Thursday, April 25, 2019

स्किल समिट में रोजगार पानेवाले 26,674 अभ्यर्थियों मेंसे अब तक मात्र 5,816 को ही विभिन्न जगहो पर योगदान सुनिच्यित हो पाया है।

ऐसे चल रहा कौषल विकास का मेगा प्लेसमेंट ड्राइव-पद व सैलरी का पता नहीं, सर ने कहा नौकरी मिलेगी, ता आ गये-प्रभात खबर ृ10 जनवरी 2018
12 को देना है 25 हजार युवाओं का नियुक्ति पत्र
20, 418 युवाओं का तय कर लिया गया है नाम
खेलगांव में चल रहा है अंतिम प्लेसमेंट ड्राइव
सुनील कमार झा-रांची-कौशल विकास मिशन सोसाइटी युवाओं को रोजगार देने के लिए खेलगांव में आठ से 11 जनवरी तक प्लेसमेंट ड्राइव चला रहा हैं। इसमें राज्य भर के बेरोजगार युवक-युवाती भाग ले रहे हैं। कौशल विकास योजना के तहत प्रशिक्षित अभ्यर्थियों का भी विभिन्न कंपनियों द्वारा इंटरव्यू के बाद चयन किया जा रहा है। मंगलवार को राज्य भर से आये अभ्यर्थी इंटरव्यू में शामिल हुए, पर इन्हें न तो  इस बात की जानकारी थी कि उन्हें क्या नौकरी मिलेगी और न ही इसकी सूचना थी कि सैलरी कितनी मिलेगी। अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया था। प्रशिक्षण केंन्द्र संचालक ने सिर्फ इतना बताया कि रांची चलना है, वहां नौकरी मिलेगी। चाईबासा से आयी पूनम कुमारी ने बताया, उसने कौशल विकास योजना के तहत आइटी की ट्रेनिंग की है, उसे वेंचर स्कील इंडिया संस्थान द्वारा यहां लाया गया है। यह पूछे जाने पर कि रांची आने से पहले उसे यहां के बारे में बताया गया, पूनम ने कहा-केवल यह बताया गया कि रांची जाने से नौकरी मिलेगीं। पूनम इंटरव्यू के लिए लाइन में अपना बायोडाटा लिये खडी थी। पर उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि वह किस कंपनी में इंटरव्यू दे रही है। उसे न तो पद की जानकारी थी न ही वंेतन की। पूनम की तरह सैकड़ों बेरोजगार युवक-युवती रोजगार लिए कतार में खड़े थे, पर उन्हें न तो वेतन की जानकारी थी न ही पद की।
बेकारों से आये शकलदीप सिंह का कहना था, सात हजार की नौकरी के लिए दिल्ली या गुजरात जाने का क्या आवश्यकता है, उसने बताया कि किस कंपनी में किस उम्र के अभ्यर्थी का चयन होगा, यह जानकारी भी नहीं दी गयी। बोकारो से आये अभ्यर्थी मारूति कंपनी के लिए इंटरव्यू  देना चाह रहे थे, पर कंपनी 23 वर्ष से कम उम्र के अभ्यर्थियों को ही ले रही थी, इस कारण काफी संख्या में अभ्यर्थी इंटरव्यू में शामिल नहीं हो पा रहे थे। चंदन कुमार ने एक्साइड बाइट्री कंपनी में अपना साक्षात्कार दिया, पर उसे पता ही नहीं कि उसने किस पद के लिए इंटरव्यू दिया है।
सात से 10 हजार तक का वेतन-मेगा कैंपस ड्राइव में अधिकतर कंपनियां अभ्यर्थियों को सात से दस हजार रूपये तक के वंतन का आॅफर दे रही है, इसके लिए उन्हें दिल्ली, हरियाणा, गुजरात तक जाना होगा। जिन पदो ंके लिए इंटरव्यू लिया जा रहा है, उनमें डाटा आपरेटर, इलोक्ट्रिशियन, पेंटर, सिलाई, बीपीओ जैसे पद शामिल हैं।

क्या कहते हैं अभ्यर्थी-
कौशल विकास तहत आइटी का प्रशिक्षण मिला है। यहां सेंटर चलानेवाले सर के कहने पर आयेंह हैं, किस कंपनी में नौकरी मिलेगी, वेतन व पद के बारे में जानकारी नहीं है-पूनम कुमारी
 पहले नौकरी मिले, इसके बाद तय करेगें कि जाना है कि नहीं हैं। अगर बेहतर वेतन व सुविधा होगा, तो दिल्ली जाने में कोई परेशानी नहीं है। वेतन के बारे में पहले नहीं बताया गया हे-जयंमंती।

सेंटर के प्रतिनिधि ने कहा-
हमें भी जानकारी नहीं-स्किल सेंटर से आये प्रतिनिधि ने बताया कि उसे भी वेतन व पद के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गयी। यहां आने के बाद बताया कि सात हजार पर बीपीओ की नौकरी दी जाऐगी।
 जिन अभ्यर्थियों को कौशल विकास के तहत प्रशिक्षण दिया गया है, उन्हें पद, कंपनी व सैलरी की जानकारी देनी चाहिए थी। सामान्य कोर्स से आये विद्यार्थियों को इसकी जानकारी नहीं हो सकती है-रवि रंजन-निदेशक, झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी।

दो दिनों में 2,396 का चयन-खेलगांव में चल रहे मेगा प्लेसमेंट ड्राइव में दो निों में 2,396 अभ्यर्थियों का अंतिम चयन किया गया। प्लेसमेंट ड्राइव 11 जनवरी तक चलेगा। आठ जनवरी को 874 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था।, जबकि दूसरे दिन मंगलवार को 1522 का चयन किया गया। दूसरे दिन कौशल विकास के तहत प्रशिक्षित 1361 व उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में 261 अभ्यर्थियों का चयन किया गया। जिन कंपनियों ने चयन किया-उनमें आनंद डेयरी लिमिडेट, बाबा कंप्यूटरर्स, कैपिटल काउ, पिलप कार्ट, मनी मेकर, टीम लेंस, ट्रेड इंडियन, पाॅलिसी बाजार समेत अन्य शामिल हैं।

झारखंड स्किल समिट 2018-प्रभात खबर
सुनील कुमार झा-रांची- रोजगार मिला 26,674 को, पर अब तब ज्वाइन किया मात्र 5,816 ने-12 जनवरी को हुए स्किल समिट में रोजगार पानेवाले 26,674 अभ्यर्थियों मेंसे अब तक मात्र 5,816 को ही विभिन्न जगहो पर योगदान सुनिच्यित हो पाया है। शेष अभ्यर्थियों ने अभी तक योगदान नहीं किया है। इन्हें नौकरी में योगदान देने के लिए अब सरकार की ओर से काउंसेलिंग करायी जा रही है। उन्हें योगदान देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रशिक्षण देनेवाली संस्थान और काॅलेजों के प्राचार्य को भी अभ्यर्थियों की काउंसेलिंग करने को कहा गया है। काउंसेलिंग में अभ्यर्थियों के अभिभावक को भी बुलाया जा रहा है। झारखंड स्किल मिशन सोसाइटी प्रतिदिन इसकी समीक्षा कर रहा है। कौशल विकास मिशन ने सभी विभागों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। अभ्यर्थियों को योगदान देने को लेकर डोरंडा काॅलेज में विभाग की ओर से काॅल सेंटर बनाया गया है। सेंटर एक-एक अभ्यार्थियों  से संपर्क कर रहा है।
भेजा जा रहा नियुक्ति पत्र- स्किल समिट में रोजगार के लिए चयनित अभ्यर्थियों को अब भी नियुक्ति पत्र प्रशिक्षण देनेवाली संस्था, काॅलेजों व शिक्षण संस्थानो को भेजा गया है। नियुक्ति पत्र वितरण की भी समीक्षा की जा रही है । काॅलेज, पोलिटेनिकस संस्थान और प्रशिक्षण देनेवाली संस्थान से नियुक्ति पत्र वितरण की स्थिति की जानकारी जी जा रही है।  जिन अभ्यर्थियों ने नियुक्ति पत्र नहीं लिया है, उन्हें बुलाया जा रहा है। आठ से 11 जनवरी तक रांची खेलगांव में हुए अंतिम मेगा प्लेसमेंट ड्राइव में नियुक्त हुए कुछ अभ्यर्थियों के आॅफर लेटर में गडबड़ी है। नियुक्ति करनेवाली कंपनियों को इसमें सुधार करने को कहा गया है।
विभागवार नियुक्ति व योगदान की स्थिति-
विभाग------------------- -------------------------------------             -नियुक्ति------योगदान
उच्च एवं तकनीकी शिक्षा सह कौशल
विकास              -------------------------------------------------        ----15,632-------2,860
ग्रामीण विकास विभाग---------------------------------------------------  2,713--------1,222
श्रमनियोजन एवं प्रशिक्षण------------------------------------------------4,418--------264
नगर विकास एवं आवास--------------------------------------------------3,554--------1,470
खान एवं उद्योग विभाग----------------------------------------------------198----------डाटा नहीं
पर्यटन कला संस्कृति एवं खेलकूद------------------------------------------159---------डाटा नहीं।

