढ़ाव हम लोगों ने देखा-सामना किये, हर कदम में आप सभों का सहयोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रहा है। आप के प्रेम -दुलार ने ही हर कदम को मजबूती से आये बढ़ाया। आज गर्व के साथ कह सकते हैं-कि हमन बिरसा मुंडा के विरासत के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया। कोयल नदी, कारो नदी, छाता नदी और तजना नदी का बहता पानी इसका साक्षी है। 
इस लबें संघर्ष के कडुआ अनुभवों ने एक कदम आगे बढ़ने का निर्णय लिया। जिस जल-जंगल-जमीन को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं-इसको संरक्षित करने, पूंजीपतियों, कारपोरेट के हाथें निलामी करने का कानून -नीति लोक सभा में और विधान सभा में ही बनाया जाता है। पालन भी इन्हीं संस्थानों के द्वारा किया जाता है। इस लिए सभों ने आंदोलन के साथियों ने निर्णय लिये कि-हम लोगों को राजनीतिक हस्तक्षेप में जाना चाहिए-जहां कानून और नीतियां तय की जाती हैं। 
चुनाव की तैयारी आप लोगों ने जनआंदोलन के तर्ज पर किये। नामंकन के पहले सभी अपने देवी-देवता, शत्कि के प्रतिक भगवानों को नमन-दर्’शन करते हैं। आप लोगों ने झारखंड के समझौताविहीन ’शहादती बिरसा मुंडा  के उलगुलान को याद करके-झारखंड की विरासत की हिफाज के लिए बिरसा मुंडा के शहादती आंदोलन के साथ राजनीतिक शत्कि को बनाने का संकल्प डोम्बारी बुरू में लिये। और तय किये कि हमारा रास्ता बिरसा का रास्ता होगा। 
खूंटी लोक सभा क्षेत्र चार जिलों के 6 विधान सभा क्षेत्र में फैला है। इसमें खूुटी जिला में तोरपा विधान सभा, और खूंटी विधान सभा है। सिमडेगा जिला में  कोलेबिरा विधान सभा और, सिमडेगा विधान सभा है। रांची जिला में  तमाड़ विधान सभा है, और खरसंवा जिला में खरसंवा विधान सभा है। पूरा देश -दुनिया जानता है कि-पूरा खूंटी लोक सभा क्षेत्र में माओवादी, पीएलएफआई से लेकर दर्जनों छोटे-बड़े उग्रवादी समूह सक्रिया हैं। यह भी सभी जानते हैं-इसमें से कई विधान सभा पर उग्रवादी संगठनों का शतप्रतिशत वर्चास्व है। इन उग्रवादि संगठनों के इच्छा के बिना कई क्षेत्रों में पता भी डोल नहीं सकता है।
 पिछले विधान सभा चुनाव के दौरान तोरपा विधान सभा क्षेत्र में उग्रवादी संगठन ने फरमान जारी किया था-कि हमारा आदमी को वोट नहीं करोगे तो -हम रात में आएगें, और वोट करोग तो दिन में आएगें। इस फरमान से पूरा तोरपा विधान सभा क्षेत्र आतांक में डुब गया। चाहते-ना चाहते हुए भी लोागों ने भय से उनका उम्मीदवार को भारी मतों से जितवाया। 
2014 के लोक सभा चुनाव में सभा उग्रवादी संगठनों ने अपना अपना उम्मीदवार खड़ा किया था। जो अपना उम्मीदवार खड़ा नहीं किया-वो संगठन उम्मीदवारों से भारी राशि  लेकर उनके पक्ष में वोट डालवाने का जिम्मेवादी उठाया। मेरे साथियों से सीधे तौर पर कहा-दयामनी को वोट करोगे तो-पूरा गांव जला देगें। नामांकन के दिन से ही मेरे साथियों को खूंटी नामांकन के लिए आने से रोकना शुरू किया। मेरे समर्थकों को कहा गया-दयामनी को वोट करोगे तो अंजाम ठीक नहीं होगा। नामांकन के दिन से लगातार -दिन-रात हर गांव में मेरे साथियों को प्रचार करने से रोकते रहे। धमकियां देते रहे। 
7 अप्रैल को बिरबांकी में हमारे साथियों  को बंधक बनाया, गाड़ी की चाभी छीन लिये। चार घंण्टा तक बंधक रखने के बाद शाम सात बजे साथी वहां से किसी तरह भाग निकले। सातों साथी रात भर बिरबांकी के जंगल में भटकते रहे। 18 घंण्टा के बाद साथी खूंटी पहुंचे। चलते चलते पैरों पर छले ओ गये थे। पूरा देह में जंगल झाडी -कांटों का खंरोच, देख कर मन सिहर जाता था। सात साथियों की जिंदगी हमारे लिये कीमती था। हमलोगों ने प्रशासन को  रिपोर्ट देर से ही लिखवायी, कारण की पहले हमारे साथियों के वापस आने का इंतजार कर रहे थे। 
9 अप्रैल को कर्रा थाना के बिकवादाग में पीएलफआई ने हमारे साथियों को मारा-पीटा, गाड़ी का चाबी छीन लिया। बाद में हमारे नेतृत्वकारी साथी को कैद में लिया और बाकी छह को वहां से भागने को कहा, उन लोगों को हिदायत दी गयी कि कोई पिछे मुडकर नहीं देखेगा-जितना जल्दी हो भागो यहां से। जिस साथी को छह बंदूकधारियों ने कैद में रखा-उनसे वहां खड़े ब्रहम्णों का पैर छू कर प्रणाम करके हाथ जोड़कर कहलवाया-एनोश  एक्का को वोट दो। पुलिस वहां पहुंची, इस कारण उनका जान बच गया। 
