मैं दयामनी बरला भारत के झारखंड प्रदेश के आदिवासी मूलवासी ,दलित मेहनत मजदूरी करने वाले समुदाय की ओर से अमेरिका -Bostan - के प्रतिष्ठित University of Massachusetts Lowell को हृदय से धन्यवाद देना चाहती हूं कि आपने मुझे University में Greeley Scholar के रूप में Greeley peace Studies के लिए आने का मौका दिए हैं।
VOICE OF HULGULANLAND AGAINST GLOBLISATION AND COMMUNAL FACISM. OUR LAND SLOGAN BIRBURU OTE HASAA GARA BEAA ABUA ABUA. LAND'FORESTAND WATER IS OURS.
Saturday, May 20, 2023
मैं धन्यवाद देना चाहती हूं कि UMASS LOWELL के Greeley Advisory Board के सदस्यों को जिन्होंने Greeley Scholar 2023 के लिए मेरा चयन किए।
हां आशा है आगे जाकर फिर मुलाकात होगी।
जिंदगी एक नदी की धारा है। हजारों चट्टानों से टकराते फुहारों में बिखरते-समेटते कल कल करते अपना रास्ता बनाते आगे बढ़ते परिचित - अपरिचित कई छोटी बड़ी धाराओं से मिलती हैं। UMASS LOWELL University of Massachusetts द्वारा GREELEY Scholar for Peace Studies 2023 के लिए चुने जाने के बाद America -Bostan में रहते हुए मैंने महसूस किया की कई छोटी बड़ी नदियों का संगम हो रहा है।
Sunday, March 19, 2023
जिलावार आरक्षण रोस्टर-प्रतिशत में
20 /3/23
खबर रांची में प्रकाशित रिपोट
झारखंड सरकार ने कैबिनंट से संकल्प जारी किया-
झारखं डमें कुल 60 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया गया-जिलास्तरीय नियुत्कि में इडब्ल्यूएस को (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) आरक्षण, शेष के कोटा में बदलाव नहीं-झारखं डमें जिलास्तरीय पदों प् होनेवाली सीधी नियुत्कि में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग ( इडब्ल्यूएस ) के लोगों को भी आरक्षण दिया जायेगा। राज्य में कुल 60 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू कर दिया गया है। सरकार के निर्णय के अनुरूप राज्यस्तरीय नियुत्कि के बाद अब जिलास्तरीय नियुत्कि में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग या इंडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिश सीट आरक्षित किया गया है। कार्मिक विभाग ने आरक्षण रोस्टर का संकल्प जारी कर दिया है। कैबिनेट की बैठक में जिलावार आरक्षण रोस्टर के प्रस्ताव को मिली स्वीकृति के बाद कार्मिक विभाग द्वारा जारी संकल्प में कहा गया है कि जिलास्तरीय पदों पर नियुत्कि के संबंध मे ंतो अप्रैल 2010 के संकल्प में संशोधन किया गया है। जिला रोस्टर में एसटी, एससी, ओबीसी, बीसी व इडब्ल्यूएस को जिलावार आरक्षण दिया गया है। राज्यस्तरीय पदों पर होनेवाली नियुत्कि में इडब्ल्यूएस को दस प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान को जिलावार भी सुनिश्चित कर दिया गया है।
झारखं डमें पदों व सेवाओं में रित्कियों में आरक्षण अधिनियम 2019 द्वारा दस प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। जिलावार आरक्षण रोस्टर में विभिन्न वर्गौं के पूर्व से आरक्षण कोटा में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2010 में जिला स्तरीय वर्ग नियुत्कि के लिए जारी अधिसूचना की तरह ही नयी अधिसूचना में भी छह जिलों में एमबीसी(अत्यंत पिछड़ा वर्ग) और बीसी के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है।
15 भाषाओं में से किसी एक का चयन करने की होगी अनूमति-जिलास्तरीय पदों पर नियुत्कि के लिए निकाले जानेवाले विज्ञापन में अभ्यार्थी का ेअब 15 भाषाओं में से किसी एक का चयन करनी की अनुमति होगी। इसमें उर्दू, संथाली, बंगाली, मुंण्डारी, हो, खडिया, उरांव, कुरमाली, खोरठा, नागपुरी, पंचनरगनिया, उड़ियाा, हिन्दीं, अंग्रेजी और संस्कृत भाषा शामिल है। हालांकि जिलों में पदों पर नियुत्कि को लेकर कार्मिक विभाग ने जिलावार क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं की सूची अभी जारी नहीं किया है।
जिलावार आरक्षण रोस्टर-प्रतिशत में
जिला------एससी-----एसटी----एमबीसी-1-----बीसी--2---इडब्ल्यूएस
रांची-------05-------37------05---------03-------10
खुंटी------05--------45------00-------- 00-------10
हजारीबाग--21--------04-------14--------11-------10
रामगढ----11--------20-------11--------08-------10
चतरा-----18--------08-------14--------10-------10
गिरिडीह---13--------12-------14--------11-------10
बोकारो----13-------12--------14--------11-------10
धनबाद----15-------08------- 15--------12-------10
लतेहार----21-------29--------00-------00--------10
लेहरदगा---03-------47--------00-------00--------10
सिमडेगा--07-------43--------00--------00--------10
प0 सिंहभूम--04-----46--------00--------00--------10
दुमका-----05-----45--------00--------00--------10
साहिबगंज---05-----38-------04--------03--------10
पाकुड-----05-----38-------04--------03--------10
सरायकेला----05----38-------04------03-------10
पू0 सिंहभूम----04----28------10------08--------10
देवघर------12-----12------15------11--------10
गोडा-------08-----25------10------07-------10
जामताडा----09-----32-------05-----04--------10
Saturday, March 4, 2023
2016-17 me
ं 50 लाख कीमत तक के जमीन रजिस्ट्री 1 रूप्या मे किया गया-इसका लाभ किसको मिला?