12 जनवरी को खेलगांव में हुआ था स्किल समिट नियुक्त अभ्यर्थियों की हो रही काउंसेलिंग-
योगदान देने के लिए प्ररित कर रही है सरकार
कउंसेलिंग में अभिभावक को भी बुलाया जा रहा है
डोरंडा काॅलेज में बनया गया है काॅल सेंटर, अभ्यर्थियों से ली जा रही जानकारी-
अभ्यर्थियों के योगदान देने की प्रक्रिया की समीक्षा हो रही है, डोरंडा काॅलेज में काॅल सेंटर बनाया गया है। एक-एक अभ्यर्थियांे से संपर्क किया जा रहा है। रोजगार पानेवाले अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को योगदान सुनिच्यित करने का प्रयास किया जा रहा है।  सभी विभाग अपने स्तर से नियुक्ति पत्र वितरण व अभ्यर्थियों के योगदान की निगरानी कर रहे हैं। अब तब 5, 816 अभ्यर्थि यों ने योगदान दिया है। इसके अलावा और भी अभ्यर्थियों ने योगदान दिया है, जिसके बारे में जानकारी प्राप्त की जा रही है-रवि रंजन, निदेशक झारखंड स्किल मिशन सोसाइटी।
(स्त्रोत-कौशल विकास मिशन सोसाइटी को मिली रिर्पोट)

ग्रामीणों की समूदायिक जमीन को गांव सभा के बिना सहमति से ही 21 लाख एकड़ भूमि बैंक में शामिल कर दिया

                  जन आंदोलनों का संयुक्त मोर्चा

                     लोकतंत्र पर खतरा और हमारी जिम्मेदारी
                   (2019 के चुनाव में जनआंदोलनों की हिस्सेदारी)
        जागो-उठो        संगठित हो          संघर्ष करो
                     आज नहीं -तो कभी नहीं
मित्रों,
झारखंड को आबाद करने, सजाने, सवांरने के लिए हमारे पूर्वजों ने अपनी जान दी है। झारखंड की हरियाली, कलकल करते नदी-नाला, उचां-नीचा पहाड़, पर्वत, लहलहाते खेत-टांड को बचाने के लिए हमारे पूर्वजों ने सांप, बाघ, भालू जैसे जंगली जानवरो से लड़ाई लड़कर इस धरती को आबाद किया है। आज इस धरती को, यहां की माटी, पानी, जंगल-झाड़, नदी-नाला, खेत-टांड को देश-विदेश के पूंजीपतियों, कारपोरेट घरानों और सरकार के विनाशकारी नीतियों द्वारा किया जा रहा हमला और लूट से बचाना होगा। झारखंड में आज क्या हो रहा है, आप सभी जानते हैं। 
हमारे पूर्वज सिद्वू, कान्हू, सिंदराय, बिंदराय, तिंलका मांझी, वीर बुद्वु भगत, वीर बिरसा मुंडा, डोंका मुंडा, जतरा टाना भगत, मान्की मुंडा, फूलो, झानो, देवमनी जैसे हजारों वीर शहीदों के अंगे्रजों के खिलाफ सघंर्षकर देश को आजादी दी। आज भारत ने भारतीय संविधान में पांचवी अनुसूचि के तहत हम आदिवासी, मूलवासी, किसान, मजदूरों को विशेष अधिकार दिया है। इसकी रक्षा करना, अधिकारों को बहाल करनवाना हमारी जिम्मेदारी है। 
भाजपा सरकार ने अभी तक कुल चार मोमेंटम झारखंड का आयोजन कर हजारों कारपोट कंपनियों तथा पूंजि-पतियों के साथ झारखंड आदिवासी-मूलवासी किसानों के जल-जंगल-जमीन को उनके हाथ देने का समझौता कर लिया है। जो पूरी तरह से पांचवी अनुसूचि तथा पेसा कानून में प्रावधान ग्रामीणो्र के अधिकारों पर हमला किया है। वर्तमान में चल रहे रिविजन सर्वे, जिसके पूर्ण होते ही, जिसके आधार पर नया खतियान बनेगा, इसके साथ ही 1932 का खतियान स्वतः निरस्त हो जाएगा। जिससे यहां के आदिवासी-मूलवासी किसानों सभी समुदाय के परंपरागत अधिकार समाप््त होगें।
भूमि अधिग्रहण कानून 2017 के लागू होने तथा उपरोक्त तमाम कानूनों के लागू होने से राज्य की कृर्षि भूमि को गैर कृर्षि उपयोग के लिए तेजी से हस्तंत्रित किया जाएगा, फलस्वरूप राज्य की कृर्षि भूमि तेजी से घटेगी तथा खद्यान संकट बढेगा। बीते एक साल में राज्य में भूख से 8 लोगों की मौत हो चुकी है, तब आने वाले समय में राज्य में भूखमरी और मौत भी अपना विक्रांत रूप लेकर आएगा।
आज विस्थापन के खतरों से पूरा राज्य भयभीत है। पलामू-लातेहार, गुमला जिला के ग्रामीण प्रस्तावित नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज से होने विस्थापन, व्यघ्र परियोजना, वाईल्ड लाईफ कोरिडोर, से होने वाले विस्थापन के खिलाफ जूझ रहा है। हजारीबाग के बडका़गांव में कोयला परियोजना से होने विस्थापन के खिलाफ किसान संघर्षरत हैं। गोडडा में अडडानी पावर प्लांट द्वारा जबरन किसानों से जमीन छीन रही है। किसान विरोध कर रहे हैं उन्हें कहा जा रहा है-जमीन नहीं दोगे, तो इसी जमीन में गाड देगें, किसानों का लहलहाता धान खेत को बुलडोजर से रौंद दिया गया। राज्य के हर ईलाका में लोग विस्थापन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं। खूंटी-गुमला जिला के ग्रामीण पहले से ही मित्तल स्टील प्लांट, पूर्वी सिंहभूम के पोटका क्षेत्र में जिंदल स्टील प्लांट, भूषण स्टील प्लांट से, प0 सिंहभूम में कुजू डैम होने वाले विस्थापन के खिलाफ संघर्षरत हैं। खूटी क्षेत्र में आदिवासी समुदाय के सामूहिक एकता को तोड़ने के कई सडयंत्र चलाया जा रहा है। जाति-धर्म के नाम पर सामाज को एक दूसरे से लड़ाया जा रहा है। जो जनता के अधिकारों के रक्षा की बात करते हैं, उन पर देशद्रोह के केस में फंसा दिया जा रहा है। धर्म मानने की आजादी, बोलने की आजादी भी खत्म किया जा रहा है। झारखंडी सामाज पर चारों तरफ से हमला हो रहा है।  इन जनसंधर्षों के बीच रघुवर सरकार उपरोक्त जनविरोधी कानूनों को झारखंडी जनता के उपर थोपने का काम कर रही है।
विकास के नाम पर भाजपा सरकार ग्रामीण किसानों को विभिन्न प्रकार का प्रलोभन देकर, रैयतों से जमीन का पूरा विवरण, उनका वशंावली जमा करवा रही है। इसके साथ डायरेक्ट बिनिफिट ट्रासफर (डीबीटी व्यवस्था) लागू करने के लिए ग्रामीणों से शपथपत्र भरवा रही है। जबकि इसके बारे ग्रामीणों को किसी तरह की सही जानकारी नहीं दी गयी। जो आने वाले दिनों में ग्रामीणों के लिए कई कठिनाईयों को खड़ा करेगा।
राज्य बन 18 साल हो गये। राज्य में 13 मुख्यमंत्री बने, साथ ही सौकड़ों मंत्री बने। लेकिन पांचवी अनुसूची एवं पेसा कानून में ग्रास सभा को दिये अधिकारों को किसी ने लागू नहीं किया। जिसमें मुख्य तौर पर किसी भी तरह के जमीन अधिग्रहण के पहले रैयतों-गांव सभा की सहमति लेना अनिवार्य है, चाहे जमीन का अधिग्रहण सरकार करे, यह कंपनिया। लघू खनिज-जैसे बालू घाट, पत्थर खदान जैसे प्रकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, विपणन और संचालन को अधिकार ग्राम सभा को नहीं दिया गया। इसी तरह से लघु वनोपज -जैसे केंदु पता, चार, महुंआ, डोरो, लाह जैसे जंगल अधारित वनोपज के नियंत्रण, बाजार-व्यवस्था, मूल्या निर्धारित करने का अधिकार गांव सभा का आज तक नहीं दिया गया। दुखद बात है कि-ग्राम सभा या गांव सभा को अधिकार देने के नाम पर भाजपा सरकार ने ग्रामीणों के साथ सिर्फ छल-प्रपंज ही किया है। 
दुखद बात है-कि पूरे झारखंड भाजपा सरकार जबरन किसानों का जमीन छीन रही है। पूरे राज्य में ग्रामीणों की समूदायिक जमीन को गांव सभा के बिना सहमति से ही 21 लाख एकड़ भूमि बैंक में शामिल कर दिया। जमीन संबंधित काम आॅनलाइन होने से, किसानों की परंपारिक खनदानी जमीन के रिकोर्ड में भारी गडबाडियां सामने आ रही है। किसानों का जमीन स्वतः खोता जा रहा है।
आज फिर से देश और राज्य में सरकार बनाने का समय आ गया है। सरकार बनाने की सारी जिम्मदारी आप के हाथ में है, कि आप किस तरह का सरकार बनाऐगे। झारखंड की धरती, जल-जंगल-जमीन, गांव, समाज को लबें समय से संघर्ष करते हुए हम लोगों ने बचाया है, उजड़ने से बचाया है। तब हम जनआंदोलनों की जिम्मेदारी भी है कि 2019 के लोक सभा और विधान सभा चुनाव में ठोंक-परख कर, अपना प्रतिनिधि-नेता चुन कर भेजेगें। हो सके तों अपने आंदोलन के बीच से भी अपना प्रतिनिधि भेजेगें।
चुनाव में हमारी एकता बिखरे नहीं, इसके लिए महागठबंधन ( कांग्रेस, जेएमएम, जेभीएम, राजद, माले, सीपीएम, सीपीआई आदि पार्टियों) से हम जनओदोलन अपील करते हैं कि-देश और राज्य को बचाने के लिए संगठित होकर लोकतंत्रिक शक्ति को मजबूत करें।
उपरोक्त तमाम खतरों एवं हमलों को रोकने के लिए 24 फरवरी को जनसंगठन के साथी रांची पुरूलिया रोड़ स्थित लोयला हाल में विचार-विमार्ष के लिएं आप सभी उपस्थित हांे।
हम सभी इन मांगों के लिए हमेषा संघर्षरत रहे हैं-और आगे भी संघर्ष जारी रहेगा।
1-सीएनटी एक्ट एसपीटी एक्ट को कडाई से लागू किया जाए।
2-5वीं अनुसूचि को कडाई्र से लागू किया जाए
2-गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाडी, सरना-मसना, अखड़ा , हडगड़ी, नदी-नाला, पाईन-झरना, चरागाह, परंपारिक-खेत जैसे भूत खेता, पहनाई, डाली कतारी, चरागाह, जतरा टांड, इंद-टांड, मांडा--टांड सहित सभी तरह के सामुदायिक  जमीन को भूमिं बैंक में शमिल किया गया है, को उसे भूमिं बैंक से मुक्त किया जाए तथा किसी भी बाहरी पूजिं-पतियों को हस्तंत्रित नही किया जाए
 3- भूमिं सुधार/भूदान कानून के तहत जिन किसानों को गैर मजरूआ खास जमीन का हिस्सा बंदोबस्त कर दिया गया है-उसे रदद नहीं किया जाए
4-जमीन अधिग्रहण कानून 2013 को लागू किया जाए
5-किसी तरह का भी जमीन अधिग्रहण के पहले ग्रांव सभा के इजाजत के बिना जमीन अधिग्रहण किसी भी कीमत में नहीं किया जाए।
6-प्रस्तावि हाथी कोरिडोर, वाईल्ड लाइफ कोरिडोर से होने वाले विस्थापन रोका जाय
7-भूमि अधिग्रहण कानून 2017 को रदद किया जाए
9-ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए मनरेगा मजदूरों का मजदूरी दर 159 रू से बढ़ा कर 500 रू किया जाए
10-आदिवासी-मूलवासी विरोधी वर्तमान स्थानीयता नीति को खारिज किया जाए तथा सदियों से जल-जंगल-जमीन के साथ रचे-बसे आदिवासी-मूलवासियों के सामाजिक मूल्यों, संस्कृतिक मूल्यों, भाषा-संस्कृति इनके इतिहास को आधार बना कर 1932 के खतियान को आधार बना कर स्थानीय नीति को पूर्नभाषित करके स्थानीय नीति बनाया जाए।
11-पंचायत मुख्यालयों, प्रखंड मुख्यलयों, स्कूलों, अस्पतालों, जिला मुख्यलयों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को सभी तरह के नौकरियों में बहाली की जाए।
13-सरना कोड़ लागू किया जाए।
14-मानकी-मुंडाओं के परंपरागत अधिकारों को यथावत लागू किया जाए
नोट-कार्यक्रम स्थल लोयला हाॅल, पुरूलिया रोड़ रांची
समय-10 बजे से कार्यक्रम शुरू होगा।