एक बुजूर्ग साथी से इसी संगठन के लोगों ने पूछा-तुम दयामनी का काम कर रहे हो? उस सज्जन ने जवाब दिया-हां काम कर रहे हैं। तब उन लोगों ने धमकाया-दयामनी को वोट कराओगे तो अंजाम ठीक नहीं होगा। भयमुक्त उस सज्जन ने जवाब दिया-यदि सचाई और समाज के लिए आप लोग मार भी दीजिएगा-तो इतिहास बनेगा, कि हमारी जान समाज की रक्षा के लिए गयी। 
एक दूसरा व्यक्ति ने हिम्मत दिखायी-17 अप्रैल को चुनाव के दिन-उसी संगठन के लोग मातदाताओं को अपने तरफ वोट करवाने के लिए खाने-पिने का आयोजन किये थे। वहां सभी को जाना था। वहां निर्देष दिया गया-सिर्फ झारखंड पार्टी के एनो’श को ही वोट करना है, प्रत्यक्षदशिर्यों के अनुसार-एक बुजुर्ग ने जवाब दिया-हम तो दयामनी को ही वोट देगें। इतना सूनना था-कि उक्त बुजुर्ग को लोगों ने खूब पीटा। इसी रात को वोट के बाद कर्रा थाना क्षेत्र के एक गांव के हमारे मूख्य अगुवा साथी के घर लोग पहुंचे-और यह कहते पीटा की तुम लोग दयामनी को वोट किये हो। 
केलेबिरा विधान सभा क्षेत्र में मेरा परचा बांट रहे युवक के उपर गोली चलायी गयी। जैसे ही गोली चलाया-परचा बांट रहा युवक सिर झुका दिया। बाल बाल बच गया। 
मैं आप लोगों को यह भी बताना चाहती हुं-कि मुझे भी बोला गया कि-5 लाख रूपया दो, नही ंतो गांव में घुसने नहीं देगें। मैं ने एक ही जवाब दी-जब गांव बचाने का लड़ाने मैंने भी लड़ा है , तब गांव बचा है-आज इसी गांव में घुसने के लिए 5 लाख रूप्रया मांग रहे हो। हमने सीधा कहा-हम नहीं दे सकते हैं। 
मित्रो-राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ यह एक बड़ी लड़ाई थी। जहां कहीं भी हमारे लोगों से वोट करने के लिए पैसा मांगा-हमारे साथियों ने हाथ जोड़ कर सीधा अनुरोध करते हुए कहा-यदि आप को वोट के लिए पैसा चाहिए तो आप हम को वोट मत दीजिए। हमारी टीम ने चुनाव प्रचार में यह भी नहीं कहा-कि आप हम को ही वोट करो, हाॅ आप अपना वोट पैसों से, लालच से मत बेचो, आप का एक वोट ही इस राज्य और दे’ा को बना सकता है और विगाड सकता है। 
मुझे गर्भ है-कि जिस उदे’य के साथ राजनीति में कदम रखे थे-हम उस उदे’य को हाशिल कर लिए हैं। हमारा उद्देश्य  था- जल-जंगल-जमीन-भाषा-संस्कृति, अस्तित्व-पहचान की लड़ाई को राजनीतिक प्लेटफाॅम में लाना, जहां दूसरे राजनीतिक पार्टीयों के यह हमारी अस्तित्व-विरासत मुददा के रूप कभी नहीं देखा गया। हम ने घोषणा भी किया हे-कि इसकी रक्षा के लिए अंतिम स्वांस तक हम आप लोगों के साथ रहेगें। 
हमारी टीम उन तमाम साथियों को भी धन्यवाद देना चाहती है-जिन्होंने मार खा कर, जुल्म सह कर भी समाज-व्यवस्था बदलने और अपने हक-अधिकार, जल-जंगल-जमीन और विरासत के लिए वोट किये। हमारी टीम धन्यवाद करती है-आप लोगों ने एक-एक मुठा चावल, एक-एक फड़ा लकड़ी, पातल, दाल, सुखा साग-सब्जी जमा कर चुनाव लड़ने का जजबा का आगे बढ़ायें। हम आप तमाम साथियों को भी धन्यवाद देना चाहते हैं, ,जिन्होंने दूर रह कर भी हमारी टीम के बहुत करीब हर कदम में, हर दुख-सुख में साथ रहे। हम आप सभों को भी धन्यवाद देना चाहते हैं-जिन्होंने अपने चिंतन में हमशा  हम लोगों के साथ रहे। हमारी टीम मीडिया के सभी साथियों को धन्यवाद देती है-कि आप ने हमारे प्रति अपनी जिम्मेवारी निभाते हुए -राज्य और देश  को हमारे चिंतन और कामों से हमेशा  अवगत करने का काम किये। हमारी टीम आप सभी अपील करती हे-कि इस लड़ाई को हम अकेले लड़ नहीं सकते हैं-आप सभी से सहयोग की अपील करती है। 
जय झारखंड
जय भारत
जिंदगी के लंबे और चुनौति भरा सफर में आप लोग मेरी ताकत बन कर, दोस्ता बनकर, सहयोगी बन कर, चिंतक बनकर, मेरा प्रशासक बन कर, ’शुभ चिंतक बन कर हर कदम, हर स्वांस में मेरे साथ निरंतर रहे और आशा  है-आगे कई वैचारिक मत भेदों के बावजूद हम-आप साथ रहेंगे 
जय भारत
जय झारखण्ड 