झारखंड के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने राज्य के सामृद्व महिलाओं को लाभ पहुुचाने के लिए भू-राजस्व एवं निबंधन विभाग के माध्यम से 50 लाख कीमत की जमीन खरीदने पर 1 रूप्या में जमीन की रजिस्ट्री करने की व्यवस्था लायी।
इस व्यवस्था के बाद हर साल 70 महिलाएं इसका लाभ उठाते रहीं। इस व्यवस्था के तहत महिलाएं एक रूप्या में जमीन, मकान, प्लैट का रजिस्ट्रेशन करायी। 2 लाख से अधिक रजिस्ट्री की गयी। इससे राज्य को 1296 करोड़ राजस्व का नुकासान भी उठाना पड़ा।
कोरोना काल में वर्तमान हेमंत सरकार ने इस व्यवस्था फिर से वापस लिया। तर्क दिया गया कि इस व्यवस्था के तहत गरीब महिलाएं लाभ नहीं ले पा रही हैं साथ ही राज्य का राजस्व का भी नुकसान हो रहा है। इसी को देखते हुए राज्य की गठबंधन सरकार ने इस व्यवस्था को वापस लिया।
5 सितंबर 2019 का तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुवर दास ने टवीट किया था-झारखंड देश का पहला राज्य है जहां महिलाओं के लिए 50 लाख रूप्या तक की जमीन , मकान की रजिस्ट्री सिर्फ एक रूप्ये में होती है। अब तक डेढ़ लाख से ज्यादा महिलाएं बन चुकी हैं मकान मालकिन।
जानकारी के लिए-देश के बाकी राज्यों में भी महिलाओं को रजिस्ट्री में कुछ प्रतिशत की छूट मिलती है-उदाहरण के तौर में-दिल्ली में 4 प्रतिशत स्टाम्प डयूटी देनी पड़ती है। यूपी में महिलाओं द्वारा जमीन खरीदने पर सिर्फ एक (1) प्रतिशत ही स्टाम्प डयूटी में छूट दी गयी है।
23 मार्च 2021 को राज्य सरकार ने महिलाओं को 1 रूप्या में जमीन रजिस्ट्री में छूट देने से राज्य सरकार को 400 करोड़ का नुकसान बताया। राज्य के प्र्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग के मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि पिछली सरकार ने महिला के नाम से जमीन रजिस्ट्री कराने नर छूट दी थी, इससे राज्य को करीब 400 करोड़़ रूप्ये राजस्व का नुकसान हुआ था। वह रजिस्ट्री शुल्क भी देने में सक्षम होता है। यह सिर्फ जमीन लूटने की षडयंत्र के तहत किया गया था।
जो भी नये-नये व्यवस्था जमीन संबंधित लाये गाये पिछली रघुवर दास की सरकार के द्वारा उसका समीक्षा होनी चाहिए कि आदिवासी, मूलवासी, दलित और मेहनत मजदूरी करने वाला परिवार को कितना लाभ मिला?। इसकी सूची सरकार को जारी करना चाहिए, तभी सामाजिक न्याय की बात हो सकती है।
विद्यार्थी आवासीय, आय, जाति और अन्य प्रमाण पत्र के लिए रोज कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं।
17-2-2023 को शहर के अखबरों में छपी मुख्य समाचार-प्रभात खबर
राजधानी के शहर अंचल कार्यालय में म्यूटेशन के 828 मामले लंबित हैं। म्यूटेशन की फरियाद लेकर लोग चक्कर लगा रहे हैं। लेकिन कोई उनकी सुनने वाल नहीं है। विद्यार्थी आवासीय, आय, जाति और अन्य प्रमाण पत्र के लिए रोज कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। कर्मचारी तरह-तरह की दलील देकर और त्रुटियां निकाल कर उनको लौटा दे रहे हैं। ऐसे में प्रमाण पत्र मिलने में युवाओं को कई महीने लग रहे हैं। नतीजन शहर अंचल में तंबित मामलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। बार-बार ऐसी बातें सामने आ रही कि म्यूटेशन का मामला चढावा नही ंदेने के कारण लटकाया जा रहा है। चढ़ावे के बाद ही म्यूटेशन किया जा रहा है। हालांकि लोगों के म्यूटेशन का मामला लटक न जाये, इस डर से पीड़ित सामने नहीं आ रहे हैं।
एसटी सटिफिकेट के 399 मामले लंबित-शहर अंचल के पिछले एक साल (एक अप्रैल 2022 से दो फरवरी 2023 तक) के कार्यकलाप का आकलन किया गया, तो लंबित मामलों की लंबी लिस्ट तैयार हो गयी। एसटी सर्टिफिकेट के कुल 399 मामले लंबित पाये गये। वहीं एसी सर्टिफिकेट की बात की जाये, तो एक साम से 79 मामले लंबित हैं। सार्टिफिकेट नहीं मिलने के कारण विद्यार्थी कई प्रतियोगी परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