                               निवेदक
                      जन आंदोलनों का संयुक्त मोर्चा
संपर्क-दयामनी बरला-9431104386, जेराम जेराल्ड कुजूर -9431705062, कुमार चंद मार्डी-9934165214, राजू लोहरा-8969503347, तुरतन तोपनो,  जगेश्वर लकड़ा-7739806699,   

Monday, April 22, 2019

एक तरफ अडानी आबंनी जैसे कोरपोरेट मलालमल हो रहे हैं, और दूसरी ओर राज्य में 19 लोगों की भूख से मौत हुई।


प्रेस विज्ञाप्ति              17 april 2019
प्रिय साथियों 
2014 में हमने 16वीं लोक सभा चुनाव देखे। चुनाव के समय भाजपा का लोक लुभावना वादा भी देखे। वादा किया था-सबके लिए अच्छे दिन लाऐगें, विदेश से काला धन वापस लाऐंगें, सभी गरीब जीरो बैंलेशखाताधारियों के खाता में 15-15 लाख रू भेजा जाएगा, सालाना 2 करोड़ की नौकरी देगें, मॅंहगाई पर रोक लगाना प्रमुख था। सबका साथ सबका विकास का नारा से आम जन को लुभाया।
चार साल के भीतर अच्छे दिन की सरकार ने राज्य और देश की आम जनता पर चारों तरफ से हमला किया, जैसे नोटबंदी से परेशानी डिग्रीधारियों से पकौड़ा बेचवाना, कौशल विकास और रोजगार के नाम पर 6000-8000 बेतन पर युवाओं को राज्य से बाहर भेज कर परेशानी, गौमाता के नkम पर दलितों, अल्पसंख्याकों और आदिवासियों पर अत्याचार भूमिं बैंक सहित कई अन्य जननविरोधी कानून बनाकर बंदुक के नोक पर जंगल, जमीन पानी लूट कर कांरपोरेट को देना, जनविरोधी कानून के सहारे आदिवासी, मूलवासी किसानों को जंगल, जमीन से बेदखल करना फोरेस्ट राईट में संशोधन कर जंगल में अपने साथ टंगिया दौली, हंसुआ तीर-धनुष लेकर जंगल घुसने वाले आदिवासियों, किसानों मूलवासियों को फोरेस्टर द्वारा सीधे गोली मारने की आज्ञा देने ईसाई समुदाय पर देशद्रोह का आरोप लगाना इनके करीब 88 संस्थाओं का एफसीआर रदद करना, खूंटी लोक सभा क्षेत्र में सीएनटी एक्ट संशोधन के विरूध हुए आंदोलन में दर्ज मुकदमें सहित पत्थलगडी के नाम पर हातु मुंडां सहित 17 हजार आम गा्रमीणों पर साजिश के तहत केस कर जेल भेजना वाईल्ड लाईफ कोरिडोर के नाम वनक्षेत्र में बसे गांवों को उजाड़ने की सजिष करना।
 सामाजिक कार्याकर्ताओं पर देशद्रोह का मुकदमा चलाना  जेपीएससी में आदिवासी युवाओ के आरक्षण को समाप्त करना मेडिकल नरसिंग विभाग में आदिवासी युवाओं के आरक्षण को समाप्त करना दलित और पिछड़ों का आरक्षण समाप्त करना  झारखंडी आदिवासी-मूलवासी विरासत पर आधारित स्थानीयता नीति को खारीज कर, आदिवासी-मूलवासी विरोधी स्थानीयता नीति थोपना पांचवी अनुसूचि एवं पेसा कानून में प्रावधान अधिकारों को सीधे समाप्त करने वाली भाजपा सरकार की नीतियों को हमने देख लिया है। एक तरफ अडानी आबंनी जैसे कोरपोरेट मलालमल हो रहे हैं,  और दूसरी ओर राज्य में 19 लोगों की भूख से  मौत हुई।  आज हमारी प्रथमिकता है-लोक सभा चुनाव में जनतवरोधी सरकार को हर हाल में रहाना।
वर्तमान परिस्थिति में न तो भारत का संविधान सुरक्षित है, न ही देश और राज्य का लोकतंत्र सुरक्षित है। ऐसे संकट के समय में हम जनआंदोलनों की संयुक्त मोर्चा ने निर्णाय लिया है कि लोक सभा चुनाव में भाजपा को हराना।
द्य उपरोक्त तमाम जनविरोधी नीतियों को रोकने और जनहित में पांचवी अनुसूचि एवं पेसा सहित अन्य संवैधानिक एवं लोकतंत्रिक अधिकारों को लागू करने एवं करवाने का  काम नहीं किया तो, इसके लिए महागठबंधन के प्रमुख दलों-कांग्रेस झारखंड मुक्ति मोर्चा झारखंड विकास मोर्चा के नेता दोष्ी होगें। एैसी स्थिति में राज्य को बचाने के लिए अगामी विधान सभा चुनाव में जनआंदोलन सीधी राजनीतिक हस्तक्षेप करेगा।
हमारी प्रतिबद्वता इन मुदों के प्रति है-
o   पथलगड़ी मामले में कुल 29 केस दर्ज कर 150 चिन्हित ग्रामीणों तथा 15000 अज्ञात निर्दोष ग्रामीणों को प्रताड़ित किया गयाए उनके ऊपर हुए केसों को ख़त्म कर उनको न्याय देना
o   खूँटी के ग्रामीण जिन्होंने 2018 के मानसून महीने में पुलिसिया दमन की वजह से गाँव छोड़ा था, धान की खेती नहीं कर पाए थे, फलस्वरूप उनके पास साल भर खाने को अनाज नहीं है, उनके भरण.पोषण की व्यवस्था की करवाना
o   वनाधिकार अधिनियम 2006 के तहत वनोत्त्पाद में ग्रामीणों के अधिकार को पूर्ण रूप से लागू कराना तथा सभी आदिवासियोंध्वासियों को जिनका वन पट्टा रद्द किया गया, अविलंब उनको वन पट्टा दिलवाना  साथ ही नए आवेदनों को स्वीकृत करवाना
o   एफ॰ आर॰ ए॰  के तहत वन कर्मियों को घातक हथियार के इस्तेमाल की दी गई छूट को तत्काल खारिज करवाना
o   मर्ज करने के नाम पर छेत्र के बंद किये गए सभी सरकारी स्कूलों को पुनः खुलवाया जायेगा साथ ही स्चूलों का इस्तेमाल सिर्फ सिक्षा के लिए हो ये सुनिश्चित करवाना
o   मानव तस्करी को खत्म करनाए तथा तस्करों के चंगुल से बचाकर लाये गये लोगों के लिए रोजगार व्यवस्था करवाना
o   आदिवासीध्मूलवासी युवाओं को रोजगार के लिए बिना शर्त छोटे पूंजी  ;5 लाख तकद्ध की व्यवस्था करवाना
o   ग्राम सभा को उसके अपने छेत्र का विकास करने हेतु शिक्षा और स्वस्थ पर पूर्ण नियंत्रण तथा बालू घाट खनन कार्यए ठेकेदारी सभी में 80 फीसदी हिस्सेदारी दिलवाना
o   छेत्र में सिंचाई की उचित व्यवस्था तथा कृषि विकास केंद्र खोलकर कृषि को बढ़ावा दिया जायेगा साथ ही किसानो को बीज और खाद में उचित सब्सिडी दी जाएगी
o   आदिवासियों को उनके जमीन पर ;गैर.मंजुरवा जमीन परद्ध मालिकाना हक दिया जायेगा
o   आदिवासी मूलवासियों का जमीन लूटने के लिए बना भूमि बैंक को रदद करवाना
o   कुपोषण जैसी भयावह स्थिति को जड़ से मिटाने के लिए उचित प्रयास किया जायेगा
o   पांचवी अनुसूची को पूर्ण रूप से लागू किया जायेगा तथा अनुसूचित छेत्रों में इसके अधीन ही कार्यपालिका कार्य करेगी ये सुनिश्चित किया जायेगा
o   ग्राम.सभा को अपने गावों के ऊपर प्रसाशन और नियंत्रण का अधिकार जो कि पेसा कानून में निहित है पूर्णतः दिलाना