Saturday, May 31, 2014

उपरोक्त बिंन्दुओं पर आप का ध्यान अकृष्ट करने का मूल उदे’य यह है कि-किसी भी चुनाव में देश और राज्य निर्माण में हर मतदाता अपना विवेकपूर्णक निर्णय से मतदान कर सकें, यह तभी संभव होगा जब चुनाव आयोग और प्रशासान इस तरह का महौल -वातावरण दे पायेगें।

सेवा में,
डीजीपी 
झारखंड
विषय- बूथ-संध्या  11-चूरले, बूथ-22 गुमडू, जारियागढ, लप्पा, बूथों का चुनाव रदद किया जाए और पूर्नमातदान किया जाए।
महाशय,
मैं आप का ध्यान 17 अप्रैल 2014 को संपन्न चुनाव के दौरान खूंटी लोक सभा क्षेत्र में घटित वस्तुविक स्थितियों के संबंध में अवगत कराना चाहती हुं-ताकि राज्य और देश  का भविष्य तय करने में निर्वाचन आयोग, मतदाता और प्रसाशन मिल कर देश हित में अपनी लोकतंत्रिक भूमिका निभा सकें 
मैं खूंटी लोक सभा सीट से आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार होने के नाते कर्रा प्रखंड के बूथों में चल रहे मतदान केंन्द्रो का जयजा लेने निकली थी। खूंटी लोक सभा क्षेत्र के तोरपा विधान सभा क्षेत्र स्थित जोजोदाग बूथ में 12 बजे पहुंचे। वहां मतदाता नहीं थे-सिर्फ मातदानकर्मी थे। पूछने पर पता चला कि यहां मतदान खत्म हो चूका है। मैं चूरले स्थित बूथ ना0 11 में पहुंची। यहां मतदाताओं की लाईन लगी हुई थी। मतदातों का फोटो मिलान करते उन्हें परची दिया जा रहा था। यहीं पर सीक्यूरीटी में तैनात एक सुरक्षाकर्मी भी मौजूद था। जिस कमरा में ईवीएम मशीन रखा गया था, उस कमरा का दो दरवाजा है। एक दरवाजा पर पीठासीन अधिकारी बैठा हुआ था। मैं अंदर गयी। घूसते ही मेरी पहली नजर ईवीएम मशीन की ओर गयी। मशीन के पास दो नाबालिग लड़के खड़े है और ईवीएम मशीन पर उनका हाथ है। कुछ छणों तक मैं हैरान उन लाड़कों को देखते रही। पीठासीन अधिकारी चुप बैठा हुआ है। मुझे को वहां खड़ा देख 2-3 मिनट के बाद दोनों लड़के दूसरे दरवाजा से निकल गये। उनके पीछे मैं भी बाहर निकली। लड़के बूथ कैंपस से बाहर निकलने लगे। मैं वहां मौजूद मतदान कर्मीयों से पूछी-ये क्या हो रहा है यहां? ये दो नाबालिग लड़के अंदर ईवीएम मशीन के पास क्या कर रहे थे, और इन दोनों को अंदर क्यों घुसने दिया गया? इस सवाल का मैं जवाब चाह रही थी। वहां मौजूद सीक्यूरीटी कर्मी सामने आया -पूछा मुझे, क्या -क्या बात है। फिर मैंन पहले का सवाल उठायी-अंदर दो नाबालिग लड़कों कों क्यों एक साथ ईवीएम म’ाीन के पास क्यों घुसने दिये? और वो दोनों म’ाीन के पास क्या कर रहे थे? 
मेरे सवाल के जवाब में वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी बोले-मैंडम यहां शांतिपूर्वक काम चल रहा है, किसी तरह की कोई गडबड़ी नहीं हो रही है। बूथ कैंपस में तैनात एक दूसरा सुरक्षाकर्मी भी मेरे सामने आया और बोला-यहां मतदान शांतिपूवक चल रहा है किसी तरह की कोई गड़बडी नहीं है।  मैं अंदर मौजूद सुरक्षाकर्मी से उनका नाम पूछी-तो उन्होंने जवाब दिया, मेरा नाम जानकार क्या करोगी? मैं पीठासीन अधिकारी से पूछी-बताइये वो नाबालिग मशीन के पास क्या कर रहे थे? क्यों उनको घुसने दिये? गलती हुआ है कि नहीं? इस पर पीठासीन अधिकारी  बोले-हाॅं गलती तो हुआ है। मेरे साथ सुरक्षाकर्मी बहस करते रहे-वे बालते रहे, यहां शांतिपूर्वक चल रहा है, आप को ही गलत नजर आ रहा है। मैं वहां से निकलने लगी-तब मेरे पीछे पीछे पीठासीन अधिकारी और एक सुरक्षाकर्मी दौड़ते आये और रोक कर बोले-माफ कीजिएगा, बात को आगे मत बढ़ाइए, आगे फिर गलती नहीं होगा। मैं कुछ नहीं बोली -आगे बढ़ गयी। 
डेढ़ बजे बूथ संख्या 22 में पहुंची। वहां दो-तीन  झुंण्ड में युवक आपस में बात करने में व्यस्त दीख रहे थे। दो लोग दरवाजा के ठीक सामने खड़े थे। जिनका नजर पर्ची लेकर आ रहे मतदाताओं पर साथ ही अंदर रखे ईवीएम मशीन पर ही केंन्द्रित था। जहां परची कट रहा था उधर जा कर मैं बैठ गयी। एक युवक मतदान कर वापस परची काटनेवालों के पास आया बोला-और परची और दीजिए , और मारेगें, सभी लोग मार रहें हैं बोगस। कर्मचारी मुझे पहचान रहे थे-इसलिए और परची देने के लिए आना-कानी करने लगे। लेकिन उक्त युवक परची के लिए जिद करने लगा। तब एक सज्जन सामने आया और बोला-आप लोगों को यह पता होना चाहिए कि यहां-एक उम्मीदवार बैठी हैं , सबका ख्याल रखना चाहिए। इनके इतना कहने पर वहां जितना झुंण्ड  दिख रहा था-अहिस्ते अहिस्ते वहां से हट गया। उस बूथ में भारी संख्या में बोगस डाला गयां। 