जति प्रमाण पत्र के लंबित मामलों की है लंबी लिस्ट-शहर अंचल में सबसे ज्यादा जाति और आवासीय माममले लंबित हैं। इबीसी-वन और बीसी-टू के करीब 556 आवेदन लंबित हैं। 369 आवेदनों को रदद किया गया हे। वहीं 755 प्रमाण पत्र जारी कर दिेये गये हैं।
व्हीं ओबीसी सर्टिफिकेट की बात की जाये तो 67 आवेदन पर अभी तक विचार नहीं किया है। इस कारण प्रमाण पत्र जारी नही हो पाया है। यहां 137 प्रमाण पत्र जारी किया गया है और 115 आवेदन रदद किया गया। नाॅन क्रीमिलेयर वाली इबीसी-वन और बीसी-टू के प्रमाण पत्रों के लंबित मामलों की संख्या 250 के करीब है। इसके आवेदक भी चक्कर लगाकर थक चुके हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी दिक्कत-उच्च शिक्षा और केंन्द्र सरकार की नौकरी का लाभ लेने के लिए आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग इडयूएस को भी प्रमाण पत्र की जरूरत होती है। लेकिन शहर अंचल में इस प्रमाण पत्र को बनाने में भी विद्यार्थियों को मशक्कत करनी पड़ रही है। एक अप्रैल 2022 से दो फरवरी 2023 तक के आंकड़ों के मुताबिक शहर अंचल में इडबयूएस के करीब 70 आवेदन लंबित हैं।
Friday, March 3, 2023
नियोजन के लिए पूर्व निर्धारित क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं मे संशोधन करते हुए हिंन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत को शामिल किया राज्य सेवा के अभ्यार्थियों को झारखंड की स्थानीय रीति-रिवाज, भाषा एवं परिवेश कर ज्ञान होने की अनिवार्यता विलोपित करने की स्वीकृति दी
प्रभात खबर 3-3-2023
स्थानीय नियोजन नीति में संशोधन किया-हैंमत सोरेन के कैबिनेट के फैसले
नौकरी के लिए राज्य से 10वीं व 12वीं पास की बाध्यता खत्म, क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं में हिंन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत भी-
झारखंड में नौकर करने के लिए अब राज्य के मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थानों से 10वीं व 12वीं की पढ़ाई करना जरूरी नहीं होगा। गुरूवार को कैबिनेट ने राज्य में नियोजन के लिए झारखंड के शिक्षण संस्थानों से ही 10वीं व 12वीं की पढ़ाई करने की अनिवार्यता समाप्त करने पर सहमति दी। साथ ही नियोजन के लिए पूर्व निर्धारित क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं मे संशोधन करते हुए हिंन्दी, अंग्रेजी व संस्कृत को शामिल किया राज्य सेवा के अभ्यार्थियों को झारखंड की स्थानीय रीति-रिवाज, भाषा एवं परिवेश कर ज्ञान होने की अनिवार्यता विलोपित करने की स्वीकृति दी। इसके लिए कैबिनेट ने दर्जन भर नियुक्ति नियमावली में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी। रास्त में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के पदों के लिए कुल 12 क्षेत्रीय व जनजातीय भाषाओं को चिन्हित किया गया था। इनमें उर्द, संताली, बांगला, मुंण्डारी, हो, खड़िया, कुडुख, खोरठा, नागपुरी, आडिया, पंचपरगनिया और कुरमाली भाषा शामिल थे।
टब कैंनिनेट ने सूची बढ़ाते हुए राज्य स्तरीय पदों के लिए कुल 15 भाषाओं को शामिल करने पर मंजूरी दी। जिलास्तरीय पदों के लिए क्रार्मिक विभाग क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं को चिन्हित कर अलग से सूची जारी करेगा। हाईकोटै द्वारा राज्य सरकार की नियोजन नीति खारिज करने के बाद राज्य के स्कूलों से पढ़ाई करने की बाध्यता समाप्त करने और चिन्हित भाषाओं में हिन्दी, अंग्रेजी व संस्कृति को शामिल करने का निर्णय लिया गया है। परीक्षा में भाषा के 100 बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे जाऐंगें।