                                                                   
                                                               
दयामनी बरला-संयोजक जनआंदोलनों का संयुक्त मोर्चा
जेरोम जेराल्ड कुजूर-नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेज
कुमार मार्डी-भूमि बचाच मंच
समीर तोपना-
पौलूस
जगेश्वर लकड़ा - कोयलकारो जनसंगठन-कोयल एरिया
बिरसा मुंडा-मुंडारी खूंटकटी भूईयारी परिषद
तुरतन तोपनो-आदिवासी मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंव
अशोक वर्मा-एनएपीएम
राजू लोहरा
ज्वालन तोपनो
अमरनाथ लकड़ा-
कृष्णा लकड़ा-
बिनिता मुंण्डू
पुरनिमा सुरिन-


Monday, March 11, 2019

सेवा में, महामहिम राज्यपाल महोदया, झारखंड द्वारा-प्रखंड विकास पदाधिकारी-कमडारा

सेवा में, 
महामहिम राज्यपाल महोदया,
झारखंड 
द्वारा-प्रखंड विकास पदाधिकारी-कमडारा                           
महोदया ,                                               पत्रांक.....07.
                                                      दिनांक.....22 फरवरी 2019
विषय- आदिवासी-मूलवासी ग्रामीण किसानों कें परंपारिक समुदायिक धरोहर जंगल-झाडी, चरागाह, सरना-मसना, अखड़ा, ससनदिरि, हड़गडी, जतराटांड, मंड़ा टांड, भूतखेता, डालीकतारी, पहनाई,  नदी-नाला, पाईन-झरना सहित गैरमजरूआ आम एवं खास जमीन को भूमिं बैंक में शामिल किया गया है, को भूमिं बैंक से मुक्त करने, तथा पांचवी अनुसूचिं एवं सीएनटी एक्ट एवं एसपीटी एक्ट को कडाई से लागू करने, तथा आॅनलाइन हो रही जमीन की हेरा-फेरी को रोकने के संबंध में। 
महाशय,
सविनयपूर्वक कहना है कि-हमारे पूर्वजों ने सांप-बिच्छू, बाघ-भालू जैसे खतरनाक जानवरों से लड़कर इस झारखंड राज्य की धरती को आबाद किया है। इतिहास गवाह है-कि जब अंग्रेजों के हुकूमत में देश गुलाम था, और आजादी के लिए देश छटपटा रहा था तब आदिवासी समुदाय के वीर नायकों ने, सिदू-कान्हू, चांद-भैरव, सिंदराय-बिंदराय, तेंलेंगा खडिया, तिलका मांझी से लेकर वीर बिरसा मुंडा के अगुवाई में देश के मुक्ति संग्राम में अपनी शहादत दी। इन्हीं वीर नायकों के खून से आदिवासी-मूलवासियों के धरोहर जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए छोटानागपुर काष्तकारी अधिनियक 1908 और संताल परगना काष्तकारी अधिनियम 1949 लिखा गया। जो राज्य के आदिवासी-मूलवासी समुदाय के परंपरागत धरोहर जल-जंगल-जमीन का सुरक्षा कवच है। 
हम आप को यह भी बताना चाहते हैं-कि भारतीय संविधान ने हम आदिवासी-मूलवासी ग्रामीण किसान समुदाय को पांचवी अनुसूचि क्षेत्र में गांव के सीमा के भीतर एवं गांव के बाहर जंगल-झाड़, बालू-गिटी, तथा एक -एक इंच जमीन पर, ग्रामीणों को मालिकाना हक दिया है। 
जमीन -जंगल पर समुदाय का परंपारिक मलिकाना हक से संबंधित जमीन का अभिलेख खतियान भाग दो में गैर मजरूआ आम एवं गैरमजरूआ खास, जंगल-झाडी, नदी-नाला सहित सभी तरह के समूदायिक जमीन पर समुदाय का हक दर्ज है। इसके आधार पर सरकार इस तरह के जमीन का सिर्फ संरक्षक है ;बनेजवकपंदद्ध  सरकार इस जमीन का देख-रेख करती है, लेकिन मालिक नहीं है, न ही सरकार इस तरह के जमीन को बेच सकती है। 
लेकिन दुखद बात है कि-सरकार हम आदिवासी-मूलवासी किसानों के परंपरागत हक-अधिकार को छीन के गैर मजरूआ आम एवं खास जमीन का भूमिं बैंक बना कर, पूजिंपतियों को आॅनलाईन हस्तांत्रण कर रही है। यदि एैसा होता है-तो ग्रामीण आदिवासी-मूलवासी सहित प्रकृति एवं पर्यावरण पर निर्भर समुदाय पूरी तरह समाप्त हो जाएगें। समुदाय की सामाजिक मूल्य, भाषा-संस्कृति, जीविका एवं पहचान अपने आप खत्म हो जाएगा। 
हम यह भी बताना चाहते हैं-कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था यहां के जंगल-झाड़, पेड़-पैधों, नदी-नाला, झरनों में आधारित है, इसी पर पूरी ग्रामीण अथव्यवस्था टिकी हुई है, जिसका मूल स्त्रोत किसानों के जोत के अलावे गैर मजरूआ आम और गैर मजरूआ खास जमीन ही है। राज्य की जनता को इन्हीं प्रकृतिक स्त्रोतों से शुद्व भोजन, शुद्व पानी और शुद्व हवा मिल रहा है। 
आज आदिवासी-मूलवासी समुदाय के समूदायिक धरोहर तमाम तरह के जमीन को भूमिं बैंक में शमिल कर बाहरी लोगों को आॅनलाइन हस्तंत्रित किया जा रहा हेेे-जो आदिवासी-मूलवासी, किसान समुदाय को समूल उखाड़ फेंकने की तैयारी ही माना जाएगा। इससे आदिवासी -मूलवासी समुदाय खासे चिंतित हैं। 
आप को यह भी बताना चाहते है कि 95 प्रतिषत ग्रामीण आबादी न तो कमप्युटर देखी है, न ही इंटरनेट ओपरेट कर सकती है। एैसे में जमीन संबंधी सभी तरह के कार्यों को आॅनलाईन संचालित होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी है। 
वर्तमान सरकार द्वारा जमीन का रसीद-मलगुजारी आॅनलाइन भुगतान किया जा रहा है, इस प्रकिया में किसानों का जमीन संबंधित रेकार्ड एवं कागजातों में हेरा-फेरी किया जा रहा है। अधिकांश किसानों का जमीन आॅनलाईन खो रहा है। इससे किसानों को अपने जमीन का मलगुजारी भुगतान करने में भारी कठिनाई हो रही है।  
वर्तमान सरकार द्वारा लाये गये स्थानीयता नीति में प्रावधान कानूून के लागू होने से-एक ओर दूसरे राज्यों से आयी आबादी सहित बड़े बड़े पूजिंपतियों को राज्य में आबाद करने एवं विकसित होने का बड़ा अवसर दे रहा है। दूसरी ओर राज्य के आदिवासी-मूलवासियों को अपने परंपरागत बसाहाट, धरोहर से उजाड़ने के लिए बड़ा हथियार के रूप में भूमि बैक को इस्तेमाल करने जा रहा है।
मंच भूमि बैंक से होन वाले खतरों की ओर आप का ध्यान खिचना चाहता है- 
भूमि बैंक एवं के लागू होने से आदिवासी-मूलवासी समुदाय के परंपरागत एवं संवैधानिक अधिकारो पर निम्नलिखित खतरा मंडरा रहा है- 
राज्य का पर्यावरणीय परंपरागत जंगल-झाड, नदी-झील-झरनों के ताना-बाना के साथ जिंदा है, वो पूरी तरह नष्ट हो जाएगा 
भूमि बैंक के लागू होना सीएनटी एक्ट एवं एसपीटी एक्ट में प्रावधान अधिकार समाप्त हो रहा है।
भूमि बैंक के लागू होने से पांचवी अनुसूचित के प्रावधान अधिकार खत्म हो जाएगा