यहां से लौटते हुए मैं वापस चुरले होते हुए निंधिया जा रहा थी। जहां मेरे लिए खाना बना हुआ था। रास्ते में उडीकेल के पास पुलिस गाड़ी मिली। मुझे रोका गया। पूरा गाड़ी चेक किया। मेरे दो-तीन साथी गाड़ी पर बैठे थे-उन्हें उतार कर पूरा शरीर चेक किया। इसके बाद हम लोग आगे बढ़े। जब हम लोग निधिया पहुंचे और गाड़ी रास्ते में खड़ा कर मेरे साथी के घर गये ।हम लोग घर पहंूचने तक पुलिस गाड़ी भी वहां पहूंच गयी और पुलिस घर पहुंच गयी हमारे पीछे पीछे। हम लोग आंगन में ही थे -तब पुलिस भी आंगन में आ धमकी। मैंने पूछा आप लोग यहां क्यों आ रहे हैं? उनमें से एक ने कहा-आप का सुरक्षा के लिए आये हैं। मैंने कहा-मैं तो सुरक्षित हुं, फिर मेंरे पीछे पीछे आने की कोई जरूरत नहीं है। दो पुलिस कर्मी मेरे सामने खड़ा हो गये। कटसी में एक चेयर उनको दिये। एक ने कुर्सी को मेरे समीप खींच कर बैठ गया। मुझे किसी से बात करने भी नहीं दे रहा था-वे खुद बक-बक कर रहे थे।  जिनके घर में गयी हुं-उस परिवार से बात करने ही नहीं दे रहा था। मेरे बार बार कहने पर कि आप लोग मुझको क्यों तग कर रहे हैं-पुलिसवाले बार बार यह कहते रहे  कि हम लोग आप के सुरक्षा में आये हैं- मैं बाथरूम करने घर के पीछवाडे की ओर जा रही थी-तब भी पुलिस मेरे पीछे हो ले रहा था। मेरे साथीयों के साथ हड़बड़ खाना खाये और वहां से निकल गये, और पुलिस को बोले मेरे पीछे आने की जरूरत नहीं है। 
मेरे साथ पुलिस वाले का इस तरह का व्योहार सीधे तौर पर -मुझे बूथों में जाने से रोकने का प्रयास था ताकि बूथों में हो रही गलतियों और गैर कानूनी कार्यों को जारी रखा जाए।  
वहां से निकल कर टाटी पूर्वी और टाटी पच्क्षिमी बूथ में गयी। दोनों बूथ पर मतदाता नहीं थे, वहां चार-पांच पिये हुए लोग थे। पूर्वी बूथ में एक व्यक्ति मतदान करके फिर बेंच पर बैठे मतदान कर्मी से बोल रहा था-बताइ्रये और कितना मारना है? पीया व्यक्ति बोलते जा रहा था लेकिन मतदान कर्मी मुझे देख चुप चाप थे। इसी बीच एक मतदाना कर्मी बोले-आप सही समय पर आये हैं, अब आप रूकिये, हम लोग म’ाीन बंद करते हैं। सामने पच्’िमी बूथ था। यहां तीन-चार लोग खडे थे। मैंने टाईम के साथ अभी तब का डाला गया मत संख्या पूछी, नोट की। वहां बैठा अधिकारी चाह रहे थे कि हम वहां से जल्द हट जाएं, लेकिन मैं पूछी कब बंद कर रहे हैं? समय तो हो गया। तब अधिकारी बोले हां अब बंद करेगें। मतदान के बाद रात को चूरले गांव में हमारे समर्थकों का घर जा कर दो लोगों ने यह कहते हुए मार पीट किया कि तुम लोगों ने झाडू छाप को वोट किया है।  मार-पीट करने वाले साथियों को धमकी दी कि-तुम लोग झाडू छाप पर वोट दिये हो, अगर हम लोगों की पार्टी हार जाएगी तो-तुम लोगों के पास रात को आएगें। जरियागढ़ बूथ, लपा बूथ, को भीे  लोगों ने कब्जा में ले कर  रखा था। लेकिन बूथों पर मौजूद मतदान कर्मचारी और सुरक्षा कर्मी -दावा किये कि मतदान शांति पूर्वक हुआ। 
इस लोकतंत्र के महापर्व में मतदाता स्वतंत्र  मतदान नहीं कर पा रहे हैं, साम-दाम-दंण्ड भेद की ताकत मतदाताओं को देश  निर्माण और इनके भविष्यय का दिशा  तय करने के लिए स्वतंत्र -विवेकपूर्ण मतदान-को रोक कर, दबाव में मतदान करवाना भी लोकतंत्र में एक बड़ा अपराथ है। 
कोलेबिरा विधान सभा क्षेत्र जलडेगा थाना क्षेत्र के सिंिलंगा बाजार टाड में (बुधवार) में चुनाव का परचा बांट रहे साथी पर अपराधियों ने  -गोली चला दी। परचा बांट रहा व्यक्ति टोपी पहने हुए थे, जैसे ही अगला आदमी गोली चलाया-उसने सिर झुका लिया, गोली टोपी को उड़ाते हुए सिर उपर से पार हो गया।  इस कारण बड़ा हादशा  टल गया। 
खूंटी, तोरपा, विधानसभा क्षेत्र में लगातार मेरे समर्थको को धमकी दी गयी है कि अगर हमलोगों का पार्टी -झापा हार गया तो-अंजाम बूरा होगा, हम लोग रात को तुम लोगों के पास आएगें। 
उपरोक्त बिंन्दुओं पर आप का ध्यान अकृष्ट करने का मूल उदे’य यह है कि-किसी भी चुनाव में देश  और राज्य निर्माण में हर मतदाता अपना विवेकपूर्णक निर्णय से मतदान कर सकें, यह तभी संभव होगा जब  चुनाव आयोग और प्रशासान इस तरह का महौल -वातावरण दे पायेगें। 
मांग-बूथ-संध्या  11-चूरले, बूथ-22 गुमडू, जारियागढ, लप्पा, चांपी, बूथों का चुनाव रदद किया जाए और पूर्नमातदान किया जाए।
 
