Monday, January 4, 2016

JINDAGI KA PAHLA BASIA BAJAR

कुम्हारी बाजार (वर्तमान में गुमला जिला के बसिया प्रखंड के )


मेरे क्ला में एमलेन तोपनो, प्यारी बरला, हन्ना तोपनो, रेलन तोपनो, ऐसरन तोपना सभी मुझ से  बड़ी थी। શિलवंती और मैं एक जोड़ी की हैं। શિलवंती को बिफे दिन को ही स्कूल में बोल दी , कल मैं नहीं आ सकती हॅं कल सर खिलवाऐगें तो हमको देना तेरा कोपी। बिफे रात को ही सुबह के लिए भात बना दिये। सुबह जल्दी उठे। तीन बार कुंआ से पानी लायी। घर-आंगन का काम जल्दी खत्म करके बिजय दादा के साथ कुम्हारी बाजार के लिए निकल गये। मैं पहली बार रायबा, सेमरटोली गांव देखी। सेमरटोली के बाद जंगल શુરુ हो गया। हाफंु गांव पूरी तरह गांव में ही है। जंगल जंगल करीब तीन-चार घंटा तक चलने के बाद कुम्हारी पहुंचे। बाजार अभी भरा नहीं है। जाते ही सीधे गाय-बकरी जहां दुकान लगाते हैं वहीं गये। वहां बैल -गाय भी बंेचने वालों ने बांध कर रखे थे। बकरी भी हैं लेकिन अभी बहुत कम हैं। दादा बोला रूको थोड़ा इंतजार कर लेते हैं, लोग और भी बकरी लेकर आऐंगे।
थोड़ी देर के बाद लोगों ने बकरी लेकर आये। हम दोनों को तो पालने के लिए बकरी बच्चा लेना था। इसलिए ज्यादा इंतजार करना पड़ा। पेषेवार खरीददार लोग जहां खस्सी देखे, यह बकरी दौड़ कर पहुंच जाते हैं। ताकि दूसरा खरीददार उसको न पटा ले। एक बुजूर्ग दो बड़ा बड़ा खस्सी लेकर आम पेड़ के नीचे बैठा है। उनके पास कई खरीद दार आये और फिर चले गये। बड़ा वाला खस्सी का दाम लोग पूछ रहे थे-बुजूर्ग दाम बताया-तीन कोरी। दो लोग फिर उसके पास आये। बोले-ठीक से बोल। देवेक-लेवे नीयर। ये 40 रू़ देवा थी। बुजूर्ग नहीं तीन कोरी से एको रूप्या कम नी होवी। मोल-तोल  आगे बढ़ता जा रहा है। के्रता-नहीं उतनो तो केउे नीं देबायें। उतना कर खस्सी नी लगें। के्रता-अच्छा तोरो नहीं-मोरो नहीं , चल आखरी 50 रूप्या देवा थी। बुजूर्ग-नहीं नी होवी उतना में। बात बढ़ते जा रहा है। अंत में के्रता बोला-ठीक अहे 60 रूप्या देवी थी। बुजूर्ग-नहीं इतना में नी देबुं, तीन कोरी से एक को कचिया कम नहीं। के्रता हा ना-60 रूप्या तो देवा थी, ले। बुजूर्ग -नीही- तीन कोरी से एको रूप्या कम में नी देबुं। अब देखते ही देखते यहां कई लोग पहुंच गये। के्रता -बुजूर्ग को समझाने लगा-जेतना तोंय मांगाथिस उतना तो देवा थों।फिर भी बुजूर्ग तैयार नहीं हो रहा है। तब वहां खडें लोंगों ने बुजूर्ग को समझाने लगे-तीन कोरी के ही 60 रूप्या कहेनां। तब जा कर बुजूर्ग देने को राजी हुआ। बात पक्का करने के लिए बगल से दूब घांस तोड़कर खरीद दार ही लाया और बुजूर्ग को दिया। दूब घांस देने के खरीद-बिक्री पक्का हो गया।  मैं ये सब खड़ा होकर देख रही थी।

Friday, November 20, 2015

jameen ki loot ...kishan sankat me

झारखण्ड का हज़ारीबाग़ का बड़काखाना एरिया जो बहुत ही उपजाऊ है।  यंहा धन. मककै. गेंहू सभी तरह की हरी सब्जियों बरो मास खेती की जाती है।  इस उपजाऊ जमीन को कोयला निकालने  के लिए एन टी पी सी ने जबरन किसानो से छीन रही है।  किसान अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. 