भूमि बैंक के लागू होने से खूटकटी अधिकार एवं विलकिंषन रूल, मांझी-परगना व्यवस्था खत्म हो जाएगा। जिसका प्रभाव निम्नलिखित स्तर पर पडेगा।
1-परंपारिक आदिवासी-मूलवासी गांवों का परंपरागत स्वाशासन गांव व्यवस्था तहस-नहस हो जाएगा।
2-आदिवासी-मूलवासी किसानों के गांवों की भौगोलिक तथा जियोलोजिकल या भूमिंतत्वीय, भूगर्भीय अवस्था जो यहां के परंारिक कृर्षि, पर्यावरणीय ताना-बाना, पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।
3-परंपारिक आदिवासी इलाके में भारी संख्या में बाहरी आबादी के प्रवेष से आदिवासी परंपरागत सामाजिक मूल्य, सामूहिकता पूरी तरह बिखर जाएगा।
4-जंगल-जमीन, जलस्त्रोंतों, जंगली-झाड़, भूमिं पर आधारित परंपरागत अर्थव्यस्था पूरी तरह नष्ट हो जाएगें।
5-स्थानीय आदिवासी-मूलवासी समुदाय पर बाहर से आने वाली जनसंख्या पूरी तरह हावी हो जाएगी, तथा आदिवासी जनसंख्या तेजी से विलोपित हो जाएगा।
6-सामाजिक, आर्थिक आधार के नष्ट होने से भारी संख्या में आदिवासी-मूलवासी समुदाय दूसरे राज्यों में पलायन के लिए विवश होगी। 
7-आदिवासी-मूलवासी समूदाय की सामूहिक एकता को विखंडित किया जा रहा है 
उपरोक्त तमाम खतरों एवं बिंन्दुओं को आप के ध्यान में लाते हुए-हम आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच  आप के सामने निम्नलिखित मांग रखते हैं-
1-सीएनटी एक्ट एसपीटी एक्ट को कडाई से लागू किया जाए।
2-गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाडी, सरना-मसना, अखड़ा , हडगड़ी, नदी-नाला, पाईन-झरना, चरागाह, परंपारिक-खेत जैसे भूत खेता, पहनाई, डाली कतारी, चरागाह, जतरा टांड, इंद-टांड, मांडा--टांड सहित सभी तरह के सामुदायिक  जमीन को भूमिं बैंक में शमिल किया गया है, को उसे भूमिं बैंक से मुक्त किया जाए तथा किसी भी बाहरी पूजिं-पतियों को हस्तंत्रित नही किया जाए
 3- भूमिं सुधार/भूदान कानून के तहत जिन किसानों को गैर मजरूआ खास जमीन का हिस्सा बंदोबस्त कर दिया गया है-उसे रदद नहीं किया जाए
4-जमीन अधिग्रहण कानून 2013 को लागू किया जाए
5-किसी तरह का भी जमीन अधिग्रहण के पहले ग्रांव सभा के इजाजत के बिना जमीन अधिग्रहण किसी भी कीमत में नहीं किया जाए।
6-5वीं अनुसूचि को कडाई्र से लागू किया जाए। 
7-किसानों का लोन माफ किया जाए  
9-ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए मनरेगा मजदूरों का मजदूरी दर 159 रू से बढ़ा कर 500 रू किया जाए
10-आदिवासी-मूलवासी विरोधी वर्तमान स्थानीयता नीति को खारिज किया जाए तथा सदियों से जल-जंगल-जमीन के साथ रचे-बसे आदिवासी-मूलवासियों के सामाजिक मूल्यों, संस्कृतिक मूल्यों, भाषा-संस्कृति इनके इतिहास को आधार बना कर 1932 के खतियान को आधार बना कर स्थानीय नीति को पूर्नभाषित करके स्थानीय नीति बनाया जाए।
11-पंचायत मुख्यालयों, प्रखंड मुख्यलयों, स्कूलों, अस्पतालों, जिला मुख्यलयों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को सभी तरह के नौकरियों में बहाली की जाए। 
13-सरना कोड़ लागू किया जाए।
14-किसी भी तरह का जमीन अधिग्रहण गांव सभा की इजाजत के बिना, नहीं किया जाए।
नोट-प्रति लिपी- 1-प्रखंड विकास पदाधिकारी कमडारा
               2-आंचल पदाधिकारी कमडारा
              3-उपायुक्त गुमला जिला
              4--राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग-रांची, झारखंड सरकार


                                     निवेदक
                        आदिवासी-मूलवासी असित्व रक्षा  मंच
                              तोरपा-खूंटी                              
    संयोजक....-दयामनी बरला          अध्याक्ष-तुरतन तांपनांे
                            उपाध्यक्ष-राजू लोहरा
                            सचिव -हादू तोपनो, उपसचिव-ऐनेम तोपनो  

सेवा में, पत्रांक--07 अंचल पदाधिकारी दिनांक--21 फरवरी 2019 तोरपा -खंूटी ,

सेवा में,                                                   पत्रांक--07
अंचल पदाधिकारी                                          दिनांक--21 फरवरी 2019
तोरपा -खंूटी                         
 ,                                                     .
                                                      
विषय-  आदिवासी-मूलवासी ग्रामीण किसानों कें परंपारिक समुदायिक धरोहर जंगल-झाडी, चरागाह, सरना-मसना, अखड़ा, ससनदिरि, हड़गडी, जतराटांड, मंड़ा टांड, भूतखेता, डालीकतारी, पहनाई,  नदी-नाला, पाईन-झरना सहित गैरमजरूआ आम एवं खास जमीन को भूमिं बैंक में शामिल किया गया है, को भूमिं बैंक से मुक्त करने, तथा पांचवी अनुसूचिं एवं सीएनटी एक्ट एवं एसपीटी एक्ट को कडाई से लागू करने, तथा आॅनलाइन हो रही जमीन की हेरा-फेरी को रोकने के संबंध में। 
महाशय,,
 सविनयपूर्वक कहना है कि-हमारे पूर्वजों ने सांप-बिच्छू, बाघ-भालू जैसे खतरनाक जानवरों से लड़कर इस झारखंड राज्य की धरती को आबाद किया है। इतिहास गवाह है-कि जब अंग्रेजों के हुकूमत में देश गुलाम था, और आजादी के लिए देश छटपटा रहा था तब आदिवासी समुदाय के वीर नायकों ने, सिदू-कान्हू, चांद-भैरव, सिंदराय-बिंदराय, तेंलेंगा खडिया, तिलका मांझी से लेकर वीर बिरसा मुंडा के अगुवाई में देश के मुक्ति संग्राम में अपनी शहादत दी। इन्हीं वीर नायकों के खून से आदिवासी-मूलवासियों के धरोहर जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए छोटानागपुर काष्तकारी अधिनियक 1908 और संताल परगना काष्तकारी अधिनियम 1949 लिखा गया। जो राज्य के आदिवासी-मूलवासी समुदाय के परंपरागत धरोहर जल-जंगल-जमीन का सुरक्षा कवच है। 
हम आप को यह भी बताना चाहते हैं-कि भारतीय संविधान ने हम आदिवासी-मूलवासी ग्रामीण किसान समुदाय को पांचवी अनुसूचि क्षेत्र में गांव के सीमा के भीतर एवं गांव के बाहर जंगल-झाड़, बालू-गिटी, तथा एक -एक इंच जमीन पर, ग्रामीणों को मालिकाना हक दिया है। 
जमीन -जंगल पर समुदाय का परंपारिक मलिकाना हक से संबंधित जमीन का अभिलेख खतियान भाग दो में गैर मजरूआ आम एवं गैरमजरूआ खास, जंगल-झाडी, नदी-नाला सहित सभी तरह के समूदायिक जमीन पर समुदाय का हक दर्ज है। इसके आधार पर सरकार इस तरह के जमीन का सिर्फ संरक्षक है ;बनेजवकपंदद्ध  सरकार इस जमीन का देख-रेख करती है, लेकिन मालिक नहीं है, न ही सरकार इस तरह के जमीन को बेच सकती है। 
लेकिन दुखद बात है कि-सरकार हम आदिवासी-मूलवासी किसानों के परंपरागत हक-अधिकार को छीन के गैर मजरूआ आम एवं खास जमीन का भूमिं बैंक बना कर, पूजिंपतियों को आॅनलाईन हस्तांत्रण कर रही है। यदि एैसा होता है-तो ग्रामीण आदिवासी-मूलवासी सहित प्रकृति एवं पर्यावरण पर निर्भर समुदाय पूरी तरह समाप्त हो जाएगें। समुदाय की सामाजिक मूल्य, भाषा-संस्कृति, जीविका एवं पहचान अपने आप खत्म हो जाएगा। 
हम यह भी बताना चाहते हैं-कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था यहां के जंगल-झाड़, पेड़-पैधों, नदी-नाला, झरनों में आधारित है, इसी पर पूरी ग्रामीण अथव्यवस्था टिकी हुई है, जिसका मूल स्त्रोत किसानों के जोत के अलावे गैर मजरूआ आम और गैर मजरूआ खास जमीन ही है। राज्य की जनता को इन्हीं प्रकृतिक स्त्रोतों से शुद्व भोजन, शुद्व पानी और शुद्व हवा मिल रहा है। 
आज आदिवासी-मूलवासी समुदाय के समूदायिक धरोहर तमाम तरह के जमीन को भूमिं बैंक में शमिल कर बाहरी लोगों को आॅनलाइन हस्तंत्रित किया जा रहा हेेे-जो आदिवासी-मूलवासी, किसान समुदाय को समूल उखाड़ फेंकने की तैयारी ही माना जाएगा। इससे आदिवासी -मूलवासी समुदाय खासे चिंतित हैं। 
आप को यह भी बताना चाहते है कि 95 प्रतिषत ग्रामीण आबादी न तो कमप्युटर देखी है, न ही इंटरनेट ओपरेट कर सकती है। एैसे में जमीन संबंधी सभी तरह के कार्यों को आॅनलाईन संचालित होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी है। 
वर्तमान सरकार द्वारा जमीन का रसीद-मलगुजारी आॅनलाइन भुगतान किया जा रहा है, इस प्रकिया में किसानों का जमीन संबंधित रेकार्ड एवं कागजातों में हेरा-फेरी किया जा रहा है। अधिकांश किसानों का जमीन आॅनलाईन खो रहा है। इससे किसानों को अपने जमीन का मलगुजारी भुगतान करने में भारी कठिनाई हो रही है।  
वर्तमान सरकार द्वारा लाये गये स्थानीयता नीति में प्रावधान कानूून के लागू होने से-एक ओर दूसरे राज्यों से आयी आबादी सहित बड़े बड़े पूजिंपतियों को राज्य में आबाद करने एवं विकसित होने का बड़ा अवसर दे रहा है। दूसरी ओर राज्य के आदिवासी-मूलवासियों को अपने परंपरागत बसाहाट, धरोहर से उजाड़ने के लिए बड़ा हथियार के रूप में भूमि बैक को इस्तेमाल करने जा रहा है।
मंच भूमि बैंक से होन वाले खतरों की ओर आप का ध्यान खिचना चाहता है- 
भूमि बैंक एवं के लागू होने से आदिवासी-मूलवासी समुदाय के परंपरागत एवं संवैधानिक अधिकारो पर निम्नलिखित खतरा मंडरा रहा है- 
राज्य का पर्यावरणीय परंपरागत जंगल-झाड, नदी-झील-झरनों के ताना-बाना के साथ जिंदा है, वो पूरी तरह नष्ट हो जाएगा 
भूमि बैंक के लागू होना सीएनटी एक्ट एवं एसपीटी एक्ट में प्रावधान अधिकार समाप्त हो रहा है।
भूमि बैंक के लागू होने से पांचवी अनुसूचित के प्रावधान अधिकार खत्म हो जाएगा