                                           आप की विश्वाशी                                                                                    उम्मीदवार-दयामनी बारला
                                           आम आदमी पार्टी 

मैं आप का ध्यान 17 अप्रैल 2014 को संपन्न चुनाव के दौरान खूंटी लोक सभा क्षेत्र में घटित वस्तुविक स्थितियों के संबंध में अवगत कराना चाहती हुं-ताकि राज्य और देश का भविष्य तय करने में निर्वाचन आयोग और मतदाता मिलकर देशहित में अपनी लोकतंत्रिक भूमिका निभा सकें।

सेवा में,
मुख्य निर्वाचन आयोग 
झारखंड
विषय- बूथ-संध्या  11-चूरले, बूथ-22 गुमडू, जारियागढ, लप्पा, बूथों का चुनाव रदद किया जाए और पूर्नमातदान किया जाए।
महाशय,
मैं आप का ध्यान 17 अप्रैल 2014 को संपन्न चुनाव के दौरान खूंटी लोक सभा क्षेत्र में घटित वस्तुविक स्थितियों के संबंध में अवगत कराना चाहती हुं-ताकि राज्य और देश  का भविष्य तय करने में निर्वाचन आयोग और मतदाता मिलकर देशहित में अपनी लोकतंत्रिक भूमिका निभा सकें। 
मैं खूंटी लोक सभा सीट से आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार होने के नाते कर्रा प्रखंड के बूथों में चल रहे मतदान केंन्द्रो का जयजा लेने निकली थी। खूंटी लोक सभा क्षेत्र के तोरपा विधान सभा क्षेत्र स्थित जोजोदाग बूथ में 12 बजे पहुंचे। वहां मतदाता नहीं थे-सिर्फ मातदानकर्मी थे। पूछने पर पता चला कि यहां मतदान खत्म हो चूका है। मैं चूरले स्थित बूथ ना0 11 में पहुंची। यहां मतदाताओं की लाईन लगी हुई थी। मतदातों का फोटो मिलान करते उन्हें परची दिया जा रहा था। यहीं पर सीक्यूरीटी में तैनात एक सुरक्षाकर्मी भी मौजूद था। जिस कमरा में ईवीएम मशीन रखा गया था, उस कमरा का दो दरवाजा है। एक दरवाजा पर पीठासीन अधिकारी बैठा हुआ था। मैं अंदर गयी। घूसते ही मेरी पहली नजर ईवीएम मशीन की ओर गयी। मशीन के पास दो नाबालिग लड़के खड़े है और ईवीएम मशीन पर उनका हाथ है। कुछ छणों तक मैं हैरान उन लाड़कों को देखते रही। पीठासीन अधिकारी चुप बैठा हुआ है। मुझे को वहां खड़ा देख 2-3 मिनट के बाद दोनों लड़के दूसरे दरवाजा से निकल गये। उनके पीछे मैं भी बाहर निकली। लड़के बूथ कैंपस से बाहर निकलने लगे। मैं वहां मौजूद मतदान कर्मीयों से पूछी-ये क्या हो रहा है यहां? ये दो नाबालिग लड़के अंदर ईवीएम मशीन के पास क्या कर रहे थे, और इन दोनों को अंदर क्यों घुसने दिया गया? इस सवाल का मैं जवाब चाह रही थी। वहां मौजूद सीक्यूरीटी कर्मी सामने आया -पूछा मुझे, क्या -क्या बात है। फिर मैंन पहले का सवाल उठायी-अंदर दो नाबालिग लड़कों कों क्यों एक साथ ईवीएम मशीन के पास क्यों घुसने दिये? और वो दोनों मशीन के पास क्या कर रहे थे? 
मेरे सवाल के जवाब में वहां मौजूद सुरक्षाकर्मी बोले-मैंडम यहां शांतिपूर्वक काम चल रहा है, किसी तरह की कोई गडबड़ी नहीं हो रही है। बूथ कैंपस में तैनात एक दूसरा सुरक्षाकर्मी भी मेरे सामने आया और बोला-यहां मतदान शांतिपूवक चल रहा है किसी तरह की कोई गड़बडी नहीं है।  मैं अंदर मौजूद सुरक्षाकर्मी से उनका नाम पूछी-तो उन्होंने जवाब दिया, मेरा नाम जानकार क्या करोगी? मैं पीठासीन अधिकारी से पूछी-बताइये वो नाबालिग मशीन के पास क्या कर रहे थे? क्यों उनको घुसने दिये? गलती हुआ है कि नहीं? इस पर पीठासीन अधिकारी  बोले-हाॅं गलती तो हुआ है। मेरे साथ सुरक्षाकर्मी बहस करते रहे-वे बालते रहे, यहां शांतिपूर्वक चल रहा है, आप को ही गलत नजर आ रहा है। मैं वहां से निकलने लगी-तब मेरे पीछे पीछे पीठासीन अधिकारी और एक सुरक्षाकर्मी दौड़ते आये और रोक कर बोले-माफ कीजिएगा, बात को आगे मत बढ़ाइए, आगे फिर गलती नहीं होगा। मैं कुछ नहीं बोली -आगे बढ़ गयी। 
डेढ़ बजे बूथ संख्या 22 में पहुंची। वहां दो-तीन  झुंण्ड में युवक आपस में बात करने में व्यस्त दीख रहे थे। दो लोग दरवाजा के ठीक सामने खड़े थे। जिनका नजर पर्ची लेकर आ रहे मतदाताओं पर साथ ही अंदर रखे ईवीएम मशीन पर ही केंन्द्रित था। जहां परची कट रहा था उधर जा कर मैं बैठ गयी। एक युवक मतदान कर वापस परची काटनेवालों के पास आया बोला-और परची और दीजिए , और मारेगें, सभी लोग मार रहें हैं बोगस। कर्मचारी मुझे पहचान रहे थे-इसलिए और परची देने के लिए आना-कानी करने लगे। लेकिन उक्त युवक परची के लिए जिद करने लगा। तब एक सज्जन सामने आया और बोला-आप लोगों को यह पता होना चाहिए कि यहां-एक उम्मीदवार बैठी हैं , सबका ख्याल रखना चाहिए। इनके इतना कहने पर वहां जितना झुंण्ड  दिख रहा था-अहिस्ते अहिस्ते वहां से हट गया। उस बूथ में भारी संख्या में बोगस डाला गयां। 