हाशिये पर आदिवासी आबादी

झारखंड की आबादी में पिछले एक दशक में 22.4 प्रतिशत की इजाफा हुआ, जबकि आदिवासियों की संख्या में 0.1 फीसदी की गिरावट आई है। वहीं नौ आदिम जनजातियां अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जंगल अािधरित आजीविका पर जीवनयापन करनेवाले इस आदिम जनजातियों तक सरकार की योजनाएं पहंच नहीं रही है। ये भूख, कुपोषण, गरीबी, अशिक्षा जैसी समस्याओं से घिरे हैं। संस्कृति विषेषज्ञों व भाषाविदों का कहना है कि वे जनजातियां लुप्त हुई तो इनकी बोलियां, संस्कृति, खानपान, और परंपराएं भी मिट जाएगी।
हाशिय पर आदिम जनजाति-
2011 की जनगणना के अनुसार झारखंड की आबादी 3.3 करोड -32,988,134 पाई गयी है। कुल आबदी में आदिवासी 26.2 प्रतिशत ही है। जबकि, 2001 की जनगणना में यह आंकड़ा 26.3 प्रतिश त का था। खूंटी में सर्वाधक 73.3 प्रतिशत आदिवासी आबादी है। जबकि, कोडरमा में सबसे कम आदिवासी पाए गए। राज्य की 32 जनजातियों में 9 को आदिम जनजाति की श्रेणी में रखा गया। इनमें असूर, बिरहोर, बिरलिया, कोरवा, माल पहाडिया, सीरिया, पहाडिया, परहिया, पहाडी खरिया, सावर शामिल है। इनमें से ज्यादतर की साक्षरता दर पांच प्रतिशत से भी कम है। असुर को छोड़ अन्य आदिम जनजातियां जंगल आधारित आजीविका पर निर्भर हैं। वे भयंकर गरीबी से जूझ रहे हैं। इनके बच्चे अति कुपोषित पैदा हो रहे हैं।
स्रकार की ओर से इनके लिए अंत्योदय योजना चलाई गई। जिसके तहत इन्हें हर महीने 35 किलो अनाज मुक्त में देने का प्रावधान है लेकिन मात्र तीस किलो ही मिलता है । इसका फायदा विचैलिये उठा ले जाते हैं।

यही हाल इंदिरा आवास योजना का भी है। मैट्रीक पास करने पर भी सीधी नियुक्ति का लाभ भी इन तक कारगर तौर पर नहीं पहुंच रही है।
फैक्ट फाइल 

कुल  आबादी-32,988,134
पुरूष-16,930,315 

महिला -16,057,819
क्ुल साक्षरता-66.41 प्रतिशत
पुरूष साक्षरता-78.84 प्रतिशत
महिला साक्षरता-52.04 प्रतिशत
आदिवासी आबादी-26.2 प्रतिशत

हाशिये पर आदिवासी आबादी

Monday, October 12, 2015

JAL  JANGLA  JAMEEN  HAMARA  HAI
 JAN ADHIKARON  PAR  HAMLA  BAND KARO....LADENGE  JEETENGE
 SAVE  THE  EARTH...SAVE  HUMAN....SAVE  ENVIRONMENT,



JAN ADHIKAR KA SANGHARSH JARI RAHEGA


KAUSHAL BIKAS KE NAM PAR NABALIK KE SATH ADHIKARI DAWARA ASHLIL HARKAT


                                                         
                                               

KHUNTI JILA ME KAUSHAL  BIKAS  KE  NAM  PAR  NABALIG  KE  SAHT  ASHLIL  HARKAT   ,,,,,SAMBANDHIT   ADHIKARI  DAWARA....