भूमि बैंक के लागू होने से खूटकटी अधिकार एवं विलकिंषन रूल, मांझी-परगना व्यवस्था खत्म हो जाएगा। जिसका प्रभाव निम्नलिखित स्तर पर पडेगा।
1-परंपारिक आदिवासी-मूलवासी गांवों का परंपरागत स्वाशासन गांव व्यवस्था तहस-नहस हो जाएगा।
2-आदिवासी-मूलवासी किसानों के गांवों की भौगोलिक तथा जियोलोजिकल या भूमिंतत्वीय, भूगर्भीय अवस्था जो यहां के परंारिक कृर्षि, पर्यावरणीय ताना-बाना, पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।
3-परंपारिक आदिवासी इलाके में भारी संख्या में बाहरी आबादी के प्रवेष से आदिवासी परंपरागत सामाजिक मूल्य, सामूहिकता पूरी तरह बिखर जाएगा।
4-जंगल-जमीन, जलस्त्रोंतों, जंगली-झाड़, भूमिं पर आधारित परंपरागत अर्थव्यस्था पूरी तरह नष्ट हो जाएगें।
5-स्थानीय आदिवासी-मूलवासी समुदाय पर बाहर से आने वाली जनसंख्या पूरी तरह हावी हो जाएगी, तथा आदिवासी जनसंख्या तेजी से विलोपित हो जाएगा।
6-सामाजिक, आर्थिक आधार के नष्ट होने से भारी संख्या में आदिवासी-मूलवासी समुदाय दूसरे राज्यों में पलायन के लिए विवश होगी। 
7-आदिवासी-मूलवासी समूदाय की सामूहिक एकता को विखंडित किया जा रहा है 
उपरोक्त तमाम खतरों एवं बिंन्दुओं को आप के ध्यान में लाते हुए-हम आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच  आप के सामने निम्नलिखित मांग रखते हैं-
1-सीएनटी एक्ट एसपीटी एक्ट को कडाई से लागू किया जाए।
2-गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाडी, सरना-मसना, अखड़ा , हडगड़ी, नदी-नाला, पाईन-झरना, चरागाह, परंपारिक-खेत जैसे भूत खेता, पहनाई, डाली कतारी, चरागाह, जतरा टांड, इंद-टांड, मांडा--टांड सहित सभी तरह के सामुदायिक  जमीन को भूमिं बैंक में शमिल किया गया है, को उसे भूमिं बैंक से मुक्त किया जाए तथा किसी भी बाहरी पूजिं-पतियों को हस्तंत्रित नही किया जाए
 3- भूमिं सुधार/भूदान कानून के तहत जिन किसानों को गैर मजरूआ खास जमीन का हिस्सा बंदोबस्त कर दिया गया है-उसे रदद नहीं किया जाए
4-जमीन अधिग्रहण कानून 2013 को लागू किया जाए
5-किसी तरह का भी जमीन अधिग्रहण के पहले ग्रांव सभा के इजाजत के बिना जमीन अधिग्रहण किसी भी कीमत में नहीं किया जाए।
6-5वीं अनुसूचि को कडाई्र से लागू किया जाए। 
7-किसानों का लोन माफ किया जाए  
9-ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए मनरेगा मजदूरों का मजदूरी दर 159 रू से बढ़ा कर 500 रू किया जाए
10-आदिवासी-मूलवासी विरोधी वर्तमान स्थानीयता नीति को खारिज किया जाए तथा सदियों से जल-जंगल-जमीन के साथ रचे-बसे आदिवासी-मूलवासियों के सामाजिक मूल्यों, संस्कृतिक मूल्यों, भाषा-संस्कृति इनके इतिहास को आधार बना कर 1932 के खतियान को आधार बना कर स्थानीय नीति को पूर्नभाषित करके स्थानीय नीति बनाया जाए।
11-पंचायत मुख्यालयों, प्रखंड मुख्यलयों, स्कूलों, अस्पतालों, जिला मुख्यलयों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को सभी तरह के नौकरियों में बहाली की जाए। 
13-सरना कोड़ लागू किया जाए।
14-किसी भी तरह का जमीन अधिग्रहण गांव सभा की इजाजत के बिना, नहीं किया जाए।




                                     निवेदक
                        आदिवासी-मूलवासी असित्व रक्षा  मंच
                              तोरपा-खूंटी                              
    संयोजक....-दयामनी बरला          अध्याक्ष-तुरतन तांपनांे
                            उपाध्यक्ष-राजू लोहरा
                            सचिव -हादू तोपनो, उपसचिव-ऐनेम तोपनो 