यहां से लौटते हुए मैं वापस चुरले होते हुए निंधिया जा रहा थी। जहां मेरे लिए खाना बना हुआ था। रास्ते में उडीकेल के पास पुलिस गाड़ी मिली। मुझे रोका गया। पूरा गाड़ी चेक किया। मेरे दो-तीन साथी गाड़ी पर बैठे थे-उन्हें उतार कर पूरा शरीर चेक किया। इसके बाद हम लोग आगे बढ़े। जब हम लोग निधिया पहुंचे और गाड़ी रास्ते में खड़ा कर मेरे साथी के घर गये ।हम लोग घर पहंूचने तक पुलिस गाड़ी भी वहां पहूंच गयी और पुलिस घर पहुंच गयी हमारे पीछे पीछे। हम लोग आंगन में ही थे -तब पुलिस भी आंगन में आ धमकी। मैंने पूछा आप लोग यहां क्यों आ रहे हैं? उनमें से एक ने कहा-आप का सुरक्षा के लिए आये हैं। मैंने कहा-मैं तो सुरक्षित हुं, फिर मेंरे पीछे पीछे आने की कोई जरूरत नहीं है। दो पुलिस कर्मी मेरे सामने खड़ा हो गये। कटसी में एक चेयर उनको दिये। एक ने कुर्सी को मेरे समीप खींच कर बैठ गया। मुझे किसी से बात करने भी नहीं दे रहा था-वे खुद बक-बक कर रहे थे।  जिनके घर में गयी हुं-उस परिवार से बात करने ही नहीं दे रहा था। मेरे बार बार कहने पर कि आप लोग मुझको क्यों तग कर रहे हैं-पुलिसवाले बार बार यह कहते रहे  कि हम लोग आप के सुरक्षा में आये हैं- मैं बाथरूम करने घर के पीछवाडे की ओर जा रही थी-तब भी पुलिस मेरे पीछे हो ले रहा था। मेरे साथीयों के साथ हड़बड़ खाना खाये और वहां से निकल गये, और पुलिस को बोले मेरे पीछे आने की जरूरत नहीं है। 
मेरे साथ पुलिस वाले का इस तरह का व्योहार सीधे तौर पर -मुझे बूथों में जाने से रोकने का प्रयास था ताकि बूथों में हो रही गलतियों और गैर कानूनी कार्यों को जारी रखा जाए।  
वहां से निकल कर टाटी पूर्वी और टाटी पच्क्षिमी बूथ में गयी। दोनों बूथ पर मतदाता नहीं थे, वहां चार-पांच पिये हुए लोग थे। पूर्वी बूथ में एक व्यक्ति मतदान करके फिर बेंच पर बैठे मतदान कर्मी से बोल रहा था-बताइ्रये और कितना मारना है? पीया व्यक्ति बोलते जा रहा था लेकिन मतदान कर्मी मुझे देख चुप चाप थे। इसी बीच एक मतदाना कर्मी बोले-आप सही समय पर आये हैं, अब आप रूकिये, हम लोग म’ाीन बंद करते हैं। सामने पच्छिमी  बूथ था। यहां तीन-चार लोग खडे थे। मैंने टाईम के साथ अभी तब का डाला गया मत संख्या पूछी, नोट की। वहां बैठा अधिकारी चाह रहे थे कि हम वहां से जल्द हट जाएं, लेकिन मैं पूछी कब बंद कर रहे हैं? समय तो हो गया। तब अधिकारी बोले हां अब बंद करेगें। मतदान के बाद रात को चूरले गांव में हमारे समर्थकों का घर जा कर दो लोगों ने यह कहते हुए मार पीट किया कि तुम लोगों ने झाडू छाप को वोट किया है।  मार-पीट करने वाले साथियों को धमकी दी कि-तुम लोग झाडू छाप पर वोट दिये हो, अगर हम लोगों की पार्टी हार जाएगी तो-तुम लोगों के पास रात को आएगें। जरियागढ़ बूथ, लपा बूथ, को भीे  लोगों ने कब्जा में ले कर  रखा था। लेकिन बूथों पर मौजूद मतदान कर्मचारी और सुरक्षा कर्मी -दावा किये कि मतदान शांति पूर्वक हुआ। 
इस लोकतंत्र के महापर्व में मतदाता स्वतंत्र  मतदान नहीं कर पा रहे हैं, साम-दाम-दंण्ड भेद की ताकत मतदाताओं को देश  निर्माण और इनके भविष्यय का दिशा  तय करने के लिए स्वतंत्र -विवेकपूर्ण मतदान-को रोक कर, दबाव में मतदान करवाना भी लोकतंत्र में एक बड़ा अपराथ है। 
कोलेबिरा विधान सभा क्षेत्र जलडेगा थाना क्षेत्र के सिंिलंगा बाजार टाड में (बुधवार) में चुनाव का परचा बांट रहे साथी पर अपराधियों ने  -गोली चला दी। परचा बांट रहा व्यक्ति टोपी पहने हुए थे, जैसे ही अगला आदमी गोली चलाया-उसने सिर झुका लिया, गोली टोपी को उड़ाते हुए सिर उपर से पार हो गया।  इस कारण बड़ा हादशा टल गया। 
खूंटी, तोरपा, विधानसभा क्षेत्र में लगातार मेरे समर्थको को धमकी दी गयी है कि अगर हमलोगों का पार्टी -झापा हार गया तो-अंजाम बूरा होगा, हम लोग रात को तुम लोगों के पास आएगें। 
उपरोक्त बिंन्दुओं पर आप का ध्यान अकृष्ट करने का मूल उदे’य यह है कि-किसी भी चुनाव में देश  और राज्य निर्माण में हर मतदाता अपना विवेकपूर्णक निर्णय से मतदान कर सकें यह तभी संभव होगा जब  चुनाव आयोग और प्रशासन इस तरह का महौल -वातावरण दे पायेगें। 
मांग-बूथ-संध्या  11-चूरले, बूथ-22 गुमडू, जारियागढ, लप्पा, चांपी, बूथों का चुनाव रदद किया जाए और पूर्नमातदान किया जाए।
 
                                           आप की बिश्वाशी 
                                        उम्मीदवार-दयामनी बारला
                                           आम आदमी पार्टी 
                                            9431104386        
                                             १८ -४ -२०१४ 

Wednesday, May 21, 2014

वो सिर्फ मुस्कुराया केवल। लेकिन मै जान नहीं सकी कि-कोंन्दा के आंख से बह रहा पानी -आंख की बीमारी के कारण नहीं बह रहा था-बल्कि घायल हृदय का आंशुं था।

25 मार्च 2014
11.30 बजे हम लोग डोम्बारी बुरू से खूुटी कचहरी पहुंचे। वहां नमांकन फर्म लेकर वकील धनिक गुडि़या, वकील शंकर कुशवाहा, वकील श्री ठाकुर मौजूद थे। मेरे प्रस्तावकों के साथ नमांकन लीगल प्रक्रिया पूरा करने में लग गये। गांवों से आये लोगों की भीड़ थी। मैं सबसे मिलने की कोशिश  कर रही थी। महिलाएं भी आयी हुई हैं। सभी साथी एक दूसरे सुे मिल रहे हैं। कई लोग बातों में व्यस्त हैं।
                                           डा शिलाश  हेम्रोम के साथ
                                              ग्रामीण साथ
                                              कोट परिसर में साथी
                                              एडवोकेट -धनिक गुड़िया और एडवोकेट शंकर कुशवाहा
                               एडवोकेट -धनिक गुड़िया, एडवोकेट शंकर कुशवाहा  और विनय भट           

वहीं एक साथी हल्का पीला कमीज पहने अकेले चुपचाप खड़ा है। मैं उनके पास गयी। सामने खड़ा होकर उनसे बात करने लगीं, मैं हाल-चाल पुछने लगी। उनकी आंखे एक टक मेरी ओर निहार रही है। उनके दोनों आंख में अंशुं  डब-डबा रहा है। अब अंशुं  आंख से बहते हुए उनके गाल पर लुढक रहा है। तब मैं पूछी-आप के आंख में अंशुं क्यों है??
कोंन्दा कुछ भी बोल नहीं रहा है। मैं दुबारा पूछी-आप के आंख में अंशुं  क्यों है? तब कोन्दा मुस्कुराने की कोशिश  करते हुए बोला-हां कुछ हो गया है, ऐसा ही पानी निकलते रहता है। मैं फिर पूछी-आंख वाला डाक्टर को आपने ने दिखाया कि नहीं?? उन्होंने ने जवाब दिया-नहीं । तब मैं बोली-अच्छा ठीक है, इस चुनाव को पार होने दीजिए-17 अप्रैल के बाद आप रांची आइए-आंख डाक्टर से दिखवा लेते हैं। वो सिर्फ मुस्कुराया केवल। लेकिन मै जान नहीं सकी कि-कोंन्दा के आंख से बह रहा पानी -आंख की बीमारी के कारण नहीं बह रहा था-बल्कि घायल हृदय का आंशुं  था।
ये बात हो ही रही थी-तब पुष्पा और सावना करीब आये। पुष्पा बोली-दीदी ये लोग बहुत दुखित हैं-आज ये लोग गांव से छह मैजिक ओटो गाड़ी बुक किये थे यहां आने के लिए। यहां आने के लिए निकले थे-लेकिन सबको गाड़ी से उतार दिये जंगल वाले, (क्षेत्र में सक्रिये उग्रवादी संगठन ) आने नहीं दिये, गांव के लोग जैसा चाहते थे-नहीं आ सके, इसीलिए दुखित हैं।
इनकी बातों को सुन कर मेरा भी मन भर आया। हाॅ गांव इस गांव के कल भी फोन किये थे दो तीन बार, और बोले थे-दीदी हम लोग गांव से छह गाड़ी बुक कर लिये है-खूंटी आने के लिये। आज सुबह भी इन लोगों ने फोन किये थे-आप लोग रांची से निकले कि नहीं-यह जानने के लिये। मैं हुडमा टोली के इन साथियों को एक टक निहारते रही, फिर अपने को समेटते हुए इन लोगों को समझायी कि-किसी के रोकने से हम लोग कभी रूके नहीं हैं-आज भी आप लोग यहां पहुंच गये -रोकने के बावजूद, कल भी आप लोग आगे ही बढ़ेगें।