सेवा में, उपायुक्त महोदय खूंटी द्वारा-प्रखंड विकास पदाधिकारी-तोरपा

सेवा में, 
उपायुक्त महोदय
खूंटी
द्वारा-प्रखंड विकास पदाधिकारी-तोरपा                          
 ,                                                     पत्रांक.....07..
                                                      दिनांक.....21 फरवरी 2019.
विषय-  आदिवासी-मूलवासी ग्रामीण किसानों कें परंपारिक समुदायिक धरोहर जंगल-झाडी, चरागाह, सरना-मसना, अखड़ा, ससनदिरि, हड़गडी, जतराटांड, मंड़ा टांड, भूतखेता, डालीकतारी, पहनाई,  नदी-नाला, पाईन-झरना सहित गैरमजरूआ आम एवं खास जमीन को भूमिं बैंक में शामिल किया गया है, को भूमिं बैंक से मुक्त करने, तथा पांचवी अनुसूचिं एवं सीएनटी एक्ट एवं एसपीटी एक्ट को कडाई से लागू करने, तथा आॅनलाइन हो रही जमीन की हेरा-फेरी को रोकने के संबंध में। 
महाशय,,
 सविनयपूर्वक कहना है कि-हमारे पूर्वजों ने सांप-बिच्छू, बाघ-भालू जैसे खतरनाक जानवरों से लड़कर इस झारखंड राज्य की धरती को आबाद किया है। इतिहास गवाह है-कि जब अंग्रेजों के हुकूमत में देश गुलाम था, और आजादी के लिए देश छटपटा रहा था तब आदिवासी समुदाय के वीर नायकों ने, सिदू-कान्हू, चांद-भैरव, सिंदराय-बिंदराय, तेंलेंगा खडिया, तिलका मांझी से लेकर वीर बिरसा मुंडा के अगुवाई में देश के मुक्ति संग्राम में अपनी शहादत दी। इन्हीं वीर नायकों के खून से आदिवासी-मूलवासियों के धरोहर जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए छोटानागपुर काष्तकारी अधिनियक 1908 और संताल परगना काष्तकारी अधिनियम 1949 लिखा गया। जो राज्य के आदिवासी-मूलवासी समुदाय के परंपरागत धरोहर जल-जंगल-जमीन का सुरक्षा कवच है। 
हम आप को यह भी बताना चाहते हैं-कि भारतीय संविधान ने हम आदिवासी-मूलवासी ग्रामीण किसान समुदाय को पांचवी अनुसूचि क्षेत्र में गांव के सीमा के भीतर एवं गांव के बाहर जंगल-झाड़, बालू-गिटी, तथा एक -एक इंच जमीन पर, ग्रामीणों को मालिकाना हक दिया है। 
जमीन -जंगल पर समुदाय का परंपारिक मलिकाना हक से संबंधित जमीन का अभिलेख खतियान भाग दो में गैर मजरूआ आम एवं गैरमजरूआ खास, जंगल-झाडी, नदी-नाला सहित सभी तरह के समूदायिक जमीन पर समुदाय का हक दर्ज है। इसके आधार पर सरकार इस तरह के जमीन का सिर्फ संरक्षक है ;बनेजवकपंदद्ध  सरकार इस जमीन का देख-रेख करती है, लेकिन मालिक नहीं है, न ही सरकार इस तरह के जमीन को बेच सकती है। 
लेकिन दुखद बात है कि-सरकार हम आदिवासी-मूलवासी किसानों के परंपरागत हक-अधिकार को छीन के गैर मजरूआ आम एवं खास जमीन का भूमिं बैंक बना कर, पूजिंपतियों को आॅनलाईन हस्तांत्रण कर रही है। यदि एैसा होता है-तो ग्रामीण आदिवासी-मूलवासी सहित प्रकृति एवं पर्यावरण पर निर्भर समुदाय पूरी तरह समाप्त हो जाएगें। समुदाय की सामाजिक मूल्य, भाषा-संस्कृति, जीविका एवं पहचान अपने आप खत्म हो जाएगा। 
हम यह भी बताना चाहते हैं-कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था यहां के जंगल-झाड़, पेड़-पैधों, नदी-नाला, झरनों में आधारित है, इसी पर पूरी ग्रामीण अथव्यवस्था टिकी हुई है, जिसका मूल स्त्रोत किसानों के जोत के अलावे गैर मजरूआ आम और गैर मजरूआ खास जमीन ही है। राज्य की जनता को इन्हीं प्रकृतिक स्त्रोतों से शुद्व भोजन, शुद्व पानी और शुद्व हवा मिल रहा है। 
आज आदिवासी-मूलवासी समुदाय के समूदायिक धरोहर तमाम तरह के जमीन को भूमिं बैंक में शमिल कर बाहरी लोगों को आॅनलाइन हस्तंत्रित किया जा रहा हेेे-जो आदिवासी-मूलवासी, किसान समुदाय को समूल उखाड़ फेंकने की तैयारी ही माना जाएगा। इससे आदिवासी -मूलवासी समुदाय खासे चिंतित हैं। 
आप को यह भी बताना चाहते है कि 95 प्रतिषत ग्रामीण आबादी न तो कमप्युटर देखी है, न ही इंटरनेट ओपरेट कर सकती है। एैसे में जमीन संबंधी सभी तरह के कार्यों को आॅनलाईन संचालित होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी है। 
वर्तमान सरकार द्वारा जमीन का रसीद-मलगुजारी आॅनलाइन भुगतान किया जा रहा है, इस प्रकिया में किसानों का जमीन संबंधित रेकार्ड एवं कागजातों में हेरा-फेरी किया जा रहा है। अधिकांश किसानों का जमीन आॅनलाईन खो रहा है। इससे किसानों को अपने जमीन का मलगुजारी भुगतान करने में भारी कठिनाई हो रही है।  
वर्तमान सरकार द्वारा लाये गये स्थानीयता नीति में प्रावधान कानूून के लागू होने से-एक ओर दूसरे राज्यों से आयी आबादी सहित बड़े बड़े पूजिंपतियों को राज्य में आबाद करने एवं विकसित होने का बड़ा अवसर दे रहा है। दूसरी ओर राज्य के आदिवासी-मूलवासियों को अपने परंपरागत बसाहाट, धरोहर से उजाड़ने के लिए बड़ा हथियार के रूप में भूमि बैक को इस्तेमाल करने जा रहा है।
मंच भूमि बैंक से होन वाले खतरों की ओर आप का ध्यान खिचना चाहता है- 
भूमि बैंक एवं के लागू होने से आदिवासी-मूलवासी समुदाय के परंपरागत एवं संवैधानिक अधिकारो पर निम्नलिखित खतरा मंडरा रहा है- 
राज्य का पर्यावरणीय परंपरागत जंगल-झाड, नदी-झील-झरनों के ताना-बाना के साथ जिंदा है, वो पूरी तरह नष्ट हो जाएगा 
भूमि बैंक के लागू होना सीएनटी एक्ट एवं एसपीटी एक्ट में प्रावधान अधिकार समाप्त हो रहा है।
भूमि बैंक के लागू होने से पांचवी अनुसूचित के प्रावधान अधिकार खत्म हो जाएगा

भूमि बैंक के लागू होने से खूटकटी अधिकार एवं विलकिंषन रूल, मांझी-परगना व्यवस्था खत्म हो जाएगा। जिसका प्रभाव निम्नलिखित स्तर पर पडेगा।
1-परंपारिक आदिवासी-मूलवासी गांवों का परंपरागत स्वाशासन गांव व्यवस्था तहस-नहस हो जाएगा।
2-आदिवासी-मूलवासी किसानों के गांवों की भौगोलिक तथा जियोलोजिकल या भूमिंतत्वीय, भूगर्भीय अवस्था जो यहां के परंारिक कृर्षि, पर्यावरणीय ताना-बाना, पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।
3-परंपारिक आदिवासी इलाके में भारी संख्या में बाहरी आबादी के प्रवेष से आदिवासी परंपरागत सामाजिक मूल्य, सामूहिकता पूरी तरह बिखर जाएगा।
4-जंगल-जमीन, जलस्त्रोंतों, जंगली-झाड़, भूमिं पर आधारित परंपरागत अर्थव्यस्था पूरी तरह नष्ट हो जाएगें।
5-स्थानीय आदिवासी-मूलवासी समुदाय पर बाहर से आने वाली जनसंख्या पूरी तरह हावी हो जाएगी, तथा आदिवासी जनसंख्या तेजी से विलोपित हो जाएगा।
6-सामाजिक, आर्थिक आधार के नष्ट होने से भारी संख्या में आदिवासी-मूलवासी समुदाय दूसरे राज्यों में पलायन के लिए विवश होगी। 
7-आदिवासी-मूलवासी समूदाय की सामूहिक एकता को विखंडित किया जा रहा है 
उपरोक्त तमाम खतरों एवं बिंन्दुओं को आप के ध्यान में लाते हुए-हम आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच  आप के सामने निम्नलिखित मांग रखते हैं-
1-सीएनटी एक्ट एसपीटी एक्ट को कडाई से लागू किया जाए।
2-गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाडी, सरना-मसना, अखड़ा , हडगड़ी, नदी-नाला, पाईन-झरना, चरागाह, परंपारिक-खेत जैसे भूत खेता, पहनाई, डाली कतारी, चरागाह, जतरा टांड, इंद-टांड, मांडा--टांड सहित सभी तरह के सामुदायिक  जमीन को भूमिं बैंक में शमिल किया गया है, को उसे भूमिं बैंक से मुक्त किया जाए तथा किसी भी बाहरी पूजिं-पतियों को हस्तंत्रित नही किया जाए
 3- भूमिं सुधार/भूदान कानून के तहत जिन किसानों को गैर मजरूआ खास जमीन का हिस्सा बंदोबस्त कर दिया गया है-उसे रदद नहीं किया जाए
4-जमीन अधिग्रहण कानून 2013 को लागू किया जाए
5-किसी तरह का भी जमीन अधिग्रहण के पहले ग्रांव सभा के इजाजत के बिना जमीन अधिग्रहण किसी भी कीमत में नहीं किया जाए।
6-5वीं अनुसूचि को कडाई्र से लागू किया जाए। 
7-किसानों का लोन माफ किया जाए  
9-ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने के लिए मनरेगा मजदूरों का मजदूरी दर 159 रू से बढ़ा कर 500 रू किया जाए
10-आदिवासी-मूलवासी विरोधी वर्तमान स्थानीयता नीति को खारिज किया जाए तथा सदियों से जल-जंगल-जमीन के साथ रचे-बसे आदिवासी-मूलवासियों के सामाजिक मूल्यों, संस्कृतिक मूल्यों, भाषा-संस्कृति इनके इतिहास को आधार बना कर 1932 के खतियान को आधार बना कर स्थानीय नीति को पूर्नभाषित करके स्थानीय नीति बनाया जाए।
11-पंचायत मुख्यालयों, प्रखंड मुख्यलयों, स्कूलों, अस्पतालों, जिला मुख्यलयों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को सभी तरह के नौकरियों में बहाली की जाए। 
13-सरना कोड़ लागू किया जाए।
14-किसी भी तरह का जमीन अधिग्रहण गांव सभा की इजाजत के बिना, नहीं किया जाए।




                                     निवेदक
                        आदिवासी-मूलवासी असित्व रक्षा  मंच
                              तोरपा-खूंटी                              
    संयोजक....-दयामनी बरला          अध्याक्ष-तुरतन तांपनांे
                            उपाध्यक्ष-राजू लोहरा
                            सचिव -हादू तोपनो, उपसचिव-ऐनेम तोपनो  



सेवा में, भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग झारखंड सरकार द्वारा-प्रखंड विकास पदाधिकारी-तोरपा

सेवा में, 
भूमि सुधार एवं राजस्व विभाग
झारखंड सरकार 
द्वारा-प्रखंड विकास पदाधिकारी-तोरपा                          
 ,                                                     पत्रांक.....07..
                                                      दिनांक.....21 फरवरी 2019.
विषय-  आदिवासी-मूलवासी ग्रामीण किसानों कें परंपारिक समुदायिक धरोहर जंगल-झाडी, चरागाह, सरना-मसना, अखड़ा, ससनदिरि, हड़गडी, जतराटांड, मंड़ा टांड, भूतखेता, डालीकतारी, पहनाई,  नदी-नाला, पाईन-झरना सहित गैरमजरूआ आम एवं खास जमीन को भूमिं बैंक में शामिल किया गया है, को भूमिं बैंक से मुक्त करने, तथा पांचवी अनुसूचिं एवं सीएनटी एक्ट एवं एसपीटी एक्ट को कडाई से लागू करने, तथा आॅनलाइन हो रही जमीन की हेरा-फेरी को रोकने के संबंध में। 
महाशय,,
 सविनयपूर्वक कहना है कि-हमारे पूर्वजों ने सांप-बिच्छू, बाघ-भालू जैसे खतरनाक जानवरों से लड़कर इस झारखंड राज्य की धरती को आबाद किया है। इतिहास गवाह है-कि जब अंग्रेजों के हुकूमत में देश गुलाम था, और आजादी के लिए देश छटपटा रहा था तब आदिवासी समुदाय के वीर नायकों ने, सिदू-कान्हू, चांद-भैरव, सिंदराय-बिंदराय, तेंलेंगा खडिया, तिलका मांझी से लेकर वीर बिरसा मुंडा के अगुवाई में देश के मुक्ति संग्राम में अपनी शहादत दी। इन्हीं वीर नायकों के खून से आदिवासी-मूलवासियों के धरोहर जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए छोटानागपुर काष्तकारी अधिनियक 1908 और संताल परगना काष्तकारी अधिनियम 1949 लिखा गया। जो राज्य के आदिवासी-मूलवासी समुदाय के परंपरागत धरोहर जल-जंगल-जमीन का सुरक्षा कवच है। 
हम आप को यह भी बताना चाहते हैं-कि भारतीय संविधान ने हम आदिवासी-मूलवासी ग्रामीण किसान समुदाय को पांचवी अनुसूचि क्षेत्र में गांव के सीमा के भीतर एवं गांव के बाहर जंगल-झाड़, बालू-गिटी, तथा एक -एक इंच जमीन पर, ग्रामीणों को मालिकाना हक दिया है। 
जमीन -जंगल पर समुदाय का परंपारिक मलिकाना हक से संबंधित जमीन का अभिलेख खतियान भाग दो में गैर मजरूआ आम एवं गैरमजरूआ खास, जंगल-झाडी, नदी-नाला सहित सभी तरह के समूदायिक जमीन पर समुदाय का हक दर्ज है। इसके आधार पर सरकार इस तरह के जमीन का सिर्फ संरक्षक है ;बनेजवकपंदद्ध  सरकार इस जमीन का देख-रेख करती है, लेकिन मालिक नहीं है, न ही सरकार इस तरह के जमीन को बेच सकती है। 
लेकिन दुखद बात है कि-सरकार हम आदिवासी-मूलवासी किसानों के परंपरागत हक-अधिकार को छीन के गैर मजरूआ आम एवं खास जमीन का भूमिं बैंक बना कर, पूजिंपतियों को आॅनलाईन हस्तांत्रण कर रही है। यदि एैसा होता है-तो ग्रामीण आदिवासी-मूलवासी सहित प्रकृति एवं पर्यावरण पर निर्भर समुदाय पूरी तरह समाप्त हो जाएगें। समुदाय की सामाजिक मूल्य, भाषा-संस्कृति, जीविका एवं पहचान अपने आप खत्म हो जाएगा। 
हम यह भी बताना चाहते हैं-कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था यहां के जंगल-झाड़, पेड़-पैधों, नदी-नाला, झरनों में आधारित है, इसी पर पूरी ग्रामीण अथव्यवस्था टिकी हुई है, जिसका मूल स्त्रोत किसानों के जोत के अलावे गैर मजरूआ आम और गैर मजरूआ खास जमीन ही है। राज्य की जनता को इन्हीं प्रकृतिक स्त्रोतों से शुद्व भोजन, शुद्व पानी और शुद्व हवा मिल रहा है। 
आज आदिवासी-मूलवासी समुदाय के समूदायिक धरोहर तमाम तरह के जमीन को भूमिं बैंक में शमिल कर बाहरी लोगों को आॅनलाइन हस्तंत्रित किया जा रहा हेेे-जो आदिवासी-मूलवासी, किसान समुदाय को समूल उखाड़ फेंकने की तैयारी ही माना जाएगा। इससे आदिवासी -मूलवासी समुदाय खासे चिंतित हैं। 
आप को यह भी बताना चाहते है कि 95 प्रतिषत ग्रामीण आबादी न तो कमप्युटर देखी है, न ही इंटरनेट ओपरेट कर सकती है। एैसे में जमीन संबंधी सभी तरह के कार्यों को आॅनलाईन संचालित होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ी है। 
वर्तमान सरकार द्वारा जमीन का रसीद-मलगुजारी आॅनलाइन भुगतान किया जा रहा है, इस प्रकिया में किसानों का जमीन संबंधित रेकार्ड एवं कागजातों में हेरा-फेरी किया जा रहा है। अधिकांश किसानों का जमीन आॅनलाईन खो रहा है। इससे किसानों को अपने जमीन का मलगुजारी भुगतान करने में भारी कठिनाई हो रही है।  
वर्तमान सरकार द्वारा लाये गये स्थानीयता नीति में प्रावधान कानूून के लागू होने से-एक ओर दूसरे राज्यों से आयी आबादी सहित बड़े बड़े पूजिंपतियों को राज्य में आबाद करने एवं विकसित होने का बड़ा अवसर दे रहा है। दूसरी ओर राज्य के आदिवासी-मूलवासियों को अपने परंपरागत बसाहाट, धरोहर से उजाड़ने के लिए बड़ा हथियार के रूप में भूमि बैक को इस्तेमाल करने जा रहा है।
मंच भूमि बैंक से होन वाले खतरों की ओर आप का ध्यान खिचना चाहता है- 
भूमि बैंक एवं के लागू होने से आदिवासी-मूलवासी समुदाय के परंपरागत एवं संवैधानिक अधिकारो पर निम्नलिखित खतरा मंडरा रहा है- 
राज्य का पर्यावरणीय परंपरागत जंगल-झाड, नदी-झील-झरनों के ताना-बाना के साथ जिंदा है, वो पूरी तरह नष्ट हो जाएगा 
भूमि बैंक के लागू होना सीएनटी एक्ट एवं एसपीटी एक्ट में प्रावधान अधिकार समाप्त हो रहा है।
भूमि बैंक के लागू होने से पांचवी अनुसूचित के प्रावधान अधिकार खत्म हो जाएगा

भूमि बैंक के लागू होने से खूटकटी अधिकार एवं विलकिंषन रूल, मांझी-परगना व्यवस्था खत्म हो जाएगा। जिसका प्रभाव निम्नलिखित स्तर पर पडेगा।
1-परंपारिक आदिवासी-मूलवासी गांवों का परंपरागत स्वाशासन गांव व्यवस्था तहस-नहस हो जाएगा।
2-आदिवासी-मूलवासी किसानों के गांवों की भौगोलिक तथा जियोलोजिकल या भूमिंतत्वीय, भूगर्भीय अवस्था जो यहां के परंारिक कृर्षि, पर्यावरणीय ताना-बाना, पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।
3-परंपारिक आदिवासी इलाके में भारी संख्या में बाहरी आबादी के प्रवेष से आदिवासी परंपरागत सामाजिक मूल्य, सामूहिकता पूरी तरह बिखर जाएगा।
4-जंगल-जमीन, जलस्त्रोंतों, जंगली-झाड़, भूमिं पर आधारित परंपरागत अर्थव्यस्था पूरी तरह नष्ट हो जाएगें।
5-स्थानीय आदिवासी-मूलवासी समुदाय पर बाहर से आने वाली जनसंख्या पूरी तरह हावी हो जाएगी, तथा आदिवासी जनसंख्या तेजी से विलोपित हो जाएगा।
6-सामाजिक, आर्थिक आधार के नष्ट होने से भारी संख्या में आदिवासी-मूलवासी समुदाय दूसरे राज्यों में पलायन के लिए विवश होगी। 
7-आदिवासी-मूलवासी समूदाय की सामूहिक एकता को विखंडित किया जा रहा है 
उपरोक्त तमाम खतरों एवं बिंन्दुओं को आप के ध्यान में लाते हुए-हम आदिवासी-मूलवासी अस्तित्व रक्षा मंच  आप के सामने निम्नलिखित मांग रखते हैं-
1-सीएनटी एक्ट एसपीटी एक्ट को कडाई से लागू किया जाए।
2-गैर मजरूआ आम, गैर मजरूआ खास, जंगल-झाडी, सरना-मसना, अखड़ा , हडगड़ी, नदी-नाला, पाईन-झरना, चरागाह, परंपारिक-खेत जैसे भूत खेता, पहनाई, डाली कतारी, चरागाह, जतरा टांड, इंद-टांड, मांडा--टांड सहित सभी तरह के सामुदायिक  जमीन को भूमिं बैंक में शमिल किया गया है, को उसे भूमिं बैंक से मुक्त किया जाए तथा किसी भी बाहरी पूजिं-पतियों को हस्तंत्रित नही किया जाए
 3- भूमिं सुधार/भूदान कानून के तहत जिन किसानों को गैर मजरूआ खास जमीन का हिस्सा बंदोबस्त कर दिया गया है-उसे रदद नहीं किया जाए
4-जमीन अधिग्रहण कानून 2013 को लागू किया जाए
5-किसी तरह का भी जमीन अधिग्रहण के पहले ग्रांव सभा के इजाजत के बिना जमीन अधिग्रहण किसी भी कीमत में नहीं किया जाए।
6-5वीं अनुसूचि में प्रावधान कानून का पालन किया जाए





                                     निवेदक
                        आदिवासी-मूलवासी असित्व रक्षा  मंच
                              तोरपा-खूंटी                              
    संयोजक....-दयामनी बरला          अध्याक्ष-तुरतन तांपनांे
                            उपाध्यक्ष-राजू लोहरा
                            सचिव -हादू तोपनो, उपसचिव-ऐनेम तोपनो