                                         डी सी सेमसन को नामांकन परचा देते हुऐ
                                            नामांकन के बाद साथियों से लड़ाई का संकल्प

                                            आदिवासी समाज के हक़ अधिकार के प्रखर पत्रकार  श्री फैसल  अनुराग 

नेलकन बयर एमांइग रेमे दुलड़ रेयआ एहो...नगापुर बिर रेआ मिमयद दारूइंग बादी लेरेंग सोतोगे लेका

25 मार्च 2014
आज खूुटी लोक सभा सीट से आम आदमी पार्टी का उम्मीदवार के रूप में नोमिनेशन भरना था। तय कार्यक्रम के अनुसार डोम्बारी बुरू में बिरसा मुंड़ा को फूल चढ़ाने के बाद खूंटी में नमांकन करना है।  आज से पहले मैं कई बार डोम्बारी बुरू आ चुकी हुॅं, लेकिन आज पहले से बिलकुल ही अलग महसूस हो रहा था। डोम्बारी बुरू स्थित बिरसा मुंडा को कई बार फूल-माला पहनायी हुं, तब आज की तरह मन नहीं रो रहा था।  मन भावुक जरूर हुआ था, लेकिन आज की तरह नहीं। आज हमारे साथ सिर्फ गांव या एक छेत्र  विशेष  के लोग ही नहीं हैं, लेकिन गुमला जिला और खुंटी जिला के अलग अलग गांवों के किसान साथी हैं। 2006 से मित्तल कंपनी के खिलाफ लड़ने वाले संगठन ’आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा के साथी हैं, 2010 से छाता नदी पर बनने वाले डैम के खिलाफ संघर्षरत -डैम प्रभावित संघर्ष समिति कर्रा, तजना नदी पर प्रस्तावित डैम के खिलाफ लड़ रहे तजना डैम प्रभावित संघर्ष समिति-खूंटी-कर्रा के साथी भी हैं।




जबड़ा, घारेपिंडा, कोरको टोली के साथियों ने अपने साथ कांसा का लोटा में पानी, कांसा का थाली में अरवा चावल और अरवा धागा, अगरबती ले कर आये हैं। बिरसा को फूल चढ़ाने के पहले सभी साथी सिंग बोंगा को प्रर्थना चढाये। प्रर्थना गीत श्री सेंरेग हेमरोम की अगुवाई में गाये-
को0  ...ने सेंड़ा पेड़े दाड़ी एमांइगमें
ने सेंड़ा पेड़े दाड़ाी एमांइगमें
ने सेंडा पेड़े दाडी एमांगइमें..........
1-नेलकन पेड़े एमांगरेमे
सिरमा पेड़े
ऐहो....नगापुर
मपरंग-मपरंग बुरू कोके
तुलांग  रेंगइ
दुपिलेलेका
2-नेलकन तीई
एमांइग रेमे सिरमा पेड़े
ऐहो...नगापुर
मपरंग-मपरंग दारू
केके चुंडुल लेरेंग
लिकुडे लेका
3-नेलेकन कटा
एमांइग रेमे सिरमा पेड़े
ऐहो....नगापुर
मपरंग’-मपरंग गड़ा कोकेंइग
 ताड़ोम लेरेइंग
पारोमेलका
4-नेकलन सनंग
एमांइग रेमे सिरमा पेड़े
ऐहो....नगापुर
मपरंग-मपरंग सेरेंग को सनंग लेरेइंग
लेयांगे लेका
5-नेलकन बयर
एमांइग रेमे दुलड़ रेयआ
एहो...नगापुर
बिर रेआ मिमयद दारूइंग
बादी लेरेंग  सोतोगे लेका








सिंग-बोंगा को प्रर्थना चढ़ाने के बाद हम लोग बिरसा को फूल चढ़ाने उपर चढे। सभी कतार में चढ़ते गये-महिलाएं बिरसा को लोटा पानी से नहलाये, अरवा चावल का चुमावन दीये, अरवा धागा का वस्त्र पहनाये, गांव से लाया गेंदा फूल आर्पित किये। सभी ने बारी बारी से अपना साम्मान आर्पित किये। इसके बाद हमलोग खूुटी नमांकन के लिए निकल गये।